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स्तंभन

स्तम्भन से अभिप्राय शिश्न के आकार में बढ़ने और कड़ा होने से है, जो यौनिच्छा करने पर शिश्न के उत्तेजित होने के कारण होता है, यद्यपि यह गैर यौन स्थितियों में भी हो सकता है। प्राथमिक शारीरिक तन्त्र जिसके चलते स्तम्भन होता है, में शिश्न की धमनियाँ स् ...

                                               

स्नान

पानी या किसी अन्य तरल में शरीर को डुबाकर या बिना डुबाये शरीर को धोना स्नान कहलाता है। स्नान कई प्रयोजनोंके लिये किया जाता है; जैसे- स्वच्छता, धार्मिक अनुष्ठान, चिकित्सकीय कारण आदि। लोग चॉकलेट, कीचड़, दूध, शम्पेन आदि में भी स्नान करते हैं। सूरज के ...

                                               

स्मृति समुन्नति

अपनी स्मृति को बढ़ाना स्मृति समुन्नति कहलाता है। स्मृति क्षीणता तथा उम्र के साथ याददास्त में कमी आने जैसी बीमारियों पर किये गये चिकित्सा अनुसंधानों के फलस्वरूप स्मृति क्षीणता के नयी व्याख्या सामने आयी है तथा स्मृति बढ़ाने के नयी तकनीकों को जन्म द ...

                                               

हस्तमैथुन

हस्तमैथुन शारीरिक मनोविज्ञान से सम्बन्धित एक सामान्य प्रक्रिया का नाम है जिसे यौन सन्तुष्टि हेतु पुरुष हो या स्त्री, कभी न कभी सभी करते है। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि बुड्ढे-बुड्ढे लोग भी लिंगोत्थान हेतु करते हैं इससे उन्हें यह अहसास होता है कि ...

                                               

होम्योपैथी

होम्योपैथी it works| चिकित्सा पद्धति है। होम्योपैथिक दवाइयाँ किसी भी स्थिति या बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी हैं; बड़े पैमाने पर किगए अध्ययनों में होमियोपैथी को प्लेसीबो से अधिक प्रभावी पाया गया है। होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीम ...

                                               

अखण्ड मानवतावाद

सभी धर्म को स्वीकारते हुए अन्य धर्मों की सिद्धांत अलग हो सकते हैं को मानते हुए अन्य देश, राज्य, स्थानीय लोग और उनके भाषा को सम्मान और रंग अथवा नश्ल भेद को स्वीकार करते हुए दुनियां के सभी इंशानो के प्रति आत्मभाव को स्थापित करना और एकदूसरे का सम्मा ...

                                               

मोहम्मद युनुस (अन्ना वीरता पदकधारक)

मोहम्मद युनुस भारत के प्रसिद्ध शहर चेन्नई में एक ई-कॉमर्स कंपनी "प्रोपो" के सह-संस्थापक हैं। उनकी प्रसिद्धि का कारण 2015 में आने वाले भयंकर तूफान के दौरान सैकड़ों चेन्नई के निवासियों को किसी धर्म, समुदाय या जाति के भेदभाव के बिना जान बचाने का महा ...

                                               

फुटलूज उद्योग

आर्थिक भूगोल में फुटलूज़ उद्योग ऐसे उद्योगों को कहा जाता है जिनकी अवस्थिति पर कच्चे माल के स्रोत से दूरी का असर नहीं होता। ऐसे अधिकतर उद्योग कहीं भी स्थापित किया जा सकते हैं और इन्हें कच्चे माल के स्रोत के समीप लगाने की अनिवार्यता नहीं होती। Exam ...

                                               

भौगोलिक उपदर्शन

भौगोलिक संकेत क्या है? एक भौगोलिक संकेत एक संकेत है जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और उन गुणों या प्रतिष्ठा होती है जो उस मूल के कारण होती हैं। जीआई के रूप में कार्य करने के लिए, एक संकेत को किसी ...

                                               

रबड़

रबड़ के वृक्ष भूमध्य रेखीय सदाबहार वनों में पाए जाते हैं, इसके दूध, जिसे लेटेक्स कहते हैं से रबड़ तैयार किया जाता हैं। सबसे पहले यह अमेजन बेसिन में जंगली रूप में उगता था, वहीं से यह इंग्लैण्ड निवासियों द्वारा दक्षिणी-पूर्वी एशिया में ले जाया गया। ...

                                               

ख़रीफ़ की फ़सल

इन फसलों को बोते समय अधिक तापमान एवं आर्द्रता तथा पकते समय शुष्क वातावरण की आवश्यकता होती है। उत्तर भारत में इनको जून-जुलाई में बोते हैं और इन्हें अक्टूबर के आसपास काटा जाता हैं

                                               

रबी की फ़सल

गेहूँ रबी की फ़सल सामान्यतः अक्तूबर-नवम्बर के महिनों में बोई जाती हैं। इन फसलों की बुआई के समय कम तापमान तथा पकते समय खुश्क और गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है। उदाहरण के तौपर गेहूँ, जौ, चना, मसूर, सरसों आदि की फ़सलें रबी की फ़सल मानी जाती हैं।

                                               

वाँन थ्यूनेन का सिद्धान्त

जर्मन विद्वान ने मैकलेनबर्ग में फार्म मैनेजर के पद पर कार्य करते हुए अपने अनुभव के आधापर 1826 में कृषि भूमि उपयोग के लिए अवस्थिति सिद्धान्त का पतिपादन किया जो तुलनात्मक लाभ के सिद्धान्त पर आधारित हैं। उनका यह सिद्धान्त निश्चयवादी तथा मानकीय है। व ...

                                               

सीढ़ीदार खेत

सीढ़ीदार खेत, पर्वतीय या पहाड़ी प्रदेशों की ढलवां भूमि पर कृषि के उद्देश्य से विकसित क्षेत्रों को कहते हैं। इन प्रदेशों में मैदानी इलाकों के आभाव में पहाड़ों की ढलानों पर सीढ़ियों के आकार के छोटे छोटे खेत विकसित किए जाते हैं जो, मृदा अपरदन और बार ...

                                               

अवप्रवाह मण्डल

अवप्रवाह मण्डल या अवप्रवाह क्षेत्र नदी की तली के नीचे का वह क्षेत्र है जिसमें जल का प्रवाह गोलाश्मों और कंकड़ पत्थर के बीच से होता है और एक तरह से यह न तो स्वतंत्र धरातलीय प्रवाह होता है न ही भूजल प्रवाह। इस प्रवाह की दिशा भी वही होती है जो नदी क ...

                                               

खड़ीन

खड़ीन खेत के किनारे सिद्ध-पाल बाँधकर वर्षा-जल को कृषि भूमि पर संग्रह करने तथा इस प्रकार संग्रहीत जल से कृषि भूमि में पर्याप्त नमी पैदाकर उसमें फसल उत्पादन करने की एक परम्परागत तकनीक है। मरुस्थल में जल-संग्रह तकनीकों का विवरण बिना खड़ीन के नाम से ...

                                               

खारा जल

खारा जल अथवा नमकीन पानी प्रकृति में पाए जाने वाले नमक युक्त जल को कहते हैं। सामान्यतः जल में घुले नमक में सोडियम क्लोराइड की प्रधानता होती है लेकिन अन्य लवण भी महत्वपूर्ण होते हैं। पानी में घुले नमक की मात्रा को लवणता कहते हैं और यह सामन्यतः ग्रा ...

                                               

जल अधिकार

जल अधिकार से आशय उस विधिक अधिकार से है जिसके अंतर्गत एक व्यक्ति को किसी जल स्रोत से पानी प्राप्त करने का अधिकार हो। वस्तुतः बार-बार यह रेखांकित किया गया है कि स्वच्छ जल की प्राप्ति व्यक्ति के जीवन से जुड़ी है और इसीलिए जीवन के अधिकार कि तरह यह भी ...

                                               

जल विवाद

जल विवाद एक ऐसी दशा है जिसमें पानी के उपयोग को लेकर दो या दो से अधिक राष्ट्रों, प्रान्तों या समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा और संघर्ष की स्थितियाँ बन जाती हैं। संविधान का अनुच्छेद 262 अंतरराज्यीय जल विवादों के न्यायनिर्णयन से संबंधित है, इसमें दो प्र ...

                                               

जलभर

जलभर, जलभृत अथवा जलभरा धरातल की सतह के नीचे चट्टानों का एक ऐसा संस्तर है जहाँ भूजल एकत्रित होता है और मनुष्य द्वारा नलकूपों से निकालने योग्य अनुकूल दशाओं में होता है। वैसे तो जल स्तर के नीचे की सारी चट्टानों में पानी उनके रन्ध्राकाश में अवश्य उपस ...

                                               

धरातलीय जल

धरातलीय जल या सतही जल वह जाल है जो पृथ्वी की सतह पर सरिताओं, नदियों, झीलों, तालाबों और आर्द्रभूमियों इत्यादि में पाया जाता है। इसे समुद्री जल, भूजल और वायुमण्डलीय जल से अलग समझा जा सकता है। यह जल चक्र का अभिन्न एवं महत्वपूर्ण हिस्सा है। जल को संस ...

                                               

भूजल

भूजल या भूगर्भिक जल धरती की सतह के नीचे चट्टानों के कणों के बीच के अंतरकाश या रन्ध्राकाश में मौजूद जल को कहते हैं। सामान्यतः जब धरातलीय जल से अंतर दिखाने के लिये इस शब्द का प्रयोग सतह से नीचे स्थित जल के रूप में होता है तो इसमें मृदा जल को भी शाम ...

                                               

मीठा जल

मीठा जल अथवा ताजा जल प्राकृतिक रूप से पृथ्वी पर पाया जाने वाला वह पानी है जो समुद्री और समुद्रतटीय लैगूनों के नमक मिश्रित जल से अलग है। इसे ऐसे जल के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें 0.5 भाग प्रति हजार से कम लवण घुले हुए हों। यह पृथ्वी पर कई ...

                                               

वर्षण

वर्षण या अवक्षेपण एक मौसम विज्ञान की प्रचलित शब्दावली है जो वायुमण्डलीय जल के संघनित होकर किसी भी रूप में पृथ्वी की सतह पर वापस आने को कहते हैं। वर्षण के कई रूप हो सकते हैं जैसे वर्षा, फुहार, हिमवर्षा, हिमपात और ओलावृष्टि इत्यादि। अतः वर्षा वर्षण ...

                                               

एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (भारत)

एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन या एकीकृत तटीय प्रबंधन तटीय क्षेत्रों के प्रबंधन की एक प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया धारणीयता की प्राप्ति के लिए तटीय क्षेत्रों के सभी पहलुओं, भौगोलिक और राजनीतिक सीमाओं को समाविष्ट करते हुए, पर एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तु ...

                                               

ज्वारनदीमुख

ज्वारनदीमुख सागर तट पर स्थित एक आधा-बंद खारे जल का समूह होता है जिसमें एक या एक से अधिक नदियाँ और झरने बहकर विलय होते हैं, और जो दूसरे अंत में खुले सागर से जुड़ा होता है। समय-समय पर ज्वारभाटा आकर इस से पानी व पानी में उपस्थित अन्य ढीला मलबा बाहर ...

                                               

द्वीपिका

लघुद्वीप या द्वीपिका किसी छोटे आकार के द्वीप को कहा जाता है। कभी-कभी इसके लिए टापू शब्द भी प्रयोग होता है हालांकि टापू शब्द से पर्याय एक बड़े आकार का द्वीप भी हो सकता है।

                                               

बाधा द्वीप

बाधा द्वीप तटों पर स्थित एक प्रकार के द्वीप होते हैं जो बहुत चपटे या ढेरों के रूप में जमा रेत के बने होते हैं और समुद्री लहरों व ज्वारभाटाओं द्वारा तट के समानांतर बन जाते हैं। यह अक्सर शृंखलाओं में बन जाते हैं जिनमें चंद द्वीपों से लेकर दर्ज़न से ...

                                               

महाद्वीपीय मग्नतट

महाद्वीपीय ताक सागर या महासागर में जल के भीतर धरती का एक ताक होता है जो किसी महाद्वीप का समुद्रतल से कम ऊँचाई वाला अंश हो। महाद्वीपीय ताक पर पानी की गहराई कम होती है और ताक के अन्त से आगे महाद्वीपीय ढलान में गहराई बढ़ने लगती है। हिमयुगों के दौरान ...

                                               

लवणता

लवणता पानी में नमक या लवण की मात्रा को कहते हैं। इसका मापन सामान्यतः g salt k g sea water {\displaystyle {\frac {g\ {\textrm {salt}}}{kg\ {\textrm {sea}}\ {\textrm {water}}}}} द्वारा किया जाता है जो एक विमाहीन राशि है।

                                               

शैल-भित्ति

समुद्री शब्दावली में, एक शैल-भित्ति या रीफ़ एक चट्टान, रेती या पानी की सतह के नीचे उपस्थित अन्य कोई संरचना है। बहुत सी शैल-भित्तियां अजैविक प्रक्रियाओं जैसे कि रेत के जमाव, लहरों द्वारा चट्टानों के कटाव आदि के द्वारा निर्मित होती हैं लेकिन इनका स ...

                                               

जल चक्र

जल चक्र पृथ्वी पर उपलब्ध जल के एक रूप से दूसरे में परिवर्तित होने और एक भण्डार से दूसरे भण्डार या एक स्थान से दूसरे स्थान को गति करने की चक्रीय प्रक्रिया है जिसमें कुजल की मात्रा का क्षय नहीं होता बस रूप परिवर्तन और स्थान परिवर्तन होता है। अतः यह ...

                                               

जल निकाय

जल निकाय पृथ्वी की सतह पर जल के एकत्रित स्वरूप को कहते हैं। यह महासागर, सागर अथवा छोटे तालाबों एवं कुंडों के रूप में हो सकते हैं। इनमें सतह पर प्रवाहमान जल के रूप में स्थित नदियों और नालों इत्यादि को भी शामिल किया जाता है।

                                               

पर्यावरण भूगोल

पर्यावरण भूगोल पर्यावरणीय दशाओं, उनकी कार्यशीलता और तकनीकी रूप से सबल आर्थिक मानव और पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्यययन स्थानिक तथा कालिक सन्दर्भों में करता है। यह एक तरह का संश्लेषणात्मक विज्ञान है और इसे इंटीग्रेटेड भूगोल समन्वयात्मक भूगोल के र ...

                                               

पर्यावरणीय अवनयन

पर्यावरणीय अवनयन के अंतर्गत पर्यावरण में होने वाले वे सारे परिवार्तन आते हैं जो अवांछनीय हैं और किसी क्षेत्र विशेष में या पूरी पृथ्वी पर जीवन और संधारणीयता को खतरा उत्पन्न करते हैं। अतः इसके अंतर्गत प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का क्षरण ...

                                               

भारतीय वानिकी

भारत में वानिकी एक प्रमुख ग्रामीण आर्थिक क्रिया, जनजातीय लोगों के जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू और एक ज्वलंत पर्यावरणीय और सामाजिक-राजनैतिक मुद्दा होने के साथ ही पर्यावरणीय प्रबंधन और धारणीय विकास हेतु अवसर उपलब्ध करने वाला क्षेत्र भी है। खाद् ...

                                               

भूजैवरसायन चक्र

भूजैवरसायन चक्र अथवा जैवभूरसायन चक्र एक पारिस्थितिकीय संकल्पना है जिसके अंतर्गत किसी पारितंत्र में पदार्थों के चक्रण को दर्शाया जाता है। यह पारितंत्र की कार्यशीलता का अभिन्न अंग है। इसके विभिन्न रूप हैं जैसे, कार्बन चक्र, जल चक्र इत्यादि।

                                               

रन्ध्राकाश

रन्ध्राकाश अथवा रन्ध्राकाशता किसी ठोस पदार्थ, जैसे कि चट्टान या मिट्टी, के कणों के बीच की खाली जगह को कहते हैं। यह भूजल के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण कारक है और पानी के लिये चट्टानों की पारगम्यता इसी रंध्राकाश की मात्रा के ऊपर निर्भर होती है। किसी ...

                                               

हिमालय के हिमनद

हिमालय के हिमनद से तात्पर्य उन हिमनदों से है जो हिमालय पर्वत श्रेणी पर पाए जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद हिमालय पर सबसे ज्यादा बर्फ़ पायी जाती है और हिमालय के हिमनद लगभग ४०,००० वर्ग कि॰मी॰ क्षेत्पर फैले हैं और इ ...

                                               

अनाच्छादन

अनाच्छादन भूपटल पर परिवर्तन लाने वाली कई प्रक्रियाओं का समूह है जिसके अंतर्गत अत्यंत मंथर गति से पृथ्वी की ऊपरी सतह कि चट्टानों का कटाव और क्षरण होता रहता है और भूपटल समतलता की ओर प्रवृत होता है।अनाच्छादन के प्रक्रमों को दो प्रमुख वर्गों में बाँट ...

                                               

अपक्षय

अपक्षय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पृथ्वी की सतह पर मौजूद चट्टानें में टूट-फूट होती है। यह अपरदन से अलग है, क्योंकि इसमें टूटने से निर्मित भूपदार्थों का एक जगह से दूसरी जगह स्थानान्तरण या परिवहन नहीं होता। यह अवघटना इन सितु होती है, इसके बाद निर ...

                                               

अपरदन

अपरदन वह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें चट्टानों का विखंडन और परिणामस्वरूप निकले ढीले पदार्थों का जल, पवन, इत्यादि प्रक्रमों द्वारा स्थानांतरण होता है। अपरदन के प्रक्रमों में वायु, जल तथा हिमनद और सागरीय लहरें प्रमुख हैं।

                                               

अपरदन-चक्र

समुद्रतल के ऊपर उठने के उपरांत धरातल के किसी भाग पर होने वाली भूम्याकृतियों के क्रमिक परिवर्तन को ही अपरदन-चक्र य क्षयचक्र या अपक्षयचक्र अथवा भूम्याकृतिचक्र कहते हैं।

                                               

अवकूट

अवकूट या लैपीज़ का निर्माण तब होता हैं जब कार्स्ट क्षेत्रों में जल के द्वारा घुलन क्रिया के कारण ऊपरी बाह्य सतह अत्यधिक ऊबड-खाबड एवं पतली शिखरिकाओं तथा संकरे गड्ढ़ों वाली हो जाती हैं। इनका निर्माण हो जाने के बाद चूना पत्थर की सतह इतनी असमान और नु ...

                                               

आश्चुताश्म

कन्दरा की छत से रिसता हुवा जल धीरे-धीरे टपकता रहता हैं। इस जल में अनेक पदार्थ घुले रहते हैं। अधिक ताप के कारण वाष्पीकरण होने पर जल सूखने लगता हैं तथा कन्दरा की छत पर पदार्थों का निक्षेप होने लगता हैं। इस निक्षेप की आक्र्ति परले स्तंभ की तरह होती ...

                                               

उपनदी

उपनदी या सहायक नदी ऐसे झरने या नदी को बोलते हैं जो जाकर किसी मुख्य नदी में विलय हो जाती है। उपनदियाँ सीधी किसी सागर या झील में जाकर नहीं मिलतीं। कोई भी मुख्य नदी और उसकी उपनदियाँ एक जलसम्भर क्षेत्र बनती हैं जहाँ का पानी उपनदियों के ज़रिये मुख्य न ...

                                               

कार्स्ट

कार्स्ट स्थलाकृतियाँ सामान्यतः घुलनशील चट्टानों वाले क्षेत्रों में जल की क्रिया द्वारा बनी स्थलाकृतियाँ हैं। इनका नामकरण यूगोस्लाविया के कार्स्ट प्रदेश के आधापर हुआ है जहाँ ये स्थलरूप बहुतायत से पाए जाते हैं। भारत में ऐसी स्थलाकृतियाँ रीवाँ के पठ ...

                                               

जलप्रपात

जल प्रपात अथवा झरना एक प्रमुख प्रवाही जल कृत अपरदनात्मक स्थलरुप हैं और जलस्रोत हैं। प्राकृतिक झरने कई नदियों के उद्गम हैं। भारत का सबसे ऊंचा जलप्रपात = महात्मा गांधी जलप्रपात उंचाई =293 मीटर अन्य नाम = जोग,गरसोपा नदी = शबरती नदी कर्नाटक

                                               

निश्चुताश्म

कन्दरा की छत से टपकता हुआ जल फर्श पर धीरे-धीरे एकत्रित होता रहता है। इससे फर्श पर भी स्तंभ जैसी आकृति बनने लगती है। यह विकसित होकर छत की ओर बढ़ने लगती हैं।

                                               

पुराचुम्बकत्व

पराचुम्बकत्व से भ्रमित न हों। पुराचुम्बकत्व अध्ययन की वह शाखा है जो चट्टानों, अवसादों या अन्य ऐसी चीजों में उनके निर्माण के समय संरक्षित चुम्बकीय गुणों का अध्ययन करती है। इस प्रकार विज्ञान की यह शाखा प्राचीन भूवैज्ञानिक घटनाओं के अध्ययन में सहायक ...