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एकांत के सौ वर्ष

एकांत के सौ वर्ष गेब्रियल गार्सिया मार्ख़ेस द्वारा लिखित एक उपन्यास है जो एक काल्पनिक बुएन्दीआ नामक परिवार की कई पीढ़ियों की दास्तान है। कहानी का घटनास्थल दक्षिण अमेरिका के कोलम्बिया देश में ओरिनोको नदी के किनारे स्थित माकोन्दो नाम का शहर है जिसे ...

                                               

आस्ट्रियाई साहित्य

जर्मन साहित्य से मूल का नाता होते हुए भी आस्ट्रियन साहित्य की निजी जातिगत विशेषताएँ हैं; जिनके निरूपण में आस्ट्रिया की भौगोलिक तथा ऐतिहासिक परिस्थितियों के अतिरिक्त काउंटर रिफ़ार्मेशन और पड़ासी देशों से घनिष्ठ, किंतु विद्वेषपूर्ण संबंधों का भी हा ...

                                               

पियेर पाउलो पसोलिनी

पियेर पाउलो पसोलिनी इतालवी फिल्म निर्देशक, लेखक, पत्रकाऔर विचारक थे। पसोलिनी यूरोपीय सिनेमा और साहित्य जगत में एक जाना पहचाना नाम है। हालांकि मार्क्सवादी विचारधारा और यौन वर्जनाओं पर उनकी साफगोई और बेबाक दृष्टिकोण के चलते उनको लेकर विवाद आज भी जा ...

                                               

नज़ीर अहमद देहलवी

नज़ीर अहमद देहलवी, जिन्हें औमतौपर डिप्टी नज़ीर अहमद बुलाया जाता था, १९वीं सदी के एक विख्यात भारतीय उर्दू-लेखक, विद्वान और सामाजिक व धार्मिक सुधारक थे। उनकी लिखी कुछ उपन्यास-शैली की किताबें, जैसे कि मिरात-उल-उरूस और बिनात-उल-नाश और बच्चों के लिए ल ...

                                               

नवाब मिर्ज़ा खान दाग़

नवाब मिर्जा खाँ दाग़, उर्दू के प्रसिद्ध कवि थे। इनका जन्म सन् 1831 में दिल्ली में हुआ। इनके पिता शम्सुद्दीन खाँ नवाब लोहारू के भाई थे। जब दाग़ पाँच-छह वर्ष के थे तभी इनके पिता मर गए। इनकी माता ने बहादुर शाह "ज़फर" के पुत्र मिर्जा फखरू से विवाह कर ...

                                               

अब्दुल मजीद द्वितीय

दूसरे अब्दुल मजीद अंतिम सुन्नी ख़लीफ़ा थे जिन्हें उस्मानी साम्राज्य की समाप्ति के बाद ख़ानदान का मुखिया चुना गया। 3 मार्च 1924 को तुर्की गणराज्य द्वारा ख़िलाफ़त की समाप्ति के ऐलान के साथ ही उनका ओहदा भी ख़त्म हो गया। वे 19 नवंबर 1922 से 3 मार्च 1 ...

                                               

निकोलस द्वितीय

निकोलस द्वितीय रूस का अन्तिम सम्राट, फिनलैण्ड का ग्रैण्ड ड्यूक तथा पोलैण्ड का राजा था। उसकी औपचारिक लघु उपाधि थी: निकोलस द्वितीय, सम्पूर्ण रूस का सम्राट तथा आटोक्रैट । रूसी आर्थोडोक्स चर्च उसे करुणाधारी सन्त निकोलस कहता है।

                                               

लेडी हार्डिंग

विनीफ्रेड सेलिना स्टर्ट १९१० से १९१६ तक भारत के वायसराय रहे, लॉर्ड हार्डिंग की पत्नी थी। विनीफ्रेड अलिंगटन के बैरन हेनरी जेरार्ड स्टर्ट की पहली पत्नी, लेडी ऑगस्टा बिंगहम ल्यूकन के तीसरे अर्ल जॉर्ज चार्ल्स बिंगहम की पहली पुत्री से दूसरी सन्तान थी। ...

                                               

अखिल भारतीय मुस्लिम लीग

अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ब्रिटिश भारत में एक राजनीतिक पार्टी थी और उपमहाद्वीप में मुस्लिम राज्य की स्थापना में सबसे कारफरमा शक्ति थी। भारतीय विभाजन के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम लीग इंडिया में एक नये नाम इण्डियन यूनियन मुस्लिम लीग के रूप में स्थापित रह ...

                                               

अज़रबैजान का इतिहास

अज़रबैजान का इतिहास सातवीं सदी से भी पूर्व का है, जब इस क्षेत्र के लोगों का स्थानीय अरब राष्ट्रों ने इस्लाम में परिवर्तन किया। १६वीं और १७वीं शताब्दियों में, यह क्षेत्र हख़ामनी साम्राज्य और उस्मानी साम्राज्य के बीच विवाद का कारण था। अजरबैजान या अ ...

                                               

अटलांटिक की लड़ाई

अटलांटिक की लड़ाई द्वितीय विश्वयुद्ध में लगातार चलने वाला सबसे लंबा सैन्य अभियान था जो सन् १९३९ को शुरु हुआ तथा सन् १९४५ में जर्मनी की हार के साथ समाप्त हुआ। यह लड़ाई मित्र राष्ट्रों द्वारा जर्मनी की नौसैनिक नाकेबन्दी - जो कि जर्मनी पर युद्ध के ऐ ...

                                               

अफ़्गानिस्तान के युद्ध

अफगानिस्तान में पिछले 150 सालों में कई लड़ाईया लड़ी गईं हैं - अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत युद्ध अफ़ग़ानिस्तान में गृहयुद्ध 1929 अफ़ग़ानिस्तान में गृहयुद्ध 1992-2001 तृतीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध द्वितीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध प्रथम आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध अफ़ग ...

                                               

अब्बक्का रानी

रानी अब्बक्का चौटा अथवा अब्बक्का महादेवी तुलुनाडू की रानी थीं जिन्होंने १६वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पुर्तगालियों के साथ युद्ध किया। वह चौटा राजवंश की थीं जो मंदिरों के नगर मूडबिद्री से शासन करते थे। बंदरगाह शहर उल्लाल उनकी सहायक राजधानी थी। Th ...

                                               

अमेरिकी क्रान्ति

अमेरिकी क्रान्ति से आशय अठ्ठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में घटित घटनाओं से है जिसमें तेरह कालोनियाँ ब्रितानी साम्राज्य से आजाद होकर संयुक्त राज्य अमेरिका के नाम से एक देश बना। इस क्रान्ति में सन १७७५ एवं १७८३ के बीच तेरह कालोनियाँ मिलकर ब्रितानी ...

                                               

अराविदु राजवंश

अराविदु राजवंश हिन्दू धर्म का अंतिम राजवंश था जिन्होंने दक्षिण भारत के विजयनगर पर राज किया था। इस राजवंश स्थापक त्रिमूल देव राय थे,जो कि राम राय के भाई थे। राम राय जो कि पिछले राजवंश के अंतिम शासक थे। इनकी मृत्यु राक्षसी तांगड़ी में हुई थी। अरावि ...

                                               

अविभाजित भारत

अविभाजित भारत का अर्थ सामान्यतः १५ अगस्त १९४७ को स्वतंत्रता मिलने से पूर्व के भारत से है जिसमें कि वर्तमान पाकिस्तान व वर्तमान बांग्लादेश की सीमाएं भी शामिल हैं।

                                               

असीम कुमार राय

राजस्थान, विशेष रूप से जयपुर के इतिहास पर महत्वपूर्ण पुरातात्विक / इतिहास संबंधी कार्य करने वाले हिस्ट्री ऑफ़ जयपुर के लेखक जाने-माने बंगाली विद्वान, जो राजस्थान-शासन में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में उप/ अपर निदेशक और बाद में जयपुर के सिटी पै ...

                                               

अहिबरन

बुलन्दशहर का प्राचीन नाम बरन था। इसका इतिहास लगभग 1200 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना अहिबरन नाम के राजा ने की थी। बुलन्दशहर पर उन्होंने बरन टॉवर की नींव रखी थी। राजा अहिबरन ने एक सुरक्षित किले का भी निर्माण कराया था जिसे ऊपर कोट कहा जाता रहा है इस ...

                                               

आनन्दपाल

आनन्दपाल या अनन्तपाल हिन्दूशाही राजवंश का तीसरा और अन्तिम शासक था। उसका शासन १००१ ई से १०१० ई तक रहा। वह जयपाल का पुत्र था जिसका राज्य लघमान से कश्मीर तथा सरहिन्द से मुल्तान तक विस्तृत था। पेशावर इसके राज्य के केन्द्र में था। आनन्दपाल के राज्य का ...

                                               

आयरिश रिपब्लिकन आर्मी

आयरी गणतांत्रिक सेना या आयरिश रिपब्लिकन आर्मी / आयरलैण्ड की मुक्ति के लिये गठित क्रान्तिकारी सैनिकों का संगठन था। इसका लक्ष्य आयरलैण्ड को ब्रिटेन से पूर्णतः मुक्त कराना था। आयरिश रिपब्लिकन ब्रदरहुड नामक संगठन इसका पितृसंगठन था जिसकी स्थापना २५ नव ...

                                               

इन्का साम्राज्य

Inca civilization and other ancient civilizations by Genry Joil. Conquest of Peru, Prescott, 1847 Full text, free to read and search, a definitive history of the Incas. One of the most readable and engaging history books of all time. Humankind lo ...

                                               

इम्फाल का युद्ध

इम्फाल का युद्ध मार्च १९४४ से जुलाई १९४४ तक इम्फाल के आसपास जापानी सेना एवं मित्र देशों की सेनाओं के बीच लड़ा गया। जापानी सेना की कोशिश थी कि मित्र सेना को इम्फाल में हराते हुए भारत पर आक्रमण करना था। किन्तु जापानी सेना को बहुत क्षति उठानी पड़ी औ ...

                                               

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध) से तात्पर्य ऐसी कार्यवाही से है जिसमें विद्युत्चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का उपयोग किया गया हो। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के अन्तर्गत दिष्ट ऊर्जा के द्वारा स्पेक्ट्रम का नियंत्रण, शत्रु पर आक्रमण करना, या स्पेक्ट्रम के माध्यम से किसी आक्रमण ...

                                               

ईरान की इस्लामी क्रांति

ईरान की इस्लामिक क्रांति सन् 1979 में हुई थी जिसके फलस्वरूप ईरान को एक इस्लामिक गणराज्य घोषित कर दिया गया था। इस क्रांति को फ्रांस की राज्यक्रांति और बोल्शेविक क्रांति के बाद विश्व की सबसे महान क्रांति कहा जाता है। इसके कारण पहलवी वंश का अंत हो ग ...

                                               

ईस्ट इण्डिया कम्पनी

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसम्बर 1600ईस्वी में हुई थी। इसे यदाकदा जॉन कंपनी के नाम से भी जाना जाता था। इसे ब्रिटेन की महारानी ने भारत के साथ व्यापार करने के लिये 21 सालो तक की छूट दे दी। बाद में कम्पनी ने भारत के लगभग सभी क्षेत्रों ...

                                               

उत्तरापथ

भारत के प्राचीन ग्रन्थों में जम्बूद्वीप के उत्तरी भाग का नाम उत्तरापथ है। किन्तु पहले उत्तरापथ उत्तरी राजपथ को कहते थे जो पूर्व में ताम्रलिप्तिका से लेकर पश्चिम में तक्षशिला और उसके आगे मध्य एशिया के बल्ख तक जाता था और अत्यधिक महत्व वाला व्यापारि ...

                                               

उदयन (राजा)

उदयन चंद्रवंश के राजा और सहस्रानीक के पुत्र थे। वत्स का नृपति, जिनकी राजधानी कौशांबी थी। कौशांबी इलाहाबाद जिले में नगर से प्राय: ५० किमी पश्चिम मे बसी थी, जहाँ आज भी यमुना के तीर कोसम गाँव में उनके खंडहर हैं। उदयन संस्कृत साहित्य की परंपरा में मह ...

                                               

एम्बर रोड

एम्बर रोड पूर्वी यूरोप में एक प्राचीन व्यापार मार्ग था जिसका नामकरण उत्तर सागर और बाल्टिक सागर से भूमध्य सागर तक ले जाए जाने वाले एम्बर के व्यापार के कारण हुआ। इसे पूर्वी मार्ग भी कहा जाता है।

                                               

ऑलिवर क्रॉमवेल

ऑलिवर क्रॉमवेल ब्रिटेन का शासक में था। इसी व्यक्ति ने चार्लस २ को मृत्युदंड दिलवाया था उसने कुछ समय के लिए इंग्लैंड को गणतंत्र में बदल दिया था। 20 अप्रैल 1653 के दिन, ऑलिवर क्रॉमवेल अपने सैनिकों के साथ ब्रिटिश संसद में घुसा था और वहां मौजूद सदस्य ...

                                               

कंबोडिया-वियतनाम युद्ध

कम्बोडिया-वियतनाम युद्ध वियतनाम और कम्पूचिया के बीच एक सशस्त्र संघर्ष था। १९७५ से १९७७ तक यह स्थल-सीमा और जल-सीमा पर यदा-कदा संघर्ष के रूप में था। 25 दिसम्बर 1978 को वियतनाम ने कम्पूचिया पर पूर्णरूपेण आक्रमण कर दिया तथा उस पर अधिकार करके खमेर रूज ...

                                               

कांस्य युग

कांस्य युग उस काल को कहते हैं जिसमें मनुष्य ने तांबे तथा उसकी रांगे के साथ मिश्रित धातु कांसे का इस्तेमाल किया। इतिहास में यह युग पाषाण युग तथा लौह युग के बीच में पड़ता है। पाषाण युग में मनुष्य की किसी भी धातु का खनन कर पाने की असमर्थता थी। कांस् ...

                                               

काबुल शाही

शाही या शाहिया राजवंशों ने भारत के मध्य राज्यों में शासन किया, जिसके अन्तर्गत काबुलिस्तान तथा गान्धार के भाग आते थे। यह राजवंश तीसरी शताब्दी में कुषाण राजवंश के पतन के बाद शासन में आया था और इसने नौवीं शताब्दी के आरम्भ तक शासन किया। इस राज्य को 5 ...

                                               

कामागाटामारू कांड

कामागातामारू भापशक्ति से चलने वाला एक जापानी समुद्री जहाज था, जिसे हॉन्ग कॉन्ग में रहने वाले बाबा गुरदित्त सिंह ने खरीदा था। जहाज में पंजाब के 351 लोगों को बैठाकर बाबा 4 मार्च 1914 को वेंकूवर के लिए रवाना हुए। 23 मई को वहां पहुंचे लेकिन, अंग्रेजो ...

                                               

कृषि का इतिहास

कृषि का विकास कम से कम 7000-13000 ईशा वर्ष पूर्व हो चुका था। तब से अब तक बहुत से महत्वपूर्ण परिवर्तन हो चुके हैं। कृषि भूमि को खोदकर अथवा जोतकर और बीज बोकर व्यवस्थित रूप से अनाज उत्पन्न करने की प्रक्रिया को कृषि अथवा खेती कहते हैं। मनुष्य ने पहले ...

                                               

खानवा का युद्ध

खानवा का युद्ध 16 मार्च 1527 को आगरा से 35 किमी दूर खानवा गाँव में बाबर एवं मेवाड़ के राणा सांगा के मध्य लड़ा गया। पानीपत के युद्ध के बाद बाबर द्वारा लड़ा गया यह दूसरा बड़ा युद्ध था ।

                                               

ख्मेर साम्राज्य

ख्मेर साम्राज्य कम्बूजा में प्राचीन साम्राज्य था। इसके ही काल में अंगकोर वाट का विशाल मन्दिर बना। यह विश्व का सबसे बडा मन्दिर समूह है। इसकी स्थापना ९वीं शताब्दी में राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने किया।

                                               

गंगैकोण्ड चोलपुरम्

गंगैकोण्ड चोलपुरम्, तमिलनाडु के त्रिचुरापल्ली जिले में स्थित एक स्थान है। यह जैयमकोण्ड सोलापुर से १० किमी की दूरी पर है। प्राचीन काल में यह एक प्रख्यात नगर था। लोकप्रवाद हे कि वाणासुर के तपस्या के फलस्वरूप शिव ने यहाँ एक कूप में गंगा बहा दी थी जि ...

                                               

गरम दल

गरम दल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अन्दर ही सदस्यों के मतभेद के कारण उपजा एक धड़ा था जिसके नेता लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल थे। बंगाल विभाजन के बाद काँग्रेस के नरम दल के लोगों के साथ इस दल के स्पष्ट विरोध सामने आये।स्वदेशी ...

                                               

ग़ुलाम वंश

गुलाम वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था। इस वंश का पहला शासक कुतुबुद्दीन ऐबक था जिसे मोहम्मद ग़ौरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराने के बाद नियुक्त किया था। इस वंश ने दिल्ली की सत्ता पर 1206-1290 ईस्वी तक राज किया । कुुुतुउद्दीन

                                               

गाहड़वाल वंश

गाहड़वाल राजवंश भारतीय उपमहाद्वीप की एक शक्ति थी, जिसने ११वीं और १२वीं शताब्दी के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार के वर्तमान भारतीय राज्यों के कुछ हिस्सों पर शासन किया था। उनकी राजधानी वाराणसी में स्थित थी, और एक संक्षिप्त अवधि के लिए उन्होंने कान्यक ...

                                               

गुजरात का इतिहास

गुजरात का इतिहास पाषाण युग के बस्तियों के साथ शुरू हुआ, इसके बाद चोलकोथिक और कांस्य युग के बस्तियों जैसे सिंधु घाटी सभ्यता। गुजरात प्रदेश के पश्चिम में विशाल सागर तट है। इस तट पर आकर जो लोग बसे उनके आदिपुरुष अफ्रीका के पूर्वी किनारे से आए होंगे, ...

                                               

घेरा

घेरा का अर्थ है किसी नगर या दुर्ग को सैनिकों द्वारा घेरना ताकि इसको जीता जा सके। घेरा डालकर युद्ध करना एक प्रकार का लगातार चलने वाला किन्तु कम तीव्रता का युद्ध है जिसमें एक पक्ष रक्षात्मक रवैया अपनाते हुए किसी दुर्ग या दीवार के अन्दर मजबूत स्थिति ...

                                               

चचनामा

चचनामा, सिन्ध के इतिहास से सम्बन्धित एक पुस्तक है। इसका लेखक अली अहमद है। इसमें चच राजवंश के इतिहास तथा अरबों द्वारा सिंध विजय का वर्णन किया गया है। इस पुस्तक को फतहनामा सिन्ध, तथा तारीख़ अल-हिन्द वस-सिन्द, भी कहते हैं। चच राजवंश ने राय राजवंश की ...

                                               

चीन-वियतनाम युद्ध

चीन-वियतनमा युद्ध चीन तथा वियतनाम के बीच १९७९ में सीमा पर लड़ा गया था। चीन ने वियतनाम पर आक्रमण किया था इस यूद्ध मे भारत ने वीयतनाम की मदद की और चीन की इस यूद्ध मे बुरी तरह से हार हुई इसके 20000 सैनिक मारे गए

                                               

चोक्कनाथ

चोक्क्नाथ नायक अथवा मन्नार चोक्क्नाथ नायकार मदुरै नायक राजवंश का राजा था जिसने अपने पिता मुट्टु अलकद्रि की मृत्यु के उपरांत १६ वर्ष की आयु में सिंहासन संभाला। सिंहासनारूढ़ होने के समय मदुरै राज्य की दशाएँ बहुत अनुकूल नहीं थीं और चोक्क्नाथ को एक ब ...

                                               

जटावर्मन् सुंदर पांड्य तृतीय

जटावर्मन् सुंदर पांड्य तृतीय मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य का ज्येष्ठ पुत्र था और १३०३ ई. से शासन में संयुक्त हुआ था। उसका उपनाम दंडरामन था। इस नाम के सिक्के संभवत: उसी के हैं। उसने अपने पिता की हत्या करके अपने भाई जटावर्मन् वीर पांड्य द्वितीय के साथ ...

                                               

जटावर्मन् सुंदर पांड्य द्वितीय

जटावर्मन् सुंदर पांडय द्वितीय मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य के राज्यकाल के पूर्वार्ध में संयुक्त शासक था। उसका सिंहासनारोहण १२७६ ई. में हुआ और उसने १२९२ ई. तक राज्य किया।

                                               

जिवा महाला

जिवा महाला छत्रपति शिवाजी के अंगरक्षक थे। प्रतापगढ की लड़ाई में इन्होने शिवाजी के प्राण बचाए थे। येे सैन नाई जााति केे थे। और शिवाजी महाराज के प्राण बचाने के बाद वह "होता जिवा म्हणून वाचला शिवा" के वाक्य से पेहचाने जाते थे। ये नदं राजवनश है

                                               

जेम्स ग्रांट डफ

जेम्स ग्रांट डफ ब्रिटिश सैनिक तथा इतिहासकार था। वह भारत में सक्रिय था और महाराष्ट्र के सातारा में पाॅलीटिकल एजेन्ट था। उसने मराठा इतिहास लिखजेम्स ग्रंथ को अंग्रेजी शिक्षा का जनक कहा जाता है क्योंकि इसने विचार दिया था कि भारत में अंग्रेजी शिक्षा क ...

                                               

जेम्स प्रिंसेप

जेम्स प्रिंसेप ईस्ट इण्डिया कम्पनी में एक अधिकारी के पद पर नियुक्त थे। उन्होंने 1837 ई. में सर्वप्रथम ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों को पढ़ने में सफलता प्राप्त की। इन लिपियों का उपयोग सबसे आरम्भिक अभिलेखों और सिक्कों में किया गया है। प्रिंसेप को यह ...