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ईश्वर

परमेश्वर वह सर्वोच्च परालौकिक शक्ति है जिसे इस संसार का सृष्टा और शासक माना जाता है। हिन्दी में परमेश्वर को भगवान, परमात्मा या परमेश्वर भी कहते हैं। अधिकतर धर्मों में परमेश्वर की परिकल्पना ब्रह्माण्ड की संरचना से जुड़ी हुई है। संस्कृत की ईश् धातु ...

                                               

ईसिस

ईसिस मिस्र के धर्म में ओसिरिस की पत्नी और होरस कि माता मानी जाती है। वह जादू, कपट, शक्ति और ज्ञान की प्रसिद्ध मिस्री देवी। केब और नुत की कन्या, शक्तिमान देव ओसिरिस की भगिनीजाया और देव होरस की माता। गाय उसकी पुनीत पशु थी और अपने मस्तक पर वह गोश्रृ ...

                                               

उड़नेवाला स्पघेटी दानव

उड़नेवाला स्पघेटी दानव पास्ताफ़ारी धर्म का ईश्वर है। इसे अमेरिका के सरकारी विद्यालयों में इंटेलिजेंट डिज़ाइन और क्रिएशनिस्म पढ़ाने का विरोध करने के लिए सन् 2005 में बनाया गया था। इसके माध्यम से ये दर्शाया जाता है कि दर्शनशास्त्रिय सबूत का बोझ उस ...

                                               

उपासना

उपासना परमात्मा की प्राप्ति का साधनविशेष। उपासना का शब्दार्थ है - अपने इष्टदेवता की समीप स्थिति या बैठना । आचार्य शंकर की व्याख्या के अनुसार उपास्य वस्तु को शास्त्रोक्त विधि से बुद्धि का विषय बनाकर, उसके समीप पहुँचकर, तैलधारा के सदृश समानवृत्तियो ...

                                               

एशियाटिक सोसायटी

एशियाटिक सोसायटी की स्थापना १५ जनवरी सन् १७८४ को विलियम जोंस ने कोलकाता स्थित फोर्ट विलियम में की थी। इसका उद्देश्य प्राच्य-अध्ययन का बढ़ावा देना था। के अलावा एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल ने भारतीय इतिहास को प्रभावित किया है

                                               

ओसिरिस

ओसिरिस मिस्र के धर्म का एक प्रमुख देवता था। इसकी हत्या इसके भ्राता सेत ने की। इसलिये इसे मृत्यु और पुनर्जन्म का देवता माना जाता था। ईसिस मिस्र के धर्म में ओसिरिस की पत्नी और होरस कि माता मानी जाती है।

                                               

कुन्फ़्यूशियसी धर्म

कनफ़ूशीवाद या कुन्फ़्यूशियसी धर्म ईसा पूर्व 5वीं शताब्दी में शुरू हुआ चीन का एक प्राचीन दर्शन और विचारधारा है। इसके प्रवर्तक थे चीनी दार्शनिक कुन्फ़्यूशियस, जिनका जन्म 551 ई.पू. माना जाता है। ये धार्मिक प्रणाली कभी चीनी साम्राज्य का राजधर्म हुआ क ...

                                               

कृष्ण जाम्बवन्त युद्ध

एक बार सत्राजित ने भगवान सूर्य की उपासना करके उनसे स्यमन्तक नाम की मणि प्राप्त की। उस मणि का प्रकाश भगवान सूर्य के समान ही था। एक दिन भगवान कृष्ण जब चौसर खेल रहे थे तभी सत्राजित उस मणि को पहन कर उनके पास आया। दूर से उसे आते देख कर यादवों ने कहा, ...

                                               

कैथोलिक कलीसिया

कैथोलिक कलीसिया या रोमन कैथोलिक कलीसिया ईसाई धर्म में वैश्विक ईसाई कलीसिया की एक मुख्य शाखा, तथा सबसे बड़ी कलीसिया है, जिसके अनुयायी रोम के वैटिकन नगर के पोप को अपना धर्माध्यक्ष मानते हैं। ईसाई धर्म की दूसरी मुख्य शाखा प्रोटेस्टैंट कहलाती है और उ ...

                                               

ख़ोजा

खोजा मुसलमानों का एक समाज जो मुख्यत: पंजाब और महाराष्ट्र के निवासी हैं। खोजा हिंदू ठाकुर का समानार्थी समझा जाता है। ये लोग मिस्र के इस्माइली पंथ के अनुयायी शिया हैं। ये लोग मूलत: सिंध निवासी लोहाड़ा जाति के हिंदू हैं जिन्हें 12वीं शती ई. में नूर ...

                                               

गंगावतरण

युधिष्ठिर ने लोमश ऋषि से पूछा, "हे मुनिवर! राजा भगीरथ गंगा को किस प्रकार पृथ्वी पर ले आये? कृपया इस प्रसंग को भी सुनायें।" लोमश ऋषि ने कहा, "धर्मराज! इक्ष्वाकु वंश में सगर नामक एक बहुत ही प्रतापी राजा हुये। उनके वैदर्भी और शैव्या नामक दो रानियाँ ...

                                               

गति (धर्म)

नरक, तिर्यंच, मानुष और देव लोक में बँटे संसार के व्यवस्थापक आठ कर्म हैं। अनंत ज्ञान, दर्शन, सुख और वीर्य के पुंजीभूत इस आत्मा की श्रद्धा, ज्ञान, आदि का जिस प्रकार ज्ञानावरणी, दर्शनावरणी कर्म विरूप करते हैं, उसी प्रकार छठा कर्म विविध शरीरों का निर ...

                                               

गन्धर्व

गन्धर्व स्वर्ग में रहने वाले देवताओं की सबसे निम्न प्रजाति है। यह भारतीय संगीतज्ञ के रूप में जाने जाते हैं, गंधर्वराज पुष्पदंत इंद्र की सभा के गायक थे। मुख्यत: गन्धर्व का हिन्दू धर्म तथा बौद्ध धर्म से संबंध है। जैन धर्म में गन्धर्व शब्द का उपयोग ...

                                               

गुरू(सिख धर्म)

गुरू एक सर्व उतम शक्ति है जो हर जीव आत्मा में ज्ञान भरती है। गुरू, संस्कृत शब्द है जिस का अर्थ है अँधेरे से रौशनी की तरफ लेकर जाने वाला। सिख धर्म में गुरू अक्षर "शब्द" के लिए इस्तेमाल हुआ है। "शब्द" निरंकार दवारा प्रगट किया हुआ, उसका हुक्म/शक्ति ...

                                               

चीर हरण

खाण्डव वन के दहन के समय अर्जुन ने मय दानव को अभय दान दे दिया था। इससे कृतज्ञ हो कर मय दानव ने अर्जुन से कहा, "हे कुन्तीनन्दन! आपने मेरे प्राणों की रक्षा की है अतः आप आज्ञा दें, मैं आपकी क्या सेवा करूँ?" अर्जुन ने उत्तर दिया, "मैं किसी बदले की भाव ...

                                               

च्यवन

भृगु मुनि के पुत्र च्यवन महान तपस्वी थे। एक बार वे तप करने बैठे तो तप करते-करते उन्हें हजारों वर्ष व्यतीत हो गये। यहाँ तक कि उनके शरीर में दीमक-मिट्टी चढ़ गई और लता-पत्तों ने उनके शरीर को ढँक लिया। उन्हीं दिनों राजा शर्याति अपनी चार हजार रानियों ...

                                               

छप्पन भोग

रस 6 प्रकार के होते है। तिक्त अम्ल कषाय कटु लवण मधुर इन छ: रसों के मेल से रसोइया कितने वयंजन बना सकता है? 6 C 1 + 6 C 2 + 6 C 3 + 6 C 4 + 6 C 5 + 6 C 6 = 63 {\displaystyle ^{6}C_{1}+^{6}C_{2}+^{6}C_{3}+^{6}C_{4}+^{6}C_{5}+^{6}C_{6}=63} अब एक रस स ...

                                               

छिन्नमस्ता भगवती

छिन्नमस्ता भगवती सप्तरी जिला के राजविराज से दक्षिण सीमावर्ती क्षेत्र छिन्नमस्ता के सखडा गाम में स्थित है। छिन्नमस्ता भगवती मनोकामना पूर्ण कनेवाली शक्तिपीठो में से एक पीठ माना जाता है और नेपाल एबं भारत के बिहार के जनता के लिये बड़ा आस्था का केन्द् ...

                                               

जमशोद नौरोज़

जमशोद नौरोज़ पारसी धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है। यह पश्चिमी एशिया, मध्य एशिया, काकेशस, काला सागर बेसिन और बाल्कन में ३००० से अधिक वर्षों के लिए मनाया जाता है। यह ईरानी कैलेंडर में पहले महीने के पहले दिन को चिह्नित करता ...

                                               

जय-विजय

एक बार सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार ये चारों सनकादिक ऋषि कहलाते हैं और देवताओं के पूर्वज माने जाते हैं सम्पूर्ण लोकों से विरक्त होकर चित्त की शान्ति के लिये भगवान विष्णु के दर्शन करने हेतु उनके बैकुण्ठ लोक में गये। बैकुण्ठ के द्वापर जय और विजय ...

                                               

जरथुस्त्रनो

जरथुस्त्रनो पारसी धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है। ज़रथोस्त नो डेसो, पारसी धर्म में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह पैगंबर जोरोस्टर की पुण्यतिथि है। यह 10 वें महीने डीएई के 11 वें दिन खोरशेद मनाया जाता है। कैलेंडर में, ज़राथोस्ट ...

                                               

जरासंघ वध

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया तथा अपने चारों भाइयों को दिग्विजय करने की आज्ञा दी। चारों भाइयों ने चारों दिशा में जाकर समस्त नरपतियों पर विजय प्राप्त की किन्तु जरासंघ को न जीत सके। इस पर श्रीकृष्ण, अर्जुन तथा भीमसेन ब्राह्मण का रूप ...

                                               

ताओ-ते-चिंग

ताओ ते चिंग या दाओ दे जिंग प्रसिद्ध चीनी दार्शनिक लाओ त्सू द्वारा रचित एक धर्म ग्रन्थ है जो ताओ धर्म का मुख्य ग्रन्थ भी माना जाता है। इसका नाम इसके दो विभागों के पहले शब्द को लेकर बनाया गया है - दाओ और दे - जिनके अंत में जिंग लगाया जाता है। पारंप ...

                                               

तारण तरण महासभा

तातरण महासभा एक मंंडल है।इसका मुख्यालय निसईजी मल्हारगढ़ और सागर है।यह मंडल ही तारण पंथ में पदवी देता है। अध्यक्ष-:श्रीमंत सेठ अशोक कुमार जैन काकाजी

                                               

तीर्थ

तीर्थ धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व वाले स्थानों को कहते हैं जहाँ जाने के लिए लोग लम्बी और अकसर कष्टदायक यात्राएँ करते हैं। इन यात्राओं को तीर्थयात्रा कहते हैं। हिन्दू धर्म के तीर्थ प्रायः देवताओं के निवास-स्थान होते हैं। मुसलमानों के लिए मक्का औ ...

                                               

तीर्थस्थान

तीर्थस्थान एक ऐसा स्थल है जहां लोग प्रेरणा और सन्तोष के लिये जाते हैं। साधारणतः यह नदी के घाट पर अथवा पहाडी पर होता है जहां एक और लोक प्रस्थान करने की कल्पना की जा सकती है।

                                               

तुरतुरिया

छत्तीसगढ़ अपनी पुरातात्विक सम्पदा के कारण आज भारत ही नहीं विश्व में भी अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। यहां के 15000गांवो में से 1000ग्रामो में कही न कही प्राचीन इतिहास के साक्ष्य आज भी विध्यमान है जो कि छत्तीसगढ के लिये एक गौरव की बात है। इसी प्र ...

                                               

थियोसोफी

थियोसोफी १९वीं शताब्दी के अन्तिम काल में संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थापित क्या गया एक धर्म है। इसकी स्थापना मुख्यतः रूसी प्रवासी हेलेना ब्लावट्स्की द्वारा की गयी थी। इसके सिद्धान्त मुख्यतः उनके ही लेखन पर आधारित हैं। यह धर्म निओप्लेटोनिज्म आदि य ...

                                               

दक्ष प्रजापति

दक्ष प्रजापति को अन्य प्रजापतियों के समान ब्रह्मा जी ने अपने मानस पुत्र के रूप में उत्पन्न किया था। दक्ष प्रजापति का विवाह स्वायम्भुव मनु की तृतीय कन्या प्रसूति के साथ हुआ था। दक्ष राजाओं के देवता थे।

                                               

दान

दान का शाब्दिक अर्थ है - देने की क्रिया। सभी धर्मों में सुपात्र को दान देना परम् कर्तव्य माना गया है। हिन्दू धर्म में दान की बहुत महिमा बतायी गयी है। आधुनिक सन्दर्भों में दान का अर्थ किसी जरूरतमन्द को सहायता के रूप में कुछ देना है।

                                               

दिति का गर्भधारण

पुराणों के अनुसार एक बार मरीचि नन्दन कश्यप जी ने भगवान को प्रसन्न करने के लिये खीर की आहुति दी। आराधना समाप्त करके वह सन्ध्या काल के समय अग्निशाला में ध्यानस्थ होकर बैठ गये। उसी समय दक्ष प्रजापति की पुत्री दिति कामातुर होकर पुत्र प्राप्ति की लालस ...

                                               

धर्म और गर्भपात

गर्भपात के विषय में कोई भी बौद्ध धर्म कुछ भी नहीं कहता। पारंपरिक स्रोत, जैसे बौद्ध मठ का संहिता के अनुसार जीवन की शुरूआत गर्भधारण से होती है जो गर्भपात करने पर वह समाप्त हो जाता है जिसे जीवन का जानबूझकर विनाश कहा जा सकता है और इससे बचना चाहिए। अध ...

                                               

धर्म और भूगोल

विश्व के सभी धर्मों की जन्मभुमि नदी टाइग्रीस व गंगा के मध्य का क्षेत्र ही है। कुल दो किस्म के धर्म पैदा हुये। पहला अब्राहमिक एव दूसरा हिन्दू। अब्राहमिक धर्म के अन्तर्गत मूलतः तीन धर्म आते हैं यहूदी, इसाई एवं मुस्लिम। तीनों के धार्मिक सिद्धन्तों म ...

                                               

धर्म के लक्षण

मनु ने धर्म के दस लक्षण गिनाए हैं: धृति: क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।। मनुस्‍मृति ६.९१ अर्थ – धृति धैर्य, क्षमा अपना अपकार करने वाले का भी उपकार करना, दम हमेशा संयम से धर्म में लगे रहना, अस्ते ...

                                               

धर्म दर्शन

धर्म दर्शन यह एक प्रकार का दर्शन है । इसका उदय भारतीय प्रायद्वीप में हुआ। धर्म यह जीवन जीने की पद्धति है । इस दर्शन की खोज प्राचीन ऋषियों ने की । कालांतर में इसका महात्मा गौतम बुध्द ने इसे पुनर्जीवित किया। धर्म विश्व की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत ...

                                               

धर्म महामात्र

प्राचीन भारत के शासन-व्यवस्था में धर्म महामात्र या धम्म महामात्र नामक कर्मचारी होते थे जिनका कार्य धर्मानुशासन् स्थापित करना होता था। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में "धर्म महामात्र" जैसे कर्मचारियों का उल्लेख न होना इस बात का सूचक है कि ये कर्मचारी चं ...

                                               

धर्मप्रचार (ईसाई)

बाइबिल में लिखा है कि ईसा ने अपने स्वर्गारोहण के पूर्व अपने शिष्यों को आदेश दिया था कि वे संसाभर में उनके धर्म का प्रचार करें। अत: प्रारंभ से ही धर्मप्रचार ईसाई धर्म की एक प्रधान विशेषता रही है।

                                               

धर्मांतरण

धर्मांतरण किसी ऐसे नये धर्म को अपनाने का कार्य है, जो धर्मांतरित हो रहे व्यक्ति के पिछले धर्म से भिन्न हो. एक ही धर्म के किसी एक संप्रदाय से दूसरे में होने वाले परिवर्तन को सामान्यतः धर्मांतरण के बजाय पुनर्संबद्धता कहा जाता है। अनेक कारणों से लोग ...

                                               

धार्मिक अल्पसंख्यक

किसी देश, प्रान्त या क्षेत्र की जनसंख्या में जिस धर्म के मानने वालों की संख्या कम होती है उस धर्म को अल्पसंख्यक धर्म तथा उसके अनुयायीयों को धार्मिक अल्पसंख्यक कहा जाता है। धार्मिक अल्पसंख्यकों से साथ भेदभाव होने की सम्भावना होती है।

                                               

धार्मिक व्यामोह (पैरानोइया)

धार्मिक व्यामोह, किसी बाहरी कारक के द्वारा या किसी धार्मिक संदर्भ के माध्यम से उद्देश्यपूर्ण तरीके से हमला होने का एक तर्कहीन भय है। ईश्वर या शैतान का डर किसी सम्प्रदाय की ख़ुद के ख़िलाफ़ साज़िश का डर राक्षसों द्वारा लुभाए जाने का dar किसी की आत् ...

                                               

नेमिनाथ

नेमिनाथ जी नोट:- या, अरिष्टनेमि जी जैन धर्म के बाईसवें तीर्थंकर थे। भगवान श्री अरिष्टनेमी अवसर्पिणी काल के बाईसवें तीर्थंकर हुए। इनसें पुर्व के इक्कीस तीर्थंकरों को प्रागैतिहासिककालीन महापुरुष माना जाता है। आधुनिक युग के अनेक इतिहास विज्ञों ने प् ...

                                               

पपेटी

पपेटी पारसी धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है। यह जरोस्त्रेयन कैलेंडर के हिसाब से नए वर्ष के शुभारंभ पर मनाया जाता है। इस दिन पारसी समुदाय से जुड़े स्त्री-पुरुष परंपरागत वस्त्रों को पहन कर अग्नि मंदिर में पूजा-अर्चना करते ह ...

                                               

परमात्मा

परमात्मा शब्द दो शब्दों ‘परम’ तथा `आत्मा’ की सन्धि से बना है। परम का अर्थ सर्वोच्च एवं आत्मा से अभिप्राय है चेतना, जिसे प्राण शक्ति भी कहा जाता है। आधुनिक हिन्दी में ये शब्द भगवान का ही मतलब रखता है। परमात्मा का अर्थ परम आत्मा से हैं परम का अर्थ ...

                                               

परशुराम

परशुराम त्रेता युग के एक ब्राह्मण थे। जिन्होंने अपनी ही मां का गला काट दिया था उन्हें विष्णु का छठा अवतार भी कहा जाता है। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र क ...

                                               

परावर्तन (धर्म)

बलपूर्वक किसी अन्य धर्म में दीक्षित हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में वापस लाने को परावर्तन या परावर्तन संस्कार कहा जाता है। मध्ययुग में सर्वप्रथम स्वामी रामानन्दाचार्य ने परावर्तन कार्यक्रम चलाया था। आधुनिक काल में आर्य समाज ने इसे आगे बढ़ाया। वर्त ...

                                               

पशुपूजा

पशु के प्रति पूज्य भावना अथवा इस भावना से आचारों तथा कृत्यों का पालन पशुपूजा है। इन दृष्टि से किसी जाति या व्यक्ति के श्रद्धाभाव के कारण पशुविशेष उस जाति या व्यक्ति की संततियों का प्रतीक भी बन जाता। पशुसंबंधी अनेक आचारों का प्रचलन संसार के विभिन् ...

                                               

पाण्डवों का हिमालय गमन

भगवान श्रीकृष्णचन्द्र से मिलने के लिये तथा भविष्य का कार्यक्रम निश्चित करने के लिये अर्जुन द्वारिकापुरी गये थे। जब उन्हें गये कई महीने व्यतीत हो गये तब एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर को विशेष चिन्ता हुई। वे भीमसेन से बोले - "हे भीमसेन! द्वारिका का समाच ...

                                               

पुण्य

श्रुति, स्मृति, आगम, बौद्ध, जैनादि सभी संप्रदायों में पुण्य की सत्ता स्वीकृत हुई है। सुकृत, शुभवासना आदि अनेक शब्द इसके लिए प्रयुक्त होते हैं, जिनसे पुण्य का लक्षण भी स्पष्ट हो जाता है। पुण्य मुख्यतया कर्मविशेष को कहते हैं, जो कर्म सत्वबहुल हो, ज ...

                                               

पूजा

पूजा अथवा पूजन किसी भगवान को प्रसन्न करने हेतु हमारे द्वारा उनका अभिवादन होता है। पूजा दैनिक जीवन का शांतिपूर्ण तथा महत्वपूर्ण कार्य है। यहाँ भगवान को पुष्प आदि समर्पित किये जाते हैं जिनके लिये कई पुराणों से छाँटे गए श्लोकों का उपयोग किया जाता है ...

                                               

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय

इस मूलभूत सिद्धांत का पालन करते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्‍वरीय विश्‍व विद्यालय इन दिनों विश्‍व भर में धर्म को नए मानदंडों पर परिभाषित कर रहा है। जीवन की दौड़-धूप से थक चुके मनुष्‍य आज शांति की तलाश में इस संस्‍था की ओर प्रवृत्‍त हो रहे हैं। ...