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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत मौसम विज्ञान प्रक्षेण, मौसम पूर्वानुमान और भूकम्प विज्ञान का कार्यभार सँभालने वाली सर्वप्रमुख एजेंसी है। मौसम विज्ञान विभाग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इस विभाग के ...

                                               

मौसम का पूर्वानुमान

मौसम का पूर्वानुमान का अर्थ है किसी स्थान के वायुमंडल की भविष्य में स्थिति की भविष्यवाणी करना। मनुष्य हजारों वर्षों से अनौपचारिक रूप से मौसम की भविष्यवाणी करते रहा है और औपचारिक रूप से कम से कम उन्नीसवीं शती से मौसम की भविष्यवाणी कर रहा है।

                                               

मौसम विज्ञान

ऋतुविज्ञान या मौसम विज्ञान कई विधाओं को समेटे हुए विज्ञान है जो वायुमण्डल का अध्ययन करता है। मौसम विज्ञान में मौसम की प्रक्रिया एवं मौसम का पूर्वानुमान अध्ययन के केन्द्रबिन्दु होते हैं। मौसम विज्ञान का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है किन्तु अट्ठारहव ...

                                               

विश्व मौसम विज्ञान दिवस

हर वर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस बनाया जाता है।30 मार्च सन 1950 को विश्व मौसम संगठन संयुक्त राष्ट्र के एक विभाग के रूप में स्थापित हुआ तथा जेनेवा में इसका मुख्यालय रखा गया। भूविज्ञान पर आधारित मौसम विभाग में कई विषयों पर शोध होता है इस ...

                                               

ओमूआमूआ

ओमूआमूआ एक अंतरतारकीय वस्तु है, यानि यह किसी तारे के गुरुत्वाकर्षक बंधन में नहीं बंधी हुई। यह हमारे सौर मंडल से होकर गुज़रने वाली पहली ज्ञात अंतरतारकीय वस्तु है। ओमूआमूआ 230 x 35 x 35 मीटर के आकार का एक कम-सक्रीय धूमकेतु है। इसका रंग बाहरी सौर मं ...

                                               

१८६२ अपोलो

१८६२ अपोलो एक पत्थरीला क्षुद्रग्रह है जो १.५ किमी का व्यास रखता है और एक पृथ्वी-समीप वस्तु है। इसे सन् १९३२ में कार्ल रायनमुथ नामक खगोलशास्त्री ने ढूंढ निकाला था, लेकिन अपनी खोज के बाद यह खोया गया और फिर ४१ सालों बाद १९७३ में ही जाकर फिर मिला। यह ...

                                               

सवाना

sawana उष्णकटिबंधीय घास के मैदानों को कहते हैं। यहां पर्याप्त रूप से छोटे वृक्ष ऐसे लगे होते हैं, कि यह क्षेत्र एकदम एकसार घना हरा भरा रहता है। ये फैले हुए वृक्षो के साथ घास के मैदान है।

                                               

सहेल

साहेल या सहेल पट्टी अफ़्रीका के पश्चिम से पुर्व तक फ़ैला एक क्षेत्र है जो सहारा के रेगिस्तान को दक्षिण के घास के मैदानो से पृथक करता है। सहेल पट्टी की लंबाई ३,८६२ किलोमीटर है और यह अटलांटिक महासागर से लेकर लाल सागर तक फ़ैली हुई है। इस पट्टी की चो ...

                                               

कच्छ का रण

कच्छ का रण तथा महान कच्छ का रण गुजरात प्रांत में कच्छ जिले के उत्तर तथा पूर्व में फैला हुआ एक नमकीन दलदल का वीरान प्रदेश है। यह लगभग 23.300 वर्ग कि॰मी॰ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह समुद्र का ही एक सँकरा अंग है जो भूचाल के कारण संभवतः अपने मौलिक ...

                                               

थार मरुस्थल

थार मरुस्थल भारत के उत्तरपश्चिम में तथा पाकिस्तान के दक्षिणपूर्व में स्थितहै। यह अधिकांश तो राजस्थान में स्थित है परन्तु कुछ भाग हरियाणा, पंजाब,गुजरात और पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांतों में भी फैला है। अरावली पहाड़ी के पश्चिमी किनारे पर थार म ...

                                               

मैन्ग्रोव

मैंग्रोव ऐसे क्षुप व वृक्ष होते हैं जो खारे पानी या अर्ध-खारे पानी में पाए जाते हैं। अक्सर यह ऐसे तटीय क्षेत्रों में होते हैं जहाँ कोई नदी किसी सागर में बह रही होती है, जिस से जल में मीठे पानी और खारे पानी का मिश्रण होता है। मैंग्रोव वनों का पारि ...

                                               

कुमारकोम

वेम्बानद झील के शांत किनारे पर बसा कुमारकोम केरल का एक छोटा और खूबसूरत नगर है। कुट्टानद क्षेत्र में स्थित यह नगर कोट्टायम से 14 किलोमीटर दूर है। पहले इस स्थान को रबड़ प्लान्टेशन के लिए जाना जाता था लेकिन अब यह स्थान पक्षी अभयारण्य के रूप में विकस ...

                                               

क्रिस्टल स्वभाव

खनिज विज्ञान में क्रिस्टल स्वभाव किसी खनिज के एक विषेश आकार से ही बनने या बढ़ने के लक्षण को कहते हैं। मसलन ऐस्बेस्टस बनाने वाले खनिज महीन रेशों के गुच्छे बनाने का स्वभाव रखते हैं जबकि हीरे में कार्बन आठ-मुखीय क्रिस्टल बनाने का स्वभाव रखता है।

                                               

खनिज

खनिज ऐसे भौतिक पदार्थ हैं जो खान से खोद कर निकाले जाते हैं। कुछ उपयोगी खनिज पदार्थों के नाम हैं - लोहा, अभ्रक, कोयला, बॉक्साइट, नमक, जस्ता, चूना पत्थर इत्यादि।

                                               

ग्रहीय क्रोड

ग्रहीय क्रोड किसी ग्रह, उपग्रह या बड़े क्षुद्रग्रह की सबसे भीतरी तह को कहा जाता है। यह ठोस या द्रव या उन दोनों की परतों का सम्मिलन हो सकती है। हमारे सौर मंडल में ग्रहीय क्रोड का पूरी वस्तु की त्रिज्या में हिस्सा चंद्रमा में २०% से लेकर बुध ग्रह म ...

                                               

दक्कन उद्भेदन

दक्कन उद्भेदन अथवा दकन ट्रैप भारत के पश्चिमी हिस्से में एक प्रदेश है जहाँ की भूवैज्ञानिक संरचना क्रीटाशियस युग के के ज्वालामुखी उद्भेदन के दौरान बनी बेसाल्ट चट्टानों है और इस इलाके में बेसाल्ट के ऊपर बनी काली रेगुर मिट्टी पायी जाती है। यह 17°–24° ...

                                               

भारत का भूविज्ञान

भारतीय भू‍वैज्ञानिक क्षेत्र व्‍यापक रूप से भौतिक विशेषताओं का पालन करते हैं और इन्‍हें तीन क्षेत्रों के समूह में रखा जा सकता है: ३ प्रायद्वीपीय ओट। २ भारत-गंगा मैदान क्षेत्र, और 1 हिमाचल पर्वत श्रृंखला और उनके संबद्ध पर्वत समूह, उत्‍तर में हिमाचल ...

                                               

1868 एरिका भूकंप

1868 एरिका भूकंप, 13 अगस्त 1868 को 21:30 बजे एरिका के पास आया था। एरिका उस समय पेरू का हिस्सा था जो वर्तमान में चिली का अभिन्न अंग हैं। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 8.5 और 9.0 के बीच अनुमानित की गई। इस भूकम्प द्वारा प्रशांत महासागर में निर्मित स ...

                                               

2007 पेरू भूकम्प

१५ अगस्त २००७ को पेरु के स्थानीय समय शाम के ६ बजे के अनुसार भूकम्प मापी यन्त्र के द्वारा ७.९ की गति से आये भूकम्प में लगभग ३७ लोग हताहत हुये और ३०० के आस पास जख्मी हो गये बताये गये हैं। इस भूकम्प आने के स्थान के स्थान के पास चिन्चा नामक शहर भी बस ...

                                               

गुजरात भूकम्प २००१

2001 का गुजरात भूकंप, जिसे भुज भूकंप के नाम से भी जाना जाता है, 26 जनवरी 2001, भारत के 51 वें गणतंत्र दिवस, की सुबह 08:46 बजे हुआ और 2 मिनट से अधिक समय तक चला। इसका केंद्र भारत के गुजरात के कच्छ जिले के भचौ तालुका में चबारी गांव के लगभग 9 किमी दक ...

                                               

जावा भूकंप २००९

जावा भूकंप २००९ २ सितंबर २००९ को इंडोनेशिया के जावा द्वीप में स्थानीय समय १४:५५ को आया भूकंप है। इसकी तीव्रता ७.३ मापी गई और इसमे ४२ लोगो के मारे जाने की खबर हैं। भूंकप का केंद्र जावा के दक्षिणी तट पर तासिकमलय शहर के पास था। यह जकार्ता से दो सौ क ...

                                               

२०१६ उत्तर-पूर्व भारत भूकम्प

३ जनवरी को उत्तर पूर्वी भारत में इम्फाल मणिपुर में ६.७ तीव्रता का तेज भूकम्प आया जिसमें कुल ११ लोगों की जानें गई तथा लगभग २०० लोग घायल हुए। इस भूकम्प में कई इमारतें ध्वस्त हुए हैं। भूकंप को दृढ़ता से बांग्लादेश में भी महसूस किया गया था।

                                               

अनुप्रयुक्त भूभौतिकी

अनुप्रयुक्त भूभौतिकी, या भूभौतिक पूर्वेक्षण में पृथ्वी के पृष्ठ पर भौतिक मापों के द्वारा अधस्थल भूवैज्ञानिक जानकारियों का संग्रह किया जाता है। इसका उद्देश्य खनिज, पेट्रोलियम, जल, घात्विक निक्षेप, विखंडनीय पदार्थो का स्थान-निर्धारण और बाँध, रेलमार ...

                                               

भूगतिकी

भूगतिकी भूभौतिकी की वह शाखा है जो पृथ्वी पर केन्द्रित गति विज्ञान का अध्ययन करती है। इसमें भौतिकी, रसायनिकी और गणित के सिद्धांतों से पृथ्वी की कई प्रक्रियाओं को समझा जाता है। इनमें भूप्रावार में संवहन द्वारा प्लेट विवर्तनिकी का चलन शामिल है। सागर ...

                                               

भूधाराएँ

भूपर्पटी में प्रवाहित विद्युत धाराओं को भू-धाराएँ कहते हैं। यह वह धारा है जो भूमि के अन्दर से या समुद्र से होकर बहती है। ये बहुत ही कम आवृत्ति की विद्युत-धाराएँ हैं जो धरती के तल या उसके आसपास बहुत बड़े क्षेत्रफल में प्रवाहित होतीं हैं। इनकी उत्प ...

                                               

भूभौतिकी

भूभौतिकी पृथ्वी की भौतिकी है। इसके अंतर्गत पृथ्वी संबंधी सारी समस्याओं की छानबीन होती है। साथ ही यह एक प्रयुक्त विज्ञान भी है, क्योंकि इसमें भूमि समस्याओं और प्राकृतिक रूपों में उपलब्ध पदार्थों के व्यवहार की व्याख्या मूल विज्ञानों की सहायता से की ...

                                               

राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान

राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की एक संघटक प्रयोगशाला है। पृथ्वी विज्ञान के बहुविषयी क्षेत्रों में अनुसंधान करने के ध्येय से राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान की स्थापना 1961 में की गई। एनजीआरआई का ...

                                               

आर्थिक भौमिकी

आर्थिक भौमिकी, भौमिकी की वह शाखा है जो पृथ्वी की खनिज संपत्ति के संबंध में बृहत्‌ ज्ञान कराती है। पृथ्वी से उत्पन्न समस्त धातुओं, पत्थर, कोयला, भूतैल तथा अन्य अधातु खनिजों का अध्ययन तथा उनका आर्थिक विवेचन आर्थिक भौमिकी द्वारा ही होता है। प्रत्येक ...

                                               

एंथ्रोपोसीन

एंथ्रोपोसीन एक प्रस्तावित युग का नाम है जिसमें मानव के कार्यकलापों के कारण धरती के भौमिकी पर तथा उसके पर्यावरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़े हैं। इस शब्द को आधिकारिक स्वीकृति अभी नहीं मिली है।

                                               

कायान्तरण (भूविज्ञान)

भौमिकी के सन्दर्भ में, जब किसी शैल का भूवैज्ञानिक स्वरूप, बिना पिघलकर मैग्मा बने ही, बदल जाय तो इसे कायान्तरण कहते हैं। अर्थात यह एक ठोस से दूसरे ठोस में परिवर्तन की प्रक्रिया है। यह परिवर्तन मुख्यतः ऊष्मा, दाब, तथा रासायनिक रूप से सक्रिय द्रवों ...

                                               

कैंब्रियनपूर्व

कैंब्रियनपूर्व या प्राक्-कैम्ब्रियन धरती के इतिहास में एक बहुत बड़ा कालखण्ड है जो वर्तमान दृश्यजीवी महाकाल से पहले आता है। इसका विस्तार लगभग 4600 मिलियन वर्ष पूर्व जब धरती का निर्माण हुआ था से लेकर कैम्ब्रियन काल, तक है।

                                               

खनि भौमिकी

खनि भौमिकी भूविज्ञान का वह अंग है जो खनन के उन सभी पहलुओं का विशेष अध्ययन करता है जिनसे एक अयस्क, या खनिज निक्षेप, पूर्ण विकसित खान में परिवर्तित हो जाए।

                                               

प्रादेशिक भूविज्ञान

किसी वृहद क्षेत्र का भूवैज्ञानिक अध्ययन प्रादेशिक भूविज्ञान कहलाता है। जिस प्रकार क्षेत्रीय भूगोल किसी क्षेत्र-विशेष के भूगोल का अध्ययन है, उसी तरह प्रादेशिक भूविज्ञान किसी क्षेत्र का भूवैज्ञानिक अध्ययन है।

                                               

विवर्तनिकी

विवर्तनिकी भूविज्ञान की वह शाखा है जिसमें पर्वतन, क्रेटॉनों, भूकम्प, ज्वालामुखी क्षेत्रों आदि के विकास का अध्ययन किया जाता है। विवर्तनिक अध्ययन अनेक दृष्टियों से लाभकारी हैं।

                                               

अवसादी शैल

अपक्षय एवं अपरदन के विभिन्न साधनों द्वारा मौलिक चट्टनों के विघटन, वियोजन और टूटने से परिवहन तथा किसी स्थान पर जमाव के परिणामस्वरुप उनके अवसादों से निर्मित शैल को अवसादी शैल कहा जाता हैं। वायु, जल और हिम के चिरंतन आघातों से पूर्वस्थित शैलों का निर ...

                                               

आग्नेय शैल

आग्नेय शैल वे शैल हैं जिनकी रचना धरातल के नीचे स्थित तप्त एवं तरल चट्टानी पदार्थ, अर्थात् मैग्मा, के सतह के ऊपर आकार लावा प्रवाह के रूप में निकल कर अथवा ऊपर उठने के क्रम में बाहर निकल पाने से पहले ही, सतह के नीचे ही ठंढे होकर इन पिघले पदार्थों के ...

                                               

उभरी तलशिला

उभरी तलशिला किसी स्थान पर ज़मीन की सतह से ऊपर निकली हुई और स्पष्ट दिखने वाली तलशिला को कहते हैं। आम तौपर पृथ्वी व अन्य स्थलीय ग्रहों के अधिकतर स्थानों पर तलशिला के ऊपर मलबे, मिट्टी व कंकर की कई परतें होती हैं।

                                               

क्रिस्टल

रसायन शास्त्र, खनिज शास्त्र एवं पदार्थ विज्ञान में क्रिस्टल उन ठोसों को कहते हैं जिनके अणु, परमाणु या आयन, एक व्यवस्थित क्रम में लगे होते हैं तथा यही क्रम सभी तरफ दोहराया जाता है। प्रतिदिन के प्रयोग के अधिकतर पदार्थ बहुक्रिस्टलीय होते हैं। क्रिस् ...

                                               

ग्रेनाइट

ग्रैनाइट मणिभीय दानेदार शिला है, जिसके प्रमुख अवयव स्फटिक और फेल्स्पार हैं। यह आग्नेय पाषाण है। ग्रैनाइट शब्द का सर्वप्रथम उपयोग प्राचीन इटालियन संग्रहकर्ताओं ने किया था। रोम के शिल्पकार फ्लेमिनियस वेका के एक वर्णन में इसका प्रथम सन्दर्भ मिलता है ...

                                               

तलशिला

तलशिला पृथ्वी व अन्य स्थलीय ग्रहों में उनकी ऊपरी सतह के नीचे के संगठित पत्थर को कहते हैं। साधारण रूप से तलशिला के ऊपर छोटे पत्थरों, मिट्टी व अन्य असंगठित मलबे की परते होती है। अलग-अलग स्थानों पर तलशिला भिन्न गहराईयों पर होती है। कहीं तो ऊपर से पर ...

                                               

फेल्सपार

फेल्सपार शैलनिर्माणकारी खनिजों का सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है। संघटन की दृष्टि से ये खनिज पोटैशियम, सोडियम, कैल्सियम, तथा बेरियम के ऐलुमिनोसिलिकेट हैं। धरती के गर्भ का लगभग ६०% भाग फेल्सपार से बना है। इस वर्ग के मुख्य खनिज निम्नलिखित हैं, जिनमें प्रथ ...

                                               

बालू

चट्टानें और अन्य धात्विक पदार्थ विविध प्राकृतिक और अप्राकृतिक साधनों से टूट फूटकर बजरी, बालू, गाद या चिकनी मिट्टी का रूप ले लेते हैं। यदि टुकड़े बड़े हुए तो बजरी और यदि छोटे हुए तो कणों, के विस्तार के हिसाब से उन्हें क्रमश: बालू, गाद या मृत्तिका ...

                                               

एमरी

एमरी एक गहरे रंग की दानेदार शैल है जिससे अपघर्षक चूर्ण बनाया जाता है। इसका नाम नैक्सोस द्वीप के केप एमरी पर पड़ा है जहाँ सबसे पहले इस तरह की शैल प्राप्त हुई थी। इस शैल में मुख्यतः खनिज कोरण्डम होता है।

                                               

गैब्रो

गैब्रो एक अंतर्भेदी आग्नेय चट्टान है जिसकी रासायनिक संगठन बेसाल्ट के समतुल्य होता है। यह एक रवेदार चट्टान है जो मैग्मा के ज़मीनी सतह के नीचे ही जम जाने से बनती है। यह एक अभ्यांतरिक चट्टान होती है । जिसमें सिलिका की मात्रा 55-45% होती है । यह खनिज ...

                                               

चूना पत्थर

चूना पत्थर एक अवसादी चट्टान है जो, मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट के विभिन्न क्रिस्टलीय रूपों जैसे कि खनिज केल्साइट और/या एरेगोनाइट से मिलकर बनी होती है। चूना पत्थर वस्तुत: कैलसियम कार्बोनेट है, पर इसमें सिलिका, ऐल्यूमिना और लोहे इत्यादि सदृश अप ...

                                               

ज्वालाकाच

ज्वालाकाच या ऑब्सिडियन, एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला ज्वालामुखीय काच है। यह रायोलाइट नामक ज्वालामुखी-शिला का अत्यन्त काचीय रूप है। अत: रासायनिक एवं खनिज संरचना में ज्वालाकाच रायोलाइट अथवा ग्रेनाइट के समतुल्य है, परन्तु भौतिक सरंचना एवं बाह् ...

                                               

पेरिडोटाइट

भौतिक भूगोल के सामान्य सिद्धांत के लेखक डी के गुर्जर के अनुसार पेरिडॉटाइट मेंटल की ऊपरी परत में पाई जाने वाली एक चट्टान है जोकि पृथ्वी की ऊपरी परत के दबाव के कारण ठोस जैसा व्यवहार करती है लेकिन जब कभी तापमान में वृद्धि व ऊपरी सतह के दबाव मुक्त हो ...

                                               

बेसाल्ट

बेसाल्ट या बसाल्ट एक प्रकार की बहिर्भेदी आग्नेय चट्टान है। इसका निर्माण बेसाल्टी लावा के धरातल पर आकार तेजी से जमने की वजह से होता है और इसी कारण यह कणविहीन या गैर-रवेदार रूप में पायी जाती है।

                                               

अन्तर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस

अन्तर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस अथवा अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को मनाया जाता है। वर्ष 1976 में संयुक्त राष्ट्र आम सभा के द्वारा" विकलांगजनों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष” के रूप में वर्ष 1981 को घोषित किया गया था।

                                               

अन्तर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस

अन्तर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस / ˈ ə n t ɑː r ɑː ʃ h t r ɪ j ə v r d ð ə d ɪ v ə s ə h ə) सम्पूर्ण विश्व में अक्टूबर-मास के १ दिनांक को मनाया जाता है । इस दिन पर वरिष्ठ नागरिको और वरिष्ठ सम्बन्धिओं का सम्मान किया जाता है। वरिष्ठों के हित के लिए चिन्त ...