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विद्युत वाहन

विद्युतीय वाहन या विद्युत वाहन एक प्रकार के विद्युत से चलने वाले वाहन होते हैं। यह वाहन अपने बैटरी द्वारा चलते हैं या कोई बाहरी स्रोत द्वारा विद्युत दिये जाने पर। इसमें विद्युत से चलने वाले रेल भी शामिल हैं। यह ऊपर दिये गए तार द्वारा उच्च विद्युत ...

                                               

अग्र अभिनत

डायोड एक बाइपोलार डिवाइस होता है मतलब इसमें निगेटिव और पोसिटिव दोने साइड होते है। इसमें एनोड ऋणात्मक औरकैथोड धनात्मक सिरों को दर्शाता है। डायोड में करंट के प्रवाह के लिए हमें उसे किसी वोल्टेज सोर्स से जोड़ना पड़ता है जैसे की बैटरी. जैसा की हम जान ...

                                               

अनुरूप संकेत

अनुरूप संकेत या एनालॉग सिग्नल, एक सतत संकेत है जिसका समय परिवर्ती गुण किसी अन्य समय परिवर्ती राशि को निरूपित करता है, यानि यह उस दूसरे समय परिवर्ती संकेत के अनुरूप होता है। उदाहरण के लिए, एक अनुरूप श्रव्य संकेत में, संकेत की तात्कालिक वोल्टता ध्व ...

                                               

इलेक्ट्रॉनिक अवयव

जिन विभिन्न अवयवों का उपयोग करके इलेक्ट्रॉनिक परिपथ बनाये जाते हैं उन्हें इलेक्ट्रॉनिक अवयव कहते हैं इलेक्ट्रॉनिक अवयव दो सिरे वाले, तीन सिरों वाले या इससे अधिक सिरों वाले होते हैं जिन्हें सोल्डर करके या किसी अन्य विधि से परिपथ में जोड़ा जाता है। ...

                                               

इलेक्ट्रॉनिक परिपथ सिमुलेशन

किसी परिपथ के गणितीय मॉडल का उपयोग करके उसके व्यवहार के बारे में बताना इलेक्ट्रॉनिक परिपथ सिमुलेशन कहलाता है। आजकल कम्प्यूटर सोफ़्टवेयर इस काम के लिए उपयोग किए जाते हैं। अधिकांश महाविद्यालय और विश्वविद्यालय इस तरह से सॉफ्टवेयरों का उपयोग करते हुए ...

                                               

एकल परिपथ आरेख

शक्ति इंजीनियरी में एकल-लाइन आरेख, तीन-फेजी शक्ति परिपथों को सरलीकृत करके दिखाने वाला एक आरेख है इसमें तीनों शक्ति-परिपथ के तीनों लाइनों में लगे अवयवों को दिखाने के बजाय एक ही लाइन में जुडी हुई चीजें दिखायी जातीं हैं और मान लिया जाता है कि तीनों ...

                                               

एलसी परिपथ

LC का उपयोग किसी नियत आवृत्ति का वैद्युत संकेत उत्पन्न करने के लिया किया जाता है। इसके अलावा इसे किसी जटिल संकेत में से किसी निश्चित आवृत्ति के संकेत को चुनने के लिए भी काम में लाया जाता है। इस कारण LC परिपथ बहुत से एलेक्ट्रानिक युक्तियों में प्र ...

                                               

किरचॉफ के परिपथ के नियम

सन् १८४५ में गुस्ताव किरचॉफ ने विद्युत परिपथों में वोल्टता एवं धारा सम्बन्धी दो नियम प्रतिपादित किये। ये दोनो नियम संयुक्त रूप से किरचॉफ के परिपथ के नियम कहलाते हैं। ये नियम विद्युत परिपथों के लिये वस्तुतः आवेश संरक्षण एवं उर्जा संरक्षण के नियमों ...

                                               

कॉकरॉफ्ट-वाल्टन जनित्र

कॉकरॉफ्ट-वाल्टन जनित्र या, कॉकरॉफ्ट-वाल्टन वोल्टता गुणित्र उच्च वोल्टता उत्पन्न करने वाली एक विद्युत परिपथ है। इसका आविष्कार जॉन डगलस कॉकरॉफ्त और ईटीएस वाल्टन ने सन् १९३२ में सर्वप्रथम इस परिपथ का उपयोग रैखिक कण त्वरक बनाने में किया था। इसके लिये ...

                                               

क्षीणता

सामान्यतः देखने को मिलता है कि किसी प्रणाली या किसी माध्यम में घुसने वाली ऊर्जा/संकेत उससे निकलने पर कम को जाती है। इस प्रक्रिया को क्षीणन कहते हैं। उदाहरण के लिए रंगीन काच से गुजरने पर प्रकाश की त्तिव्रता कम हो जाती है। इसी तरह सीसे की सिल्ली को ...

                                               

जाइरेटर

परिभ्रमित्र या जाइरेटर एक पैसिव, रैखिक, ह्रासरहित, द्वि-पोर्ट विद्युत नेटवर्क अवयव है जिसे १९४८ में बर्नार्ड डी एच टेलिगन ने प्रस्तावित किया था। चार परम्परागत अवयवों से यह इस मामले में भिन्न है कि जाइरेटर एक अ व्युत्क्रम अवयव है। जाइरेटर की सहायत ...

                                               

टेलीग्राफ समीकरण

टेलीग्राफ समीकरण परस्पर युग्मित दो रैखिक अवकल समीकरण हैं जो किसी संचरण लाइन के वोल्टता और धारा का मान बताते हैं।

                                               

डायोड सेतु

डायोड सेतु चार या अधिक डायोडों को सेतु के रूप में जोड़ने से बनता है। इसकी विशेषता है कि इसके इनपुट में किसी भी ध्रुवता का वोल्टेज लगाने पर आउटपुट में एक ही पोलैरिटी का वोल्टेज मिलता है। इसकारण इसका उपयोग दिष्टकारी के रूप में एसी को डीसी में बदलने ...

                                               

थेवेनिन का प्रमेय

थेवेनिन का प्रमेय, परिपथ सिद्धान्त का एक महत्वपूर्ण प्रमेय है। इसे फ्रांस के टेलेग्राफ इंजीनीयर लियों चार्ल्स थेवेनिन) ने प्रतिपादित किया था। इसके अनुसार, वोल्टता स्रोत, धारा स्रोत एवं प्रतिरोधकों से निर्मित किसी भी रैखिक परिपथ का इसके किन्हीं दो ...

                                               

द्वि-प्रद्वार जालक्रम

द्वि-प्रद्वार जालक्रम ऐसे विद्युत परिपथ को कहते हैं जिसमें बाहरी जगत से जुड़ने के लिये दो-जोड़ी सिरे होते हैं। उदाहरण के लिये ट्रान्जिस्टर एक द्वि-पोर्ट नेटवर्क है होता है।)

                                               

परिपथ डिजाइन

परिपथ अभिकल्प का अर्थ बहुत व्यापक है। इसमें किसी आईसी के अन्दर केवल एक ट्रांजिस्टर का डिजाइन से लेकर जटिल एलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की डिजाइन तक आता है। सरल कार्यों के लिये डिजाइन की प्रक्रिया एक ही व्यक्ति बिना किसी योजनाबद्ध डिजाइन प्रक्रिया का अ ...

                                               

परिपथ विश्लेषण

किसी परिपथ के सभी अवयवों के मान दिये होने पर परिपथ की विभिन्न शाखाओं में धारा एवं नोडों की वोल्टता ज्ञात करना परिपथ विश्लेषण कहलाती है। वैश्लेषिक औजारों का उपयोग करते हुए किसी व्यक्ति द्वारा केवल सरल और प्रायः रैखिक नेटवर्कों का विश्लेषण ही किया ...

                                               

फिल्टर (संकेत प्रसंस्करण)

संकेत प्रसंस्करण के सन्दर्भ में, उस युक्ति या प्रक्रिया को फिल्टर कहते हैं जो संकेत से कुछ अवांछित अवयवों या विशेषताओं को निकाल देता है। उदाहरण के लिये लो पास फिल्टर किसी सिगनल के उन अवयवों को तो आउटपुट में जाने देता है जो कम आवृत्ति के हों किन्त ...

                                               

मिलर का प्रमेय

मिलर प्रमेय किसी विद्युत परिपथ के तुल्य दूसरे विद्युत परिपथ की गणना करने से सम्बन्धित प्रमेय है। इसके अनुसार, श्रेणीक्रम में जुड़े दो वोल्टता स्रोतों से जुड़े किसी फ्लोटिंग प्रतिबाधा अवयव impedance element को दो ग्राउण्ड किये हुए प्रतिबाधा अवयवों ...

                                               

रैखिक परिपथ

रैखिक परिपथ वह परिपथ है जिसमें f आवृत्ति का साइनवक्रीय इनपुट वोल्टेज लगाने पर उसके सभी वोल्टेज तथा धाराएँ भी f आवृत्ति की साइनवक्रीय होती हैं। हाँ, यह आवश्यक नहीं है कि सभी वोल्टेज और धारायें इनपुट के फेज में ही हों।. रैखिक परिपथ की एक दूसरी परिभ ...

                                               

वैद्युत पृथक्करण

किसी वैद्युत प्रणाली के दो या अधिक प्रभागों को इस प्रकार विलगित करना कि उनके बीच में आवेश-वाहक कणों का प्रवाह नहीं हो, वैद्युत पृथक्करण कहलाता है। पृथकृत प्रभागों के बीच विद्युत पृथक्करण के होते हुए भी ऊर्जा या सूचना का विनिमय सम्भव है जो धारिता, ...

                                               

वैद्युत प्रतिघात

विद्युत प्रणालियों तथा इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में, किसी अवयव द्वारा धारा अथवा वोल्टता के परिवर्तन के विरोध को उस अवयव का प्रतिघात कहते हैं। चुम्बकीय क्षेत्र, धारा के परिवर्तन का विरोध करता है जबकि विद्युत क्षेत्र, वोल्टता के परिवर्तन का। वैद्युत ...

                                               

वोल्टता गुणक

वोल्टता गुणक एक विशेष विद्युत परिपथ है जो कम वोल्टता के एसी को अपेक्षाकृत अधिक वोल्टता के डीसी में बदलने का काम करता है। इसमें प्रायः डायोड और संधारित्र का प्रयोग होता है। इनका उपयोग उच्च वोल्टता पैदा करने के लिये किया जाता है जो मुख्यतः उच्च ऊर् ...

                                               

वोल्टता नियंत्रित दोलक

वोल्टता नियंत्रित दोलक) ऐसे विद्युत परिपथ को कहते हैं जिसके आउटपुट की आवृत्ति उसके इनपुट पर लगाए गये वोल्टता को बदलकर घटायी-बढायी जा सके। अर्थात् इस प्रकार के दोलक की तात्क्षणिक आवृत्ति उसके तात्क्षणिक इन्पुट वोल्टता द्वारा निर्धारित होती है। अतः ...

                                               

वोल्टता विभाजक

इलेक्ट्रॉनिक्स में, वोल्टता विभाजक या विभव-विभाजक एक पैसिव रैखिक परिपथ होता है जिसके आउटपुट से हमें उसके इन्पुट वोल्टेज का एक निश्चित भाग प्रात होता है। उदाहरण के लिए पार्श्व चित्र में Z1=१००० ओम तथा Z2 = १००० ओम हो तो Vout का मान Vin के आधा होगा।

                                               

व्हीटस्टोन सेतु

व्हीटस्टोन सेतु एक छोटा सा परिपथ है जो मापन में उपयोगी है। इसका आविष्कार सैमुएल हण्टर क्रिस्टी ने सन् १८३३ में किया था किन्तु चार्ल्स ह्वीटस्टोन ने इसको उन्नत और लोकप्रिय बनाया। अन्य कामों के अतिरिक्त यह किसी अज्ञात प्रतिरोध का मान ज्ञात करने के ...

                                               

श्रेणी और समानांतर परिपथ

किसी विद्युत परिपथ के विभिन्न अवयव श्रृंखलाक्रम जुड़े हो सकते हैं, समानान्तर क्रम में जुड़े हो सकते हैं, या श्रृंखला-समानान्तर क्रम में जुड़े हो सकते हैं। श्रृंखलाक्रम में जुड़े सभी अवयवों में एकसमान विद्युतधारा प्रवाहित होती है। समान्तर क्रम में ...

                                               

श्रेणीक्रम और समानांतरक्रम परिपथ

बहुत से विद्युत या इलेक्ट्रॉनिक घटकों या अवयवों को जोड़कर विद्युत परिपथ बनते हैं। परिपथों में घटक दो प्रकार से जोड़े जा सकते हैं: श्रेणीक्रम और समानांतरक्रम में। जिस परिपथ में सभी घटक श्रेणीक्रम में जुड़े हों, उसे श्रेणी परिपथ और जिस परिपथ में सभ ...

                                               

स्कॉट संयोजन

स्कॉट संयोजन ऐसा परिपथ है जो द्विफेजी विद्युत शक्ति को त्रिफेजी विद्युत में बदलता है । अतः इसका उपयोग करके त्रिफेजी विद्युत द्वारा द्विफेजी प्रेरण मोटर चलाया जा सकता है।

                                               

स्पन्द जनक जालक्रम

स्पन्द जनक जालक्रम) वह विद्युत परिपथ है जो विद्युत ऊर्जा को अपेक्षाकृत अधिक समय तक एकत्र करने के बाद उस ऊर्जा को कम समय की लगभग वर्गाकार स्पन्द के रूप में देता है। इस तरह की कम समय की वर्गाकार स्पन्द का अनेकों जगह उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लि ...

                                               

स्वतः लब्धि नियंत्रण

स्वतः लब्धि नियंत्रण) एक ऐसा परिपथ या नियंत्रण प्रणाली है जो इन्पुट संकेत के घटने-बढने के बावजूद आउटपुट को एक नियत मान पर बनाये रखती है। बहुत सी इलेक्ट्रानिक युक्तियों में यह प्रयुक्त होती है। आउटपुट के स्तर को नियत बनाये रखने के लिये आउटपुट संके ...

                                               

स्विचित संधारित्र

स्विचित संधारित्र इलेक्ट्रानिक परिपथों में प्रयुक्त एक अवयव है। इसका उपयोग विविक्त-काल संकेत प्रसंस्करण में किया जाता है। स्विचित संधारित्रों का उपयोग करते हुए जो फिल्टर बनाये जाते हैं उन्हें स्विचित संधारित्र फिल्टर कहते हैं। एकीकृत परिपथ के अन् ...

                                               

सुग्राहिता (एलेक्ट्रॉनिकी)

सुग्राहिता का विद्युतिकी में यह अर्थ होता है कि वह अपना कार्य कितनी विश्वसनीयता से कर रहा है । इस प्रकार का उपयंत्र किसी भी छोटे से छोटे मान को तथा किसी भी बड़े से बड़े मान को सरलता से मानता है और जुड़ता है।

                                               

विद्युत शक्ति

किसी विद्युत परिपथ में जिस दर से विद्युत उर्जा स्थानान्तरित होती है उसे विद्युत शक्ति कहते हैं। इसका एसआई मात्रक वाट है। किसी परिपथ के दो नोडों के बीच विभवान्तर vt हो तथा इस शाखा में धारा it हो तो उस शाखा द्वारा ली गयी विद्युतशक्ति, p t = v t ⋅ i ...

                                               

अंकीय रक्षी रिले

विद्युत शक्ति के संप्रेषण और वितरण के सन्दर्भ में, अंकीय रक्षी रिले उस तन्त्र को कहते हैं जो विद्युत दोषों का पता करने के लिए सॉफ्टवेयर-आधारित कलन विधि तथा अंकीय तन्त्र का उपयोग करता है। अतः इन्हें माइक्रोप्रोसेसर प्रकार के रक्षी रिले अथवा न्युमे ...

                                               

गुणावृत्ति

किसी न्यूनतम आवृत्ति के पूर्णांक गुणक आवृत्ति को उसका प्रसंवादी या गुणावृत्ति कहते हैं। उदाहरण के लिए, ३०० हर्टज, ५० हर्ट्ज की गुणावृत्ति है। प्रायः मूल आवृत्ति फण्डामेण्टल फ्रेक्वेन्सी के साथ गुणावृत्ति भी अवश्य होती है। कहीं ये गुणावृत्तियाँ ला ...

                                               

द्विफेज प्रणाली

द्विफेज प्रणाली विद्युत शक्ति की वह प्रणाली है जिसमें दो-फेज होते हैं। इनके बीच ९० डिग्री का कलान्तर होता है। इसका कुछ स्थानों पर उपयोग होता है किन्तु कुल मिलाकर बहुत कम उपयोग है। द्विफेज वोल्टेज प्राप्त करने के लिए द्विफेजी जनित्र का उपयोग किया ...

                                               

रक्षी रिले

रक्षी रिले एक विद्युतचुम्बकीय युक्ति है जिसमे एक से अधिक क्वायलें होती हैं। इसकी डिजाइन इस प्रकार की गई होती है कि विद्युत प्रणाली के धारा, वोल्टता, शक्ति आदि के मान में विसंगति दिखते ही ये परिपथ विच्छेदक को ट्रिप कर देती हैं। आजकल विद्युतचुम्बकी ...

                                               

वितरण ट्रांसफॉर्मर

वितरण ट्रांसफॉर्मर या सर्विस ट्रान्सफॉर्मर उस ट्रान्सफॉर्मर को कहते हैं जो सीधे उपभोक्ताओं को बिजली देता है। यह एक स्टेप-डाउन ट्रान्स्फॉर्मर होता है।

                                               

विद्युत उपकेंद्र

विद्युत उपकेंद्र विद्युत उत्पादन, संचारण और वितरण प्रणालियों में प्रयुक्त एक सहायक केन्द्र होता है जहाँ वोल्टता को परिणामित्र की सहायता से अधिक से कम या कम से अधिक किया जाता है। विद्युत उत्पादन केन्द्र से लेकर विद्युत उपभोक्ता तक कई उपकेन्द्र लगा ...

                                               

विद्युत ऊर्जा का उपभोग

विद्युत ऊर्जा का उपभोग से आशय ऊर्जा के उस उपभोग से है जो विद्युत शक्ति के रूप में उपभोग की जाती है। वर्ष २०१२ में विश्व की सम्पूर्ण विद्युत ऊर्जा उपभोग २०९०० टेरावाटघण्टे था।

                                               

वॉट घंटा

वॉट घंटा या वॉट आवर ऊर्जा की इकाई है। इसे प्रायः विद्युत ऊर्जा की खपत की मात्रा के मापन हेतु प्रयोग किया जाता है। इसे प्रायः विद्युत बिलों में देखा जाता है। इसे जनसामान्य की भाषा में यूनिट भी कहा जाता है।

                                               

शक्ति इंजीनियरी

शक्ति इंजीनियरी इंजीनियरी की वह उपक्षेत्र है जो विद्युत शक्ति के उत्पादन, पारेषण, वितरण, उपभोग तथा इनमें प्रयुक्त जनित्रों, ट्रांसफार्मरों, पारेषण लाइनों एवं मोतरों से सम्बन्ध रखता है। इस विधा को विद्युत प्रणाली इंजीनियरी भी कहते हैं।

                                               

शक्ति गुणांक

एसी विद्युत शक्ति पर काम कर रहे किसी भार द्वारा लिये गये वास्तविक शक्ति तथा आभासी शक्ति के अनुपात को शक्ति गुणक या शक्ति गुणांक कहते हैं। शक्ति गुणांक का संख्यात्मक मान शून्य और १ के बीच में होता है। शक्ति गुणक = P / S लोड द्वारा लिये गये शक्ति क ...

                                               

अंतरिक्ष यान प्रणोदन

अंतरिक्ष यान प्रणोदन अंतरिक्ष यान और कृत्रिम उपग्रहों की गति तेज करने की प्रक्रिया है। इसकी अनेक विधियाँ हैं। यह अंतरिक्ष अनुसंधान का महत्त्वपूर्ण भाग है। ज्यादातर अंतरिक्ष यान आज सुपरसोनिक यानों के माध्यम से प्रक्षेपित किए जाते हैं। इनमें प्रयुक ...

                                               

अंतरिक्ष शटल

अंतरिक्ष शटल संयुक्त राज्य अमरीका में नासा द्वारा मानव सहित या रहित उपग्रह यातायात प्रणाली को कहा जाता है। यह शटल पुन: प्रयोगनीय यान होता है और इसमें कंप्यूटर डाटा एकत्र करने और संचार के तमाम यंत्र लगे होते हैं। इसमें सवार होकर ही वैज्ञानिक अंतरि ...

                                               

केप्लर अंतरिक्ष यान

कॅप्लर अंतरिक्ष यान अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्थान, नासा, का एक अंतरिक्ष यान है, जिसका काम सूरज से अलग किंतु उसी तरह अन्य तारों के इर्द-गिर्द ऐसे ग़ैर-सौरीय ग्रहों को ढूंढना है जो पृथ्वी से मिलते-जुलते हों। कॅप्लर को ७ मार्च २००९ में रोकेट के ...

                                               

टाइटन 3ई

टाइटन तृतीय ई या टाइटन ३ई, जिसे टाइटन III-सेन्टॉर भी कहा जाता है, एक अमरीकी एक्स्पेन्डेबल लॉन्च प्रणाली थी, जिसे १९७४ से १९७७ के बीच सात बार लॉन्च किया गया था। इसके द्वारा नासा की उच्च-प्रोफ़ाइल अभियानों को यात्रा करायी गयी थी, जिसमें वॉयेजर, वाइ ...

                                               

टीकेएस (अंतरिक्ष यान)

टीकेएस एक सोवियत अंतरिक्ष यान था। जिसकी 1960 के दशक में कल्पना की थी। इसका प्रयोग सैन्य अंतरिक्ष स्टेशन अल्माज़ तक रसद का सामान पहुचने में किया जाता। अंतरिक्ष यान दोनों मानव और स्वायत्त मानवरहित मालवाहक उड़ानों के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन अप ...

                                               

तारायान

तारायान ऐसे अंतरिक्ष यान को कहते हैं जो एक तारे से दुसरे तारे तक यात्रा करने में सक्षम हो। ऐसे यान वर्तमान में केवल काल्पनिक हैं और विज्ञान कथा साहित्य में इनपर आधारित बहुत कहानियाँ मिलती हैं। हक़ीक़त में, मनुष्यों ने सौर मंडल के अन्दर यात्रा कर ...