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बीजोपचार

फसलों के रोग मुख्यतः बीज, मिट्टी तथा हवा के माध्यम से फैलते हैंl फसलों को बीज-जनित एवं मृदा-जनित रोगों से बचाने के लिए बीजों को बोने से पहले कुछ रासायनिक दवाओं एवं पोषक तत्वों की उपलब्धता बढाने के लिए कुछ जैव उर्वरकों से उपचारित किया जाता है। इसे ...

                                               

बेंबर खेती

बेंवर खेती पूरी तरह से जैविक, पारिस्थितिक, प्रकृति के अनुकुल और मिश्रित खेती है। यह जैविक खेती का ही एक रूप है। डिंडौरी जिले के समनापुर विकासखंड के कई गांवों में बैगा आदिवासी इस तरह की खेती करके अनाज का उत्पादन करते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। ...

                                               

बैलगाड़ी

bail. jpg, बैलगाड़ी बैलों से खींची जाने वाली गाड़ी या यान है। यह विश्व का सबसे पुराना यातायात का साधन एवं सामान ढ़ोने का साधन है। यह यातायात का एक साधन भी होता था है और मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में प्रयोग में लाया जाता है। इसे बैलों द्वारा खींचा ...

                                               

भारत में किसान आत्महत्या

भारत में किसान आत्महत्या १९९० के बाद पैदा हुई स्थिति है जिसमें प्रतिवर्ष दस हज़ार से अधिक किसानों के द्वारा आत्महत्या की रपटें दर्ज की गई है। १९९७ से २००६ के बीच १,६६,३०४ किसानों ने आत्महत्या की।भारतीय कृषि बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है तथा मानस ...

                                               

भारतीय शस्य

यह फसल लगभग सवाचार करोड़ एकड़ भूमि में भारत में बोई जाती है। यह चारे तथा दाने दोनों के लिये बोई जाती है। यह खरीफ की मुख्य फसलों में है। सिंचाई करके वर्षा से पहले एवं वर्षा आरंभ होते ही इसकी बोवाई की जाती है। यदि बरसात से पहले सिंचाई करके यह बो दी ...

                                               

मांस उद्योग

मांस के उत्पादन, पैकिंग, संरक्षण, तथा विपणन के लिये किये जाने वाले आधुनिक ढंग के औद्योगिक पशुपालन को मांस उद्योग कहते हैं। यह दुग्ध उत्पादन या ऊन उत्पादन से बिल्कुल अलग है।

                                               

मृदा परीक्षण

कृषि में मृदा परीक्षण या "भूमि की जाँच" एक मृदा के किसी नमूने की रासायनिक जांच है जिससे भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा के बारे में जानकारी मिलती है। इस परीक्षण का उद्देश्य भूमि की उर्वरकता मापना तथा यह पता करना है कि उस भूमि में कौन से तत् ...

                                               

राइजोबियम

Rhizobiumरायजोबीयम वेक्ट्रिया फलीदार पौधो की जड़ों की ग्रंथिकाओं में पाये जाते हैं, फलीदार जैसे दाल, मटर, ये Rhizobium ये नाइट्रोजन को नाइट्रेट मे बदल देता है इसी Rhizobium के कारण फलीदार पौधों मे प्रोटीन प्रचुर मात्रा मे पाया जाता है और वायुमंडल ...

                                               

राष्ट्रीय औषधीय पादप मिशन

बिहार सरकार द्वारा राष्ट्रीय औषधीय पादप मिशन के अंतर्गत औषधीय पौधों की खेती, आधारभूत संरचना के विकास, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, बाजार व्यवस्था आदि से संबंधित योजना शुरू की है। इसके अंतर्गत फसल के विविधीकरण द्वारा राज्य के किसानों, ग्रामीण युव ...

                                               

राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो

राष्ट्रीय मत्स्य आनुवांषिक संसाधन ब्यूरो भारत के जलीय जैव-संसाधनों का सूचीबद्धकरण और संरक्षण करने के लिये स्थापित एक संस्थान है।

                                               

रेशमकीट पालन

कृषि पर आधारित कुटीर उद्योग है। ग्र क्षेत्र में ही कम लागत में इस उद्योग में शीघ्र उत्पादन प्रारम्भ किया जा सकता है। कृषि कार्य एवं अन्य घरेलू कार्यों के साथ-साथ इस उद्योग को अपनाया जा सकता है। श्रम जनित होने के कारण इस उद्योग में विभिन्न स्तरों ...

                                               

रोपण यंत्र

19वीं शती में अमरीका और यूरोप में रोपणयंत्रों का विकास हुआ। ऐसे वपित्र भारत में भी देखे जाते हैं। इन वपित्रों के सिद्धांत पर, बैलों से चलनेवाले कुछ वपित्र भी बने हैं। ऐसे यंत्र, या तो बीज बोनेवाले होते हैं, या पौधों की कतार में, कुछ दूरी पर, बोने ...

                                               

वन्यजीव कृषि

वन्यजीव खेती जैसे भोजन, पारंपरिक चिकित्सा और फाइबर के रूप में रहने वाले जानवरों और वस्तुओं के उत्पादन के लिए एक कृषि सेटिंग में गैर पालतू जानवरों की स्थापना करने के लिए संदर्भित करता है।

                                               

वर्मी वाश

वर्मीवाश एक तरल जैविक खाद है जो ताजा वर्मीकम्पोस्ट व केंचुए के शरीर को धोकर तैयार किय जाता है। वर्मीवाश के उपयोग से न केवल उत्तम गुणवत्ता युक्त उपज प्राप्त कर सकते हैं बल्कि इसे प्राकृतिक जैव कीटनाशक के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। वर्मीवाश ...

                                               

वृक्षायुर्वेद

वृक्षायुर्वेद एक संस्कृत ग्रन्थ है जिसमें वृक्षों के स्वास्थ्यपूर्ण विकास एवं पर्यावरण की सुरक्षा से समन्धित चिन्तन है। यह सुरपाल की रचना मानी जाती है जिनके बारे में बहुत कम ज्ञात है। सन् १९९६ में डॉ वाय एल नेने एशियन एग्रो-हिस्ट्री फाउन्डेशन, भा ...

                                               

शुष्कभूमि कृषि

शुष्कभूमि कृषि सिंचाई किये बिना ही कृषि करने की तकनीक है। यह शुष्कभूमियों के लिये उपयोगी है, यानि वह क्षेत्र जहाँ बहुत कम वर्षा होती है। इसके अंतर्गत उपलब्ध सीमित नमी को संचित करके बिना सिंचाई के ही फसलें उगायी जाती हैं। वर्षा की कमी के कारण मिट् ...

                                               

शैवालीकरण

जैव उर्वरक के रूप में बड़े स्तर पर नील हरित शैवाल की वृद्धि करने की प्रक्रिया को शैवालीकरण कहते हैं। इस संकल्पना का प्रारम्भ भारत में हुआ था लेकिन इस तकनीक का वास्तविक रूप में विकास जापान में किया गया। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा ...

                                               

संरक्षण कृषि

संरक्षण कृषि, खेती का एक बिल्कुल ही नया मॉडल है, जिसकी मदद से पर्यावरण का ख्याल रखा जाता है। इस अनोखी तरह की खेती में जमीन को या तो बिल्कुल भी नहीं जोता जाता या फिर कम से कम जुताई होती है। इसमें फसल के पौधों को शुरू में नर्सरी में उगाया जाता है। ...

                                               

सघन पशुपालन

सघन पशुपालन से आशय पशुपालन के उस तरीके से है जिसमें बहुत कम जगह में अधिक पशुओं को रखा जाता है ताकि कम से कम खर्च में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके। इसे औद्योगिक पशुपालन या फैक्ट्री पशुपालन भी कहते हैं। बहुत से लोग इसे अनैतिक मानते हैं और इ ...

                                               

सस्यविज्ञान

सामान्यतः भूमि का उचित प्रबन्ध कर वैज्ञानिक विधि से फसलों को उगाने का अध्ययन सस्यविज्ञान कहलाता है। दूसरे शब्दों में, पौधों से भोजन, ईंधन, चारा एवं तन्तु की प्राप्ति के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को सस्यविज्ञान कहते हैं। सस्यविज्ञान के अन्तर्गत पाद ...

                                               

हँसिया

हंम्सिये की ब्लेड वक्राकार curved होती है। इस वक्राकार ब्लेड का भीतरी भाग तेज धार वाला होता है जिससे फसलों के आधार के विपरीत इसको खीचने/चलाने से फसलें कट जातीं हैं। काटी जाने वाली वस्तु को एक हाथ की मुट्ठी में पकड़कर दूसरे हाँथ में हँसिये को इस प ...

                                               

हरित क्रांति

हरित क्रांति सन् १९४०-६० के मध्य कृषि क्षेत्र में हुए शोध विकास, तकनीकि परिवर्तन एवं अन्य कदमों की श्रृंखला को संदर्भित करता है जिसके परिणाम स्वरूप पूरे विश्व में कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इसने हरित क्रांति के पिता कहे जाने वाले नौरम ...

                                               

हरी खाद

कृषि में हरी खाद उस सहायक फसल को कहते हैं जिसकी खेती मुख्यत: भूमि में पोषक तत्त्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदाथों की पूर्ति करने के उद्देश्य से की जाती है। प्राय: इस तरह की फसल को इसके हरी स्थिति में ही हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। ह ...

                                               

हल

हल एक कृषि यंत्र है जो जमीन की जुताई के काम आता है। इसकी सहायता से बीज बोने के पहले जमीन की आवश्यक तैयारी की जाती है। कृषि में प्रयुक्त औजारों में हल शायद सबसे प्राचीन है और जहाँ तक इतिहास की पहुँच है, हल किसी न किसी रूप में प्रचलित पाया गया है। ...

                                               

ज्वालामुखीय चाप

ज्वालामुखीय चाप ज्वालामुखियों की एक शृंखला होती है जो दो भौगोलिक तख़्तों की संमिलन सीमा में निम्नस्खलित तख़्ते के ऊपर बन जाती है। ऊपर से देखने पर ज्वालामुखियों की यह शृंखला एक चाप के आकार में नज़र आती है। यदि यह किसी महासागर में स्थित हो तो अक्सर ...

                                               

द्वीप चाप

द्वीप चाप एक ऐसा द्वीप समूह होता है जिसमें द्वीप, ज्वालामुखी व समुद्र के नीचे उभरी चट्टानें एक चाप के आकार में सुसज्जित होती हैं। यह द्वीप चाप अक्सर दो भौगोलिक प्लेटों की सीमा पर स्थित होते हैं और उस सीमा पर एक प्लेट के दूसरी प्लेट के नीचे दब जान ...

                                               

प्रवेशिका

प्रवेशिका या पतली खाड़ी किसी तट पर एक लम्बी और पतली खाड़ी होती है जिसमें सागर का पानी कुछ दूरी तक भूमीय क्षेत्र में अंदर आया हुआ होता है। जब किसी पहाड़ी क्षेत्र में यह हिमानी द्वारा बनता है जो ऐसी प्रवेशिकाओं को फ़्योर्ड कहा जाता है।

                                               

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान या केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान भारत के राजस्थान में स्थित एक विख्यात पक्षी अभयारण्य है। इसको पहले भरतपुर पक्षी विहार के नाम से जाना जाता था। इसमें हजारों की संख्या में दुर्लभ और विलुप्त जाति के पक्षी पाए जाते हैं, जैसे ...

                                               

कोलेरू झील

कोलेरू झील एक मीठे पानी की झील है। यह आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित है। यह एक अण्डाकार छिछली झील है। वर्षा ऋतु में इसका क्षेत्रफल लगभग 160 वर्ग किलोमीटर हो जाता है। अब यह झील अनेक सोंतो द्वारा भरती जा रही है।

                                               

सांभर झील

भारत के राजस्थान राज्य में जयपुर नगर के समीप स्थित यह लवण जल की झील है। यह झील समुद्र तल से 1.200 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। जब यह भरी रहती है तब इसका क्षेत्रफल 90 वर्ग मील रहता है। इसमें चार नदियाँ आकर गिरती हैं। इस झील से बड़े पैमाने पर नमक का उ ...

                                               

सुन्दरवन

सुंदरवन या सुंदरबोन भारत तथा बांग्लादेश में स्थित विश्व का सबसे बड़ा नदी डेल्टा है। यहां के नरभक्षी बाघ बंगाल टाइगर के नाम से विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। मै

                                               

वातज स्थलरूप

वातज स्थलरूप पृथ्वी की सतह पर वह स्थलरूप होते हैं जो वायु प्रवाह द्वारा निर्मित हों। ऐसे स्थलरूप पृथ्वी के अलावा मंगल जैसे अन्य ग्रहों पर भी देखे गए हैं। बालुका स्तूप (ड्यून", अर्ग, लोयस, इत्यादि इसी वातज श्रेणी में आते हैं।

                                               

अक़ाबा की खाड़ी

अक़ाबा की खाड़ी लाल सागर के उत्तरी भाग में सीनाई प्रायद्वीप से पूर्व में और अरबी मुख्यभूमि से पश्चिम में स्थित एक बड़ी खाड़ी है। इस खाड़ी के किनारे पर चार देश तटस्थ हैं: मिस्र, इस्राइल, जोर्डन और सउदी अरब।

                                               

खाड़ी

खाड़ी समुद्री पानी के ऐसे जलाशय को कहते हैं जो किसी ओर से सागर या महासागर से तो जुड़ी हो लेकिन जिसके इर्द-गिर्द काफ़ी हद तक धरती का घेरा हो। ध्यान दें कि समुद्री तट में छोटे-से मोड़ को यह दर्जा नहीं दिया जाता और केवल महत्वपूर्ण क्षेत्रफल वाले जला ...

                                               

अदन की खाड़ी

अदन की खाड़ी अरब सागर मे, यमन और सोमालिया के मध्य स्थित है। लाल सागर और अदन की खाड़ी को केवल 20 किलोमीटर चौड़ा बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य आपस में जोड़ता है। यह जलमार्ग उस स्वेज नहर जलयान मार्ग का एक महत्त्वपूर्ण भाग है, जो भूमध्य सागर को अरब सागर क ...

                                               

ओमान की खाड़ी

ओमान की खाड़ी, जिसे अरबी में ख़लीज उमान और फ़ारसी में ख़लीज-ए-मकरान कहते हैं, अरब सागर और होरमुज़ जलसन्धि के बीच स्थित एक जलडमरू है। यह होरमुज़ जलसन्धि के पार फ़ारस की खाड़ी से जुड़ता है। हालांकि इसे खाड़ी बुलाया जाता है, भौगोलिक रूप से यह वास्तव ...

                                               

टोक्यो खाड़ी

टोक्यो खाड़ी, जापान के दक्षिणी कांटो क्षेत्र में स्थित एक खाड़ी है, और टोक्यो, कानागावा प्रांत, और चिबा प्रांत के तटों में फैला हुआ हैं। टोक्यो खाड़ी उरागा चैनल द्वारा प्रशांत महासागर से जुड़ा हुआ हैं। इसका पुराना नाम ईडो खाड़ी था। टोक्यो खाड़ी क ...

                                               

नेपल्स की खाड़ी

नेपल्स की खाड़ी, इटली के दक्षिण पश्चिमी तट पर नेपल्स प्रांत के कम्पानिया क्षेत्र में स्थित एक 10 मील चौड़ी खाड़ी है। यह पश्चिम में भूमध्य सागर से मिलती है। इसके उत्तर में नेपल्स और पोज़्ज़ुओली शहर, पूर्व में वेसुवियस पर्वत और दक्षिण में सॉरेंटाइन ...

                                               

बिस्के की खाड़ी

बिस्के की खाड़ी या बिस्काई खाड़ी पूर्वोत्तरी अन्ध महासागर की एक खाड़ी है जो केल्टिक सागर से दक्षिण में स्थित है। यह फ़्रान्स और स्पेन के पश्चिमी छोर के कुछ भाग के साथ सटी हुई है। इसका नाम शायद स्पेन के बास्क प्रदेश व पड़ोस के फ़्रान्स के क्षेत्रो ...

                                               

मरतबन की खाड़ी

मरतबन की खाड़ी बर्मा के दक्षिण में स्थित अंडमान सागर की एक साखा है। इस खाड़ी का नाम तटीय नगर मरतबन के नाम पर पड़ा है। सालावीं और सीतांग नदियाँ इस खाड़ी में गिरती हैं।

                                               

सुएज़ की खाड़ी

सुएज़ की खाड़ी लाल सागर के उत्तरी भाग में सीनाई प्रायद्वीप के पश्चिम में और मिस्र की मुख्यभूमि के पूर्व में स्थित एक खाड़ी है। इस खाड़ी के बीच की काल्पनिक रेखा एशिया और अफ़्रीका के महाद्वीपों की विभाजन रेखा मानी जाती है। खाड़ी के उत्तरी अंत पर मि ...

                                               

हडसन खाड़ी

हडसन खाड़ी, पूर्वोत्तर कनाडा में 1.230.000 किमी 2 क्षेत्र में फैला खारे पानी का एक बड़ा जल निकाय हैं। यह एक बहुत बड़े लगभग 3.861.400 किमी 2 क्षेत्र में अपवाहिका बनाता हैं, जिसमें दक्षिणपूर्व नुनावुत, सस्केचेवान, अल्बर्टा, मैनिटोबा, ओन्टेरियो, क्य ...

                                               

गुफ़ा

गुफ़ा धरती में ऐसे भूमिगत स्थल को कहते हैं जो इतना बड़ा हो कि कोई व्यक्ति उसमें प्रवेश कर सके। अगर ऐसा कोई स्थान इतना छोटा हो कि उसमें केवल एक छोटा जानवर ही प्रवेश कर पाए तो उसे आम तौर से हिन्दी में गुफा की बजाए बिल कहा जाता है। यह संभव है कि कोई ...

                                               

गुफ़ादूध

गुफ़ादूध या चाँददूध गुफ़ाओं में मिलने वाला एक सफ़ेद गाढ़े-दूध जैसा पदार्थ होता है। यह गुफाओं में बनने वाले अन्य पदार्थों जैसा होता है लेकिन इसकी विषेशता यह है कि यह सख़्त होकर पत्थर में परिवर्तित नहीं होता। यह चूना पत्थर से चू कर निकलने वाला तलछट ...

                                               

अरकु घाटी

अरकू घाटी भारत में आंध्र प्रदेश राज्य के विशाखापट्टनम जिले में एक पर्वतीय स्थान है। यह घाटी पूर्वी घाट पर स्थित है और कई जनजातियों का निवास स्थान रहा है। अरकू घाटी दक्षिण भारत में सबसे कम प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है तथा वाणिज्यिक रूप से कम उप ...

                                               

गणगौर घाट

गणगौर घाट जिसे गणगौरी घाट भी कहते हैं। यह एक घाट है जो भारत के राजस्थान राज्य के उदयपुर ज़िले की पिछोला झील के निकट स्थित है। साथ ही इस घाट के नजदीक जगदीश चौक भी है यह बागोर-की-हवेली दर्शनीय स्थल का एक लोकप्रिय हिस्सा है।

                                               

वादी नजरान

वाडी नजारन अरब प्रायद्वीप की सबसे बड़ी वादियों में से एक है। इसकी सहायक नदियाँ सरवात पहाड़ियाँ और उनके आसपास की पहाड़ियों से आती हैं। यह मैदान में अपने मुंह से पूर्व की ओर 180 मील तक फैली हुई है, जहां यह रुब अल-ख़ाली नदी की रेत में समाप्त होती है ...

                                               

अति-खारी झील

अति-खारी झील ऐसी झील को कहा जाता है जिसमें नमक की सान्द्रता समुद्र से भी अधिक हो, यानि जिसका पानी समुद्र के पानी से भी अधिक खारा हो। मात्रा मापन के हिसाब से ३.५% से अधिक सान्द्रता होने पर किसी झील को अति-खारी कहा जा सकता है। अति-खारी झीलों में आम ...

                                               

उदयसागर झील

उदयसागर झील उदयपुर की पांच प्रमुख झीलों में से एक है। यह झील पूर्व उदयपुर से लगभग १३ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।इसका निर्माण उदयसिंह द्वितीय ने १५६५ ईस्वी में करवाया था। जो कि लगभग ४ किलोमीटर चौड़ी और ९ मीटर गहरी है।

                                               

उस्मान सागर

उस्मान सागर, तेलंगाना, भारत में एक कृत्रिम जलाशय है जो हैदराबाद से ३० किमी दूर है। यह एक और कृत्रिम झील हिमायत सागर के समानांतर है।