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नयी कविता (पत्रिका)

नयी कविता हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल में प्रयोगवाद से कुछ भिन्नताओं के साथ विकसित हिन्दी कविता की नवीन धारा का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्द्धवार्षिक पत्रिका थी। इसे नयी कविता आंदोलन के मुखपत्र की तरह माना जाता है। इसका प्रकाशन सन् १९५४ में आरंभ ...

                                               

नयी कहानी

आजादी के बाद हिन्दी कहानी को नया संस्कार देने वाले कहानीकारों ने कहानी को नयी कहानी के नाम से अभिहित किया। नयी कहानी का जन्म 1956 से माना जाता है। 1956 में भैरव प्रसाद गुप्त के संपादन में नयी कहानी नाम की पत्रिका का एक विशेषांक निकाला। इसी विशेषा ...

                                               

नाथ साहित्य

सिद्धों के महासुखवाद के विरोध में नाथ पंथ का उदय हुआ। नाथों की संख्या नौ है। इनका क्षेत्र भारत का पश्चिमोत्तर भाग है। इन्होंने सिद्धों द्वारा अपनाये गये पंचमकारों का नकार किया। नारी भोग का विरोध किया। इन्होंने बाह्याडंबरों तथा वर्णाश्रम का विरोध ...

                                               

नियम अनियम दोष

काव्य में एक प्रकार का अर्थ दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

निशा निमंत्रण(हरिवंशराय बच्चन)

निशा निमंत्रण हरिवंशराय बच्चन के गीतों का संकलन है जिसका प्रकाशन १९३८ ई० में हुआ। ये गीत १३-१३ पंक्तियों के हैं जो कि हिन्दी साहित्य की श्रेष्ठतम उपलब्धियों में से हें। ये गीत शैली और गठन की दृष्टि से अतुलनीय है। नितान्त एकाकीपन की स्थिति में लिख ...

                                               

नेवाज (रीतिग्रंथकार कवि)

नेवाज, महाराज छत्रसाल के समकालीन एक हिंदी कवि थे। इनका जन्म, ठाकुर शिवसिंह के कथनानुसार, संवत्‌ १७३९ में हुआ था। इनका लिखा हुआ केवल शकुंतला नाटक देखने में आया है। कुछ फुटकर छंद भी इधर उधर पुस्तकों में बिखरे दिख पड़ते है। कहते हैं कि महाराज छत्रसा ...

                                               

न्यून पद दोष

न्यून काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष है। परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों ...

                                               

पजनेस

पजनेस का जन्मसंवत् अज्ञात है। शिवसिंह सेंगर के अनुसार इनका उपस्थितिकाल सं. १८७२वि. है जिसे कुछ लोगों ने भ्रमवश इनका जन्मकाल मान लिया है। रामचंद्र शुक्ल के अनुसार इनका कविताकाल संवत् १९०० के आसपास माना जा सकता है। ये बुंदेलखंड के पन्ना प्रदेश में ...

                                               

परमानंद दास

परमानन्ददास वल्लभ संप्रदाय के आठ कवियों में एक कवि जिन्होने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का अपने पदों में वर्णन किया। इनका जन्म काल संवत १६०६ के आसपास है। अष्टछाप के कवियों में प्रमुख स्थान रखने वाले परमानन्ददास का जन्म कन्नौज में एक निर्धन ...

                                               

पुनरुक्ति दोष

काव्य में एक प्रकार का शब्द दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

प्रकाशित विरुद्ध दोष

काव्य में एक प्रकार का अर्थ दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

प्रतापनारायण मिश्र

प्रतापनारायण मिश्र के प्रमुख लेखक, कवि और पत्रकार थे। वह भारतेंदु निर्मित एवं प्रेरित हिंदी लेखकों की सेना के महारथी, उनके आदर्शो के अनुगामी और आधुनिक हिंदी भाषा तथा साहित्य के निर्माणक्रम में उनके सहयोगी थे। भारतेंदु पर उनकी अनन्य श्रद्धा थी, वह ...

                                               

प्रतिमान (पत्रिका)

प्रतिमान विकासशील समाज अध्ययन पीठ की ओर से प्रकाशित होने वाली समाज-विज्ञान और मानविकी की पूर्व-समीक्षित अर्धवार्षिक पत्रिका है। इसका पूरा नाम प्रतिमान समय समाज संस्कृति है। इसके प्रधान संपादक अभय कुमार दुबे एवं संपादक आदित्य निगम, रविकांत तथा राक ...

                                               

प्रसिद्ध दोष

काव्य में एक प्रकार का अर्थ दोष परिभाषा:- आचार्य मम्मट के अनुसार काव्य के मुख्य अर्थ रस के विधात तत्व ही दोष है| प्रसाद ने साहित्यदर्पण में "रसापकर्षका दोष:" कहकर रस का अपर्कष करने वालो तत्वों को दोष बताया है| दोषों का विभाजन:--- दोषों का विभाजन ...

                                               

प्रियप्रवास

प्रियप्रवास, अयोध्यासिंह "हरिऔध" की हिन्दी काव्य रचना है। हरिऔध जी को काव्यप्रतिष्ठा "प्रियप्रवास" से मिली। इसका रचनाकाल सन् 1909 से सन् 1913 है। यह महाकाव्य खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है

                                               

बचनेश

बचनेश का जन्म सं0-1932 में फर्रुखाबाद में हुआ था। आपकी प्रतिभा बहुमुखी थी। यही कारण है कि आपने गद्य और पद्य दोनों में ही सफलता हासिल की। प्रमुख काव्य ग्रंथों में- नीति कुंडल, आनन्द लहरी, नवरत्न, मनोरंजिनी, बचनेश शतक, भारती भूषण, धर्म ध्वजा, धर्म ...

                                               

बाणभट्ट की आत्‍मकथा

बाणभट्ट की आत्मकथा आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी रचित एक ऐतिहासिक हिन्दी उपन्यास है। इसमें तीन प्रमुख पात्र हैं- बाणभट्ट, भट्टिनी तथा निपुणिका। इस पुस्तक का प्रथम प्रकाशन वर्ष 1946 में राजकमल प्रकाशन ने किया था। इसका नवीन प्रकाशन 1 सितम्बर 2010 को ...

                                               

बिहारी सतसई

सतसैया के दोहरे, ज्यों नैनन के तीर। देखन में छोटे लगे, बेधे सकल शरीर। बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाइ। सौह करे भौह्नी हँसे दैन कहे नाती जाई।। कहत, नटत, रीझत, खीझत, मिळत, खिलत, लजियात। भरे भौन में करत है, नैनन ही सों बात। मेरी भव- बाधा हरो राधा ...

                                               

बुंदेलखंड का काव्य

छत्रसाल के समय में जहां बुन्देलखण्ड को "इत जमुना उत नर्मदा, इत चम्बल उत टोंस" से जाना जाता है, वहीं भौगोलिक दृष्टि जनजीवन, संस्कृति और भाषा के संदर्भ से बुन्देला क्षत्रियों के वैभवकाल से जोड़ा जाता है। बुन्देली इस भू-भाग की सबसे अधिक व्यवहार में ...

                                               

बूँद और समुद्र

बूँद और समुद्र साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध हिन्दी उपन्यासकार अमृतलाल नागर का सर्वोत्कृष्ट उपन्यास माना जाता है। इस उपन्यास में लखनऊ को केंद्र में रखकर अपने देश के मध्यवर्गीय नागरिक और उनके गुण-दोष ...

                                               

बेनी प्रवीन(रीतिग्रंथकार कवि)

बेनी प्रवीन हिन्दी के रीतिग्रंथकार कवि हैं। बेनी प्रवीन का वास्तविक नाम बेनीदीन वाजपेयी था। ये संभवत: लखनऊ के निवासी थे। इनकी सुख्यात रचना नवरसतरंग है। इसमें दिगए विवरण से ज्ञात होता है कि इसकी रचना सन् १८१७ ई. में नवलकृष्ण की प्रशंसा में की गई थ ...

                                               

बेनी बंदीजन(रीतिग्रंथकार कवि)

बेनी बंदीजन रीतिकाल के हिन्दी कवि थे। बेनी बंदीजन रायबरेली जिले के बेंती नामक स्थान के निवासी और अवध के वजीर महाराज टिकैतराय के दरबारी कवि थे। शिवसिंह सेंगर के मतानुसार ये सं. १८९२ वि. में पर्याप्त वृद्ध होकर मरे थे। टिकैतराय प्रकाश अथवा अलंकारशि ...

                                               

बोधा

बोधा हिन्दी साहित्य के रीतिकालीन कवि थे। उन्हें विप्रलम्भ शृंगार रस की कविताओं के लिये जाना जाता है। वर्तमान उत्तर प्रदेश में बाँदा जिले के राजापुर ग्राम में जन्मे कवि बोधा का पूरा नाम बुद्धिसेन था। वर्तमान मध्य प्रदेश स्थित तत्कालीन पन्ना रियासत ...

                                               

ब्रजभाषा साहित्य

ब्रजभाषा विक्रम की १३वीं शताब्दी से लेकर २०वीं शताब्दी तक भारत के मध्यदेश की मुख्य साहित्यिक भाषा एवं साथ ही साथ समस्त भारत की साहित्यिक भाषा थी। विभिन्न स्थानीय भाषाई समन्वय के साथ समस्त भारत में विस्तृत रूप से प्रयुक्त होने वाली हिन्दी का पूर्व ...

                                               

भक्त कवियों की सूची

मीरा बाई सूरदास त्यागराज आलवार सन्त रहीम नयनार तुलसीदास कबीर नरसिंह महेता आण्डाल रविदास रैदास चैतन्य महाप्रभु मलिक मोहम्मद जायसी महिपतिalwat Ramakrishna Paramhansa तुकाराम जनाबाई पुरंदरदास

                                               

भक्ति काल

भक्ति काल अपना एक अहम और महत्वपूर्ण स्थान रखता है। आदिकाल के बाद आये इस युग को पूर्व मध्यकाल भी कहा जाता है। जिसकी समयावधि संवत् 1343ई से संवत् 1643ई तक की मानी जाती है। यह हिंदी साहित्य का श्रेष्ठ युग है। जिसको जॉर्ज ग्रियर्सन ने स्वर्णकाल, श्या ...

                                               

भगत धन्ना

धन्ना भगत एक रहस्यवादी कवि और जिसका तीन भजन आदि ग्रन्थ में मौजूद हैं । एक वैष्णव भक्त थे।धन्ना मूल रूप से राजस्थान के टोंक जिले में दूनी तहसील में धुवां कला गाँव मे जाट परिवार में पैदा हुआ थे। आज इनके स्थान पर इनका मंदिऔर गुरूद्वारा बना हुुुआ है। ...

                                               

भारत दुर्दशा

भारत दुर्दशा नाटक की रचना इ. में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा की गई थी। इसमें भारतेन्दु ने प्रतीकों के माध्यम से भारत की तत्कालीन स्थिति का चित्रण किया है। वे भारतवासियों से भारत की दुर्दशा पर रोने और फिर इस दुर्दशा का अंत करने का प्रयास करने का ...

                                               

भारत भारती (काव्यकृति)

भारत भारती, मैथिलीशरण गुप्तजी की प्रसिद्ध काव्यकृति है जो १९१२-१३ में लिखी गई थी। यह स्वदेश-प्रेम को दर्शाते हुए वर्तमान और भावी दुर्दशा से उबरने के लिए समाधान खोजने का एक सफल प्रयोग है। भारतवर्ष के संक्षिप्त दर्शन की काव्यात्मक प्रस्तुति "भारत-भ ...

                                               

भारतेन्दु युग

हिन्दी साहित्य के इतिहास में आधुनिक काल के प्रथम चरण को "भारतेन्दु युग" की संज्ञा प्रदान की गई है और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को हिन्दी साहित्य के आधुनिक युग का प्रतिनिधि माना जाता है। भारतेन्दु का व्यकितत्व प्रभावशाली था, वे सम्पादक और संगठनकर्ता थ ...

                                               

भाविक अलंकार

भाविक अलंकार अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार काव्य में प्रयुक्त एक अलंकार है। साहित्य दर्पण के अनुसार बीत चुके अथवा भविष्य में होने वाले अदभुत पदार्थ का प्रत्यक्ष के समान वर्णन करने को भाविक अलंकार कहते हैं।

                                               

भिखारीदास

भिखारीदास रीतिकाल के श्रेष्ठ हिन्दी कवि थे। कवि और आचार्य भिखारीदास का जन्म प्रतापगढ़ के निकट टेंउगा नामक स्थान में सन् 1721 ई० में हुआ था। इनकी मृत्यु बिहार में आरा के निकट भभुआ नामक स्थान पर हुई। भिखारीदास द्वारा लिखित सात कृतियाँ प्रामाणिक मान ...

                                               

भूपति राजा गुरुदत्त सिंह(रीतिग्रंथकार कवि)

गुरुदत्त सिंह भूपति, अमेठी के राजा थे। ये बंधुल गोत्रीय सूर्यवंशी कुशवाहा क्षत्रिय थे। इनके पिता राजा हिम्मतबहादूर सिंह स्वयं कवि एवं कवियों के आश्रयदाता थे। इस वंश के प्राय: सभी नरेश विद्वान्‌ थे और गुणियों का यथोचित सम्मान करने में रुचि रखते थे ...

                                               

भूषण (हिन्दी कवि)

भूषण रीतिकाल के तीन प्रमुख कवियों में से एक हैं, अन्य दो कवि हैं बिहारी तथा केशव। रीति काल में जब सब कवि शृंगार रस में रचना कर रहे थे, वीर रस में प्रमुखता से रचना कर भूषण ने अपने को सबसे अलग साबित किया। भूषण की उपाधि उन्हें चित्रकूट के राजा रूद्र ...

                                               

भ्रमरगीत

सूरसागर सूरदासजी का प्रधान एवं महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसमें प्रथम नौ अध्याय संक्षिप्त है, पर दशम स्कन्ध का बहुत विस्तार हो गया है। इसमें भक्ति की प्रधानता है। इसके दो प्रसंग कृष्ण की बाल-लीला’ और भ्रमरगीत-प्रसंग अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हैं। इसके वि ...

                                               

मतिराम

मतिराम, हिंदी के प्रसिद्ध ब्रजभाषा कवि थे। इनके द्वारा रचित "रसराज" और "ललित ललाम" नामक दो ग्रंथ हैं; परंतु इधर कुछ अधिक खोजबीन के उपरांत मतिराम के नाम से मिलने वाले आठ ग्रंथ प्राप्त हुए हैं। इन आठों ग्रंथों की रचना शैली तथा उनमें आए और उनसे सम्ब ...

                                               

मधुशाला

मधुशाला हिंदी के बहुत प्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन का अनुपम काव्य है। इसमें एक सौ पैंतीस रूबाइयां हैं। मधुशाला बीसवीं सदी की शुरुआत के हिन्दी साहित्य की अत्यंत महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें सूफीवाद का दर्शन होता है।

                                               

मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी

मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी भोपाल में जुलाई 1969 से हिन्दी ग्रंथ अकादमी स्थापित है। संस्था का दायित्व केन्द्र प्रवर्तित योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय स्तर की 25 विषयों की पाठयपुस्तकों के साहित्य को हिन्दी में प्रकाशित कर उपलब्ध कराना है। अक ...

                                               

महादेवी की काव्यगत विशेषताएँ

महादेवी वर्मा रहस्यवाद और छायावाद की कवयित्री थीं, अतः उनके काव्य में आत्मा-परमात्मा के मिलन विरह तथा प्रकृति के व्यापारों की छाया स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है। वेदना और पीड़ा महादेवी जी की कविता के प्राण रहे। उनका समस्त काव्य वेदनामय है। उन् ...

                                               

महेंद्र भटनागर

डॉ महेंद्र भटनागर भारतीय समाजार्थिक-राष्ट्रीय-राजनीतिक चेतना-सम्पन्न द्वि-भाषिक कवि एवं लेखक हैं। ये सन् 1946 से प्रगतिवादी काव्यान्दोलन से सक्रिय रूप से सम्बद्ध प्रगतिशील हिन्दी कविता के द्वितीय उत्थान के चर्चित हस्ताक्षरों में से एक हैं।

                                               

मानस का हंस

मानस का हंस अमृत लाल नागर द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यास है। 1972 में प्रकाशित यह उपन्यास रामचरितमानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर लिखा गया है। इस उपन्यास में तुलसीदास का जो स्वरूप चित्रित किया गया है, वह एक सहज मानव का रूप है। यही कारण ...

                                               

मिट्टी की बारात (काव्य)

मिट्टी की बारात शिवमंगल सिंह सुमनकृत हिंदी साहित्य का निरालाकृत सरोज-स्मृति के बाद दूसरा सबसे प्रसिद्ध एवं बड़ा शोकगीत है। वर्ष 1974 के साहित्य अकादमी पुरस्काऔर सोवियतलैंड नेहरू पुरस्कार से सम्मानित मिट्टी की बारात हिंदी के ओजस्वी कवि डॉ– शिवमंगल ...

                                               

मैनेजर पाण्डेय

मैनेजर पाण्डेय हिन्दी में मार्क्सवादी आलोचना के प्रमुख हस्‍ताक्षरों में से एक हैं। उन्हें गम्भीऔर विचारोत्तेजक आलोचनात्मक लेखन के लिए पूरे देश में जाना जाता है।

                                               

यथासंख्य अलंकार

अलंकार चन्द्रोदय के अनुसार हिन्दी कविता में प्रयुक्त एक अलंकार भिन्न धर्म वाले अनेक निर्दिष्ट अर्थों का अनुनिर्देश यथासंख्यक अलंकार कहलाता है। यथासंख्यक का अर्थ हैं संख्याक्रम के अनुसार। इसमें एक क्रम से कुछ पदार्थ पहले कहे जाते हैं, फिर उसी क्रम ...

                                               

रमैनी और बीजक

रमैनी या रमनिनी बीजक की प्रस्तावना है। कबीर ने रमैनी द्वारा हिंदू एवं मुस्लिम दोनों को समान रूप से धार्मिक शिक्षा दी है और अपने विचारों को निर्भयतापूर्वक समाज के समक्ष रखा है। रमैनी में चौरासी पद हैं। प्रत्येक पद में स्वतंत्र विचार हैं। प्रथम रमै ...

                                               

रस (काव्य शास्त्र)

श्रव्य काव्य के पठन अथवा श्रवण एवं दृश्य काव्य के दर्शन तथा श्रवण में जो अलौकिक आनन्द प्राप्त होता है, वही काव्य में रस कहलाता है। रस के जिस भाव से यह अनुभूति होती है कि वह रस है उसे स्थायी भाव होता है। रस, छंद और अलंकार - काव्य रचना के आवश्यक अव ...

                                               

रसलीन (रीतिग्रंथकार कवि)

रसलीन का पूरा नाम सैयद गुलाम नबी था। ये रसलीन उपनाम से कविता लिखते थे। इनके पिता का नाम सैयद मुहम्मद बाकर था। ये हरदोई जिला के प्रसिद्ध कस्बा बिलग्राम के रहने वाले थे। इनका जन्म सन् १६८९ ई० माना जाता है। इनकी मृत्यु सन् १७५० ई० में हुयी। एक प्रसि ...

                                               

रसिक गोविंद(रीतिग्रंथकार कवि)

रसिक गोविन्द रीतिकाल के कवि थे। वे निंबार्क संप्रदाय के एक महात्मा हरिव्यास की गद्दी के शिष्य थे और वृंदावन में रहते थे। हरिव्यास जी की शिष्य परंपरा में सर्वेश्वरशरण देव जी बड़े भारी भक्त हुए हैं। रसिक गोविंद उन्हीं के शिष्य थे। ये जयपुर के रहने ...

                                               

रांगेय राघव की कृतियां

घरौदा मुरदों का टीला लोई का ताना अँधेरे की भूख काका बौने और घायल फूल आँधी की नावें पराया चीवर प्रोफेसर विषाद मठ कब तक पुकारूँ देवकी का बेटा यशोधरा जीत गई रत्ना की बात पतझर अँधेरे के जुगनू लखिमा की आँखें कल्पना बंदूक और बीन सीधा साधा रास्ता बोलते ...

                                               

राजा यशवन्त सिंह

राजा यशवन्त सिंह जी जो कि तिर्वा नरेश के नाम से जाने जाते हैं, हिन्दी के प्रसिद्ध रीति कवियों में से एक हैं। शिवसिंह सरोज में इनके तीन ग्रंथों- ‘शृंगार शिरोमणि’, ‘भाषा भूषण’ और ‘शालिहोत्र’ का उल्लेख है। ‘शृंगार शिरोमणि’ की अनेक प्रतियाँ खोज में प ...