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कोशविज्ञान

कोशविज्ञान भाषाविज्ञान की वह शाखा है जिसमें शब्दों का अध्ययन किया जाता है। इसमें शब्दों के अर्थ, उनका चिन्हों के रूप से प्रयोग और उनके अर्थों का ज्ञानमीमांसासे सम्बन्ध भी इसमें समझा जाता है।

                                               

क्रिया (व्याकरण)

जिन शब्दों से किसी कार्य का करना या होना व्यक्त हो उन्हें क्रिया कहते हैं। जैसे- रोया, खा रहा, जायेगा आदि। उदाहरणस्वरूप अगर एक वाक्य मैंने खाना खाया देखा जाये तो इसमें क्रया खाया शब्द है। इसका नाम मोहन है में क्रिया है शब्द है। आपको वहाँ जाना था ...

                                               

खमेर लिपि

खमेर लिपि कम्बोडिया की खमेर भाषा को लिखने में प्रयुक्त होने वाली लिपि है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि खमेर लिपि का विकास भारत की पल्लव लिपि से हुआ। खमेर लिपि विश्व की सबसे वृहद वर्णमाला है गिनीज बुक ऑफ वर्ड रिकॉर्ड्स, 1995. इसमें ३३ ब्यंजन, २३ स् ...

                                               

गुजराती लिपि

गुजराती लिपि, नागरी लिपि से व्युत्पन्न हुई है। गुजराती भाषा में लिखने के लिए देवनागरी लिपि को परिवर्तित करके गुजराती लिपि बनायी गयी थी। गुजराती भाषा और लिपि तीन अलग-अलग चरणों में विकसित हुईं - 10 वीं से 15 वीं शताब्दी, 15 वीं से 17 वीं शताब्दी और ...

                                               

गुप्त लिपि

गुप्त लिपि, जिसे गुप्त ब्राह्मी लिपि भी कहते हैं, भारत में गुप्त साम्राज्य के काल में संस्कृत लिखने के लिए प्रयोग की जाती थी। गुप्त लिपि ब्राह्मी लिपि से बनी थी, और इसने आगे चलकर देवनागरी, गुरुमुखी, तिब्बतन और बंगाली-असमिया लिपियों को जन्म दिया।

                                               

गुरमुखी लिपि

गुरमुखी लिपि एक लिपि है जिसमें पंजाबी भाषा लिखी जाती है। गुरुमुखी का अर्थ है गुरुओं के मुख से निकली हुई। अवश्य ही यह शब्द ‘वाणी’ का द्योतक रहा होगा, क्योंकि मुख से लिपि का कोई संबंध नहीं है। किंतु वाणी से चलकर उस वाणी कि अक्षरों के लिए यह नाम रूढ ...

                                               

ग्लोस

ग्लोस या ग्लॉस किसी लेख में किसी शब्द का अर्थ समझाने के लिए करी गई छोटी सी टिप्पणी को कहते हैं। यह अक्सर वाक्य के साथ पृष्ठ के किनारों पर या छोटे अकार के अक्षरों में शब्द के ऊपर, नीचे या साथ में लिखा होता है। ग्लोस लिखाई की भाषा में या पढ़ने वाले ...

                                               

चित्रलिपि

चित्रलिपि ऐसी लिपि को कहा जाता है जिसमें ध्वनि प्रकट करने वाली अक्षरमाला की बजाए अर्थ प्रकट करने वाले भावचित्र होते हैं। यह भावचित्र ऐसे चित्रालेख चिह्न होते हैं जो कोई विचार या अवधारणा व्यक्त करें। कुछ भावचित्र ऐसे होते हैं कि वह किसी चीज़ को ऐस ...

                                               

तमिल लिपि

तमिल लिपि एक लिपि है जिसमें तमिल भाषा लिखी जाती है। इसके अलावा सौराष्ट्र, बडगा, इरुला और पनिया आदि अल्पसंख्यक भाषाएँ भी तमिल में लिखी जातीं हैं। यह लिपि भारत और श्रीलंका में तमिल भाषा को लिखने में प्रयोग किया जाता था। यह ग्रंथ लिपि और ब्राह्मी के ...

                                               

तिब्बती लिपि

तिब्बती लिपि भारतीय मूल की ब्राह्मी परिवार की लिपि है। इसका उपयोग तिब्बती भाषा, लद्दाखी भाषा तथा कभी-कभी बलती भाषा को लिखने के लिये किया जाता है। इसकी रचना ७वीं शताब्दी में तिब्बत के धर्मराजा स्रोंचन गम्पो के मंत्री थोन्मि सम्भोट ने की थी। इसलिये ...

                                               

तुलनात्मक भाषाविज्ञान

तुलनात्मक भाषाविज्ञान, ऐतिहासिक भाषाविज्ञान की एक शाखा है जिसमें भाषाओं की तुलना की जाती है ताकि उनके ऐतिहासिक सम्बन्धों को पुनः स्थापित किया जा सके।

                                               

तेलुगू लिपि

तेलुगु लिपि, ब्राह्मी से उत्पन्न एक भारतीय लिपि है जो तेलुगु भाषा लिखने के लिये प्रयुक्त होती है। अक्षरों के रूप और संयुक्ताक्षर में ये अपने पश्चिमी पड़ोसी कन्नड़ लिपि से बहुत मेल खाती है।

                                               

थाई लिपि

थाई लिपि, थाई भाषा के अलावा थाईलैण्ड की अन्य अल्पसंख्यक भाषाएँ लिखने के लिये प्रयुक्त होती है। थाई लिपि में ४४ व्यंजन थाई: พยัญชนะ, बयञचन और १५ स्वर थाई: สระ, सर हैं। थाई स्वरों के कम से कम २८ रूप होते हैं तथा चार टोन-मार्क थाई: วรรณยุกต์ या วรรณ ...

                                               

द्वित्व

भाषाविज्ञान में जब किसी शब्द के मूल या स्टेम को दोहराया जाता है तो इसे द्वित्व कहते हैं। मूल की पुनरावृत्ति हूबहू हो सकती है या मामूली परिवर्तन के साथ। साथ-साथ, कहाँ-कहाँ, धीरे-धीरे, खाना-वाना, चलते-चलते आदि हिन्दी में प्रयुक्त कुछ द्वित्व हैं। व ...

                                               

नागरी लिपि

नागरी लिपि से ही देवनागरी, नंदिनागरी आदि लिपियों का विकास हुआ है। इसका पहले प्राकृत और संस्कृत भाषा को लिखने में उपयोग किया जाता था। कई बार नागरी लिपि का अर्थ देवनागरी लिपि भी लगाया जाता है। नागरी लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। कुछ अनुसन् ...

                                               

न्यायालयिक भाषाविज्ञान

न्यायालयिक भाषाविज्ञान या न्याय-भाषाविज्ञान, अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की एक शाखा है जो भाषावैज्ञानिक ज्ञान, विधियों तथा अन्तर्दृष्टि का उपयोग करके न्यालयों में अपराध-अन्वेषण में सहायक होता है। न्यायालयों में काम करने वाले भाषावैज्ञानिक निम्नलिखित ...

                                               

पदविज्ञान

भाषाविज्ञान में रूपिम की संरचनात्मक इकाई के आधापर शब्द-रूप के अध्ययन को पदविज्ञान या रूपविज्ञान कहते हैं। दूसरे शब्दों में, शब्द को पद में बदलने की प्रक्रिया के अध्ययन को रूपविज्ञान कहा जाता है। रूपविज्ञान, भाषाविज्ञान का एक प्रमुख अंग है। इसके अ ...

                                               

पाठसंग्रह

भाषाविज्ञान में बड़े और संरचित पाठ के समुच्चय को पाठसंग्रह या कॉर्पस कहते हैं। पाठसंग्रह के बहुत से उपयोग हैं। जैसे किसी भाषा में प्रयुक्त शब्दों की बारंबारता निकालना, किसी भाषा में प्रयुक्त सर्वाधिक १००० शब्दों की जानकारी निकालना, कोई शब्द किस-क ...

                                               

पुरालेखविद्या

प्राचीन लेखों को पढ़ना और उनके आधापर इतिहास का पुनर्गठन करना पुरालेखविद्या कहलाता है। पुरालेखविद्या के अन्तर्गत निम्नलिखित बातें आती हैं- 1. प्राचीन लेखों की लिपि का अध्ययन और उसके आधापर प्राचीन तथ्यों को प्रकाशित करना। 2. प्राचीन लेखों की भाषा क ...

                                               

प्रायोगिक भाषाविज्ञान

प्रायोगिक भाषाविज्ञान या संकेतप्रयोगविज्ञान, भाषाविज्ञान का एक उपक्षेत्र है जिसमें इस बात का अध्यन किया जाता है कि प्रसंग के अनुसार अर्थ कैसे बदलते हैं।

                                               

प्रोक्‍ति विश्‍लेषण

किसी लिखित, मौखिक या सांकेतिक भाषा के प्रयोग के विश्लेषण के विभिन्न तरीकों को प्रोक्‍ति विश्‍लेषण या discourse studies) कहते हैं।

                                               

प्रोग्राम अनुवादक

कम्प्यूटर मात्र बाइनरी संकेत अर्थात 0 और 1 को ही समझता है। मशीनी भाषा के अतिरिक्त अन्य सभी प्रोग्रामिंग भाषाओ में 0 और 1 के अतिरिक्त अन्य अंक व अक्षरो का प्रयोग होता है। अनुवादक इन अंको व अक्षरों को बाइनरी संकेतों में अनुवादित कर देता है ताकि कम् ...

                                               

बंगाली लिपि

बांग्ला लिपि पूर्वी नागरी लिपि का एक परिमार्जित रूप है जिसे बांग्ला भाषा, असमिया या विष्णुप्रिया मणिपुरी लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है। पूर्वी नागरी लिपि का संबंध ब्राम्ही लिपि के साथ है। आधुनिक बांग्ला लिपि को चार्ल्स विल्किंस द्वारा 1778 में ...

                                               

बर्मी लिपि

म्यांमार लिपि या बर्मी लिपि, बर्मी भाषा लिखने के लिये प्रयुक्त होती है। यह ब्राह्मी परिवार की लिपि है। इसके अक्षर गोल होते हैं जो ताड़पत्पर लेखन में सुविधा प्रदान करते थे क्योंकि सीधी रेखाएँ लिखने से पत्तों के फटने का डर रहता है।

                                               

बाली लिपि

बाली लिपि इण्डोनेशिया के बाली द्वीप की आस्ट्रोनेशियन बाली भाषा, पुरानी बाली भाषा, तथा संस्कृत लिखने के लिये प्रयुक्त होती है। कभी-कभी यह समीप के द्वीप लोम्बोक की शशक भाषा लिखने के लिये भी प्रयुक्त होती है। बाली में इसे अक्षर बाली या हनचरक कहते है ...

                                               

भाषाई नृविज्ञान

भाषायी मानवविज्ञान मानवशास्त्र की एक महत्वपूर्ण शाखा है। इसमें वैसी भाषाओं का अध्ययन किया जाता है जो अभी भी अलिखित हैं। ऐसी भाषा को समझने के लिए शब्दकोश व व्याकरण का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। शोधकर्ता को भाषा का अध्ययन करके शब्दकोश व व्याकरण त ...

                                               

भाषाविज्ञान

भाषाविज्ञान भाषा के अध्ययन की वह शाखा है जिसमें भाषा की उत्पत्ति, स्वरूप, विकास आदि का वैज्ञानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया जाता है। भाषाविज्ञान, भाषा के स्वरूप, अर्थ और सन्दर्भ का विश्लेषण करता है। भाषा के दस्तावेजीकरण और विवेचन का सबसे प्राच ...

                                               

भाषाशास्त्रियों की सूची

शैक्षिक संदर्भों में उन लोगों को भाषावैज्ञानिक कहा जाता है जो प्राकृतिक भाषा का अध्ययन करते हैं। भाषावैज्ञानिक, बहुभाषी, वैयाकरण हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है।

                                               

मनोभाषाविज्ञान

मनोभाषाविज्ञान भाषा को सीखने, प्रयोग करने, समझने एवं अभिव्यक्त करने से सम्बन्धित मनोवैज्ञानिक एवं तंत्रिका-जैविक कारकों का अध्ययन करता है।

                                               

मलयालम लिपि

मलयालम लिपि ब्राह्मी लिपि से व्युत्पन्न लिपि है। इसका उपयोग मलयालम भाषा सहित पनिय, बेट्ट कुरुम्ब, रवुला और कभी-कभी कोंकणी लिखने में होता है।

                                               

मात्रात्मक भाषाविज्ञान

मात्रात्मक भाषाविज्ञान), भाषाविज्ञान का एक उपक्षेत्र है। इसमें सांख्यिकीय विधियों का उपयोग करते हुए भाषाओं का विश्लेषण किया जाता है। इसका उपयोग भाषा अधिगम, भाषा परिवर्तन, तथा प्राकृतिक भाषाओं की संरचना के अध्ययन में किया जाता है। मात्रात्मक भाषाव ...

                                               

रंजना लिपि

रंजना लिपि ११वीं शती में ब्राह्मी से व्युत्पन्न एक लिपि है। यह मुख्यतः नेपाल भाषा लिखने के लिए प्रयुक्त होती है किन्तु भारत, तिब्बत, चीन, मंगोलिया और जापान के मठों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। यह प्रायः बाएँ से दाएँ लिखी जाती है किन्तु कूटाक् ...

                                               

रूप

रूप वाक्य में प्रयुक्त शब्द को कहते हैं। इसे पद भी कहा जाता है। शब्दों के दो रूप है। एक तो शुद्ध रूप है या मूल रूप है जो कोश में मिलता है और दूसरा वह रूप है जो किसी प्रकार के संबंध-सूत्र से युक्त होता है। यह दूसरा, वाक्य में प्रयोग के योग्य रूप ह ...

                                               

रूपिम

रूपिम भाषा उच्चार की लघुत्तम अर्थवान इकाई है। रूपिम स्वनिमों का ऐसा न्यूनतम अनुक्रम है जो व्याकरणिक दृष्टि से सार्थक होता है। स्वनिम के बाद रूपिम भाषा का महत्वपूर्ण तत्व अंग है। रूपिम को रूपग्राम और पदग्राम भी कहते हैं। जिस प्रकार स्वन-प्रक्रिया ...

                                               

लहजा (भाषाविज्ञान)

भाषाविज्ञान में लहजा बोलचाल में उच्चारण के उस तरीक़े को कहते हैं जिसका किसी व्यक्ति, स्थान, समुदाय या देश से विशेष सम्बन्ध हो। उदहारण के तौपर कुछ दक्षिण-पूर्वी हिंदी क्षेत्र के ग्रामीण स्थानों में लोग श की जगह पर स बोलते हैं, जिसकी वजह से वह शहर ...

                                               

असमिया लिपि

असमिया लिपि पूर्वी नागरी का एक रूप है जो असमिया के साथ-साथ बांग्ला और विष्णुपुरिया मणिपुरी को लिखने के लिये प्रयोग की जाती है। केवल तीन वर्णों को छोड़कर शेष सभी वर्ण बांग्ला में भी ज्यों-के-त्यों प्रयुक्त होते हैं। ये तीन वर्ण हैं- ৰ, ৱ और ক্ষ ।

                                               

लैंग और पैरोल

लैंग और पैरोल फर्दिनांद सस्यूर द्वारा "कोर्स इन जनरल लिंग्विस्टिक्स" पुस्तक में प्रतिष्ठित भाषावैज्ञानिक पद हैं।

                                               

वर्ण आवृत्ति

किसी भाषा के किसी पाठ में सभी वर्ण समान संख्या में नहीं होते बल्कि कुछ वर्णों की संख्या अधिक और कुछ की कम होती है। यह भाषा का एक विशिष्ट गुण है। इस तथ्य का कूटलेखन एवं आवृत्ति-विश्लेषण में उपयोग किया जाता है।

                                               

वर्त्स्य कटक

मानवों और कुछ अन्य प्राणियों के मुँहों में वर्त्स्य कटक या दंतउलूखल कटक जबड़ों के सामने वाली बाढ़ होती है जो ऊपर के दांतों के ऊपर व पीछे तथा नीचे के दांतों के नीचे व पीछे होती है। इसमें दाँत समूहने वाले गढढे होते हैं। वर्त्स्य कटकों को जिह्वा से ...

                                               

वाग्बाधा

वाक बाधा किसी मनुष्य की ऐसी स्थिति को कहते हैं जिसमें उसे आसानी से साधारण तरह से बातचीत करने में कठिनाई पेश आए। इसमें हकलाना, तुतलाना और अन्य प्रकार की वाकबाधाएँ शामिल हैं। ध्यान दें कि महज़ किसी के बोलने के अलग लहजे को वाकबाधा नहीं कहा जा सकता। ...

                                               

वासीनाम

वासीनाम किसी स्थान विशेष में रहने वाले निवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाला नाम है। उदाहरण के लिए, भारत के पंजाब राज्य के निवासियों को पंजाबी तथा बिहार के निवासियों को बिहारी कहा जाता है। जरूरी नहीं की हमेशा ही यह नाम उस स्थान विशेष के नाम पर आधार ...

                                               

विशिष्टीकरण (भाषाविज्ञान)

भाषाविज्ञान के सन्दर्भ में, पॉल हॉपर ने विशिष्टीकरण की परिभाषा दी है। इस सन्दर्भ में विशिष्टीकरण उन पाँच सिद्धान्तों एक है जो वैयाकरणीकरण की सूचना देते हैं। वैयाकरणीकरण होने की सूचना देने वाले अन्य चार सिद्धान्त ये हैं- स्तरीकरण, अपसार, निरति, तथ ...

                                               

विसर्ग

विसर्ग महाप्राण सूचक एक स्वर है। ब्राह्मी से उत्पन्न अधिकांश लिपियों में इसके लिये संकेत हैं। उदाहरण के लिये, रामः, प्रातः, अतः, सम्भवतः, आदि में अन्त में विसर्ग आया है। जैसे आगे बताया गया है, विसर्ग यह अपने आप में कोई अलग वर्ण नहीं है; वह केवल स ...

                                               

व्यतिरेकी भाषाविज्ञान

व्यतिरेकी भाषाविज्ञान भाषा-शिक्षण का व्यवहारिक तरीका है जो किसी भाषा-युग्म के समानताओं एवं अन्तरों का वर्णन करके भाषा को सुगम बनाने पर जोर देता है। इसीलिये इसे कभी-कभी अंतरात्मक भाषाविज्ञान भी कहा जाता है।

                                               

व्याख्यान शास्त्र

व्याख्यान शास्त्र उस कला को कहते हैं जिसमें लेखकों और वक्ताओं की जानकारी प्रदान करने, भावनाएँ व्यक्त करने और श्रोताओं को भिन्न उद्देश्यों के लिए प्रेरित करने की क्षमता और उसे सुधारने की विधियों का अध्ययन किया जाता है।

                                               

शब्द

एक या एक से अधिक वर्णों से बनी हुई स्वतंत्र सार्थक ध्वनि ही शब्द कहलाती है। जैसे- एक वर्ण से निर्मित शब्द- न व अनेक वर्णों से निर्मित शब्द-कुत्ता, शेर, कमल, नयन, प्रासाद, सर्वव्यापी, परमात्मा आदि भारतीय संस्कृति में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। एक ...

                                               

शब्दांश स्थानांतरण

भाषाविज्ञान में शब्दांश स्थानांतरण उस प्रक्रिया को कहते हैं जिससे किसी भी शब्द के शब्दांश या वर्ण अपना शब्द में स्थान बदल लेते हैं। अक्सर जब शब्द एक भाषा से दूसरी भाषा में जाते हैं तो शब्दांश स्थानांतरण देखा जाता है। उदाहरण के लिए संस्कृत का शब्द ...

                                               

शारदा लिपि

शारदा लिपि का उपयोग भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी-पश्चिमी भाग में सीमित था। यह लिपि पश्चिमी ब्राह्मी लिपि से नौवीं शताब्दी में उत्पन्न हुई। आज इसका उपयोग बहुत ही कम होता है । हिमाचल प्रदेश में यह लिपि तेरहवीं शती तक प्रयोग में आती थी और फल-फूल रही ...

                                               

शैलीविज्ञान

शैलीविज्ञान शब्द दो शब्दो से मिलकर बना है- शैली और विज्ञान जिसका शाब्दिक अर्थ है शैली का विज्ञान अर्थात‌‌‌‌ जिस विज्ञान में शैली का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित रूप सें अध्ययन किया जाए वह शैलीविज्ञान है। ’शैली’ शब्द अंग्रेजी के स्टाइल शब्द का हिन्दी र ...

                                               

श्वा

भाषाविज्ञान और स्वानिकी में श्वा मध्य-केंद्रीय स्वर वर्ण को कहते हैं। इस वर्ण को देवनागरी में अ लिखा जाता है और अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में इसे ə के चिन्ह से दर्शाया जाता है।