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उदगमन

उदगमन उस स्थिति को कहते हैं जब किसी तंत्र का पूर्ण रूप से ऐसा व्यवहार हो या उसमें ऐसे गुण हों जो उस तंत्र के अंदर सम्मिलित भागों के व्यवहार या गुणों से अलग हों। उदाहरण के लिये यदी मनुष्यों के मस्तिष्क की कोशिकाओं के गुणों व व्यवहार को परखा जाये त ...

                                               

साक्ष्य

मोटे तौपर साक्ष्य में वे सभी चीजें सम्मिलित हैं जो किसी कथन की सत्यता सिद्ध करने के लिये प्रयोग की जाती हैं। साक्ष्य देना वह प्रक्रिया है जिसमें वे चीजें प्रस्तुत की जाती हैं जो - वे स्वयं अन्य साक्ष्यों के द्वारा सिद्ध हों। सत्य समझी जांय, या

                                               

उड़ान

उड़ान एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक वस्तु, किसी सतह के सीधे संपर्क के बिना वायुमंडल में या इससे बाहर चलती है। इसे ऐरोडायनामिक लिफ्ट, एयर प्रप्लशन, बोएन्सी या बैलेस्टिक मूवमेंट पैदा करके प्राप्त किया जा सकता है। बहुत सी चीजें उड़ती हैं जैसे पक्ष ...

                                               

अरुण बाला

डॉ अरुण बाला एक शिक्षाविद एवं दार्शनिक हैं। विज्ञान दर्शन एवं विज्ञान का इतिहास उनके विचारों के केन्द्रबिन्दु हैं। वैज्ञानिक क्रांति के विचार को वे अस्वीकार करते हैं। अरुण बाला ने सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक दर्शनशास्त्र ...

                                               

चीन में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का इतिहास

चीन में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का इतिहास बहुत पुराना एवं समृद्ध है। पुराने काल से ही विश्व के अन्य देशों एवं सभ्यताओं से स्वतंत्र रूप से चीन के दार्शनिकों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, गणित, खगोल आदि में उल्लेखनीय प्रगति की थी। पारम्परिक चीनी औषधि, ...

                                               

प्राकृतिक इतिहास

पादपों एवं जन्तुओं के वैज्ञानिक अनुसंधान को प्राकृतिक इतिहास कहते हैं। इसमें प्रयोगों के बजाय प्रेक्षणों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

                                               

भौतिक विज्ञान का इतिहास

भौतिकी Physics, विज्ञान की मूलभूत शाखा है जिसका विकास प्रकृति एवं दर्शन के अध्ययन से हुआ था। १९वीं शताब्दी के अन्त तक इसे प्राकृतिक दर्शन "natural philosophy" कहा जाता था। वर्तमान समय में पदार्थ, उर्जा तथा इसके पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन भौतिक ...

                                               

विकासवाद का इतिहास

विकासवाद की धारणा है कि समय के साथ जीवों में क्रमिक-परिवर्तन होते हैं। इस सिद्धान्त के विकास का लम्बा इतिहास है। १८वीं शती तक पश्चिमी जीववैज्ञानिक चिन्तन में यह विश्वास जड़ जमाये था कि प्रत्येक जीव में कुछ विलक्षण गुण हैं जो बदले नहीं जा सकते। इस ...

                                               

वैज्ञानिक क्रांति

वैज्ञानिक क्रांति उस समयावधि को इंगित करती है जब भौतिकी, खगोलशास्त्र, जीवविज्ञान, मानव शरीररचना, रसायन विज्ञान एवं अन्य विज्ञानों की प्रगति ने पुराने सिद्धन्तों को अस्वीकर दिया। इस प्रकार आधुनिक विज्ञान की नींव पड़ी। वैज्ञानिक क्रान्ति की धारणा क ...

                                               

सातत्य सिद्धान्त

विचारों के इतिहास के सन्दर्भ में, सातत्य सिद्धान्त की परिकल्पना है कि मध्यकाल, पुनर्जागरण काल तथा आधुनिक काल के आरम्भिक चरणों के बीच बौद्धिक दृष्टि से कोई मूलभूत असातत्य नहीं है। इस प्रकार यह सिद्धान्त पुनर्जागरण के बाद किसी वैज्ञानिक क्रान्ति हो ...

                                               

नियतत्ववाद

दर्शनशास्त्र में नियतत्ववाद या निर्धारणवाद वह विचारधारा है जिसके अनुसार सभी होने वाली घटनाएँ पहले से उपस्थित परिस्थितियों द्वारा निर्धारित होती हैं। इसके अनुसार मानवों व अन्य जीवों में मुक्त कर्म की क्षमता नहीं है क्योंकि उनके सारे कर्म उनकी परिस ...

                                               

प्रकृति (दर्शन)

दर्शन में, प्रकृति के दो अर्थ होते हैं। पहला, इसका सन्दर्भ उन सारी चीजों के समुच्चय से हैं जो प्राकृतिक हैं, या प्रकृति के विधि के अनुसार सामान्य रूप से काम करते हैं। दूसरी तरफ़, इसका सन्दर्भ वैयक्तिक चीजों के आवश्यक गुणों और कारणों से हैं। साँचा ...

                                               

हित द्वंद्व

हित द्वंद्व ऐसे न्याय-विरुद्ध या अनौचित्य की परिस्थिति होती है जिसमें कोई व्यक्ति या संगठन एक से अधिक हितों या ध्येयों को प्राप्त करने में लिप्त हो जिनमें आपसी टकराव है। भ्रष्टाचार अक्सर हित द्वंद की परिस्थितियों में जन्म लेता है, जब कोई सरकार या ...

                                               

पक्षपात

पक्षपात किसी व्यक्ति, संस्थान, प्रकाशन या संगठन के दृष्टिकोण के ऐसे रुझान को कहते हैं जिसमें किसी विषय को लेकर अधूरा परिप्रेक्ष्य रखा जाये या प्रस्तुत करा जाये और अन्य दृष्टिकोणों की सम्भावनाओं या उपयुक्तता से बिना उचित आधार के इनकार करा जाये। अक ...

                                               

दृग्विषय

दृग्विषय या परिघटना कोई वह चीज़ हैं जो स्वयं प्रकट होती हैं। भले सदैव नहीं, पर आम तौपर दृग्विषयों को "चीजें जो दृष्टिगोचर होती हैं" या संवेदन-समर्थ जीवों के "अनुभव" समझे जाते हैं, या वे जो सैद्धान्तिक रूप से हो सकते हैं। यह शब्द इमानुएल काण्ट के ...

                                               

वास्तविकता

वास्तविकता जो है उसका दूसरा नाम है। इसे यथार्थता भी कहते हैं। इसे समझने के लिए आपको स्वपन से बाहर आना होगा। सच्चाई को समझने के लिए जो प्रमाणित किया जाता है उसे वास्तविकता कहते हैं

                                               

वेबलेन वस्तु

वेबलेन वस्तु से आशय उन सामग्रियों से है जिनके लिए उपभोक्ताओं की पसंद या नापसंद उस वस्तु विशेष की कीमत में बढ़ोत्तरी या गिरावट से तय होता हो। अर्थशास्त्र की माँग आपूर्ति नियम की शृंखला में वेबलेन प्रभाव उस दशा को दर्शाता है जब उपभोक्ता द्वारा किसी ...

                                               

जोड़

जब किसी संख्या या अंक में एक या एक से अधिक संख्या या अंक को मिलाया जाता है तो उसे जोड़ या योग कहते हैं। जोड़ को + चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है। इस चिह्न को धन चिह्न कहते हैं। जोड़ दो प्रकार से होते है,धनात्मक तथा ऋणात्मक । उदाहरणः 14 + 6 = 20 ...

                                               

विश्लेषणात्मक फलन

गणित में विश्लेषणात्मक फलन वह फलन कहलाता है जिसे अभिसारी बहुघात श्रेणी में बदला जा सके। वास्तविक व समिश्र दोनों तरह के विश्लेषणात्मक फलन पाये जाते हैं जिनके जिनकी श्रेणियाँ कुछ समानता व कुछ भिन्नता के साथ होती हैं।

                                               

समुच्चय सिद्धान्त

समुच्चय सिद्धान्त, गणित की एक शाखा है जो समुच्चयों का अध्ययन करती है। वस्तुओं के संग्रह को समुच्चय कहते हैं। यद्यपि समुच्चय के अन्तर्गत किसी भी प्रकार की वस्तुओं का संग्रह सम्भव है, किन्तु समुच्चय सिद्धान्त मुख्यतः गणित से सम्बन्धित समुच्चयों का ...

                                               

तार्किक सत्य

तार्किक सत्य तर्कशास्त्र की सबसे आधारभूत अवधारणाओं में से एक है। यह एक ऐसी प्रतिज्ञप्ति या कथन होता है जो सत्य हो और किसी भी तार्किक निर्वचन में सत्य ही रहे। इसका अर्थ यह है कि प्रतिज्ञप्ति में किसी भी स्थान पर पर्यायवाची डालने पर भी प्रतिज्ञप्ति ...

                                               

निष्कर्ष (तर्क)

तर्कशास्त्र में निष्कर्ष या परिणाम consequence) कथनों के किसी समूह में ऐसा आपसी सम्बन्ध होता है जिसमें यदि एक छोड़कर अन्य कथन सत्य हों तो बचा हुआ एक कथन स्वयं ही निष्कर्ष बनकर सत्य ठहरता है। किसी तर्क में निष्कर्ष को सही साबित करने वाले अन्य कथन ...

                                               

ट्रक्टेटुस लॉजिको-फिलोसोफिक्स

ट्रक्टेटुस लॉजिको-फिलोसोफिक्स लुडविग विट्गेंश्टाइन की महान दार्शनिक कृति है। पुस्तक का नाम लैटिन भाषा में है जिसका अर्थ है - तार्किक-दार्शनिक प्रबन्ध । यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना थी जिसका लक्ष्य भाषा और वास्तविकता के अन्तः संबन्ध का पता लगाना त ...

                                               

कुतर्कों की सूची

औपचारिक कुतर्क उस कुतर्क को कहते हैं जो संरचनात्मक होता है। उपाख्यान का कुतर्क – अच्छे तर्क या सबूत के स्थान पर निजी अनुभव या असंबंधित उदाहरण देना। संभावना से अपील – किसी चीज़ को सत्य मान लेना क्योंकि वो होने की संभावना अधिक है या अधिक लगती है। क ...

                                               

पुष्टि पूर्वाग्रह

पुष्टि पूर्वाग्रह एक तरह का कुतर्क है। इसमें व्यक्ति जानकारी को इस तरह से भाषान्तरित करता है, इस तरह से याद करता है जिस से उसकी धारणाओं और परिकल्पनाओं की पुष्टि होती हो, और जो जानकारी उसकी धारणाओं और परिकल्पनाओं के विपरीत हो उसे बहुत कम महत्व देत ...

                                               

प्रकृति से अपील

प्रकृति से अपील एक तरह का तर्क है जिसमें यह प्रस्तावित किया जाता है कि "कोई वस्तु अच्छी है क्योंकि वह प्राकृतिक है, या कोई वस्तु बुरी है क्योंकि वह अप्राकृतिक है"।

                                               

मिथ्या तर्क

मिथ्या तर्क किसी कथन का वह भाग है जो तार्किक रूप से दोषपूर्ण सिद्ध किया जा सके। हिन्दी में इसे मिथ्या हेतु, हेत्वाभास, तर्काभास और भ्रामकता भी कहा जाता है। मिथ्या हेतु बहुत प्रकार के होते हैं। अपनी बात और उसके निष्कर्ष को सही सिद्ध करने के लिये च ...

                                               

प्रकाशिकी

प्रकाश का अध्ययन भी दो खंडों में किया जाता है। पहला खंड, ज्यामितीय प्रकाशिकी, प्रकाश किरण की संकल्पना पर आधारित है। दर्पणों से प्रकाश का परार्वतन और लेंसों तथा प्रिज्मों से प्रकाश का अपवर्तन, ज्यामितीय प्रकाशिकी के विषय है। सूक्ष्मदर्शी, दूरदर्शी ...

                                               

अधिनीतिशास्त्र

अधिनीतिशास्त्र नीतिशास्त्र की वह शाखा है जो नीतियों के गुणों, दावों, मनोदृष्टि और निर्णयों को समझने का प्रयास करती है। दर्शनशास्त्री अक्सर नीतिशास्त्र की तीन शाखाओं का अध्ययन करते हैं: अधिनीतिशास्त्र, मानदण्डक नीतिशास्त्और अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र ...

                                               

अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र

अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र निजी और सार्वजनिक जीवन के विशिष्ट मुद्दों का, नैतिक दृष्टिकोण से, दार्शनिक परिक्षण हैं, जो नैतिक जजमेन्ट के मामले हैं। अतः, ये, रोजमर्रा के जीवन में अलग़-अलग़ क्षेत्रों में नैतिक रूप से सही कार्य-मार्ग पहचानने हेतु दार्शनि ...

                                               

अनौचित्य

अनौचित्य व्यवहार के ऐसे मानक होते हैं जिन्हें समाज में बुरा समझा जाता है। यह न्याय द्वारा वर्जित व्यवहार से भिन्न है क्योंकि बहुत से व्यवहार ग़ैर-कानूनी न होते हुए भी हानिकारक या बुरे माने जाते हैं।

                                               

तदनुभूति

दूसरों के कष्टों और संवेगों का अनुभव करने और समझने को तदनुभूति या समानुभूति कहते हैं। समानुभूति, असमानुभूति के विपरीत और उदासीनता से भिन्न होती है। असमानुभूति में कोई व्यक्ति लोगों के कष्ट को समझने और महसूस करने की बात तो दूर वह उनके विपरीत होता ...

                                               

नीतिशास्त्र का इतिहास

यद्यपि आचारशास्त्र की परिभाषा तथा क्षेत्र प्रत्येक युग में मतभेद के विषय रहे हैं, फिर भी व्यापक रूप से यह कहा जा सकता है कि आचारशास्त्र में उन सामान्य सिद्धांतों का विवेचन होता है जिनके आधापर मानवीय क्रियाओं और उद्देश्यों का मूल्याँकन संभव हो सके ...

                                               

परहितवाद

परहितवाद या निःस्वार्थता, जिसे परोपकारिता या आत्मोत्सर्ग भी कहते हैं, दूसरों की भलाई हेतु चिन्ता का सिद्धान्त या कारण प्रथा हैं नींद में नींद और सपने देखने में और हमारी मृत्यु कोमा है और परोपकारिता जुड़वाँ और सोसिया पैदा करती है कि हमें अपना भविष ...

                                               

प्रतिज्ञा

प्रतिज्ञा किसी व्यक्ति द्वारा किसी चीज़ को करने या न करने के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध करने की प्रक्रिया को कहते हैं। कानूनी रूप से मान्य प्रतिज्ञाएँ संविदा में लिखी जाती हैं।

                                               

वर्णात्मक नीतिशास्त्र

वर्णात्मक नीतिशास्त्र, जिसे तुलनात्मक नीतिशास्त्र भी कहा जाता हैं, नैतिकता के बारे में लोगो की आस्थाओं का अध्ययन हैं।:26 वर्णात्मक नीतिशास्त्र निर्देशात्मक या मानदण्डक नीतिशास्त्र से अलग हैं, जो उन नीतिशास्त्रीय सिद्धान्तों का अध्ययन करता हैं, जो ...

                                               

सहानुभूति

किसी व्यक्ति की ऐसी संवेगात्मक प्रतिक्रियाएं जो दूसरे लोगों पर केंद्रित होती हैं, या जिसका रूझान दूसरे की तरफ होता है और जिससे करूणा की अनुभूति, हमदर्दी और चिंताएं शामिल होती है, उसे सहानुभूति कहते हैं। इस तरह समानुभूति में सहानुभूति शामिल होती ह ...

                                               

आर्थिक आज़ादी

आर्थिक स्वतंत्रता का प्रयोग आर्थिक एवं नीतिगत चर्चाओं में बहुधा होती रहती है। जिस प्रकार स्वतंत्रता की अनेकों परिभाषाएँ दी जातीं है, उसी तरह अर्थिक आजादी का भी कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। किन्तु परम्परागत रूप से मुक्त बाजाऔर निजी स्वामित्व पर ...

                                               

राजा का दैवी सिद्धान्त

राजा के दैवी सिद्धान्त के अनुसार राज्य की उत्पत्ति ईश्वर के द्वारा की गई है। राजा को ईश्वर द्वारा राज्य को संचालित करने के लिए भेजा गया है। प्रजा का कर्तव्य है कि राजा का विरोध न करे क्योंकि वह ईश्वर का प्रतिनिधि है। राज्य की उत्पत्ति का दैवी सिद ...

                                               

शक्तियों का पृथक्करण

शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धान्त राज्य के सुशासन का एक प्रादर्श है। शक्तियों के पृथक्करण के लिये राज्य को भिन्न उत्तरदायित्व वाली कई शाखाओं में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक शाखा को अलग-अलग और स्वतंत्र शक्तियाँ प्रदान की जाती हैं। प्रायः यह व ...

                                               

न्यायशास्त्र

न्यायशास्त्र कानून का सिद्धांत और दर्शन है। न्यायशास्त्र के विद्वान अथवा कानूनी दार्शनिक, विधि की प्रवृति, कानूनी तर्क, कानूनी प्रणालियां एवं कानूनी संस्थानों का गहन ज्ञान पाने की उम्मीद रखते हैं। आधुनिक न्यायशास्त्र की शुरुआत 18वीं सदी में हुई औ ...

                                               

केनेथ वाल्ट्ज

केनेथ नील वाल्ट्ज एक अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक थे, जो कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कली और कोलंबिया विश्वविद्यालय दोनों में संकाय के सदस्य थे और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र के सबसे प्रमुख विद्वानों में से एक थे। वे द्वितीय विश्व युद्ध और ...

                                               

हैलीना ब्लावाट्स्की

भारत में अंतर्राष्ट्रीय थियोसॉफिकल सोसाइटी का मुख्यालय स्थापित करके हम भारतीयों को गौरवान्वित करने वाली मैडम ब्लावाट्स्की अधिक दिन भारत में नहीं रहीं। अपने विश्व भ्रमण के दौरान 1852 में वे पहली बार भारत आई थीं और यहां थोड़े दिन रुक कर इसकी ऋषि पर ...

                                               

लाओ-सू

लाओ-सू, लाओ-सी या लाओ-से प्राचीन चीन के एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे, जो ताओ ते चिंग नाम के मशहूर उपदेश ले लेखक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी विचारधाराओं पर आधारित धर्म को ताओ धर्म कहते हैं। लाओ-सू एक सम्मान जतलाने वाली उपाधि है, जिसमें लाओ का अर्थ आ ...

                                               

सौ विचारधाराएँ

सौ विचारधाराएँ प्राचीन चीन में ७७० ईसापूर्व से २२१ ईसापूर्व के बसंत और शरद काल और झगड़ते राज्यों के काल में पनपने वाले दार्शनिकों और नई विचारधाराओं को कहते हैं। इसे युग को चीनी दर्शनशास्त्र का सुनहरा काल समझा जाता है। हालांकि इस समय में चीन में ब ...

                                               

इमानुएल काण्ट

इमानुएल कांट जर्मन वैज्ञानिक, नीतिशास्त्री एवं दार्शनिक थे। उसका वैज्ञानिक मत "कांट-लाप्लास परिकल्पना" के नाम से विख्यात है। उक्त परिकल्पना के अनुसार संतप्त वाष्पराशि नेबुला से सौरमंडल उत्पन्न हुआ। कांट का नैतिक मत "नैतिक शुद्धता" का सिद्धांत, "क ...

                                               

मैक्स वेबर

मैक्स वेबर एक जर्मन समाजशास्त्री और राजनीतिक अर्थशास्त्री थे। इन्हें आधुनिक समाजशास्त्र के जन्मदाताओं में से एक भी माना जाता है। वेबर की प्रमुख रचनाये:- 1. द प्रोटेस्टेण्ड एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैप्टिलीज़म 1905 2. द रिलीज़न ऑफ इंडिया 1916 3. द रि ...

                                               

विज्ञान के दार्शनिकों की सूची

दार्शनिकों की एक लंबी परंपरा रही है जिन्होंने वैज्ञानिक चिंतन के माध्यम से वस्तुनिष्ठ और आत्मनिष्ठ ज्ञान के सहसंबंध को विश्व से अवगत कराया है। इन दार्शनिकों की एक कालक्रमानुसार सूची निम्नवत है।

                                               

जूलिया क्रिस्टेवा

जूलिया क्रिस्टेवा एक बल्गेरियाई-फ्रेंच दार्शनिक, साहित्यिक आलोचक, मनोविश्लेषक, नारीवादी, और, सबसे हाल ही में, उपन्यासकार है 1960 के दशक के मध्य से फ्रांस में रह रही है। वह अब विश्वविद्यालय पेरिस डिडरोट में प्रोफेसर हैं। क्रिस्टेवा 1969 में अपनी प ...

                                               

फ़्रीड्रिक हायक

फ़्रीड्रिक हायक) एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री थे। उनका जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था। अर्थशास्त्र में इनके काम के महत्व को देखते हुए 1974 मैं इन्हें और गुन्नार म्यर्दल को अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।