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हेट स्टोरी 2

हेट स्टोरी 2 भारतीय हिन्दी फिल्म है, जिसका निर्माण विशाल पाण्ड्य ने किया है। इस फिल्म में सुशांत सिंह, सुरवीन चावला और जय भानुशाली मुख्य किरदार में हैं। इस फिल्म का प्रदर्शन 18 जुलाई 2014 को सिनेमाघरों में किया गया।

                                               

हेट स्टोरी 3

हेट स्टोरी 3 एक भारतीय बॉलीवुड फिल्म है। इसका निर्देशन विशाल पाण्ड्य और निर्माण भूषण कुमार ने किया है। इस फिल्म में करन सिंह ग्रोवर, ज़रीन खान, और शरमन जोशी मुख्य किरदार में हैं। यह फिल्म 4 दिसम्बर 2015 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई।

                                               

स्वच्छन्दतावाद

स्वच्छन्दतावाद कला, साहित्य तथा बौद्धिक क्षेत्र का एक आन्दोलन था जो यूरोप में अट्ठारहवीं शताब्दी के अन्त में आरम्भ हुआ। १८०० से १८५० तक के काल में यह आन्दोलन अपने चरमोत्कर्ष पर था। अट्ठारहवीं सदी से आज तक दर्शन, राजनीति, कला, साहित्य और संगीत को ...

                                               

अंतराल (गणित)

गणित में अंतराल वास्तविक संख्याओं का ऐसा समुच्चय होता है जिसमें यह नियम लागू हो कि समुच्चय के किन्हीं दो सदस्य संख्याओं के बीच की सभी संख्याएँ भी उस समुच्चय की सदस्य होती हैं। उदाहरण के लिए, x द्वारा अंकित वह सभी संख्याएँ जो 0 ≤ x ≤ 1 को संतुष्ट ...

                                               

कन्वेंशन ड्यू मेत्रे

कन्वेंशन ड्यू मेत या फ्रेंच में Convention du Mètre 20 मई, 1875 को हुई एन अन्तर्राष्ट्रीय संधि थी, जिसमें मीट्रिक मानकों पर नजर रखने हेतु तीन संगठनों की स्थापना की गयी थी। यह फ़्रेंच भाषा में लिखी गयी है और इसे अंग्रेजी भाषा में Metre Convention ...

                                               

जापानी मापन इकाइयाँ

शक्कान-हो एक परंपरागत जापानी मापन प्रणाली है। इसका नाम शक्कान-हो दो शब्दों से बना है:- शाकु - लम्बाई की एक इकाई और कान -भार माप की इकाई। यह प्रणाली मूलतः चीनी है। इसकी इकाइयाँ शांग वंश के काल में 13वीं शती ई.पू. में बनीं थीं। यह 10वीं शती ई.पू. म ...

                                               

ताइवानी मापन इकाइयाँ

ताइवानी मापन इकाइयाँ ताइवान की परंपरागत मापन इकाइयाँ हैं। कई इकाइयाँ जापानी मापन इकाइयों से ली गईं हैं और उनके नाम चीनी मापन इकाइयों के समान ही हैं, परंतु उनके अंतरण चीन और हांगकांग से भिन्न हैं। कई मामलों में यह इकाइयां SI इकाइयों के समान ही हैं ...

                                               

प्राचीन फारसी भार एवं मापन

ऐतिहासिक फ़ारसी भार एवं माप कई प्राचीन भार एवं माप पद्धतियों में से एक हैं। यह प्राचीन मेसोपोटामियाई भार एवं माप पद्धति पर आधारित है। इसे सूसा और ईलम राजाओं ने चलाया था और बाद में ऐकैमिनिड लोगों ने भी प्रयोग किया था।

                                               

सेंटीमीटर-ग्राम-सैकिण्ड इकाई प्रणाली

सेन्टीमीटर मापने का टेप सेंटीमीटर-ग्राम-सैकिण्ड इकाई प्रणाली भौतिक इकाइयों के मापन की प्रणाली है। यह या~ंत्रिक इकाइयों हेतु सर्वदा समान है, पर्म्तु कई विद्युत इकाइयाँ जुडी़ हैं। इसका स्थान बाद में MKS इकाई प्रणाली ने ले लिया था, जिसमें मीटर, किलो ...

                                               

कार्तीय निर्देशांक पद्धति

गणित में कार्तीय निर्देशांक पद्धति, समतल मे किसी बिन्दु की स्थिति को दो अंको के द्वारा अद्वितीय रूप से दर्शाने के लिए प्रयुक्त होती है। इन दो अंको को उस बिन्दु के क्रमशः X-निर्देशांक व Y-निर्देशांक कहा जाता है। इसके लिये दो लंबवत रेखाएं निर्धारित ...

                                               

खगोलीय निर्देशांक पद्धति

खगोलीय निर्देशांक पद्धति ब्रह्माण्ड में किसी भी प्रकार की खगोलीय वस्तु का स्थान निर्धारित करने का एक तरीक़ा है। जहाँ तक मनुष्यों का अनुभव है पूरा ब्रह्माण्ड एक तीन आयामों वाला दिक् है। इसमें एक निर्देशांक पद्धति के ज़रिये किसी भी स्थान को अंकों क ...

                                               

गोलीय निर्देशांक पद्धति

गोलीय निर्देशांक पद्धति तीन आयामों वाले दिक् में प्रयोग होने वाली ऐसी निर्देशांक पद्धति होती है जिसमें उस दिक् में मौजूद किसी भी बिंदु का स्थान तीन अंकों से निर्धारित हो जाता है: मूल समतल से उसका दिगंश कोण azimuth angle - इसके लिए अक्सर φ का चिह् ...

                                               

निर्देशांक पद्धति

निर्देशांक पद्धति ज्यामिति में ऐसी प्रणाली को कहते हैं जिसमें एक या उस से अधिक अंकों के प्रयोग से किसी भी बिंदु का किसी दिक् में स्थान पूर्ण रूप से बताया जा सके। यह दिक् मनुष्यों का जाना-पहचाना त्रिआयामी हो सकता है या फिर ऐसा कोई उलझा हुआ बहुमोड़ ...

                                               

ग्रीनिच माध्य समय

लन्दन के शाही ग्रीनिच वेधशाला के माध्य सौर समय को ग्रीनिच माध्य समय माना गया है। यह वहाँ की मध्यरात्रि से आरम्भ होता है । किन्तु पहले यह मध्याह्न से भी आरम्भ हुआ माना जाता था। इसके अलावा अन्य प्रकार से भी ग्रीनिच माध्य समय की गणना की जाती रही है। ...

                                               

प्रहर

यह हिन्दू समय मापन इकाई है। यह इकाई मध्यम श्रेणी की है। एक तृसरेणु = 6 ब्रह्माण्डीय अणु. एक त्रुटि = 3 तॄसरेणु, या सैकिण्ड का 1/1687.5 भाग एक लव = 3 वेध. एक वेध =100 त्रुटि.

                                               

मुहूर्त

हिन्दू धर्म में मुहूर्त एक समय मापन इकाई है। वर्तमान हिन्दी भाषा में इस शब्द को किसी कार्य को आरम्भ करने की शुभ घड़ी को कहने लगे हैं। एक मुहूर्त बराबर होता है दो घड़ी के, या लगभग 48 मिनट के. अमृत/जीव मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त बहुत श्रेष्ठ होते है ...

                                               

अंतरराष्ट्रीय संबंध सिद्धांत

यह लेख सैद्धांतिक शिक्षण की और इंगित करता है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंध को देखें। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सिद्धांत में सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य से अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन किया जाता है। यह एक ऐसा वैचारिक ढांचा प्रदान ...

                                               

भौतिक प्रभावों की सूची

Accordion effect physics waves Averch–Johnson effect economics Avalanche effect cryptography Autokinetic effect vision Anti-greenhouse effect atmospheric dynamics atmospheric science astronomy planetary atmospheres Antenna effect digital electron ...

                                               

लिनस का नियम

सॉफ्टवेयर के विकास में लिनस का नियम या सिद्धान्त यह दावा करता है कि "लगभग हर समस्या को चित्रित किया जाएगा, और उसे हल किया जाएगा"। इस नियम को एरिक एस॰ रेमंड ने अपने निबंध और द कैथेड्रल एंड द बाज़ार 1999 पुस्तक में सूत्रबद्ध किया था, और इसका नाम ली ...

                                               

तोरोइड

यह एक वृताकार खोखला छल्ला होता है जिस पर किसी तार के अत्यधिक फेरे पास-पास सटाकर लपेटे जाते हैं। इसे एक ऐसी परिनालिका के रूप में भी देखा जा सकता है जिसे बंद करके एक वृताकार मोड़ दिया गया है। मान लीजिए टोरॉइड पर लगते हुए दांत से I विद्युत धारा प्रव ...

                                               

दीर्घवृत्ताभ

दीर्घवृत्ताभ या ऍलिप्सॉइड एक बंद सतह का अन्डेनुमा आकार होता है। दीर्घवृत्ताभ दीर्घवृत्त की तरह ही होता है लेकिन जहाँ दीर्घवृत्त केवल दो आयामों का होता है वहाँ दीर्घवृत्ताभ तीन या उस से ज़्यादा आयामों में होता है। हमारे ब्रह्माण्ड के जिस दिक् का म ...

                                               

फलन

गणित में जब कोई राशि का मान किसी एक या एकाधिक राशियों के मान पर निर्भर करता है तो इस संकल्पना को व्यक्त करने के लिये फलन शब्द का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिये किसी ऋण पर चक्रवृद्धि ब्याज की राशि मूलधन, समय एवं ब्याज की दर पर निर्भर करती है; ...

                                               

फलन का कोणांक

गणित में फलन का कोणांक किसी फलन में निवेश होने वाले स्वतंत्चर को कहते हैं। उदाहरण के लिए, f = x 2 + y 2 {\displaystyle f=x^{2}+y^{2}} वाले फलन में दो कोणांक हैं, x {\displaystyle x} और y {\displaystyle y} ।

                                               

क्रिस्टल बॉल फलन

क्रिस्टल बॉल फलन प्रायिकता घनत्व फलन है जो उच्च ऊर्जा भौतिकी में अधिक ऊर्जा क्षय वाली विभिन्न मॉडल गणनाओं में काम में लिया जाता है। इसका नामकरण क्रिस्टल बॉल सहभागी प्रयोग के सम्मान में किया गया। यह एक तरफ गाउस फलन का रूप रखता है और अन्य दिशा में ...

                                               

फलन का प्रभावक्षेत्र

बीजगणित में फलन का प्रभावक्षेत्र किसी फलन में प्रयोग होने वाले कोणांकों के वह मान होने हैं जिनके लिए फलन परिभाषित हो, यानि आर्थपूर्ण हो।

                                               

अंक

अंक ऐसे चिह्न हैं जो संख्याओं लिखने के काम आते हैं। दासमिक पद्धति में शून्य से लेकर नौ तक कुल दस अंक प्रयोग किये जाते हैं। इसी प्रकार षोडसी पद्धति में शून्य से लेकर ९ तक एवं A से लेकर F कुल १६ अंक प्रयुक्त होते हैं। द्विक पद्धति में केवल ० और् १ ...

                                               

चतुष्फलकीय संख्या

चतुष्फलकीय संख्या अथवा त्रिकोणीय पिरामिड संख्या चित्र संख्या है जो त्रिभुजाकार आधाऔर तीन अन्य फलकों को जोड़ने पर बनने वाली चतुष्फलकी आकृति पिरामिड को निरूपित करती है। n वीं चतुष्फलकीय संख्या, प्रथम n त्रिकोण संख्याओं के योग के बराबर होती है। प्रथ ...

                                               

बृहत् संख्याओं का इतिहास

बड़ी संख्याओं के प्रयोग का इतिहास भी काफी पुराना है। विभिन्न संस्कृतियों ने परम्परागत रूप से बड़ी संख्याओं के नामकरण के लिए को अलग-अलग पद्धति अपनायी। इसके अलावा अलग-अलग संस्कृतियों में कितनी बड़ी संख्याओं का प्रयोग हुआ, ये सीमाएंम् भी भिन्न भिन्न ...

                                               

शून्य

शून्य एक अंक है जो संख्याओं के निरूपण के लिये प्रयुक्त आजकी सभी स्थानीय मान पद्धतियों का अपरिहार्य प्रतीक है। इसके अलावा यह एक संख्या भी है। दोनों रूपों में गणित में इसकी अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। पूर्णांकों तथा वास्तविक संख्याओं के लिये यह य ...

                                               

भग्न

भग्न एक "विषम या खंडित ज्यामितीय आकार है जिसे हिस्से में विभाजित किया जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक कम से कम लगभग संपूर्ण की लघु-आकार प्रतिलिपि है," एक गुण जो स्व-समानता कहलाता है। भग्न के गणितीय सख्त उपचार की जड़ें कार्ल वेइर्स्ट्रास, जार्ज कैं ...

                                               

संस्थितिविज्ञान

संस्थितिविज्ञान या टोपोलॉजी गणित का बड़ा क्षेत्र है। इसे ज्यामिति के विस्तार के रूप में देखा जाता है। इसमें उन गुणों का अध्ययन किया जाता है जो वस्तुओं को सतत रूप से विकृत करने पर उनमें बने रहे हैं। उदाहरण के लिये किसी चीज को बिना फाड़े या साटे हु ...

                                               

सदिश बीजगणित

यदि त्रिविम यूक्लिडीय स्पेस में एक सदिश a → {\displaystyle {\overrightarrow {\mathbf {a} }}} = a 1 e 1 + a 2 e 2 + a 3 e 3 है, तो सदिश का परिमाण निम्नलिखित रूप से ज्ञात किया जायेगा- ‖ a → ‖ = a 1 2 + a 2 + a 3 2 {\displaystyle \left\|{\overrighta ...

                                               

अस्पष्ट समीकरण

गणित में R = 0 जैसे सम्बन्ध को अस्पष्ट समीकरण कहते हैं जहाँ R अनेक चरों का फलन है। उदाहरण के लिए, x 2 + y 2 − 1 = 0 {\displaystyle x^{2}+y^{2}-1=0} ईकाई त्रिज्या वाले एक वृत्त का समीकरण है। इसी तरह y 3 + y 2 + 5 x y + x 2 + x + y = 0 {\displaysty ...

                                               

आयलर समीकरण

चिरसम्मत यांत्रिकी में, आयलर के घूर्णी समीकरण घूर्णी निर्देश तन्त्र की सहायता से दृढ़ पिण्डों की घूर्णन गति का वर्णन करते हैं। इसमें जो घूर्णी फ्रेम लिया जाता है उसका अक्ष उस पिण्ड से जुड़ा हुआ तथा पिण्ड के मुख्य जड़त्व अक्षों के समान्तर होता है। ...

                                               

ऊष्मा समीकरण

उष्मा समीकरण महत्वपूर्ण आंशिक अवकल समीकरण है जो किसी वस्तु के किसी क्षेत्र में समय के साथ ताप की स्थिति बताता है। तीन स्पेस चरों एवं समय t के किसी फलन u के लिये उष्मा समीकरण निम्नवत है: ∂ u ∂ t − α ∂ 2 u ∂ x 2 + ∂ 2 u ∂ y 2 + ∂ 2 u ∂ z 2 = 0 {\di ...

                                               

केप्लर के ग्रहीय गति के नियम

खगोल विज्ञान में केप्लर के ग्रहीय गति के तीन नियम इस प्रकार हैं - सभी ग्रहों की कक्षा की कक्षा दीर्घवृत्ताकार होती है तथा सूर्य इस कक्षा के नाभिक पर होता है। ग्रह द्वारा सूर्य की परिक्रमा के कक्षीय अवधि का वर्ग, अर्ध-दीर्घ-अक्ष semi-major axis के ...

                                               

कोशी रीमान समीकरण

गणित में सम्मिश्र विश्‍लेषण के क्षेत्र में कोशी-रीमान समीकरण दो आंशिक अवकल समीकरणों की प्रणाली है। ये समीकरण अवश्य ही संतुष्ट होंगे यदि दिया हुआ समिश्र फलन समिश्र-अवकलनिय है। समीकरण का यह नाम अगस्तिन कोशी और बर्नार्ड रीमान के नम पर पड़ा है। इसके ...

                                               

कौशी समीकरण

कौशी समीकरण एक विशेष पारदर्शी पदार्थ के लिए प्रकाश के अपवर्तनांक और तरंगदैर्घ्य के मध्य आनुभाविक सम्बन्ध है। इसका नामकरण महान गणितज्ञ ऑगस्टिन लुइस कौशी के नाम से किया गया, जिन्होनें इसे १८३६ में परिभषित किया था।

                                               

क्रैमर-नियम

रैखिक बीजगणित में क्रैमर-नियम रैखिक समीकरण निकाय का हल निकालने की एक प्रत्यक्ष विधि है। यह विधि गुणांक मैट्रिक्स के डिटरमिनैण्ट तथा गुणांक मैट्रिक्स के एक परिवर्तित रूप के सारणिक के रूप में व्यक्त करती है। यह विधि तभी वैध है जब निकाय का अनन्य हल ...

                                               

गति के समीकरण

गति के समीकरण, ऐसे समीकरणों को कहते हैं जो किसी पिण्ड के स्थिति, विस्थापन, वेग आदि का समय के साथ सम्बन्ध बताते हैं। गति के समीकरणों का स्वरूप भिन्न-भिन्न हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि गति में स्थानान्तरण हो रहा है या केवल घूर्णन है य ...

                                               

घन फलन

गणित में निम्नलिखित स्वरूप वाले फलन को घन फलन या "त्रिघाती बहुपद" कहते हैं: f x = a x 3 + b x 2 + c x + d, {\displaystyle fx=ax^{3}+bx^{2}+cx+d,\,} यहाँ a अशून्य संख्या है। यह मानते हुए कि a ≠ 0 तथा ƒ x = 0 करने पर एक घन समीकरण बनता है। निम्नलिखि ...

                                               

डायोफैंटीय समीकरण

डायोफैंटस नामक यूनानी गणितज्ञ ने, जो संभवत: ईसा के पश्चात् तीसरी शताब्दी में रहा, बहुत से बहुपदीय अनिर्धार्य समीकरणों का अध्ययन किया तथा पूर्णांकों में उनके हलों को ज्ञात किया। किन्तु आधुनिक तथ्यों के प्रकाश में अब इसमें कोई सन्देश नहीं रह गया है ...

                                               

पाइथागोरस प्रमेय

इस अनुच्छेद को विकिपीडिया लेख Pythagorean theorem के इस संस्करण से अनूदित किया गया है। पाइथागोरस प्रमेय या, बौधायन प्रमेय यूक्लिडीय ज्यामिति में किसी समकोण त्रिभुज के तीनों भुजाओं के बीच एक सम्बन्ध बताने वाला प्रमेय है। इस प्रमेय को आमतौपर एक समी ...

                                               

पुनरावृत्ति संबंध

गणित में, पुनरावृत्ति सम्बन्ध उस समीकरण को कहते हैं जो किसी अनुक्रम के आरम्भ के एक या कुछ पदों को बताने के बाद शेष पदों को प्रतिवर्ती ढंग से से परिभाषित करता है। अन्तर समीकरण difference equation भी एक विशेष प्रकार का पुनरावृत्ति सम्बन्ध ही है।

                                               

प्राईस समीकरण

जब एक पीढ़ी से दूसरे का संक्रमण होता हे, तब इन पीढियों के बीच में पित्रैकों का स्थानांतरण होता है। प्रत्येक पित्रैक से संबंधित एक लक्षण होता है, जो उस जाति के उत्तरजीविता के लिए महत्वपूर्ण होता है। विशेष रूप से यह लक्षण हर पीढ़ी में एक मज़बूती या ...

                                               

बीजीय समीकरण

गणित में निम्नलिखित स्वरूप वाले समीकरणों को बीजीय समीकरण या बहुपद समीकरण कहते हैं। P n x = 0 {\displaystyle P_{n}x=0} जहाँ P n x {\displaystyle P_{n}x}, n {\displaystyle n} घात का बहुपद है। a n x n + a n − 1 x n − 1 + ⋯ + a 1 x + a 0 = ∑ i = 0 n ...

                                               

मूल निकालने की विधियाँ

मूल मूल निकालने की विधियाँ वे आंकिक विधियाँ हैं जिनकी सहायता से किसी समीकरण f = 0 के दिये होने पर यदि x का कोई ऐसा मान निकाल सकें जो इस समीकरण को संतुष्ट करता हो। x का वह मान फलन f का मूल कहलाता है। इसे समीकरण f = 0 का हल भी कहते हैं।

                                               

युगपत समीकरण

गणित के सन्दर्भ में एक से अधिक चरों से युक्त एक से अधिक समीकरणों के समूह को युगपत समीकरण कहते हैं। युगपत का अर्थ है - एक साथ। दिये गये समीकरणों पर गणितीय संक्रियायें करके उनमें आने वाले सभी चरों का ऐसा मान निकालते हैं जो सभी समीकरणों को संतुष्ट क ...

                                               

रैखिक समीकरण निकाय

गणित में समान अज्ञात राशि वाले रैखिक समीकरणों के समुच्चय को रैखिक समीकरणों का निकाय कहा जाता है। उदाहरण के लिए, 3 x + 2 y − z = 1 2 x − 2 y + 4 z = − 2 − x + 1 2 y − z = 0 {\displaystyle {\begin{alignedat}{7}3x&&\;+\;&&2y&&amp ...

                                               

समीकरण

15 = aप्लस 12 यह लेख गणीतीय समीकरण के सम्बन्ध में है। रसायन शास्त्र में समीकरण के सन्दर्भ में रासायनिक समीकरण देखें। समीकरण प्रतीकों की सहायता से व्यक्त किया गया एक गणितीय कथन है जो दो वस्तुओं को समान अथवा तुल्य बताता है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं ...