Blog पृष्ठ 130




                                               

नन्दा देवी

नंदा देवी समूचे गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल और हिमालय के अन्य भागों में जन सामान्य की लोकप्रिय देवी हैं। नंदा की उपासना प्राचीन काल से ही किये जाने के प्रमाण धार्मिक ग्रंथों, उपनिषद और पुराणों में मिलते हैं। रूप मंडन में पार्वती को गौरी के छ: रुपो ...

                                               

पर्जन्य

पर्जन्य तीसरे आदित्य हैं - ये मेघों में निवास करते हैं। इनका मेघों पर नियंत्रण हैं। वर्षा के होने तथा किरणों के प्रभाव से मेघों का जल बरसता है। ये धरती के ताप को शांत करते हैं और फिर से जीवन का संचार करते हैं। इनके बगैर धरती पर जीवन संभव नहीं।

                                               

पाखंगबा

पाखंगबा या इबुधोऊ पाखंगबा या पाइखोम्बा एक दिव्य प्राणी हैं जिनके प्रति भारत के मणिपुर क्षेत्र में लोग भारी आस्था रखते हैं। इन्हें अधिकतर सर्प-शरीऔर मृग-सींगो रखने वाले एक अझ़दहा के रूप में दर्शाया जाता है। गणतंत्र की स्थापना से पहले जब मणिपुर एक ...

                                               

पूषा

पांचवें आदित्य पूषा हैं जिनका निवास अन्न में होता है। समस्त प्रकार के धान्यों में ये विराजमान हैं। इन्हीं के द्वारा अन्न में पौष्टिकता एवं ऊर्जा आती है। अनाज में जो भी स्वाद और रस मौजूद होता है वह इन्हीं के तेज से आता है।

                                               

भग-आदित्य

सातवें आदित्य हैं-भग:- प्राणियों की देह में अंग रूप में विद्यमान हैं। ये भग देव शरीर में चेतना, ऊर्जा शक्ति, काम शक्ति तथा जीवंतता की अभिव्यक्ति करते हैं।

                                               

भारतमाता

भारत को मातृदेवी के रूप में चित्रित करके भारतमाता या भारतम्बा कहा जाता है। भारतमाता को प्राय: केसरिया या नारंगी रंग की साड़ी पहने, हाथ में भगवा ध्वज लिये हुए चित्रित किया जाता है तथा साथ में सिंह होता है। जो हमेशा गुस्से में होता है । भारत में भा ...

                                               

भैरव

भैरव हिन्दुओं के एक देवता हैं जो शिव के रूप हैं। भैरवों की संख्या ५२ है। ये ५२ भैरव भी ८ भागों में विभक्त हैं।भैरव एक हिंदू तांत्रिक देवता हैं जिन्हें हिंदुओं द्वारा पूजा जाता है। शैव धर्म में, वह शिव के विनाश से जुड़ा एक उग्र रूप है। त्रिक प्रणा ...

                                               

भ्रामरी

भ्रामरी एक हिन्दू देवी हैं। वे शक्ति की अवतार मानी जातीं हैं। माँ भ्रामरी देवी जगदम्बा भवानी का ही एक स्वरूप है। माँ भ्रामरी देवी का मंदिर हरियाणा के हिसार मे बनभौरी के नाम से विख्यात है। माँ भ्रामरी देवी की एक प्रतिमा सिद्धपीठ माँ शाकम्भरी देवी ...

                                               

मित्र

बारहवें आदित्य हैं मित्र - विश्व के कल्याण हेतु तपस्या करने वाले, साधुओं का कल्याण करने की क्षमता रखने वाले हैं मित्र देवता हैं। ये 12 आदित्य सृष्टि के विकास क्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

                                               

विवस्वान्

आठवें आदित्य विवस्वान हैं - ये अग्निदेव हैं। इनमें जो तेज व ऊष्मा व्याप्त है वह सूर्य से है। कृषि और फलों का पाचन, प्राणियों द्वारा खागए भोजन का पाचन इसी अग्नि द्वारा होता है। ये आठवें मनु वैवस्वत मनु के पिता हैं।

                                               

विष्णु

वैदिक समय से ही विष्णु सम्पूर्ण विश्व की सर्वोच्च शक्ति तथा नियन्ता के रूप में मान्य रहे हैं। विष्णु पुराण १/२२/३६ अनुसार भगवान विष्णु निराकार परब्रह्म जिनको वेदों में ईश्वर कहा है चतुर्भुज विष्णु को सबसे निकटतम मूर्त एवं मूर्त ब्रह्म कहा गया है। ...

                                               

सन्त सिंगाजी

सिंगाजी का जन्म ग्राम खजूरी जिला बड़वानी मध्यप्रदेश मे हुआ। का नामकरण उन्ही के नाम पर किया गया है। सिंगाजी मध्य प्रदेश में खांडवा से 28 मील उत्तर पूर्व में हरसूद तहसील का एक छोटा गाँव है। हरसूद का निर्माण हर्षवर्धन द्वारा किया गया था। इसी गाँव मे ...

                                               

हिन्दू देवी देवताओं की सूची

यह सनातन देवी देवताओं की सूची है। सनातन लेखों के अनुसार, धर्म में तैंतीस प्रकार देवी-देवता बताये गये हैं। इनमें स्थानीय व क्षेत्रीय देवी-देवता भी शामिल हैं)। वे सभी तो यहां सम्मिलित नहीं किये जा सकते हैं। फिर भी इस सूची में तीन सौ से अधिक संख्या ...

                                               

इराक में ईसाई धर्म

इराक के ईसाईयों को दुनिया के सबसे पुराने ईसाई समुदायों में से एक माना जाता है। विशाल बहुमत स्वदेशी पूर्वी अरामी बोलने वाले जातीय कसदिया हैं। सिरीक, अश्शूरी, आर्मेनियन और कुर्द, अरब और आबादी का एक छोटा सा समुदाय भी है। इराकी तुर्कमेन्स। अधिकांश वर ...

                                               

तिब्बती बौद्ध धर्म

तिब्बती बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म की महायान शाखा की एक उपशाखा है जो तिब्बत, मंगोलिया, भूटान, उत्तर नेपाल, उत्तर भारत के लद्दाख़, अरुणाचल प्रदेश, लाहौल व स्पीति ज़िले और सिक्किम क्षेत्रों, रूस के कालमिकिया, तूवा और बुर्यातिया क्षेत्रों और पूर्वोत्तरी ...

                                               

पाकिस्तान में बौद्ध धर्म

पाकिस्तान में बौद्ध धर्म ने लगभग 2.300 साल पहले मौर्य राजा अशोक के अधीन थे, जिन्हें नेहरू ने कभी "किसी से अधिक या सम्राट" कहा था। पाकिस्तान के वर्तमान इतिहास में बौद्ध धर्म का एक लंबा इतिहास है। बैक्ट्रिया, इंडो-ग्रीक साम्राज्य, कुषाण साम्राज्य, ...

                                               

भारत में बौद्ध धर्म का इतिहास

भारत में बौद्ध धर्म का जन्म ईसा पूर्व 6वीं शताब्दी में हुआ था और तब से यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक अभिन्न अंग बन गया है। वर्षों से, सम्पूर्ण भारत में हिन्दु और बौद्ध संस्कृतियों का एक अद्भुत मिलन होता आया है और भारत के आर्थिक उद ...

                                               

मेसन ईविंग

9 अप्रैल, 1982 को कैमरून की आर्थिक राजधानी मेसनकाइरिलॉन्ग इविंगवास्बोर्निन डौला। वह एक फ्रांसीसी, कैमरून और अमेरिकी निर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक और फैशन डिजाइनर हैं जो फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका में रहते हैं। 2011 में बनाया गया, मेसन ईविंग ...

                                               

अफगानिस्तान में हिन्दू धर्म

अफगानिस्तान में हिन्दू धर्म का अनुसरण करने वाले बहुत कम लोग हैं। इनकी संख्या कोई 1.000 अनुमानित है। ये लोग अधिकतर काबुल एवं अफगानिस्तान के अन्य प्रमुख नगरों में रहते हैं। अफगानिस्थान पर इस्लामीयों की विजय से पूर्व अफगानिस्थान की जनता बहु-धार्मिक ...

                                               

कोलम्बिया में हिन्दू धर्म

कोलंबिया में हिन्दू धर्म एक अल्पसंख्यक पंथ है जिसका पालन मुख्य रूप से हरे कृष्ण भक्तों और प्रवासी भारतीयों द्वारा किया जाता है। इस्कॉन के देश में 20 शहरों में मंदिर हैं, जहाँ लगभग 700 सदस्य हैं।

                                               

जापान में हिंदू धर्म

निकट भविष्य से संबंधित बौद्ध धर्म के विपरीत हिंदू धर्म जापान में अल्पसंख्यक धर्म है। फिर भी, हिंदू धर्म ने जापानी संस्कृति में कुछ हद तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

                                               

दक्षिण-पूर्व एशिया में हिन्दू धर्म

दक्षिण-पूर्व एशिया में हिन्दू धर्म का प्रसार हुआ तथा इसने मध्य वियतनाम के दक्षिणी भागों में चम्पा सभ्यता को जन्म दिया, कम्बोडिया में फुनान, हिन्दचीन में ख्मेर, मलय प्रायद्वीप में लंगकासुक राज्य, गंगा नगर, तथा पुराना केदा को जन्म दिया। इसी प्रकार ...

                                               

बांग्लादेश में हिंदू धर्म

2011 बांग्लादेश की जनगणना के लिए बांग्लादेश ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार हिंदू धर्म बांग्लादेश में दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक संबद्धता है, जिसमें लगभग 8.96% आबादी शामिल है। आबादी के मामले में, बांग्लादेश भारत और नेपाल के बाद दुनिया का तीसरा सबस ...

                                               

भारत में हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म भारत का सबसे बड़ा और मूल धार्मिक समूह है और भारत की 79.8% जनसंख्या इस धर्म की अनुयाई है। भारत में वैदिक संस्कृति का उद्गम २००० से १५०० ईसा पूर्व में हुआ था। जिसके फलस्वरूप हिन्दू धर्म को, वैदिक धर्म का क्रमानुयायी माना जाता है, जिसका ...

                                               

मलेशिया में हिंदू धर्म

मलेशिया में हिंदू धर्म चौथा सबसे बड़ा धर्म है। मलेशिया की 2010 की जनगणना के अनुसार 1.78 मिलियन मलेशियाई निवासियों हिंदू हैं। यह 2000 में 1.380.400 से ऊपर है.। अधिकांश मलेशियाई हिंदुओं प्रायद्वीपीय मलेशिया के पश्चिमी हिस्सों में बस गए हैं। 2010 की ...

                                               

संयुक्त राज्य अमेरिका में हिन्दू धर्म

संयुक्त राज्य अमेरिका में हिन्दू धर्म एक अल्पसंख्यक धर्म है और संराअमेरिका में हिन्दुओं की कुल जनसंख्या मात्र ०.५% है। अमेरिका में अधिकान्श हिन्दू भारतीय उपमहाद्वीप मूल के हैं।

                                               

श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर

श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर कराची, पाकिस्तान में स्थित एक हिंदू मंदिर है। पाकिस्तान हिंदू परिषद के अनुसार, मंदिर लगभग 200 साल पहले बनाया गया था। और स्थानीय समुदाय के हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण पूजा स्थल है। मंदिर सबसे पुराना परिचालन मंदिरों में स ...

                                               

परिणामवाद

परिणामवाद मानदण्डक नीतिशास्त्र के सिद्धांतों में वह विचारधाराएँ हैं जिनके अनुसार किसी क्रिया या व्यवहार की अच्छाई या बुराई का आंकलन अंततः इसी बुनियाद पर होता है कि उस क्रिया का परिणाम अच्छा था या बुरा। परिणामवादियों के अनुसार जिस काम के करने के न ...

                                               

अनियतत्ववाद

दर्शनशास्त्र में अनियतत्ववाद वह विचारधारा है जिसके अनुसार ब्रह्माण्ड में होने वाली घटनाएँ का पूर्वानुमान उस घटना से पहले उपस्थित परिस्थितियों द्वारा पूरी तरह निर्धारित नही होता। जहाँ नियतत्ववाद का दावा है कि ब्रह्माण्ड में किसी भी क्षण में घटने व ...

                                               

द सेटेनिक वर्सेज़

द सेटेनिक वर्सेज़ सलमान रश्दी द्वारा सन् १९८८ में लिखित उपन्यास है जो इस्लामी जगत में अत्यन्त विवाद का विषय बना और अब भी विवादित है। द सेटेनिक वर्सेज़ सलमान रुश्दी का चौथा उपन्यास है, जिसे पहली बार 1988 में प्रकाशित किया गया था और इस्लाम के पैगंब ...

                                               

यशोधरा (काव्य)

मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित प्रसिद्ध प्रबंध काव्य है जिसका प्रकाशन सन् 1933 ई. में हुआ। अपने छोटे भाई सियारामशरण गुप्त के अनुरोध करने पर मैथिलीशरण गुप्त ने यह पुस्तक लिखी थी। यशोधरा महाकाव्य में गौतम बुद्ध के गृह त्याग की कहानी को केन्द्र में रखक ...

                                               

राजकुमार सत्त्व

जातक कथाओं के अनुसार गौतम बुद्ध अपने एक पूर्वजन्म में सत्त्व नाम के राजकुमार थे। वे महारथ के पुत्र थे। उन्होने सात भूखे शावकों को जीवित बचाने के लिए स्वेच्छा से अपने शरीर का त्याग दिया था।

                                               

राजकुमारी यशोधरा

राजकुमारी यशोधरा कोलीय वंश के राजा सुप्पबुद्ध और उनकी पत्नी पमिता की पुत्री थीं। यशोधरा की माता- पमिता राजा शुद्धोदन की बहन थीं। १६ वर्ष की आयु में यशोधरा का विवाह राजा शुद्धोधन के पुत्र सिद्धार्थ गौतम के साथ हुआ। बाद में सिद्धार्थ गौतम संन्यासी ...

                                               

शुद्धोधन

राजा शुद्धोधन, सिद्धार्थ गौतम के पिता थे, जिन्हें बाद में गौतम बुद्ध के नाम से जाना गया। वह दक्षिण नेपाल में रहने वाले शाक्य लोगों के नेता थे। शाक्यों मे एक पत्नी रखने की प्रथा थी, लेकिन जब शुद्धोदन ने अपने पिता के विरुद्ध एक लडा़ई जीती तो उसने द ...

                                               

सिद्धार्थ (उपन्यास)

सिद्धार्थ हरमन हेस द्वारा रचित उपन्यास है, जिसमें बुद्ध काल के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के सिद्धार्थ नाम के एक लड़के की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन किया गया है। यह पुस्तक हेस का नौवां उपन्यास है, इसे जर्मन भाषा में लिखा गया था। यह सरल लेकिन प्रभावप ...

                                               

कविराज कृष्णदास

कविराज कृष्णदास बंगाल के वैष्णव कवि। बंगाल में उनका वही स्थान है जो उत्तर भारत में तुलसीदास का। इनका जन्म बर्दवान जिले के झामटपुर ग्राम में कायस्थ कुल में हुआ था। इनका समय कुछ लोग 1496 से 1598 ई. और कुछ लोग 1517 से 1615 ई. मानते हैं। इन्हें बचपन ...

                                               

गोपाल भट्ट गोस्वामी

गोपाल भट्ट गोस्वामी का जन्म संवत् १५५३ विक्रमी में कावेरी नदी के तट पर श्रीरंग के पास बेलगुंडी ग्राम में हुआ था। सं. १५६८ में जब श्रीगौरांग दक्षिण यात्रा करते हुए श्रीरंग आए, वेंकट भट्ट के यहाँ चातुर्मास व्यतीत किया था। गोपाल भट्ट की सेवा से प्रस ...

                                               

गोपीनाथ मंदिर, वृंदावन

गोपी नाथ जी मन्दिर वृंदावन में स्थित एक वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। इसकी निर्माण तिथि अज्ञात है। इसका मूल निर्माण कछवाहा ठाकुरों की शेखावत शाखा के संस्थापक के पौत्र रायसिल ने करवाया था। बाद में १८२१ में नन्दकुमार घोष नामक एक बंगाली कायस्थ ने नया ...

                                               

गोविंददेव मंदिर

गोविन्द देव जी का मंदिर वृंदावन में स्थित वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। इसका निर्माण १५९० ई. में हुआ था। इस मंदिर के शिला लेख से यह जानकारी पूरी तरह सुनिश्चित हो जाती है कि इस भव्य देवालय को आमेर के राजा भगवान दास के पुत्र राजा मानसिंह ने बनवाया थ ...

                                               

चैतन्य चरितामृत

चैतन्यचरितामृत, बांग्ला के महान भक्तकवि कृष्णदास कविराज द्वारा रचित ग्रन्थ है जिसमें चैतन्य महाप्रभु के जीवन और शिक्षाओं का विवरण है। यह मुख्य रूप से बांग्ला भाषा में रचित है किन्तु शिक्षाष्टकम समेत अन्य भक्तिपूर्ण काव्य संस्कृत छन्द में भी हैं। ...

                                               

चैतन्य भागवत

श्री चैतन्य भागवत चैतन्य महाप्रभु के उपदेशों पर लिखा एक ग्रन्थ है। चैतन्य भागवत में यह वर्णन है कि ईश्वरपुरी के निकट दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात श्री चैतन्य महाप्रभु गया से नवद्वीप धाम जाते समय यहां प्रथम बार भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन किये तथा उसस ...

                                               

चैतन्य महाप्रभु

चैतन्य महाप्रभु वैष्णव धर्म के भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। इन्होंने वैष्णवों के गौड़ीय संप्रदाय की आधारशिला रखी, भजन गायकी की एक नयी शैली को जन्म दिया तथा राजनैतिक अस्थिरता के दिनों में हिंदू-मुस्लिम एकता ...

                                               

जीव गोस्वामी

श्री जीव गोस्वामी, वृंदावन में चैतन्य महाप्रभु द्वारा भेजे गए छः षण्गोस्वामी में से एक थे। उनकी गणना गौड़ीय सम्प्रदाय के सबसे महान दार्शनिकों एवं सन्तों में होती है। उन्होने भक्ति योग, वैष्णव वेदान्त आदि पर अनेकों ग्रंथों की रचना की। वे दो महान स ...

                                               

नवद्वीप

नवद्वीप भारत के पश्चिमी बंगाल प्रदेश में नदिया जिले में भागीरथी और जलांगी नदियों के संगम पर कृष्णनगर से आठ मील पश्चिम में स्थित प्रसिद्ध नगर है। यह हिंदुओं का एक तीर्थस्थान है। १४८५ ई. में चैतन्य महाप्रभु का जन्म यहीं हुआ था। १२वीं शताब्दी में से ...

                                               

नित्यानंद प्रभु

नित्यानंद प्रभु चैतन्य महाप्रभु के प्रथम शिष्य थे। इन्हें निताई भी कहते हैं। इन्हीं के साथ अद्वैताचार्य महाराज भी महाप्रभु के आरंभिक शिष्यों में से एक थे। इन दोनों ने निमाई के भक्ति आंदोलन को तीव्र गति प्रदान की। निमाई ने अपने इन दोनों शिष्यों के ...

                                               

श्रीपाद केशव भारती

श्री पाद केशव भारती गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के प्रवर्तक श्री चैतन्य महाप्रभु के गुरु थे। इन्होंने गौरांग को २४ वर्ष की आयु में १५१० में दीक्षा दी। उनका नाम बदल कर कृष्ण चैतन्य कर दिया। केशवदास जी के कुछ पद निम्नलिखित हैं:- हम तो हर दम ही श्यामा श् ...

                                               

मदन मोहन मन्दिर, वृंदावन

मदन मोहन जी का मंदिर वृंदावन में स्थित एक वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। इसका निर्माण संभवतः १५९० से १६२७ के बीच में मुल्तान निवासी श्री रामदास खत्री एवं कपूरी द्वारा करवाया गया था। पुरातनता में यह मंदिर गोविन्द देव जी के मंदिर के बाद आता है। निमार ...

                                               

अद्वैताचार्य महाराज

अद्वैताचार्य महाराज चैतन्य महाप्रभु के प्रथम शिष्य थे। इन्हीं के साथ नित्यानंद प्रभु भी महाप्रभु के आरंभिक शिष्यों में से एक थे। इन दोनों ने निमाई के भक्ति आंदोलन को तीव्र गति प्रदान की। निमाई ने अपने इन दोनों शिष्यों के सहयोग से ढोलक, मृदंग, झाँ ...

                                               

रघुनाथ दास गोस्वामी

श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, वृंदावन में चैतन्य महाप्रभु द्वारा भेजे गए छः षण्गोस्वामी में से एक थे। इन्होंने युवा आयु में ही गृहस्थी का त्याग किया और गौरांग के साथ हो लिए थे। ये चैतन्य के सचिव स्वरूप दामोदर के निजी सहायक रहे। उनके संग ही इन्होंने ग ...

                                               

रघुनाथ भट्ट गोस्वामी

श्री रघुनाथ भट्ट गोस्वामी, वृंदावन में चैतन्य महाप्रभु द्वारा भेजे गए छः षण्गोस्वामी में से एक थे। ये सदा हरे कृष्ण का अन्वरत जाप करते रहते थे और श्रीमद भागवत का पाठ नियम से करते थे। राधा कुण्ड के तट पर निवास करते हुए, प्रतिदिन भागवत का मीठा पाठ ...