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श्री दत्तन सर साहिब गुरुद्वारा

मुक्तसर जिला में स्थित गुरूद्वारा श्री दतन सर साहिब पंजाब राज्य स्थित प्रमुख सिख गुरूद्वारों में से एक है। इस गुरूद्वारे का निर्माण सिक्खों के दसवें गुरू, गुरू गोविन्द सिंह के सम्मान में करवाया गया था। माना जाता है कि गुरू साहिब को मुगलों का एक स ...

                                               

हेमकुंट साहिब

हेमकुंट साहिब चमोली जिला, उत्तराखंड, भारत में स्थित सिखों का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यह हिमालय में 4632 मीटर की ऊँचाई पर एक बर्फ़ीली झील के किनारे सात पहाड़ों के बीच स्थित है। इन सात पहाड़ों पर निशान साहिब झूलते हैं। इस तक ऋषिकेश-बद्रीनाथ साँ ...

                                               

ख़ालिस्तान आंदोलन

ख़ालिस्तान प्रस्तावित देश का नाम है। सिख अधिकतर भारतीय पंजाब में आबाद हैं और अमृतसर में उनके मत्वपूर्ण राजनैतिक और धार्मिक अकाल तख़्त स्थित है। 1980 के दशक में ख़ालिस्तान की प्राप्ति के आंदोलन ज़ोरों पर थे जिसे विदेशों में रहने वाले सिखों का वित् ...

                                               

नानकमत्ता

नानकमत्ता उधम सिंह नगर जिला, उत्तराखण्ड उत्तरी भारत में स्थित एक शहर है। यह शहर अपने ऐतिहासिक सिख मंदिर गुरुद्वारा नानकमत्ता व बाउली साहिब के लिये प्रसिद्ध है।

                                               

बन्दी छोड़ दिवस

बन्दी छोड़ दिवस सिख त्योहार है जो कि दीपावली के दिन पड़ता है। दीपावली त्यौहार सिख समुदाय द्वारा ऐतिहासिक रूप से मनाया जाता है। । 20वीं सदी से सिख धार्मिक नेताओं द्वारा दिवाली को बन्दी छोड़ दिवस कहा जाने लगा। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वार ...

                                               

रणजीत सिंह की समाधि

रणजीत सिंह की समाधि पंजाब के सिख सरदार महाराजा रणजीत सिंह का स्मारक है। यह क़िला लाहौऔर बादशाही मस्जिद के पास स्थित है। सन् 1839 में महाराजा की मृत्यु हुई थी और इसी स्थान पर उनका दह संस्कार किया गया था। उनके बेटे खड़ग सिंह ने इस समाधि का निर्माणक ...

                                               

शहीदी जोड़ मेला

शहीदी जोड़ मेला सिख्खों के ऐतिहासिक गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब, पंजाब पर हर साल आयोजित किया जाने वाला एक समागम है जो गुरु गोबिंद सिंह के छोटे बेटों,जिनको सिख इतिहास में छोटे साहिबजादे कहा जाता है, की शहीदी दिवस की याद में आयोजित किया जाता है।यह समा ...

                                               

जिन्द कौर

महारानी जिन्द कौर 1843 से 1846 तक सिख साम्राज्य की संरक्षिका थीं। वे महाराजा रणजीत सिंह के सबसे छोटी महारानी थीं। अन्तिम महाराजा दिलीप सिंह उनके ही पुत्र थे। वे अपने सौन्दर्य, ऊर्जा तथा उद्देश्य के प्रति समर्पण के लिये प्रसिद्ध थीं। इसलिये उन्हें ...

                                               

दलीप सिंह (महाराजा)

महाराजा दलीप सिंह महाराजा रणजीत सिंह के सबसे छोटे पुत्र तथा सिख साम्राज्य के अन्तिम शासक थे। इन्हें 1843 ई. में पाँच वर्ष की आयु में अपनी माँ रानी ज़िन्दाँ के संरक्षण में राजसिंहासन पर बैठाया गया।

                                               

सरदार हरि सिंह नलवा

{{Infobox military person | religion = valmekan | name = सरदार हरि सिंह नलवा ਹਰੀ ਸਿੱਘ ਨਲੂਆ | native_name = हरि सिंह नलवा | image = Hari Singh Nalwa british museum.jpg | image_size = | caption = सरदार हरि सिंह नलवा | birth_date = 1791 | death_date ...

                                               

बुल्ले शाह

बुल्ले शाह, जिन्हें बुल्ला शाह भी कहा जाता है, एक पंजाबी सूफ़ी संत एवं कवि थे। उनकी मृत्यु 1757 से 1759 के बीच वर्तमान पाकिस्तान में स्थित शहर क़सूर में हुई थी उनकी कविताओं को काफ़ियाँ कहा जाता है।

                                               

वारिस शाह

वारिस शाह एक पंजाबी कवि थे जो मुख्य रूप से अपने "हीर राँझा" नामक काव्य-कथा के लिये मशहूर हैं। कहा जाता है कि उन्होंने हीर को "वारिस की हीर" बना कर अमर कर दिया।

                                               

बुरख़ान ख़लदुन

बुरख़ान ख़लदुन​ मंगोलिया के ख़ेन्ती प्रांत में ख़ेन्ती पर्वत शृंखला में स्थित एक पर्वत है। मंगोलिया में लोकमान्यता है कि मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान का जन्म इसी पहाड़ पर या इसके इर्द-गिर्द कहीं हुआ था और उसका गुप्त मक़बरा भी यहीं-कहीं ...

                                               

सुनन्दा देवी

सुनन्दा देवी, जिसका पुराना नाम नन्दा देवी पूर्व था, गढ़वाल हिमालय में स्थित नन्दा देवी पर्वत के मुख्य शिखर के दो साथी शिखरों में से कम ऊँचाई वाले शिखर का नाम है। पर्वतीय सूचियों में ५०० मीटर से कम की स्थलाकृतिक उदग्रता रखने वाले शिखर स्वतंत्र पर् ...

                                               

सुलयमान पहाड़

सुलयमान पहाड़, जिसे तख़्त​-ए-सुलयमान और सुलयमान चट्टान भी कहते हैं, किर्गिज़स्तान के ओश शहर के पास स्थित एक पहाड़ है। यह मध्य एशिया की मशहूर फ़रग़ना वादी के मैदानी इलाक़े में दूर तक इकलौता पहाड़ होने से और भी महान दिखता है। हज़ारों साल से यह पहाड ...

                                               

सिंधफणा नदी

सिंधफणा नदी, गोदावरी नदी की सहायक नदी है जो महाराष्ट्र के बीड के पातोदा तालुका के चिनचोली पहाड़ी के आसपास से निकलती है। पश्चिम से पूर्व में इसकी जल निकासी बेसिन में बीड जिले का करीब 80% हिस्सा आता है। इस कारण यह बीड जिले की सबसे महत्वपूर्ण नदी है ...

                                               

गोम्मटगिरि

गोम्मटगिरि एक प्रख्यात जैन तीर्थ है। यहाँ भगवान बाहुबली की ७०० वर्ष प्राचीन मूर्ति है। यह मूर्ति जिसे गोम्मटेशवर भी कहा जाता है, ५० मीटर ऊँची पहाड़ी के ऊपर स्थित है। पहाड़ी को श्रवण गुड्डा के नाम से जाना जाता है। गोम्मटेश्वर मूर्ति विजयनगर काल की ...

                                               

डेल्फी

डेल्फी ग्रीस का एक पुरातात्विक स्थल व आधुनिक नगर दोनों है, जो फोसिस की घाटी में माउंट पर्नासस के दक्षिण-पश्चिमी पर्वत स्कंध पर स्थित है। डेल्फी ग्रीक पौराणिक कथाओं में, डेल्फी की ऑरेकल, प्राचीन ग्रीक विश्व में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऑरेकल, का स्थान ...

                                               

बेथलहम

बेथलहम "; इब्रानी: בֵּית לֶחֶם ‎, बीट लेहम, प्रकाशित "हाउस ऑफ ब्रेड ;" यूनानी: Βηθλεέμ बेथलीम) मध्य वेस्ट-बैंक में, येरुशलम से लगभग 10 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक फिलिस्तीनी शहर है, जिसकी जनसंख्या लगभग 30.000 है। यह फिलिस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकर ...

                                               

श्रंगवेरपुर

कहते है कि तीन नदियों के मेल को संगम कहते है परंतु इतिहास कुछ और ही है साथियों। संगम राज निषाद, निषाद देश के राजा थे उनके तीन पुत्र थे 1-तीर्थराज निषाद जिनके नाम से तीरथ धाम पड़ा 2 प्रयागराज निषाद जिनके नाम पर प्रयाग धाम व प्रयागराज जिला नाम पड़ा ...

                                               

जटोली शिव मंदिर

जटोली शिव मंदिर भारत देश के हिमाचल प्रदेश राज्य के सोलन जिलेमें स्थित है, जिसकी स्थापना श्री श्री 1008 स्वामी कृष्णानंद परमहंस महाराज ने की थी। स्वामी कृष्णानंद परमहंस 1950 में जटोली आए थे। 1974 में मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया था। जटोली की ...

                                               

महालक्ष्मी मंदिर

मुंबई के सर्वाधिक प्राचीन धर्मस्थलों में से एक है यहाँ का महालक्ष्मी मंदिर। समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित यह मंदिर अत्यंत सुंदर, आकर्षक और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। माँ लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है। महालक्ष्मी की ...

                                               

महालक्ष्मी मंदिर (मुंबई)

मुंबई के सर्वाधिक प्राचीन धर्मस्थलों में से एक है यहाँ का महालक्ष्मी मंदिर । समुद्र के किनारे बी. देसाई मार्ग पर स्थित यह मंदिर अत्यंत सुंदर, आकर्षक और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

                                               

हर्षनाथ मंदिर

हर्षनाथ राजस्थान राज्य में सीकर जिले के निकट स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। वर्तमान में हर्षनाथ नामक ग्राम हर्षगिरि पहाड़ी की तलहटी में बसा हुआ है और सीकर से प्रायः १४ किमी दक्षिण-पूर्व में है। स्थानीय अनुश्रुति के अनुसार यह स्थान पूर्वकाल में 36 मी ...

                                               

अंजनेरी

अंजनेरी महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में स्थित एक प्राचीन दुर्ग है। जो त्र्यम्बकेश्वर श्रृंखला के अंतर्गत आता है। यह दुर्ग नासिक से त्रिम्बक रोड़ से २० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

                                               

अशोक वाटिका

साँचा:19 जनवरी 2016राम जी की कृपा से अमित अवस्थी के द्वारा अशोकवाटिका लंका में स्थित एक सुरम्य वाटिका का नाम था। अशोक वाटिका रावण की नगरी श्रीलंका में ह जो की अशोक वाटिका के नाम से जानी जाती ह वहाँ रामायण के अनुसार वहाँ एक वट वृक्ष था जो की अब नह ...

                                               

अहिल्या स्थान

दरभंगा जिले सदर अनुमंडल के अंतर्गत अहियारी गाँव है, जो अहिल्या स्थान के नाम से विख्यात है। कमतौल रेलवे स्टेशन से उतरकर यहाँ पहुंचा जाता है। यह स्थान सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी से 40 कि॰मी॰ पूर्व में स्थित है। कहा जाता है कि ऋषि विश्वामित्र की आज् ...

                                               

ऋंगवेरपुर

ऋंगवेरपुरप्रयागराज रामायणकाल में गंगा के तट पर स्थित एक स्थान का नाम यह है। ऋंगवेरपुर के राजा महाराजा निषादराज थे, उनका नाम महाराजा गुह्यराज निषाद था। वे तीरथराज निषाद के पु्त्र एवं प्रयागराज के पौत्र थे और निषाद राज एक महान महाराजा थे श्रृंगवेरप ...

                                               

ऋष्यमूक

ऋष्यमूक वाल्मीकि रामायण में एक पर्वत का नाम है। रामायण के अनुसार ऋष्यमूक पर्वत में ऋषि मतंग का आश्रम था। वालि ने दुंदुभि असुर का वध करने के पश्चात् दोनों हाथों से उसका मृत शरीर एक ही झटके में एक योजन दूर फेंक दिया। हवा में उड़ते हुए मृत दुंदुभि क ...

                                               

क़सूर

कसूर या क़सूर, पाकिस्तान में भारतीय सीमा से सटे कसूर जिले का मुख्यालय नगर है। इसके उत्तर में लाहौर, दक्षिण एवं पूर्व में भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय सीमा है। इस सीमा का नाम गंडा सिंह वाला है, जहां वाघा सीमा की ही भांति ध्वजारोहण एवं ध्वज उतारने की परं ...

                                               

किष्किन्धा

किष्किन्धा | आज जो हम्पीहै, वाल्मीकि रामायण में पहले वालि का तथा उसके पश्चात् सुग्रीव का राज्य बताया गया है। आज के संदर्भ में यह राज्य तुंगभद्रा नदी के किनारे वाले कर्नाटक के हम्पी शहर के आस-पास के इलाके में माना गया है। रामायण के काल में विन्ध्य ...

                                               

कोशल

कोशल प्राचीन भारत के १६ महाजनपदों में से एक था। इसका क्षेत्र आधुनिक गोरखपुर के पास था। इसकी प्रथम राजधानी साकेत और द्वितीय राजधानी श्रावस्ती थी। चौथी सदी ईसा पूर्व में मगध ने इस पर अपना अधिकाकर लिया। गोंडा के समीप सेठ-मेठ में आज भी इसके भग्नावशेष ...

                                               

गंधमादन पर्वत

रामेश्वरम् गंधमादन पर्वत जो की कैलाश पर्वत के उत्तर में स्थित है, वहा आज भी ‘हनुमान जी’ निवास करते हैं। मान्यताओं अनुसार कैलाश पर्वत से उत्तर दिशा की ओर एक जगह है, जहां हनुमान जी आज भी निवास करते हैं। हनुमान जी के इस निवास स्थल का वर्णन कई ग्रंथो ...

                                               

चित्रकूट धाम

चित्रकूट धाम या कर्वी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के चित्रकूट ज़िले में स्थित एक नगर है। यह उस जिले का मुख्यालय भी है। यह पड़ोस में ही स्थित मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के चित्रकूट नगर से जुड़ा हुआ है।

                                               

त्रेतायुग

त्रेतायुग हिंदू मान्यताओं के अनुसार चार युगों में से एक युग है। त्रेता युग मानवकाल के द्वितीय युग को कहते हैं। इस युग में विष्णु के पाँचवे, छठे तथा सातवें अवतार प्रकट हुए थे। यह अवतार वामन, परशुराम और राम थे। यह मान्यता है कि इस युग में ॠषभ रूपी ...

                                               

धनुषकोडी

धनुषकोडी या दनुशकोडि भारत के तमिलनाडु राज्‍य के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक गांव/शहर है। धनुषकोडी पंबन के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। धनुषकोडी श्रीलंका में तलैमन्‍नार से करीब 18 मील पश्‍चिम में है। पंबन से प्रारंभ हो ...

                                               

पम्पा सरोवर

पाम्पा सरोवर भारतीय राज्य कर्नाटक के कोपल ज़िले में हम्पी,कर्नाटक के निकटतम स्थित एक झील है। यह झील दक्षिण में स्थित तुंगभद्रा नदी के अंतर्गत यह हिन्दुओं द्वारा पवित्र माना जाता है और भारत में पाँच पवित्र सरोवरों, या झीलों में से पम्पा सरोवर भी ए ...

                                               

पुष्कलावती

पुश्कलावती प्राचीनकाल में गन्धार की राजधानी हुआ करता था। मान्यता के अनुसार इस शहर की स्थापना रामायण के राम के भाई भरत के पुत्र पुश्कल ने की थी, जिनपर इस नगर का नाम पड़ा। आधुनिक काल में यह पाकिस्तान के उत्तरी भाग में ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के ...

                                               

रामसेतु

रामसेतु, तमिलनाडु, भारत के दक्षिण पूर्वी तट के किनारे रामेश्वरम द्वीप तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के मध्य चूना पत्थर से बनी एक शृंखला है। भौगोलिक प्रमाणों से पता चलता है कि किसी समय यह सेतु भारत तथा श्रीलंका को भू मार्ग से आप ...

                                               

रामेश्वरम तीर्थ

रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। भारत के उत्तर मे काशी की जो मान् ...

                                               

लाहौर

लाहौर पाकिस्तान के प्रांत पंजाब की राजधानी है एवं कराची के बाद पाकिस्तान में दूसरा सबसे बडा आबादी वाला शहर है। इसे पाकिस्तान का दिल नाम से भी संबोधित किया जाता है क्योंकि इस शहर का पाकिस्तानी इतिहास, संस्कृति एवं शिक्षा में अत्यंत विशिष्ट योगदान ...

                                               

पवन शर्मा

पवन शर्मा भारतवर्ष की राजनीति में उत्तर भारत का एक परिचित नाम तथा राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी से सम्बन्धित बहुविदित व लोकप्रिय राजनीतिज्ञ हैं। बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति समर्पित संवाहक/प्रचारक तथा भारत की राजधानी पश ...

                                               

पाञ्चजन्य (पत्र)

पाञ्चजन्य भारतीय राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रणयन करने वाला हिन्दी का साप्ताहित समाचार पत्र है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है।

                                               

बंच ऑफ़ थोट्स

बंच ऑफ़ थोट्स गोलवालकर द्वारा लिखित पुस्तक है है एक के द्वारा लिखित पुस्तकों माधव सदाशिव गोलवलकर, उन्हें गुरुजी के नाम से भी जाना जाता है और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक थे. यह पुस्तक १९६६ में प्रकाशित किया गया था.आरएसएस नेता राज ...

                                               

मोहन भागवत

मोहन मधुकर भागवत एक पशु चिकित्सक और 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक हैं। उन्हें एक व्यावहारिक नेता के रूप में देखा जाता है। के एस सुदर्शन ने अपनी सेवानिवृत्ति पर उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था।

                                               

भारतीय शिक्षण मण्डल

भारतीय शिक्षण मण्डल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक आनुसंगिक संगठन है जो शिक्षाक्षेत्र में राष्ट्रीय पुनरुत्थान के उद्देश्य से कार्यरत है। इसकी स्थापना सन 1969 में रामनवमी के दिन हुई थी। इसके मुख्य उद्देश्य हैं- भारत की एकात्म जीवनदृृष्टि पर आधारित ...

                                               

मुरलीधर दत्तात्रेय देवरस

मुरलीधर दत्तात्रेय देवरस उपाख्य भाऊराव देवरस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेता थे। वे मधुकर दत्तात्रेय देवरस के छोटे भाई थे। 1937 में भाऊराव ने स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की। अब डा. हेडगेवार ने उन्हें उत्तर प्रदेश में जाने को कहा। अतः भाऊराव ने ...

                                               

लघु उद्योग भारती

लघु उद्योग भारती १९९४ में स्थापित भारत में सूक्ष्म और लघु उद्योगों के एक पंजीकृत अखिल भारतीय संगठन है। पूरे देश में 250 शाखाओं के साथ 400 से अधिक जिलों में इसकी सदस्यता है।

                                               

विश्व संवाद केन्द्र

विश्व संवाद केन्द्र, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, का आधिकारिक मीडिया केंद्र है। इसका प्रधान कार्यालय बेंगलूर में है। विश्व संचार केंद्र मीडिया के क्षेत्र में काम कर रहा एक माध्यम है जो दोनों प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक शामिल-संबंधित बहुआयामी गतिविधियों के ...

                                               

वी ओर आवर नेशनहुड डिफाइंड

वी ओर आवर नेशनहुड डिफाइंड गोलवालकर द्वारा लिखित पुस्तक है। उन्हें गुरुजी के नाम से भी जाना जाता है और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक थे। इसका प्रकाशन १९३९ में हुआ था।