Blog पृष्ठ 353




                                               

फ़िरोज़कोह

फ़िरोज़कोह या फ़िरूज़कूह आधुनिक अफ़ग़ानिस्तान के ग़ोर प्रान्त में स्थित एक शहर था जो ग़ोरी राजवंश की प्रथम राजधानी थी। कहा जाता है कि अपने समय में यह विश्व के महान नगरों में से एक था लेकिन सन् १२२० के दशक में चंगेज़ ख़ान के पुत्र ओगताई ख़ान के ने ...

                                               

बालासगून

बालासगून मध्य एशिया के किरगिज़स्तान क्षेत्र में एक प्राचीन सोग़दाई शहर था। यह चुय वादी में किरगिज़स्तान की आधुनिक राजधानी बिश्केक और इसिक कुल झील के बीच स्थित था। शुरू में यहाँ सोग़दाई भाषा बोली जाती थी, जो एक ईरानी भाषा थी। १०वीं सदी ईसवी के बाद ...

                                               

सिकन्दरिया

सिकन्दरिया या अलेक्जेंड्रिया, मिस्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यहाँँ की जनसंख्या 41 लाख है और यह देश का सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है जहाँँ मिस्र का लगभग 80% आयात और निर्यात कार्य संपन्न होता है। सिकन्दरिया एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल भी है। सिकन्दर ...

                                               

ओलम्पिया में जियस की मूर्ति

ओलम्पिया में जियस की मू्र्ति प्राचीन विश्व के सात आश्चर्यो में से एक है। इस मूर्ति का निर्माण यूनानी मूर्तिकार फ़िडी्यास ने ईसा से ४३२ साल पहले किया था। इस मूर्ति को यूनान के ओलम्पिया में स्थित जियस के मंदिर में स्थापित किया गया था। इस मूर्ति में ...

                                               

सिकन्दरिया का प्रकाशस्तंभ

ऐलेक्जेन्ड्रिया का रोशनीघर सम्पादन प्राचीन विश्व का सात आश्चर्यो में से एक है। इस रोशनीघर का निर्माण ईसा से ३ शताब्दी पूर्व मिस्र के द्विप फ़ेरोस पर एक प्रतीक चिह्न के रूप में करवाया गया था। विभिन्न सोत्रो के अनुसार इसकी उंचाई ११५ मीटर से १३५ मीट ...

                                               

बेबीलोन के झूलते उपवन

बेबीलोन के हैंगिंग गार्डन प्राचीन दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक थे जो कि हेलेनिक संस्कृति द्वारा सूचीबद्ध है, और विभिन्न प्रकार के वृक्षों, झाड़ियों और दाखलताओं के साथ टियर वाले बगीचों की एक चढ़ाई श्रृंखला के साथ इंजीनियरिंग की एक उल्लेखनीय उ ...

                                               

मिस्र के पिरामिड

मिस्र के पिरामिड वहां के तत्कालीन फैरो गणों के लिए बनागए स्मारक स्थल हैं, जिनमें राजाओं के शवों को दफनाकर सुरक्षित रखा गया है। इन शवों को ममी कहा जाता है। उनके शवों के साथ खाद्यान, पेय पदार्थ, वस्त्र, गहनें, बर्तन, वाद्य यंत्र, हथियार, जानवर एवं ...

                                               

रोड्स का कॉलॉसस

रोडेस कि विशालमूर्ति यूनानी द्विप रोडेस पर यूनानी देवता हेलियोस की एक विशाल मूर्ती है। यह मूर्ती प्राचीन विश्व का सात आश्चर्यो में से एक है। इस का निर्माण ईसा पूर्व २९२ से २८० के बीच किया गया। प्राचीन विश्व की यह सबसे उंची मूर्ती थी जिसकी उंचाई ३ ...

                                               

धन-निष्कासन सिद्धान्त

भारत में ब्रिटिश शासन के समय, भारतीय उत्पाद का वह हिस्सा जो जनता के उपभोग के लिये उपलब्ध नहीं था तथा राजनीतिक कारणों से जिसका प्रवाह इंग्लैण्ड की ओर हो रहा था, जिसके बदले में भारत को कुछ नहीं प्राप्त होता था, उसे आर्थिक निकास या धन-निष्कासन की सं ...

                                               

परगना

परगना, सल्तनत काल, मुगल काल और ब्रिटिश राज के दौरान, भारतीय उपमहाद्वीप की एक पूर्व प्रशासनिक इकाई थी, जिसका उपयोग मुख्य रूप से भूतकाल में किया जाता था। परगना को दिल्ली सल्तनत द्वारा पेश किया गया था, और यह शब्द फारसी मूल का है। एक राजस्व इकाई के र ...

                                               

भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना भारतवर्ष के कृषकों एवं पिछड़े वर्ग के लोगों के जीवन में क्रांतिकारी घटना मानी जा सकती है क्योंकि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की स्थापना के पीछे मूल उद्देश्य यही है कि छोटे तथा मझोले स्तर ...

                                               

भारतीय अर्थव्यवस्था की समयरेखा

महाजनपदों द्वारा चाँदी के पंच किए हुए सिक्के punch-marked coins ढाले जाते थे। इन सिक्कों ने सघन व्यापार में तथा नगरीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।. 500 ईसापूर्व 1 ई. विश्व अर्थव्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था का हिसा 52.9% था जो एक कीर्तिमा ...

                                               

रैयतवाड़ी

रैयतवाड़ी व्यवस्था १७९२ र्इ. में मद्रास पे्रसीडेन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गर्इ। थॉमस मुनरो १८२० र्इ. से १८२७ र्इ. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद मुनरो ने इसे १८२० र्इ. में संपूर्ण मद्रा ...

                                               

विऔद्योगीकरण

विऔद्योगीकरण का अर्थ है - किसी देश या क्षेत्र में औद्योगिक क्रियाकलापों का क्रमशः कम होना तथा उससे सम्बन्धित सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन। यह औद्योगीकरण की उलटी प्रक्रिया है। विऔद्योगीकरण में विशेषतः भारी उद्योगों या निर्माण उद्योगों में कमी आती ह ...

                                               

अंतलिखित

अंतलिखित तक्षशिला का हिंदू ग्रीक राजा। बेसनगर के स्तंभ लेख के अनुसार इस राजा ने अपने दूत दिय-के-पुत्र हेलियोदोरस को शुंगवंश के राजा अथवा भागभद्र के दरबार में भेजा था। यह भागभद्र शुगंराज ओद्रक अथवा भागवत में से कोई हो सकता है। इस अभिलेख में अंतलिख ...

                                               

अग्रसेन

महाराजा अग्रसेन एक पौराणिक समाजवाद के प्रर्वतक, युग पुरुष, राम राज्य के समर्थक एवं महादानी एवं समाजवाद के प्रथम प्रणेता थे। वे अग्रोदय नामक गणराज्य के महाराजा थे। जिसकी राजधानी अग्रोहा थी

                                               

अन्दीझ़ान

अन्दीझ़ान या अन्दीजान मध्य एशिया के उज़्बेकिस्तान देश का चौथा सबसे बड़ा शहर है और उस देश के अन्दीझ़ान प्रान्त की राजधानी है। यह फ़रग़ना वादी में उज़्बेकिस्तान की किर्गिज़स्तान की सीमा के साथ स्थित है। सन् १९९९ की जनगणना में इसकी आबादी ३,२३,९०० अन ...

                                               

अफ़शारी राजवंश

अफ़शारी राजवंश १८वीं सदी ईसवी में तुर्क-मूल का ईरान में केन्द्रित राजवंश था। इसके शासक मध्य एशिया के ऐतिहासिक ख़ोरासान क्षेत्र से आये अफ़शार तुर्की क़बीले के सदस्य थे। अफ़शारी राजवंश की स्थापना सन् १७३६ ई में युद्ध में निपुण नादिर शाह ने करी जिसन ...

                                               

अमात्य राक्षस

अपने गुरु चाणक्य के कुशल मार्गदर्शन में चन्द्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश के अंतिम सम्राट घननंद को पराजित कर दिया और मगध का सम्राट बन गया। युद्ध में नंद राज्य के मंत्री और सेनापति या तो मारे गए या बंदी बना लिगए परन्तु प्रधान अमात्य राक्षस उनके हाथ नही ...

                                               

अमीचंद

अमीचन्द, संभवतः वास्तविक नाम अमीरचंद का बंगाली उच्चारण। उन षयन्त्रों के रचने में उसकी प्रमुख भूमिका थी जिनके परिणामस्वरूप प्लासी के युद्ध हुआ था। नितान्त स्वार्थ लाभ से प्रेरित होकर इसने अँग्रेजों की यथेष्ट सहायता की और अँगरेजों के व्यावसायिक संप ...

                                               

अमोघवर्ष नृपतुंग

अमोघवर्ष नृपतुंग या अमोघवर्ष प्रथम भारत के राष्ट्रकूट वंश के महानतम शाशक थे। वे जैन धर्म के अनुयायी थे। इतिहासकारों ने उनकी शांतिप्रियता एवं उदारवादी धार्मिक दृष्टिकोण के लिये उन्हें सम्राट अशोक से तुलना की है। उनके शासनकाल में कई संस्कृत एवं कन् ...

                                               

अम्बिका चक्रवर्ती

चटगाँव बंगाल शस्त्रागार केस के प्रसिद्ध क्रान्तिकारी और कम्युनिस्ट नेता अंबिका चक्रवर्ती का जन्म 1892 ई. में म्यांमार बर्मा में हुआ था। बाद में उनका परिवार चटगाँव में आकर रहने लगा। अंबिका के ऊपर उस समय के क्रान्तिकारियों और स्वामी विवेकानन्द के व ...

                                               

अम्लाट

गार्गीसंहिता के युगपुराणवाले स्कंध में एक शक आक्रमण का उल्लेख है जो मगध पर ल. 35 ई.पू. में हुआ था। इस आक्रमण का नेता शक अम्लाट था। अम्लाट संभवत: शकराज अयस्‌ का प्रांतीय शासक था और उत्तर पश्चिम के भारतीय सीमा प्रांत से चलकर सीधा मगध तक जा पहुँचा। ...

                                               

अलीपुर जेल प्रेस

अलीपुर जेल प्रेस अलीपुर जेल में स्थित है। इसका संचालन प्रेस और फ़ॉर्म्स विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा किया जाता है जिसमें अलीपुर जेल के क़ैदियों से काम लिया जाता है। कुछ विशेष कार्यों के लिए अतिरिक्त मानव संसाधनों का बाहर से भी प्रयोग किया जात ...

                                               

अलोर का चच

चच सातवीं शताब्दी के मध्य में सिंध पर राज करने वाला एक ब्राम्हण वंश का शाशक था। वह एक भूतपूर्व मंत्री और राजा राय साहसी का प्रमुख सलाहकारा था। राजा के मरने के बाद उनकी विधवा रानी से शादी कर के वह सत्तासीन हो गया। उसने अपने साम्राज्य को सिंध तक फै ...

                                               

अवन्तिवर्धन

अवंतिवर्धन अवंती के प्रद्योतकुल का अंतिम राजा जो संभवत: मगधराज शिशुनाग का समकालीन था। वैसे, पुराणों के अनुसार शैशुनाग वंश का प्रवर्तक शिशुनाग इस काल के पर्याप्त पहले हुआ, परंतु सिंहली इतिहास के अनुसार, जो संभवत: अधिक सही है, वह बिंबिसार से कई पीढ ...

                                               

अहमद शाह अब्दाली

"चित्|thumbnail| अहमद शाह अब्दाली, जिसे अहमद शाह दुर्रानी भी कहा जाता है, सन 1748 में नादिरशाह की मौत के बाद अफ़ग़ानिस्तान का शासक और दुर्रानी साम्राज्य का संस्थापक बना। उसने भारत पर सन 1748 से सन 1758 तक कई बार चढ़ाई की। उसने अपना सबसे बड़ा हमला ...

                                               

अहीर (आभीर) वंश के राजा, सरदार व कुलीन प्रशासक

अहीर एक विशुध्द चंद्रवंशी क्षत्रिय भारतीय जातीय समुदाय है, जो कि यादव नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यादव व अहीर शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची माने गए हैं। अब तक की खोजों के अनुसार अहीर, आभीर अथवा यदुवंश का इतिहास भगवान विष्णु, अत्री, चन्द्र, तारा ...

                                               

आइन-ए-अकबरी

आइन-ए-एकबरी, एक 16वीं शताब्दी का ब्यौरेवार ग्रन्थ है। इसकी रचना अकबर के ही एक नवरतन दरबारी अबुल फज़ल ने की थी। इसमें अकबर के दरबार, उसके प्रशासन के बारे में चर्चा की गई है। इसके तीन ख्ण्ड हैं, जिनमें अंतिम खंड अकबरनामा, के नाम से है। ये खंड स्वयं ...

                                               

आपातकाल (भारत)

25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित था। तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी। स्वतंत ...

                                               

इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी

इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी, जिसे बख्तियार खिलजी भी कहते हैं, कुतुबुद्दीन एबक का एक सैन्य सिपहसालार था।

                                               

इत्सिंग

इत्सिंग एक चीनी यात्री एवं बौद्ध भिक्षु था, जो ६७१-६९५ ई. में भारत आया था। वह ६७५ ई में सुमात्रा के रास्ते समुद्री मार्ग से भारत आया था और 10 वर्षों तक नालन्दा विश्वविद्यालय में रहा था। उसने वहाँ के प्रसिद्ध आचार्यों से संस्कृत तथा बौद्ध धर्म के ...

                                               

इल्बर्ट विधेयक

इल्बर्ट विधेयक 1861 से समस्त देश में एक ही फौजदारी कानून लागू कर दिया गया था और प्रत्येक प्रांत में उच्च न्यायालय स्थापित कर दिगए थे । उससे पूर्व देश में दो प्रकार के कानून चलते थे । प्रेसिडेंसी नगरों में अंग्रेजी कानून और ग्रामीण प्रदेशों में मु ...

                                               

उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण

उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण 333) इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा निर्णीत एक केस था जिसमें भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी कदाचार का दोषी पाया गया था। यह केस सन १९७५ में राजनारायण द्वारा दायर किया गया था जो चुनाव में इंदि ...

                                               

उत्पल वंश

उत्पल वंश कश्मीर का राजकुल जिसने लगभग ८५५ ई. से लगभग ९३९ ई. तक राज किया। अंतिम करकोट राजा के हाथ से अवंतिवर्मन् ने शासन की बागडोर छीन उत्पल राजवंश का आरंभ किया। इस राजकुल के राजाओं में प्रधान अवंतिवर्मन् और शंकरवर्मन् थे। इस कुल के अंतिम राजा उन् ...

                                               

एकी आन्दोलन

1917 ई. में भीलों व गरासियों ने मिलकर दमनकारी नीति व बेगार के विरुद्ध महाराणा को पत्र लिखा। इसका कोई परिणाम नहीं निकालता देखकर 1921 में बिजौलिया के किसान आन्दोलन से प्रभावित होकर भीलों ने पुनः महाराणा को शिकायत की। इन सभी अहिंसात्मक प्रयासों को ज ...

                                               

एक्स फ़ोर्स

एक्स फ़ोर्स चीन की राष्ट्रीय क्रांतिकारी सेना के अभियान बल के हिस्से को दिया गया नाम था जो 1942 में बर्मा से भारत में वापस आया। च्यांग काई-शेक ने 1942 में जापानियों को वापस खदेड़ने में अंग्रेजों की सहायता के लिए युन्नान से बर्मा में सेना भेजी। ये ...

                                               

ऑल इंडिया सुन्नी कांफ्रेंस

पाकिस्तान आंदोलन के दौर में राजनेता विभिन्न समूहों में विभाजित थे। कुछ लोग अंग्रेज समर्थक थे। कुछ अंग्रेज दुश्मन लेकिन हिन्दू के मन से दोस्तो और सहयोगी थे। इमाम अहमद रजा बरेलवी और हम मसलक विद्वानों का धार्मिक और इस्लामी बिंदु दृष्टिकोण था कि अंग् ...

                                               

ओड़िशा का इतिहास

प्राचीन काल से मध्यकाल तक ओडिशा राज्य को कलिंग, उत्कल, उत्करात, ओड्र, ओद्र, ओड्रदेश, ओड, ओड्रराष्ट्र, त्रिकलिंग, दक्षिण कोशल, कंगोद, तोषाली, छेदि तथा मत्स आदि नामों से जाना जाता था। परन्तु इनमें से कोई भी नाम सम्पूर्ण ओडिशा को इंगित नहीं करता था। ...

                                               

औरंगज़ेब

अबुल मुज़फ़्फ़र मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगज़ेब आलमगीर जिसे आमतौपर औरंगज़ेब या आलमगीर के नाम से जाना जाता था भारत पर राज्य करने वाला छठा मुग़ल शासक था। उसका शासन १६५८ से लेकर १७०७ में उसकी मृत्यु होने तक चला। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी ...

                                               

कंपनी राज

कंपनी राज का अर्थ है ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा भारत पर शासन। यह 1773 में शुरू किया है, जब कंपनी नेकोलकाता में एक राजधानी की स्थापना की है, अपनी पहली गवर्नर जनरल वार्रन हास्टिंग्स नियुक्त किया और संधि का एक परिणाम के रूप में 1764 बक्सर का ...

                                               

कदंब राजवंश

कदंब दक्षिण भारत का एक ब्राह्मण राजवंश। कदंब कुल का गोत्र मानव्य था और उक्त वंश के लोग अपनी उत्पत्ति हारीति से मानते थे। ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार कदंब राज्य का संस्थापक मयूर शर्मन्‌ नाम का एक ब्राह्मण था जो विद्याध्ययन के लिए कांची में रहता था ...

                                               

कमला देवी

कमला देवी गुजरात के राजा कर्णदेव द्वितीय की रानी थी। 1297 ई. में कर्णदेव द्वितीय को अलाउद्दीन खिलजी की फ़ौज द्वारा पराजय का सामना करना पड़ा। कर्णदेव द्वितीय गुजरात से भाग निकला और उसने देवगिरि के राजा रामचन्द्र देव के यहाँ शरण ली। युद्ध में हार क ...

                                               

कर्णचेदि

कर्ण, कलचुरि वंश का सबसे प्रतापी शासक था। वह चेदि नामक प्राचीन भारतीय महाजनपद राज्य का राजा था। लगभग सन्‌ 1041 में अपने पिता चेदीश्वर गांगेयदेव की मृत्यु होने पर राजगद्दी पर बैठा। उसने अनेक राजाओं को हराया। किंतु कर्ण केवल योद्धा ही नहीं, भारतीय ...

                                               

कर्नाट वंश

कर्नाट वंश या सिमराँव वंश या देव राजवंश का उदय 1097 ई. में मिथिला में हुआ। जिसकी राजधानी बारा जिले के सिम्रौनगढ़ में थी। कर्नाट वंश का संस्थापक नान्यदेव था। नान्यदेव एक महान शासक था। उनका पुत्र गंगदेव एक योग्य शासक बना। कर्नाट वंश के शासनकाल को म ...

                                               

कलिंग

कलिंग पूर्व भारत में गंगा से गोदावरी तक विस्तृत एक शक्तिशाली साम्राज्य था। वर्तमान के ओडिशा, आन्ध्रकलिंग, छत्तीशगढ़, झारखण्ड और बंगाल और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में यह व्याप्त था। ग्रीक् के लेखक इस के लोगों को ओरेट्सOretes कहते थे, क्यों कि ये ...

                                               

काच (गुप्तवंश का एक शासक)

काच गुप्तवंश का शासक था, जिसका नाम कुछ स्वर्णमुद्रओं पर खुदा मिलता है। इन मुद्राओं पर सामने बाएँ हाथ में चक्रध्वज लिए खड़े राजा की आकृति मिलती है। उसके बाएँ हाथ के नीचे गुप्ताकालीन ब्राह्मी लिपि में राजा का नाम "काच" लिखा रहता है। मुद्रा पर वर्तु ...

                                               

कुजुल कडफिसेस

कुजुल कड़फिसेस का वास्तविक नाम ‘गुजुर कपिशिया’ हैं| Key Words- Kadphises, Kapisa, Kapasiya Gusura, Gujur, Gujar, Gurjar 135 ईसा पूर्व में कुषाण हिन्दू कुश पर्वत क्षेत्र में वक्षु नदी आधुनिक आमू दरिया के उत्तरी और दक्षिणी हिन्दू कुश पर्वत क्षेत्रो ...

                                               

कुणाल

क़ुणाल सम्राट अशोक तथा रानी पद्मावती के सुपुत्र थे। दिव्यावदान के अशोकावदान और कुणालावदान में कुणाल के जीवन से संबंधित अनेक कहानियां हैं। सर्वप्रसिद्ध कथा है कि अशोक की एक रानी तिष्यरक्षिता पालि साहित्य की तिस्सरक्खिता थी, जो सम्राट् से अवस्था मे ...

                                               

कुमारदेवी

सुविख्यात लिच्छवि कुमारी; गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त प्रथम की पत्नी और समुद्रगुप्त की माता। ये संसार मे पहली महारानी है जिनके नाम से सिक्के प्रचलित किए गए। 2 कान्यकुब्ज और वाराणासी के गहड़वाल सम्राट गोविंदचंद्र 1114-1154 की रानी। उनके पिता देवरक्षि ...