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अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र

अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र निजी और सार्वजनिक जीवन के विशिष्ट मुद्दों का, नैतिक दृष्टिकोण से, दार्शनिक परिक्षण हैं, जो नैतिक जजमेन्ट के मामले हैं। अतः, ये, रोजमर्रा के जीवन में अलग़-अलग़ क्षेत्रों में नैतिक रूप से सही कार्य-मार्ग पहचानने हेतु दार्शनि ...

                                               

अनौचित्य

अनौचित्य व्यवहार के ऐसे मानक होते हैं जिन्हें समाज में बुरा समझा जाता है। यह न्याय द्वारा वर्जित व्यवहार से भिन्न है क्योंकि बहुत से व्यवहार ग़ैर-कानूनी न होते हुए भी हानिकारक या बुरे माने जाते हैं।

                                               

तदनुभूति

दूसरों के कष्टों और संवेगों का अनुभव करने और समझने को तदनुभूति या समानुभूति कहते हैं। समानुभूति, असमानुभूति के विपरीत और उदासीनता से भिन्न होती है। असमानुभूति में कोई व्यक्ति लोगों के कष्ट को समझने और महसूस करने की बात तो दूर वह उनके विपरीत होता ...

                                               

नीतिशास्त्र का इतिहास

यद्यपि आचारशास्त्र की परिभाषा तथा क्षेत्र प्रत्येक युग में मतभेद के विषय रहे हैं, फिर भी व्यापक रूप से यह कहा जा सकता है कि आचारशास्त्र में उन सामान्य सिद्धांतों का विवेचन होता है जिनके आधापर मानवीय क्रियाओं और उद्देश्यों का मूल्याँकन संभव हो सके ...

                                               

परहितवाद

परहितवाद या निःस्वार्थता, जिसे परोपकारिता या आत्मोत्सर्ग भी कहते हैं, दूसरों की भलाई हेतु चिन्ता का सिद्धान्त या कारण प्रथा हैं नींद में नींद और सपने देखने में और हमारी मृत्यु कोमा है और परोपकारिता जुड़वाँ और सोसिया पैदा करती है कि हमें अपना भविष ...

                                               

प्रतिज्ञा

प्रतिज्ञा किसी व्यक्ति द्वारा किसी चीज़ को करने या न करने के लिए स्वयं को प्रतिबद्ध करने की प्रक्रिया को कहते हैं। कानूनी रूप से मान्य प्रतिज्ञाएँ संविदा में लिखी जाती हैं।

                                               

वर्णात्मक नीतिशास्त्र

वर्णात्मक नीतिशास्त्र, जिसे तुलनात्मक नीतिशास्त्र भी कहा जाता हैं, नैतिकता के बारे में लोगो की आस्थाओं का अध्ययन हैं।:26 वर्णात्मक नीतिशास्त्र निर्देशात्मक या मानदण्डक नीतिशास्त्र से अलग हैं, जो उन नीतिशास्त्रीय सिद्धान्तों का अध्ययन करता हैं, जो ...

                                               

सहानुभूति

किसी व्यक्ति की ऐसी संवेगात्मक प्रतिक्रियाएं जो दूसरे लोगों पर केंद्रित होती हैं, या जिसका रूझान दूसरे की तरफ होता है और जिससे करूणा की अनुभूति, हमदर्दी और चिंताएं शामिल होती है, उसे सहानुभूति कहते हैं। इस तरह समानुभूति में सहानुभूति शामिल होती ह ...

                                               

आर्थिक आज़ादी

आर्थिक स्वतंत्रता का प्रयोग आर्थिक एवं नीतिगत चर्चाओं में बहुधा होती रहती है। जिस प्रकार स्वतंत्रता की अनेकों परिभाषाएँ दी जातीं है, उसी तरह अर्थिक आजादी का भी कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। किन्तु परम्परागत रूप से मुक्त बाजाऔर निजी स्वामित्व पर ...

                                               

राजा का दैवी सिद्धान्त

राजा के दैवी सिद्धान्त के अनुसार राज्य की उत्पत्ति ईश्वर के द्वारा की गई है। राजा को ईश्वर द्वारा राज्य को संचालित करने के लिए भेजा गया है। प्रजा का कर्तव्य है कि राजा का विरोध न करे क्योंकि वह ईश्वर का प्रतिनिधि है। राज्य की उत्पत्ति का दैवी सिद ...

                                               

शक्तियों का पृथक्करण

शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धान्त राज्य के सुशासन का एक प्रादर्श है। शक्तियों के पृथक्करण के लिये राज्य को भिन्न उत्तरदायित्व वाली कई शाखाओं में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक शाखा को अलग-अलग और स्वतंत्र शक्तियाँ प्रदान की जाती हैं। प्रायः यह व ...

                                               

न्यायशास्त्र

न्यायशास्त्र कानून का सिद्धांत और दर्शन है। न्यायशास्त्र के विद्वान अथवा कानूनी दार्शनिक, विधि की प्रवृति, कानूनी तर्क, कानूनी प्रणालियां एवं कानूनी संस्थानों का गहन ज्ञान पाने की उम्मीद रखते हैं। आधुनिक न्यायशास्त्र की शुरुआत 18वीं सदी में हुई औ ...

                                               

केनेथ वाल्ट्ज

केनेथ नील वाल्ट्ज एक अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक थे, जो कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कली और कोलंबिया विश्वविद्यालय दोनों में संकाय के सदस्य थे और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र के सबसे प्रमुख विद्वानों में से एक थे। वे द्वितीय विश्व युद्ध और ...

                                               

हैलीना ब्लावाट्स्की

भारत में अंतर्राष्ट्रीय थियोसॉफिकल सोसाइटी का मुख्यालय स्थापित करके हम भारतीयों को गौरवान्वित करने वाली मैडम ब्लावाट्स्की अधिक दिन भारत में नहीं रहीं। अपने विश्व भ्रमण के दौरान 1852 में वे पहली बार भारत आई थीं और यहां थोड़े दिन रुक कर इसकी ऋषि पर ...

                                               

लाओ-सू

लाओ-सू, लाओ-सी या लाओ-से प्राचीन चीन के एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे, जो ताओ ते चिंग नाम के मशहूर उपदेश ले लेखक के रूप में जाने जाते हैं। उनकी विचारधाराओं पर आधारित धर्म को ताओ धर्म कहते हैं। लाओ-सू एक सम्मान जतलाने वाली उपाधि है, जिसमें लाओ का अर्थ आ ...

                                               

सौ विचारधाराएँ

सौ विचारधाराएँ प्राचीन चीन में ७७० ईसापूर्व से २२१ ईसापूर्व के बसंत और शरद काल और झगड़ते राज्यों के काल में पनपने वाले दार्शनिकों और नई विचारधाराओं को कहते हैं। इसे युग को चीनी दर्शनशास्त्र का सुनहरा काल समझा जाता है। हालांकि इस समय में चीन में ब ...

                                               

इमानुएल काण्ट

इमानुएल कांट जर्मन वैज्ञानिक, नीतिशास्त्री एवं दार्शनिक थे। उसका वैज्ञानिक मत "कांट-लाप्लास परिकल्पना" के नाम से विख्यात है। उक्त परिकल्पना के अनुसार संतप्त वाष्पराशि नेबुला से सौरमंडल उत्पन्न हुआ। कांट का नैतिक मत "नैतिक शुद्धता" का सिद्धांत, "क ...

                                               

मैक्स वेबर

मैक्स वेबर एक जर्मन समाजशास्त्री और राजनीतिक अर्थशास्त्री थे। इन्हें आधुनिक समाजशास्त्र के जन्मदाताओं में से एक भी माना जाता है। वेबर की प्रमुख रचनाये:- 1. द प्रोटेस्टेण्ड एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैप्टिलीज़म 1905 2. द रिलीज़न ऑफ इंडिया 1916 3. द रि ...

                                               

विज्ञान के दार्शनिकों की सूची

दार्शनिकों की एक लंबी परंपरा रही है जिन्होंने वैज्ञानिक चिंतन के माध्यम से वस्तुनिष्ठ और आत्मनिष्ठ ज्ञान के सहसंबंध को विश्व से अवगत कराया है। इन दार्शनिकों की एक कालक्रमानुसार सूची निम्नवत है।

                                               

जूलिया क्रिस्टेवा

जूलिया क्रिस्टेवा एक बल्गेरियाई-फ्रेंच दार्शनिक, साहित्यिक आलोचक, मनोविश्लेषक, नारीवादी, और, सबसे हाल ही में, उपन्यासकार है 1960 के दशक के मध्य से फ्रांस में रह रही है। वह अब विश्वविद्यालय पेरिस डिडरोट में प्रोफेसर हैं। क्रिस्टेवा 1969 में अपनी प ...

                                               

फ़्रीड्रिक हायक

फ़्रीड्रिक हायक) एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री थे। उनका जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था। अर्थशास्त्र में इनके काम के महत्व को देखते हुए 1974 मैं इन्हें और गुन्नार म्यर्दल को अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

                                               

अन्नम भट्ट

अन्नम भट्ट, सोलहवीं -सत्रहवीं शताब्दी के भारतीय दार्शनिक हैं। उन्होने न्याय और वैशिक दर्शनों से सम्बन्धित अनेक संस्कृत ग्रन्थ्ं की रचना की है जिनमें तर्कसंग्रह और तर्कसंग्रहदीपिका प्रमुख हैं।

                                               

अप्पय दीक्षित

अप्पय दीक्षित वेदांत दर्शन के विद्वान्‌। इनके पौत्र नीलकंठ दीक्षित के अनुसार ये 72 वर्ष जीवित रहे थे। 1626 में शैवों और वैष्णवों का झगड़ा निपटाने ये पांड्य देश गए बताए जाते हैं। सुप्रसिद्ध वैयाकरण भट्टोजि दीक्षित इनके शिष्य थे। इनके करीब 400 ग्रं ...

                                               

आलार कालाम

आलार कालाम गौतम बुद्ध के समकालीन एक दार्शनिक एवं योगी थे। वे सांख्य दर्शन के विशेषज्ञ थे। पालि ग्रन्थों के अनुसार, वे गौतम बुद्ध के प्रथम गुरु थे। गौतम बुद्ध के समय समाज में सांख्य दर्शन का काफी प्रभाव था और इससे गौतम बुद्ध भी काफी प्रभावित थे। उ ...

                                               

उद्योतकर

उद्योतकर न्याय दर्शन के आचार्य थे। गौतम के न्यायशास्त्पर वात्स्यायन का भाष्य था। बौद्ध दार्शनिक दिंनाग ने अपने प्रमाणसमुच्चय में इस भाष्य की बड़ी आलोचना की। उद्योतकर ने वात्स्यायन भाष्य पर वार्तिक लिखकर न्यायशास्त्र की दृष्टि से बौद्धों का खंडन क ...

                                               

उभयभारती

उभयभारती मण्डन मिश्र की पत्नी। इनके शारदा तथा सरसवाणी नाम भी मिलते हैं। अपनी दिग्विजय यात्रा के बीच शंकराचार्य मिथिला पहुँचे और वहाँ उन्होंने शास्त्रार्थ में मंडन मिश्र को पराजित कर दिया। इसपर मंडन मिश्र की भार्या उभयभारती ने शंकराचार्य को कामशास ...

                                               

एम॰ हिरियण्णा

मैसूरु हिरियण्णा बीसवीं शताब्दी में भारतीय दर्शन के विषय में लिखने वाले सर्वश्रेषठ लेखकों में गिने जाते हैं। प्रो॰ हिरियण्णा का जन्म ७ मई १८७१ को मैसूरु में हुआ था। मद्रास क्रिश्चियन कालेज से एम ए करने के बाद उन्होने मैसूरु ओरिएण्टल लाइब्रेरी मैस ...

                                               

कुमारजीव

मध्य एशिया के कुची प्रदेश के निवासी। इनके पिता कुमारायण नाम के भारतीय थे। कुछ अज्ञात कारणवश ये भारत छोड़कर पामीर के दुर्गम मार्ग से होते कुची पहुँचे। वहाँ के राजा ने इनका हार्दिक स्वागत किया और शीघ्र राजगुरु का पद प्रदान किया। उन्होंने जीवा नाम क ...

                                               

गदाधर भट्टाचार्य

गदाधर भट्टाचार्य नव्य न्याय के यशस्वी नैयायिक थे। वे नवद्वीप के निवासी थे। इन्होंने रघुनाथ की "दीधिति" पर अत्यन्त विसतृत और परिष्कृत टीका की रचना की है जो "गादाधरी" नाम से विख्यात है। व्युत्पत्तिवाद, शक्तिवाद आदि उनके अनेक मौलिक ग्रंथ हैं, जिनसे ...

                                               

गोपाल दास

गोपाल दास १८ वीं सदी के एक प्रमुख कन्नड़ भाषा के कवि और संत थे जो हरिदास परंपरा से संबंधित थे। विजय दास और जगन्नाथ दास जैसे अन्य समकालीन हरिदासियो के साथ, गोपाल दास ने दक्षिण भारत में माधवाचार्य के द्वैत दर्शन का प्रसार दशरा पडगालु नमक कीर्तनों क ...

                                               

जगन्नाथ दास

जगन्नाथ दास, कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध हरिदासी संत-कवियों में से एक थे। वे कर्नाटक राज्य अन्तर्गत रायचूर जिले के मानवी शहर के मूल निवासी थे। वे he वैष्णव भक्ति को प्रचारित करने वाले कई प्रसिद्ध भक्ति गीतों को लिखने के अलावा, जगन्नाथ दास ने देशी षटप ...

                                               

ज्ञानश्रीमित्र

वृतमालास्तुति अपोहप्रकरण अभिसमयहृदय अध्यार्धप्रज्ञापारमितानयशतपञ्चाशिका अनेकचिन्तामणि अद्वैतबिन्दु भेदाभेदपरीक्षा सर्वशब्दाभावचर्चा ईश्वरदूषण साकारसिद्धिशास्त्र साकारसङ्ग्रहसूत्र सर्वज्ञानसिद्धि कार्यकरणभावसिद्धि अनुपलब्धिरहस्य व्याप्तिचर्चा योगी ...

                                               

तिरुवल्लुवर

तिरुवल्लुवर एक प्रख्यात तमिल कवि हैं जिन्होंने तमिल साहित्य में नीति पर आधारित कृति थिरूकुरल का सृजन किया। उन्हें थेवा पुलवर, वल्लुवर और पोयामोड़ी पुलवर जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। तिरुवल्लुवर का जन्म मायलापुर में हुआ था। उनकी पत्नी वासुक ...

                                               

धरमपाल

धरमपाल भारत के एक गांधीवादी विचारक, इतिहासकार एवं दार्शनिक थे। धरमपाल का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में हुआ था। भारत से लेकर ब्रिटेन तक लगभग 30 साल उन्होंने इस बात की खोज में लगाये कि अंग्रेजों से पहले भारत कैसा था। इसी कड़ी में उनके द् ...

                                               

पञ्चशिख

पञ्चशिख, सांख्य दर्शन के एक प्रधान आचार्य थे जिनका वर्णन महाभारत के शान्तिपर्व में आया है। ये कपिल की शिष्यपरंपरा में आसुरि के शिष्य थे। इनका उलेख वामनपुराण, कूर्मपुराण और वायुपुराण तथा तर्पण विधि में प्रतिष्ठित आचार्य के रूप में हुआ है है। महाभा ...

                                               

प्रभाकर

प्रभाकर बैगा घोघरी भारत के दार्शनिक एवं वैयाकरण थे। वे मीमांसा से सम्बन्धित हैं। कुमारिल भट्ट से उनका शास्त्रार्थ हुआ था। शालिकनाथ ने ८वीं शताब्दी में प्रभाकर के ग्रन्थों का भाष्य लिखा।

                                               

प्रमुख मीमांसक आचार्य

तैत्तिरीय ब्राह्मण, शतपथ ब्राह्मण आदि गंथ तथा श्रौत सूत्रों की समीक्षा से विदित होता है कि वैदिक वाक्यों में प्रतीयमान विरोध का परिहार करने के लिये ऋषि-महर्षियों ने जो छानबीज की वही विचारधारा मीमांसा के रूप में परिणत हुई। मीमांसा कर्मकांड विषयक व ...

                                               

भास्कर (दार्शनिक)

भास्कर एक भारतीय दार्शनिक थे। वे वेदान्त दर्शन के भेदाभेद परम्परा के दार्शनिक थे। भास्कर ने ब्रह्मसूत्र का भाष्य लिखा और आदि शंकराचार्य के माया दर्शन का खण्डन किया।

                                               

मणिलाल द्विवेदी

मणिलाल नभुभाई द्विवेदी गुजराती भाषा के लेखक, कवि, उपन्यासकार, निबंधकार, दार्शनिक और समाज सुधारक थे। उन्होंने 19वीं सदी के गुजराती साहित्य को बहुत प्रभावित किया और इस क्षेत्र में मान्यता प्राप्त बॉम्बे विश्वविद्यालय के पहले स्नातक थे। अर्वाचीन गुज ...

                                               

मुरारि मिश्र

मुरारि मिश्र भारतीय दार्शनिक थे। उन्हे मीमांसा दर्शन में तृतीय सम्प्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होने मीमांसा सूत्र की व्याख्या लिखी थी जो अब आंशिक रूप में ही प्राप्त है। इनके पृथक मत का कारण इनका प्रामाण्यवाद विवेचन है। महान नैयायिक होने के ...

                                               

रत्नकीर्ति

रत्नकीर्ति, प्रमाणवाद और योगाचार से सम्बन्धित एक बौद्ध दार्शनिक थे। उन्होने विक्रमशिला में अध्ययन किया जहाँ ज्ञानश्रीमित्र उनके गुरु थे।

                                               

विजय दास

विजया दास १८वीं शताब्दी में कर्नाटक, भारत की हरिदास परंपरा के एक प्रमुख संत और द्वैत दार्शनिक परंपरा के विद्वान थे। गोपाल दास, हेवलांकट्टे गिरिम्मा, जगन्नाथ दास और प्रसन्न वेंकट दास जैसे समकालीन हरिदास संतों के साथ, उन्होंने कन्नड़ भाषा में लिखे ...

                                               

शंकर मिश्र

शंकर मिश्र भारत के एक प्रसिद्ध दार्शनिक थे। शंकर मिश्र द्वारा विरचित श्लोक "रसार्णव" नाम से प्रसिद्ध है। उनके पिता भवनाथ मिश्र भी प्रसिद्ध दार्शनिक थे। वैशेषिक सूत्रोपस्कार शंकर द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ है।

                                               

शबर

शबर या शबर स्वामी जैमिनीकृत पूर्व मीमांसा सूत्र के भाष्यकार थे। इस पर उन्होने शबर भाष्य की रचना की। ऐसा कहा जाता है कि शबर का वास्तविक नाम आदित्यदेव था किन्तु जैनों के डर से उन्होने अपने वास्तविक नाम को प्रकट नहीं होने दिया और वनवासी की तरह भेष ब ...

                                               

आर्किमिडीज़

सेराक्यूस के आर्किमिडीज़, एक यूनानी गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी, अभियंता, आविष्कारक और खगोल विज्ञानी थे। हालांकि उनके जीवन के कुछ ही विवरण ज्ञात हैं, उन्हें शास्त्रीय पुरातनता का एक अग्रणी वैज्ञानिक माना जाता है। भौतिक विज्ञान में उन्होनें जलस्थैतिकी ...

                                               

एरेटोस्थेनेज

एरेटोस्थेनेज ग्रीक गणितज्ञ, भूगोलकार, कवि, खगोलविद, और संगीत सिद्धांतवादी थे। वह सीखने का एक आदमी था, जो अलेक्जेंड्रिया पुस्तकालय में मुख्य पुस्तकालय अध्यक्ष बन गया। उन्होंने भूगोल के अनुशासन का आविष्कार किया, जिसमें आज प्रयोग की जाने वाली शब्दाव ...

                                               

यूक्लिड

यूक्लिड, या उकलैदिस, प्राचीन यूनान का एक गणितज्ञ था। उसे "ज्यामिति का जनक" कहा जाता है। उसकी एलिमेण्ट्स नामक पुस्तक गणित के इतिहास में सफलतम् पुस्तक है। इस पुस्तक में कुछ गिने-चुने स्वयंसिद्धों के आधापर ज्यामिति के बहुत से सिद्धान्त निष्पादित किय ...

                                               

हाईपेशिया

हाईपेशिया,अक्सर अलेक्जेंड्रिया का हाइपैसिया कहा जाता है मिस्र, जो तब पूर्वी रोमन साम्राज्य का एक भाग था में एक ग्रीक गणितज्ञ, खगोलविद, और दार्शनिक थी।वह नीओप्लेटोनिक स्कूल अलेक्जेंड्रिया की प्रमुख थी, जहां वह दर्शन और खगोल विज्ञान पढ़ाती थी। समका ...

                                               

हिपोक्रेटिस

हिपोक्रेटिस, या बुकरात, प्राचीन यूनान के एक प्रमुख विद्वान थे। ये यूनान के पाश्चात्य चिकित्सा शास्त्र के जन्म दाता थे। इन का जन्म ४६० - ३७० ई पूर्व माना जाता है। इन का जन्म प्राचीन यूनान के शहर कोस में हुवा। और मृत्यु शहर लारिस्सा में हुई।

                                               

ए॰ जे॰ एयर

सर अल्फ्रेड जूल्स "फ्रेडी" एयर एक ब्रितानी दार्शनिक थे। एयर तार्किक विधेयवाद को बढ़ावा देने के कारण विख्यात हैं जिसका उल्लेख उनकी पुस्तकों भाषा, सत्य और तर्क तथा ज्ञान की समस्या में मिलता है।