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जातीय समूह

जातीय समूह मनुष्यों का एक ऐसा समूह होता है जिसके सदस्य किसी वास्तविक या काल्पनिक सांझी वंश-परंपरा के माध्यम से अपने आप को एक नस्ल के वंशज मानते हैं। यह सांझी विरासत वंशक्रम, इतिहास, रक्त-संबंध, धर्म, भाषा, सांझे क्षेत्र, राष्ट्रीयता या भौतिक रूप- ...

                                               

ईरानी

ईरानी भारतीय उपमहाद्वीप में फैले एक नस्ली वर्ग को कहते हैं जो पिछले 1000 सालों में यहाँ आए हैं। अक्सर ईरानियों को पारसियों के समान समझने की भूल की जाती है। पारसी वो लोग हैं जो 1000 साल के पहले भारत में आए जबकि ईरानी वो लोग हैं जो उसके बाद आए। इन ...

                                               

एशियाई लोग

एशिया में मानव विकास सूचकांक के आधापर सबसे विकसित क्षेत्र पूर्वी एशिया है। वहाँ बेहतर स्वच्छता, शिक्षा और आय के आधार पर, पिछले 40 वर्षों में औसत मानव विकास सूचकांक की दरें दोगुनी हो गई है। 1970 के बाद से मानव विकास सूचकांक में दुनिया का दूसरा सबस ...

                                               

कुर्द लोग

कुर्द लोग मुख्य रूप से उत्तरी इराक़, दक्षिणपूर्वी तुर्की तथा उत्तरी सीरिया में पाए जाते हैं। कुर्द लोगों से सम्बन्धित चीज़ों को भी कुर्द कहा जाता है। इनकी भाषा को कुर्द भाषा कहा जाता है। से लोग शिया बाहुल्य हैं

                                               

भारत में नस्लवाद

भारत में जातीय सम्बंध अथवा भारत में नस्लवाद भारतीय लोगों के अन्य नस्ल अथवा जातीयता के लोगों के साथ रवैये को प्रदर्शित करता है। भारत के प्रत्येक राज्य में इसकी लोकसंस्कृति, रहन सहन, लोकगीत, लोकनृत्य आदि में भिन्नता पायी जाती है।

                                               

मूर

मूर उत्तरी अफ्रीका के अरबों तथा बर्बर लोगों को कहते हैं जो व्यापारिक कारणों से कई अन्य क्षेत्रों में बस गए। ये इस्लाम के आगमान से पूर्व तथा उसके बाद भी विस्थापित होते रहे। स्पेन, श्रीलंका तथा इंडोनेशिया कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ मूरों की आबादी रहत ...

                                               

स्लाव लोग

स्लाव लोग या स्लावी लोग पूर्वी यूरोप, दक्षिणी यूरोप और उत्तर एशिया में बसने वाली एक मानव जाति है। यह और इनके पूर्वज स्लावी भाषाएँ बोलते थे, जो हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की एक उपशाखा है। स्लावी लोगों के नाम अक्सर इक या इच की ध्वनि में ख़त्म होते ह ...

                                               

पितृत्व का बंधन

किसी पुरुष के लिए पितृत्व या बाप बनने का एहसास बच्चे के जन्म के बाद धीरे-धीरे होता है। परन्तु महिला को मातृत्व का एहसास को तत्काल होता है क्योंकि नवजात उसी की कोख से निकलता है। इसी कारण बच्चों की आवशयकता पहले माँ को पता चलती है कि कब उसे भूख लगी ...

                                               

मातृत्व का बंधन

मातृत्व एक महत्वपूर्ण मानव बंधन है। यह एक माँ के अपने बच्चों के प्रति स्नेह, प्याऔर देखरेख का नाम है। माँ न केवल बच्चों के खाने-पीने और स्वास्थ्य का ध्यान रखती है बल्कि हर काम में स्वयं से आगे बच्चों की भलाई को रखती है। स्कूली बच्चों की माएँ अपने ...

                                               

गुआंचे

गुआंचे, कैनरी द्वीपसमूह पर निवास करने वाले आदिवासी हैं जिन्हें बर्बर नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये लोग वहाँ पर १००० ई॰पू॰ अथवा इससे भी पहले बस गये थे।

                                               

विकीर्णन (डायसपोरा)

विकीर्णन या डायस्पोरा diaspora से आशय है -किसी भौगोलिक क्षेत्र के मूल वासियों का किसी अन्य बहुगोलिक क्षेत्र में प्रवास करना विकीर्ण होना। किन्तु डायसपोरा का विशेष अर्थ ऐतिहासिक अनैच्छिक प्रकृति के बड़े पैमाने वाले विकीर्ण, जैसे जुडा से यहूदियों क ...

                                               

आदिम-हिन्द-यूरोपीय लोग

आदिम-हिन्द-यूरोपीय यूरेशिया में बसने वाले उन प्राचीन लोगों को कहा जाता है जो आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा बोलते थे। इनके बारे में जानकारी भाषावैज्ञानिक तकनीकों से और कुछ हद तक पुरातत्व-विज्ञान से आई है। आधुनिक युग में अनुवांशिकी के ज़रिये भी इनकी जाती ...

                                               

कारलूक लोग

कारलूक या क़ारलूक़ एक ख़ानाबदोश तुर्की क़बीला था जो मध्य एशिया में अल्ताई पहाड़ों से पश्चिम में कारा-इरतिश और तरबगत​ई पर्वतों के क्षेत्र में बसा करता था। इन्हें चीनी लोग गेलोलू भी बुलाते थे। कारलूक समुदाय जातीयता के नज़रिए से उईग़ुर लोगों से सम्ब ...

                                               

कूमान लोग

कूमान, जिन्हें रूसी भाषा में पोलोव्त्सी कहा जाता था, एक तुर्क बंजारा समुदाय था जो 1237 ईसवी में होने वाले मंगोल हमले तक यूरेशियाई स्तेपी में कृष्ण सागर से उत्तरी में और वोल्गा नदी के किनारे विस्तृत कूमान-किपचाक परिसंध की पश्चिमी शाखा थी। मंगोल हम ...

                                               

ख़ज़र लोग

ख़ज़र मध्यकालीन यूरेशिया की एक तुर्की जाति थी जिनका विशाल साम्राज्य आधुनिक रूस के यूरोपीय हिस्से, पश्चिमी कज़ाख़स्तान, पूर्वी युक्रेन, अज़रबेजान, उत्तरी कॉकस, जोर्जिया, क्राइमिया और उत्तरपूर्वी तुर्की पर विस्तृत था। इनकी राजधानी वोल्गा नदी के किन ...

                                               

जुरचेन लोग

जुरचेन लोग उत्तर-पूर्वी चीन के मंचूरिया क्षेत्र में बसने वाली एक तुन्गुसी जाति थी। वैसे यह विलुप्त तो नहीं हुई लेकिन १७वीं सदी में उन्होने अपने आप को मान्छु लोग बुलाना शुरू कर दिया और वही उनकी पहचाबन गई। जुरचेनों ने जिन राजवंश की स्थापना की थी जि ...

                                               

जू-जान ख़ागानत

जू-जान ख़ागानत या रोऊरान ख़ागानत या निरून ख़ागानत एक ख़ानाबदोश क़बीलों का परिसंघ था जो चीन के उत्तरी भाग और उसके पड़ौसी इलाक़ों में चौथी सदी ईसवी के अंत से छठी सदी ईसवी के मध्य तक के काल में विस्तृत था। कुछ इतिहासकारों के अनुसार यह क़बीले वही थे ...

                                               

तान्गूत लोग

तान्गूत एक तिब्बती-बर्मी भाषा बोलने वाला समुदाय था जिसने प्राचीन चीन के पश्चिम में पश्चिमी शिया राज्य स्थापित किया। माना जाता है कि वे १०वीं सदी ईसवी से पहले उत्तर-पश्चिमी चीन में आ बसे थे। माना जाता है कि इनका तिब्बती लोगों से नसल का सम्बन्ध था ...

                                               

तिएले लोग

तिएले, चिले या गाओचे उत्तरी चीन और मध्य एशिया में चौथी से आठवीं शताब्दी ईसवी के काल में नौ तुर्की जातियों का परिसंघ था। ऐतिहासिक चीनी स्रोतों के अनुसार तिएले लोग प्राचीन दिंगलींग लोगों के वंशज थे और वे इस क्षेत्र में शियोंगनु साम्राज्य के पतन के ...

                                               

तुषारी लोग

तुषारी या तुख़ारी प्राचीन काल में मध्य एशिया में स्थित तारिम द्रोणी में बसने वाली एक जाति थी। यह हिन्द-यूरोपीय भाषाएँ बोलने वाले सब से पूर्वतम लोग थे। चीनी स्रोतों के अनुसार इनका युएझ़ी लोगों से गहरा सम्बन्ध था। इनकी उत्तरी शियोंगनु लोगों से बहुत ...

                                               

दिंगलींग लोग

दिंगलींग साइबेरिया में बसने वाली एक प्राचीन जाति थी। यह शुरू में बयकाल झील से पश्चिम में लेना नदी के किनारे बसा करते थे लेकिन समय के साथ दक्षिण की ओर जाकर मंगोलिया और उत्तरी चीन के क्षेत्र में जा बसे। महान इतिहासकार के अभिलेख नामक चीनी इतिहास-ग्र ...

                                               

दोंगहु लोग

दोंगहु प्राचीन चीन से उत्तर-पूर्व में बसने वाली एक मंगोल ख़ानाबदोश क़बीलों की जाति थी जिनका वर्णन सातवी शताब्दी ईसापूर्व से मिलता है। माना जाता है कि उनकी झड़पें शिओंगनु लोगों से हुई जिन्होनें १५० ईसापूर्व में उन्हें नष्ट कर दिया। आगे जाकर दोंगहु ...

                                               

नबाती

नबाती या नबाताई प्राचीन काल में दक्षिणी जोर्डन, सीरिया और लेबनान और अरबी प्रायद्वीप के उत्तरी भाग में बसने वाली एक जाति थी। उन्होंने इस क्षेत्र में व्यापापर आधारित संस्कृति विकसित की, जिसके केंद्र रेगिस्तान में जगह-जगह पर स्थित नख़लिस्तान थे। रोम ...

                                               

पार्थिया

पार्थ या पार्थिया उत्तर-पूर्वी ईरान और उस के समीप के क्षेत्र का ऐतिहासिक नाम है। यहाँ कभी पार्थी लोग अपना साम्राज्य चलाया करते थे जो २४७ ईसापूर्व से २२४ ईसवी तक चला। इस साम्राज्य को अशकानी साम्राज्य के नाम से भी जाना जाता है। पार्थी लोग एक ईरानी ...

                                               

पुलिंद

पुलिंद भारतीय उपमहाद्वीप के मध्य भाग में स्थित विंध्य पर्वतों के क्षेत्र में बसने वाले एक प्राचीन क़बीले और जनजाति का नाम था। सन् २६९ ईसापूर्व से २३१ ईसापूर्व तक सम्राट अशोक द्वारा शिलाओं पर तराशे गए आदेशों में पुलिंदों का, उनकी पुलिंदनगर नामक रा ...

                                               

प्राचीन आनातोली लोग

प्राचीन आनातोली या प्राचीन आनातोलियाई सुदूर पश्चिमी एशिया के आनातोलिया क्षेत्र में बसने वाले लोग थे जो हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार की आनातोली भाषाएँ बोलते थे। आनातोली भाषा-परिवार पूरे हिन्द-यूरोपीय परिवार की एक शाखा था जो समय के साथ विलुप्त हो गया, ...

                                               

मसागती लोग

मसागती प्राचीनकाल में मध्य एशिया में बसने वाली ख़ानाबदोश क़बीलों की एक जनजाति थी। वे एक पूर्वी ईरानी भाषा बोला करते थे। उन्हें मुख्य-रूप से यूनानी इतिहासकार हेरोदोतस की लिखाईयों से जाना जाता है। सम्भव है कि वे स्किथी लोगों से सम्बन्धित हों।

                                               

युएझ़ी लोग

यूइची या युएझ़ी, युएज़ी या रुझ़ी प्राचीन काल में मध्य एशिया में बसने वाली एक जाति थी। माना जाता है कि यह एक हिन्द-यूरोपीय लोग थे जो शायद खस लोगों से सम्बंधित रहें हों। शुरू में यह तारिम द्रोणी के पूर्व के शुष्क घास के मैदानी स्तेपी इलाक़े के वासी ...

                                               

यूरेशियाई आवार लोग

यूरेशियाई आवार या प्राचीन आवार मध्य एशिया के स्तेपी मैदानों की एक जाति थी जो आरम्भ में तो शायद जू-जान ख़ागानत की तुर्की मूल की थी लेकिन बाद में मिश्रित यूरेशियाई जातियों का परिसंघ बन गई। आवार एक ख़ागान द्वारा शासित परिसंघ था जिसके शक्ति के केंद्र ...

                                               

शक

विश्वास और अविश्वास के बीच स्थिति के लिए संदेह देखें। शक प्राचीन मध्य एशिया में रहने वाली स्किथी लोगों की एक जनजाति या जनजातियों का समूह था। इनकी सही नस्ल की पहचान करना कठिन रहा है क्योंकि प्राचीन भारतीय, ईरानी, यूनानी और चीनी स्रोत इनका अलग-अलग ...

                                               

शियानबेई लोग

शियानबेई प्राचीनकाल में मंचूरिया, भीतरी मंगोलिया और पूर्वी मंगोलिया में बसने वाली एक मंगोल ख़ानाबदोश क़बीलों की जाति थी। माना जाता है कि ख़ान की उपाधि का इस्तेमाल सबसे पहली इन्ही लोगों में हुआ था। चीनी स्रोतों के अनुसार शियानबेई लोग दोंगहु लोगों ...

                                               

शियोंगनु लोग

शियोंगनु एक प्राचीन ख़ानाबदोश क़बीलों की जाती थी जो चीन के हान राजवंश के काल में हान साम्राज्य से उत्तर में रहती थी। इतिहास में उनका वर्णन सीमित है, इसलिए यह ठीक से ज्ञात नहीं है कि उनकी नस्ल क्या थी। अलग-अलग इतिहासकार उन्हें तुर्की, मंगोली, ईरान ...

                                               

सरमती लोग

सरमती लोग प्राचीनकाल में दक्षिणी रूस, युक्रेन और बाल्कन प्रदेश में बसने वाली एक जाति थी। सरमती ईरानी भाषाएँ बोलते थे और इस क्षेत्र में इनका प्रभाव पाँचवी शताब्दी ईसापूर्व से चौथी शताब्दी ईसवी तक रहा। यह स्किथी लोगों के पश्चिम में थे और उनसे सम्बं ...

                                               

सलजूक़ साम्राज्य

सलजूक़​ साम्राज्य या सेल्जूक साम्राज्य एक मध्यकालीन तुर्की साम्राज्य था जो सन् १०३७ से ११९४ ईसवी तक चला। यह एक बहुत बड़े क्षेत्पर विस्तृत था जो पूर्व में हिन्दू कुश पर्वतों से पश्चिम में अनातोलिया तक और उत्तर में मध्य एशिया से दक्षिण में फ़ारस की ...

                                               

स्किथी लोग

स्किथी या स्किथाई यूरेशिया के स्तेपी इलाक़े की एक प्राचीन ख़ानाबदोश जातियों के गुट का नाम था। ये प्राचीन ईरानी भाषाएँ बोलते थे और इनका भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग पर एक गहरा प्रभाव पड़ा है। इनके अति-प्राचीन इतिहास के बारे में ज़्यादा नहीं पता ...

                                               

हत्ती लोग

हत्ती या ख़त्ती एक प्राचीन आनातोली लोक-समुदाय था जिन्होने १८वीं सदी ईसापूर्व में उत्तर-मध्य आनातोलिया के ख़त्तूसा क्षेत्र में एक साम्राजय स्थापित किया। यह साम्राजय १४वीं शताब्दी ईपू के मध्य में सुप्पीलुलिउमा प्रथम के राजकाल में अपने चरम पर पहुँचा ...

                                               

हफथाली लोग

हफथाली मध्य एशिया में ५वीं और ६ठी सदी ईसवी में रहने वाली एक ख़ानाबदोश जाति थी। भारत में यह श्वेत हूण और तुरुष्क के नाम से भी जाने जाते थे। चीनी सूत्रों के हवाले से यह पहले चीन की महान दीवार से उत्तर में रहने वाले युएझ़ी लोग थे। यह किस जाति से सम् ...

                                               

नृवंशविज्ञान

नृवंशविज्ञान एक गुणात्मक अनुसंधान विधि है जिसका प्रयोग अक्सर सामाजिक विज्ञान में विशेष रूप से मानवशास्त्और समाजशास्त्र में किया जाता है। इसके अंतर्गत अक्सर मानव समाज/संस्कृतियों पर अनुभवजन्य आँकड़े जुटाने का कार्य किया जाता है। आँकड़ा संग्रह का क ...

                                               

अल्पसंख्यकवाद

अल्पसंख्यकवाद एक नवनिर्मित शब्द है जिसका तात्पर्य एक ऐसी राजनीतिक संरचना या प्रक्रिया से होता है जिसमें एक की आबादी का एक अल्पसंख्यक खंड जिससे देश के लिए निर्णय लेने में कुछ हद तक प्रधानता प्राप्त हो। यह बहुसंख्यकवाद के विपरीत हो सकता है, लेकिन य ...

                                               

पारम्परिक चिकित्सा

पारम्परिक चिकित्सा या लोक चिकित्सा कई मानव पीढ़ीयों द्वारा विकसित वे ज्ञान प्रणालियाँ होती हैं जिनके प्रयोग से आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से भिन्न तरीके से शारीरिक व मानसिक रोगों की पहचान, रोकथाम, निवारण और इलाज करा जाता रहा है। कई एशियाई और अफ़्रीक ...

                                               

संरचनावाद

structuralism संरचनावाद By Mr.Deepak Kumar,Suman,Pooja,Soniya,Rohit स्ट्रक्चरलिज्म मानव विज्ञान की एक ऐसी पद्धति है जो संकेत विज्ञान यानी संकेतों की एक प्रणाली और सहजता से परस्पर संबद्ध भागों की एक पद्धति के अनुसार तथ्यों का विश्लेषण करने का प्रय ...

                                               

पुरातत्वशास्त्र

पुरातत्वशास्त्र वह विज्ञान है जो पुरानी वस्तुओं का अध्ययन व विश्लेषण करके मानव-संस्कृति के विकासक्रम को समझने एवं उसकी व्याख्या करने का कार्य करता है। यह विज्ञान प्राचीन काल के अवशेषों और सामग्री के उत्खनन के विश्लेषण के आधापर अतीत के मानव-समाज क ...

                                               

लोक जीवविज्ञान

लोक जीवविज्ञान वैज्ञानिक रूप से विभिन्न मानव संस्कृतियों का अमानवीय जीवों के साथ के सम्बन्ध का अध्ययन करता है। इसमें अन्य जीवों के साथ करे गये मानव-व्यवहार, प्रयोगों, इत्यादि को देखा जाता है। मानवों का बायोटा और पर्यावरण के साथ ऐतिहासिक और वर्तमा ...

                                               

सामाजिक स्तरीकरण

सामाजिक स्तरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमे व्यक्तियों के समूहों को उनकी प्रतिष्ठा, संपत्ति और शक्ति की मात्रा के सापेक्ष पदानुक्रम में विभिन्न श्रेणियों में उच्च से निम्न रूप में स्तरीकृत किया जाता है। वर्ग स्‍तरीकरण वि‍श्‍वव्‍यापी है और उसके उत्‍पन् ...

                                               

रज़िया सुल्तान

रज़िया अल-दिन, शाही नाम" जलॉलात उद-दिन रज़ियॉ”, इतिहास में जिसे सामान्यतः" रज़िया सुल्तान” या" रज़िया सुल्ताना” के नाम से जाना जाता है, दिल्ली सल्तनत की सुल्तान थी। उसने 1236 ई० से 1240 ई० तक दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। रजिया पर्दा प्रथा त्यााग क ...

                                               

इडर के प्रताप सिंह

लेफ्टिनेंट जनरल प्रताप सिंह इडर राज्य के महाराजा तथा ब्रितानी भारतीय सेना के अधिकारी थे। १९०२ से १९११ तक वे अहमदनगर के महाराजा भी थे। प्रताप सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1845 को हुआ था। वह जोधपुर के तख्त सिंह 1819 -13 फरवरी 1873 जोधपुर के महाराजा के त ...

                                               

कुलोत्तुंग चोल तृतीय

कुलोत्तुंग चोल तृतीय चोल राज्य के वैभव के अपकर्षकाल का शासक था। इसने पहले तो पांड्यनरेश जटावर्मन कुलेश्वर को बुरी तरह पराजित किया था। बाद में उसने होयसल नरेश वल्लाल की सहायता से ही अपने राज्य पर अधिकार प्राप्त किया; किंतु उसे पांड्य नरेश की अधीनत ...

                                               

कुलोत्तुंग चोल द्वितीय

कुलोत्तुंग चोल द्वितीय कुलोत्तुंग का पौत्और विक्रम चोल का पुत्र। इसका शासनकाल राजनीतिक दृष्टि से पूर्णत: शांति का था। इसकी ऐतिहासिक ख्याति अन्य कारण से है। इसके पिता विक्रम चोल ने चिदंबरम् के सुविख्यात मंदिर के नवीनीकरण और विस्तार का कार्य आरंभ क ...

                                               

कुलोत्तुंग चोल प्रथम

कुलोत्तुंग चोल प्रथम दक्षिण भारत के चोल राज्य का प्रख्यात शासक था। यह वेंगी के चालुक्यनरेश राजराज नरेंद्र का पुत्र था और इसका नाम राजेंद्र था। इसका विवाह चोलवंश की राजकुमारी मधुरांतका से हुआ था जो वीरराजेंद्र की भतीजी थी। यह वेंगी राज्य का वैध अध ...

                                               

गांगेयदेव

गांगेयदेव कल्चुरि राजवंश का प्रमुख शासक था। वह सन् १०१५ के लगभग कलचुरि चेदि राज्य के सिंहासन पर बैठा। उसके पिता कोकल्लदेव द्वितीय और दादा युवराजदेव द्वितीय के समय राज्य की स्थिति कुछ कमजोर हो चली थी। गांगेयदेव ने इस स्थिति को केवल सँभाला ही नहीं, ...