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बृहद्रथ

बृहद्रथ नाम से कई व्यक्तियों का उल्लेख वैदिक तथा पुराणेतिहास ग्रंथों में हुआ है, जो निम्नांकित हैं: १ पुराकालीन व्यक्ति की स्थिति से बृहद्रथ का सबसे प्राचीन उल्लेख ऋग्वेद १.३६-१८ में दो बार नववास्त्व के साथ हुआ है जो इंद्र से पराजित होकर मारा गया ...

                                               

मदालसा

मदालसा विश्वावसु गन्धर्वराज की पुत्री तथा ऋतुध्वज की पटरानी थी। इनका ब्रह्मज्ञान जगद्विख्यात है। पुत्रों को पालने में झुलाते-झुलाते इन्होंने ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया था।वे अनासक्त होकर अपने कर्तव्य का पालन करती जिसके फल स्वरुप उनके पुत्र बचपन से ...

                                               

मयासुर

मय या मयासुर, कश्यप और दुन का पुत्र, नमुचि का भाई, एक प्रसिद्ध दानव। यह ज्योतिष तथा वास्तुशास्त्र का आचार्य था। मय ने दैत्यराज वृषपर्वन् के यज्ञ के अवसर पर बिंदुसरोवर के निकट एक विलक्षण सभागृह का निर्माण कर अपने अद्भुत शिल्पशास्त्र के ज्ञान का पर ...

                                               

महाभारत के पात्र

शान्तनु धृतराष्ट्र द्रुपद शल्य परशुराम कीचक अभिमन्यु अम्बालिका राजा विराट नारायणी-सेनाप्रमुख कृतवर्मा विदुर वेदव्यास अम्बा विचित्रवीर्य रुक्मी सुभद्रा अम्बिका गंगादेवी सुदेष्णा दासराजपुत्री सत्यवती पाण्डु द्रोणाचार्य-भार्या कृपि उत्तरा विकर्ण अश् ...

                                               

मातरिश्वा

मातरिश्वा वेदों में यह शब्द वायु के अर्थ में नहीं प्रयुक्त हुआ है, पर यास्क तथा सायण के मतानुसार यह पवन का ही दूसरा नाम है। ऋग्वेद में यह अग्नि तथा उसको उत्पन्न करनेवाले देवता के लिये प्रयुक्त किया गया है और उसी में अन्यत्र वर्णन है कि मनु के लिय ...

                                               

युधामन्यु

युधामन्यु पांचालनरेश जो महाभारत में पांडवों की ओर से लडे थे। इनके भाई का नाम उत्तमौजा था और दोनो ही परम पराक्रमी एवं धनुर्धर थे। कहते हैं, इनका वास्तविक नाम कुछ और ही था पर अपने शत्रुओं से क्रोधातुर होकर युद्ध करने से इनका यह नाम प्रसिद्ध हो गया।

                                               

रक्तबीज

धार्मिक मान्यता के अनुसार वह एक ऐसा दानव था जिसे यह वरदान था की जब उसके लहू की बूंद इस धरती पर गिरेगी तब हर बूंद से एक नया रक्तबीज जन्म ले लेगा जो बल, शरीऔर रूप से मुख्य रक्तबीज के समान ही होगा।

                                               

रोमहर्षण

रोमहर्षण, क्षत्रिय पिता तथा ब्राह्मणी माता से सूत कुलोत्पन्न, व्यासकृत आद्यपुराण की छह संहिताओं का निर्माता, पुराणकथन के लिए ऋषियों द्वारा गौरवान्वित, अपनी रोमांचित कर देनेवाली वक्तृत्वशक्ति के कारण लोमहर्षण अथवा रोमहर्षण कहलाया जो नैमिषारण्य में ...

                                               

लोपामुद्रा

लोपामुद्रा प्राचीन भारत की एक नारी दार्शनिक थीं। वे महर्षि अगस्त्य की पत्नी थी जिनकी सृष्टि उन्होंने स्वयं की थी। इनको वरप्रदा और कौशीतकी भी कहते हैं। इनका पालनपोषण विदर्भराज निमि या क्रथपुत्र भीम ने किया इसलिए इन्हें वैदर्भी भी कहते थे। अगस्त्य ...

                                               

वाहन (पौराणिक)

पौराणिक सन्दर्भ में वाहन उन पशु-पक्षियों को कहते हैं जो देवताओं एवं अन्य पौराणिक पात्रों को वहन करते हैं। उदाहरण के लिए शिव का वाहन नन्दी है और दुर्गा का वाहन सिंह है।

                                               

विरोचन

विरोचन हिन्दू पौराणिक गाथाओ के अनुसार भक्त प्रह्लाद का पुत्र तथा बली का पिता और एक असुर राजा था। छान्दोग्य उपनिषद् के अनुसार इन्द्और वह प्रजापति के पास आत्मन् के बारे में शिक्षा ग्रहण करने गये और ३२ वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन किया। लेकिन अंत में ...

                                               

शची

शची इन्द्र की पत्नी और पुलोमा की कन्या थीं। द्रौपदी इन्हीं के अंश से उत्पन्न हुई थीं और ये स्वयं प्रकृति की अन्यतम कला से जन्मी थीं। जयंत शची के ही पुत्र थे। शची को इन्द्राणी, ऐन्द्री, महेन्द्री, पुलोमजा, पौलोमी आदि नामों से भी जाना जाता है। ब्रह ...

                                               

शबलाश्व

जब दक्ष की बनाई मानस सृष्टि में वृद्धि नही हुई तो ब्रह्म जी ने उन्हें मैथुनजनित सृष्टि की रचना करने की प्रेरणा दी। इस प्रकार दक्ष ने असिक्नी से विवाह किया। असिक्नी के गर्भ से दस हजार पुत्र उत्पन्न हुए जो हर्यश्व कहलाए। परंतु नारद ने उन्हें भिक्षु ...

                                               

शुनक

शुनक, रुरु के पुत्र एक महर्षि, जिनकी उत्पत्ति प्रमद्वरा के गर्भ से हुई थी। पुराणों के प्रसिद्ध शौनक के यही पितामह है । शौनक को इनका पुत्र भी कहा गया है । श्री कृष्ण का दूत बनकर ये हस्तिनापुर गए थे।

                                               

श्वेतकेतु

श्वेतकेतु इस नाम के कई व्यक्ति हुए हैं; 1 महर्षि उद्दालक के पुत्र जो कहीं उत्तराखंड में रहते थे। इन्होंने एक बार ब्राह्मणों के साथ दुर्व्यवहार किया जिससे इनके पिता ने इसका परित्याग कर दिया। इन्होंने यह नियम प्रचारित किया कि पति को छोड़कर पर पुरुष ...

                                               

सत्यभामा

सत्यभामा सत्राजित की कन्या और कृष्ण की चार मुख्य स्त्रियों में से एक। इनसे कृष्ण को दस पुत्र हुए जिनके नाम भानु, सुभानु, स्वरभानु आदि थे। सूर्य ने जो स्यमंतक मणि सत्यभामा के पिता को दी थी उसे शतधन्वन ने सत्राजित की हत्या करके छीन लिया। अंत में यह ...

                                               

सप्तमातृका

हिन्दुओं के शाक्त सम्प्रदाय में सप्तमात्रिरिका का उल्लेख महाशक्ति की सककारी सात देवियों के लिये हुआ है। ये देवियाँ ये हैं- ब्रह्माणी, वैष्णवी, माहेश्वरी, इन्द्राणी, कौमारी, वाराही और चामुण्डा अथवा नारसिंही। इन्हें मातृका या मातर भी कहते हैं। किसी ...

                                               

सहस्रबाहु

सहस्रबाहु नाम विष्णु, कार्तवीर्य अर्जुन तथा वाणासुर का है। इन्हें कभी-कभी सहस्रभुज भी कहते हैं। इसी नाम का बलिपुत्र बाणराज भी हुआ है जिसका उल्लेख श्रीमद्भागवत में यों आया है- बाण: पुत्रशतज्येष्ठी बलेरासीन्महात्मन:। सहस्रबाहुर्वाद्येन ताण्डवे हतोष ...

                                               

सुदेषणा

महाभारत में, सुदेष्णा, राजा विराट की पत्नी थी। विराट के राजमहल में ही पांडवों ने अपने निर्वासन के दौरान छुपकर एक वर्ष बिताया था। सुदेषणा उत्तर, उत्तरा, श्वेता और शंख की माँ थी। उसका कीचक नामक एक भाई था।

                                               

सुन्द और उपसुन्द

सुन्द और उपसुन्द हिन्दू पौराणिक कथाओं के दो असुर पात्र हैं। वे भाई थे और जम्भ के पुत्र थे। इनकी कथा रामायण में आयी है। बड़े होकर बहुत बलवान हुए। उनकी मति सदा एक सी रहती थी।

                                               

हर्यश्व

जब दक्ष की बनाई मानस सृष्टि में वृद्धि नही हुई तो ब्रह्म जी ने उन्हें मैथुनजनित सृष्टि की रचना करने की प्रेरणा दी। इस प्रकार दक्ष ने असिक्नी से विवाह किया। असिक्नी के गर्भ से दस हजार पुत्र उत्पन्न हुए जो हर्यश्व कहलाए। पिता दक्ष ने उनको सृष्टि रच ...

                                               

हिरण्याक्ष

हिरण्याक्ष एक असुर था जिसका वध वाराह अवतारी विष्णु ने किया था। वह हिरण्यकशिपु का छोटा भाई था।, विष्णुपुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार दैत्यों के आदिपुरुष कश्यप और उनकी पत्नी दिति के दो पुत्र हुए। हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। हिरण्याक्ष माता धरती क ...

                                               

लख़मी

लख़मी या बनू लख़्म​ या मुनथ्री प्राचीनकाल में अरब ईसाईयों का एक समुदाय था जो दक्षिणी इराक़ में बसा करते थे और जिन्होनें २६६ ईसवी में अल-हीरा नमक शहर को अपनी राजधानी बनाया। उस युग के अरब कवियों ने इस शहर की तुलना स्वर्ग से की थी और एक अरबी मुहावरे ...

                                               

समूद

समूद या थमूद 8 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से पैगम्बर हज़रत मुहम्मद साहब के समय के निकट ज्ञात हेजाज़ अरब में एक प्राचीन सभ्यता थी। थमूद सभ्यता अरब प्रायद्वीप के उत्तर में स्थित थी। यद्यपि माना जाता है कि वे दक्षिणी अरब में पैदा हुए थे, अरबी परंपरा ने उ ...

                                               

अब्द अर-रहमान चतुर्थ

अब्द अर-रहमान चतुर्थ ; 1018 ईस्वी में सुलेमान द्वितीय के उत्तराधिकारी और अल अन्डालुस के अन्तिम कोर्डोबा उमय्यद खलीफा थे इनकी शासनकाल के दौरान एक युद्ध में हत्या करदी थी।

                                               

अब्द अर-रहमान द्वितीय

अब्द अर- रहमान द्वितीय ; Abd ar-Rahman II, अल-अन्डालस में उमय्यद खिलाफत की शाखा कोर्डोबा अमीरात के चारवें अमीर थे जिन्होने 822-852 ईस्वी तक शासन किया।

                                               

अब्द अल-रहमान प्रथम

अब्द अल-रहमान. पूरा नाम: अब्द अल-रहमान इब्न मुआविया इब्न हिशाम इब्न अब्द अल मालिक बिन मरवान; Abd al-Rahman I, full name. Abd al-Rahman ibn Muawiya ibn Hisham ibn Abd al-Malik ibn Marwan, कोर्डोबा खिलाफत व अमीरात के अमीर थे जिन्होने 756 से 788 ईस् ...

                                               

अब्दुल अज़ीज़ इब्न मूसा

अब्द अल-अज़ीज़ इब्न मुसा इब्न नुसायर आधुनिक स्पेन और पुर्तगाल में अल-अंडलस के गवर्नर थे। वह इफिरिया के राज्यपाल मूसा इब्न नुसर के पुत्र थे। अब्द अल-अज़ीज़ इब्न मुसा इब्न नुसर का पिता के साथ राजनीतिक और सैन्य भागीदारी का लंबा इतिहास था।.

                                               

अल-कासिम अल-मामुन

अल-कासिम अल-मामुन इब्न हम्मुद ; Al-Qasim al-Mamun ibn Hammud, स्पेन के कोर्डोबा खलीफा थे जिन्होंने दो वार 1018 से 1021 तक और फिर कम समय के लिए 1023 ईस्वी में किया था वह हम्मुद वंश के एक सदस्य थे।

                                               

अल-मुंदिर

अल-मुंदिर ; Al-Mundhir, उमय्यद खिलाफत की कोर्डोबा अमीरात शाखा के खलीफा थे जिन्होने 886 से 888 ईस्वी तक शासन किया वह मुहम्मद बिन अब्द अल-रहमान के पुत्र थे।

                                               

अल-वालिद द्वितीय

वालिद इब्न यज़ीद या वालिद द्वितीय ; Walid ibn Yazid or Walid II,‏‎ एक उमय्यद खलीफा था जिसने 743 से 744 ईस्वी तक शासन किया और हिशाम इब्न अब्द अल-मालिक का भतीजा था।

                                               

अल-वालिद प्रथम

अल-वालिद इब्न अल-मालिक ; या अल-वालिद प्रथम: Al-Walid ibn Abd al-Malik‏ or Al-Walid I, एक उमय्यद, खलीफा थे जिन्होने 705 से 715 अपनी मृत्यु तक शासन किया इनके शासनकाल में सबसे बड़ा विस्तार देखा गया जो सफल सैन्य अभियानो के रूप में था। केंद्रीय एशिया, ...

                                               

अल-हाकम प्रथम

अल-हाकम इब्न हिशाम इब्न अब्द-अर-रहमान प्रथम ; Al-Hakam Ibn Hisham Ibn Abd-ar-Rahman I, उमय्यद खिलाफत की कोर्डोबा अमीरात शाखा के अमीर थे जिन्होंने 796 से 822 ईस्वी तक अल-अन्डालस पर शासन किया था। इनके शासन काल में अनेक विद्रोह हुए जो ईसाइयो के उमय् ...

                                               

अली इब्न हम्मुद अल-नासिर

अली इब्न हम्मुद अल-नासिर ; Ali ibn Hammud al-Nasir, कोर्डोबा खिलाफत के छठे खलीफा जिन्होंने 1016 से 1018 ईस्वी तक शासन किया और शासनकाल के दौरान 1018 ईस्वी में ही मृत्यु हो गयी थी। वह अल अंन्डालुस के हम्मुद वंश से थे।

                                               

इब्राहिम इब्न अल-वालिद

इब्राहिम इब्न अल-वालिद ; एक उमय्यद खलीफा थे और खलीफा अल-वालिद द्वितीय के पुत्र थे जिन्होने ईस्वी बहुत कम समय तक शासन किया जो राजनीतिक विरोधियो का कारण था।

                                               

उमय्यद ख़िलाफ़त

उमय्यद खिलाफत ; हजरत मुहम्मद साहब की मृत्यु के बाद स्थापित प्रथम रशीदुन चार खलीफाओं के बाद उमय्यद इस्लामी खिलाफत का हिस्सा बने, उमय्यद खलीफा बनू उमय्या बंश से या उमय्या के पुत्र जो मक्का शहर से जूड़े हुए थे। उमय्यद परिवार पहले रशीदुन खिलाफत के ती ...

                                               

कोर्डोबा अमीरात

कोर्डोबा अमीरात ; Emirate of Córdoba, इबेरिया प्रायद्वीप में एक स्वतंत्र इस्लामी राज्य था और राजधानी कोर्डोबा के साथ 756 और 929 के बीच अमीरात था। 711-718 ईस्वी में मुस्लिम उमय्यदो की हिस्पानिया विजय बाद इबेरिया प्रायद्वीप, उमय्यद खिलाफत के तहत एक ...

                                               

कोर्डोबा खिलाफत

कोर्डोबा खिलाफत ; Caliphate of Córdoba उमय्यद वंश द्वारा शासित उत्तरी अफ्रीका के एक भाग के साथ इबेरिया प्रायद्वीप में एक इस्लामी राज्य था। कोर्डोबा में राजधानी के साथ राज्य 929 से 1031 ईस्वी आस्तिव में रहा जो क्षेत्र पूर्व में उमय्यद खिलाफत की शा ...

                                               

तारिक इब्न ज़ियाद

तारिक इब्न ज़ियाद एक मुस्लिम कमांडर थे जिन्होंने 711-718 ईस्वी में विसिगोथिक हिस्पैनिय की इस्लामी नाम अरबी नाम जबल तारिक का स्पेनिश व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है "तारिक का पर्वत", जिसका नाम उनके नाम पर रखा गया है।इनको इतिहास के बहतरीन कमांंडरोंं म ...

                                               

देबल

देबल एक प्राचीन भारतीय बंदरगाह थी जो आधुनिक पाकिस्तान के सिंध प्रान्त की राजधानी कराची के पास स्थित थी। यह मनोड़ा प्रायद्वीप के पास थी। इसका नाम पास के एक महान मंदिपर देवल पड़ा था जो बिगड़कर देबल बन गया। यह मकरान के तटवर्ती रेगिस्तान के पूर्वी छो ...

                                               

मरवान द्वितीय

मरवान इब्न मुहम्मद इब्न मरवान ; या मरवान द्वितीय, एक उमय्यद खलीफा थे जिन्होने 744 से 750 ईस्वी तक शासन किया थे और दमिश्क में उमय्यद खिलाफत के अन्तिम खलीफा। इनकी मृत्यु के बाद अब्बासी क्रांति शुरू हुई जो दमिश्क से उमय्यदो के पतन का मूल कारण बनी जि ...

                                               

मुआविया द्वितीय

मुआविया द्वितीय ; और, मुआविया इब्न यज़ीद, Muawiya II or Muawiya ibn Yazid: उमय्यद खिलाफत का तीसरे खलीफा था जिन्होने अपने पिता यज़ीद प्रथम की मृत्यु के बाद शासन किया जो उमय्यद वंश के एक सफल खलीफा माना जाता है इनका शासनकाल 683-684 ईस्वी तक रहा था।

                                               

मुआविया प्रथम

मुआविया प्रथम ; Muawiyah I: रशीदुन ख़िलाफत में तीसरे ख़लीफा उस्मान बिन अफ्फान के भतीजे थे ख़िलाफते राशिदा में ख़लीफा हज़रत उमर रज़ी० से हज़रत अली रज़ी० तक सीरिया के गवर्नर बने रहे। इन्होनें उमय्यद वंश या उमय्यद खिलाफत की स्थापना की थी।

                                               

मुहम्मद द्वितीय कोर्डोबा

मुहम्मद द्वितीय अल-महंदी ; Mohammed II al-Mahdi, कोर्डोबा, स्पेन के चौथे खलीफा, अल-अंदलुस में उमय्याद वंश से थे। 7.000 सैनिकों की अपनी सेना को तोड़ने के बाद, वह अपने कई विषयों के विरोध का स्रोत बन गए थे। अल-महदी ने सुलेमान द्वितीय के राजनीतिक प्र ...

                                               

मुहम्मद प्रथम कोर्डोबा

मुहम्मद प्रथम और मुहम्मद इब्न अब्द अर-रहमान अल-वस्त, Muhammad I or Muhammad ibn Abd ar-Rahman al-Wast, अल अन्डलास में 852 से 886 ईस्वी तक कोर्डोबा के उमय्यद अमीर थे।

                                               

यज़ीद तृतीय

यज़ीद इब्न अल-वालिद इब्न अब्द अल-मालिक ; Yazid ibn al-Walid ibn Abd al-Malik or Yazid III,एक उमय्यद खलीफा था जिसने 15 अप्रैल से 3 अक्टूबर 744 ईस्वी तक छह महीने तक शासन किया और शासन के दौरान मृत्यु हो गयी थी। यज़ीद एक फारसी राजकुमारी का पुत्र था ज ...

                                               

सुलेमान इब्न अब्द अल-मालिक

सुलेमान इब्न अब्द अल मालिक ; Sulayman bin Abd al-Malik, एक उमय्यद खलीफा थे जिन्होने 715 से 717 ईस्वी तक शासन किया इनके पिता अब्द अल मालिक इब्न मरवान थे और अपने पुर्वधिकारी अल-वालिद प्रथम के छोटे भाई थे।

                                               

सुलेमान इब्न अल-हाकम

सुलेमान द्वितीय इब्न अल-हाकम, और सुलेमान अल-मस्ताइन; Sulayman II ibn al-Hakam, कोर्डोबा के पाँचवें उमय्यद खलीफा थे जिन्होने 1009 से 1013 के बीच और 1013 से 1016 ईस्वी तक अल अन्डालुस पर शासन किया था।

                                               

हिशाम द्वितीय

हिशाम द्वितीय ; अल-हाकम द्वितीय का पुत्और कोर्डोबा का खलीफा 976 ईस्वी में 11 वर्ष की आयु में अपने पिता अल-हाकम द्वितीय के बाद खलीफा बना था। हिशाम अपने परिग्रहण के समय एक नबालिग था जिस कारण शासन के लिए अयोग्य था लेकिन जफर अल-मुशफी ने हिशाम के लिए ...

                                               

हिशाम प्रथम

हिशाम प्रथम और हिशाम अल-रेडा; Hisham I or Hisham Al-Reda,कोर्डोबा के दूसरे उमय्यद खलीफा थे जिन्होने अंडालुस पर 7‏88‎ से 796 ईस्वी तक शासन किया हिशाम का जन्म कोर्डोबा में 757 ईस्वी में हुआ था वह अब्द अल-रहमान प्रथम के भाई थे।