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दर्शक

सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश्वमेधदत्त उदयन | अहेनर | निरमित्र खान्दपन ...

                                               

दिवोदास

१ प्रथम दिवोदास काशी का चंद्रवंशी राजा था। पुराणों में उसकी चर्चा है । कभी-कभी उसके वंशज द्वितीय दिवोदास के साथ उलझे हुए रूप में मिलते हैं। किंतु पार्जिस्टर महोदय का यह क्रम निर्धारण सही प्रतीत होता है एंशेंट इंडियन हिस्टॉरिकल ट्रेडिशन्स्‌, 1962, ...

                                               

दिवोदास (रिपुञ्जय)

दिवोदास एक पौराणिक पात्र हैं, जो काशी के राजा के रूप में प्रख्यात हैं। उनका पहले का नाम रिपुञ्जय था। उनके तपोबल से सन्तुष्ट ब्रह्मा जी के द्वारा उन्हें दिवोदास नाम प्रदान किया गया था। उन्होंने काशी से देवताओं को बहिष्कृत कर समस्त कार्य स्वयं सम्प ...

                                               

द्रुपददेव

सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव उदयन | अहेनर | निरमित्र खान्दपनी |क्षेमक जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश ...

                                               

द्रौनदेव

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव उदयन | अहेनर | निरमित्र खान्दपनी |क्षेमक वृष्णिमत् | सुषेण | सुनी ...

                                               

निचक्षु

सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष्ण | चित्ररथ | शुचिद्रथ सुखीबल | परिप्ल ...

                                               

निरमित्र

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश्वमेधदत्त सुखीबल | परिप्लव | सुनय | मेधाव ...

                                               

निवृति

हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश्वमेधदत्त अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष्ण | ...

                                               

नृचक्षुस्

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नृपञ्जय

परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव उदयन | अहेनर | निरमित्र खान्दपनी |क्षेमक जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश ...

                                               

परिप्लव

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पुरु

राजा ययाति के देवयानी से दो पुत्र यदु तथा तुवर्सु और शर्मिष्ठा से तीन पुत्र द्रुह्य, अनु तथा पुरु हुये। पुरु राजा ययाति के प्रिय पुत्र थे, आगे चल कर कुरु वन्श इसी की शाखा के रूप मे विश्व इतिहास का महान साम्राज्य बना। चन्द्रवंशी ययाति से पुरू हुए। ...

                                               

पृथु

पृथु राजा वेन के पुत्र थे। भूमण्डल पर सर्वप्रथम सर्वांगीण रूप से राजशासन स्थापित करने के कारण उन्हें पृथ्वी का प्रथम राजा माना गया है। साधुशीलवान् अंग के दुष्ट पुत्र वेन को तंग आकर ऋषियों ने हुंकार-ध्वनि से मार डाला था। तब अराजकता के निवारण हेतु ...

                                               

प्रवीर

पूरु अथवा प्राचिन्वत्‌ के पुत्र, जनमेजय के भाई, अथवा जनमेजय और मनस्यु के पिता, एक पौराणिक राजा जिन्होंने तीन अश्वमेघयज्ञ किए थे।

                                               

प्राचीन वंशावली

भारतीय इतिहास अति प्राचीन है। पौराणिक वंशावली अधस्तात् दी गयी है। यह वंशावली कृत युग से द्वापर के अन्त तक की है। नीचे लिखी सूचियां मनु से आरम्भ होती हैं और भगवान कृष्ण की पीढी पर समाप्त होती हैं। पूरी वंशावली जो पुराणों मे उपलब्ध है, नन्द वंश तक ...

                                               

बृहद्बल

बृहद्बल भारतीय महाकाव्य महाभारत में एक चरित्र है। वह भगवान् राम के एक वंशज थे, वह इक्ष्वाकु राजवंश के अंतर्गत विश्रुतवन्ता के पुत्र के रूप में कोशल राज्य के अंतिम शासक थे। कुरुक्षेत्र युद्ध में बृहद्बल ने कौरवों की ओर से युध्द लड़ा और चक्रव्यूह म ...

                                               

मरहन्देव

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मेधाविन्

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रघु

रघु अयोध्या के प्रसिद्ध इक्ष्वाकुवंशीय राजा थे जिनके नाम पर रघुवंश की रचना हुई। ये दिलीप के पुत्र थे। अपने कुल में ये सर्वश्रेष्ठ गिने जाते हैं जिसके फलस्वरूप मर्यादापुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी भी अपने को रघुवंशी कहने में परम गर्व अनुभव करते हैं। ...

                                               

रामदेव (कुरु वंश)

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रामन्देव

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रुच

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विजयनन्द

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विभु

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वृष्णिमत्

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शतानीक १

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शिशुनाग

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शुचि

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शुचिद्रथ

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श्रुतश्रव

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सन्धिमन्

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सिंहदेव

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सुखदेव(राजा)

इसी नाम से प्रसिद्ध एक भारतीय क्रांतिकारी के बारे में जानने के लिए यहां जाँय - सुखदेव महाभारत के पश्चात के कुरु वंश के राजा। कलियुग वंशावली यह प्राचीन भारत के सूर्यवंश-चन्द्रवंश के प्रसिद्ध राजा थे। भारतीय इतिहास अति प्राचीन है। पौराणिक वंशावली अ ...

                                               

सुखीबल

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सुनय

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सुनीथ

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सुल्कन्देव

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सुव्रत

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सेनाजित्

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सोमाधि

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हर्णदेव

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हर्नामदेव

सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | बृहद्रथ | वसुदान |शत्निक बुद्ध कालीन| जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश्वम ...

                                               

एक-रत्न

एक-रत्न, मंदिर वास्तुकला की एक शैली है जो बंगाल में विकसित हुई। इस शैली के मन्दिरों के नीचे वाला भाग चार-चाला मंदिरों जैसा ही होता है किन्तु इसकी छत बिल्कुल अलग होती है। यह रत्न मंदिरों की सरलतम शैली है। पंचरत्न तथा नवरत्न, एकरत्न की अपेक्षा अधिक ...

                                               

कटारमल सूर्य मन्दिर

कटारमल सूर्य मन्दिर भारतवर्ष का प्राचीनतम सूर्य मन्दिर है। यह पूर्वाभिमुखी है तथा उत्तराखण्ड राज्य में अल्मोड़ा जिले के अधेली सुनार नामक गॉंव में स्थित है। इसका निर्माण कत्यूरी राजवंश के तत्कालीन शासक कटारमल के द्वारा छठीं से नवीं शताब्दी में हुआ ...

                                               

गुप्तेश्वर महादेव, उदयपुर

गुप्तेश्वर महादेव मंदिर शहर के एक दूरस्थ पक्ष में स्थित है, जो घनी बस्ती में बसा हुआ है। हालांकि शहर के केंद्र सूरजपोल से केवल किलोमीटर और उदयपुर शहर के रेलवे स्टेशन से ७.५ किलोमीटर दूर है। आगंतुक निजी वाहन, या टैक्सी या ऑटो-रिक्शा द्वारा मंदिर प ...

                                               

गोला गोकर्णनाथ

गोला गोकर्णनाथ छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित यह नगर पालिका परिषद व तहसील भगवान शिव के मंदिऔर बजाज हिन्दुस्तान लिमिटेड के चीनी मिल के लिए जाना जाता है। गोली गांव जो कि शिव मंदिर से कुछ दूरी ...

                                               

दन्तेश्वरी मन्दिर

दन्तेश्वरी मन्दिर छत्तीसगढ़ के दन्तेवाड़ा में स्थित एक शक्तिपीठ है जो दन्तेश्वरी देवी को समर्पित है। इस मन्दिर का निर्माण १४वीं शताब्दी में हुआ था। दन्तेवाड़ा का नाम देवी दन्तेश्वरी के नाम पर ही पड़ा है जो काकतीय राजाओं की कुलदेवी हैं। परम्परागत ...

                                               

पारसमणिनाथ मंदिर

पारसमणिनाथ मंदिर पारसमणिधाम रहुआ-संग्राम के रूप में भी जाना जाता है। यह एक प्रसिद्ध शिव के लिए समर्पित हिंदू मंदिर है जो रहुआ-संग्राम गांव के उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। जो बिहार के मधुबनी जिला अंतर्गत मधेपुर प्रखण्ड कार्यालय से छह किलोमीटर की ...

                                               

बादामी गुफा मंदिर

बादामी गुफा मंदिर, भारत के कर्नाटक के उत्तरी भाग में बागलकोट जिले के एक शहर बादामी में स्थित हिंदू और जैन गुफा मंदिरों का एक परिसर है। गुफाओं को भारतीय चट्टानों को काटकर बनाने की वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है, विशेष रूप से बादामी चालुक्य वास्त ...

                                               

श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा

आनंदवन पथमेड़ा भारत देश की वह पावन व मनोरम भूमि हैं जिसे भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र सें द्वारका जाते समय श्रावण भादों माह में रुक कर वृंदावन से लायी हुई भूमंड़ल की सर्वाधिक दुधारु जुझारु साहसी शौर्यवान सौम्यवान गायों के चरने व विचरनें के लिए ...