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आराम बाग़

आराम बाग़ आम तौपर एक ऐसा उद्यान है जो जनता के मनोरंजन के लिए बनाया गया हो. आराम बाग़ और अन्य सार्वजनिक उद्यानों में यह अंतर होता है कि यहाँ मनोरंजन के लिए विभिन्न आयोजन किए जाते हैं. इनमें कॉन्सर्ट हॉल, बैंडस्टैंड, मनोरंजन की राइड्स, चिड़ियाघर आद ...

                                               

नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान

नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान अथवा लखनऊ चिड़ियाघर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित प्रदेश का सबसे पुराना चिड़ियाघर है। 1921 में स्थापित हुआ यह चिड़ियाघर 29 हैक्टेयर में फैला हुआ है।

                                               

राजस्थान के वन्य-जीव अभयारण्य

देश का सबसे अधिक दुर्लभ पक्षी गोडावण है जो राजस्थान के बीकानेर, बाड़मेऔर जैसलमेर जिले में अधिक संख्या में मिलता है राजस्थान में तीन राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्य जीव अभ्यारण्य एवं 33 आखेट निषेद क्षेत्र घोषित किए जा चुके हैं। भारतीय वन्यजीव कानून १९७२ ...

                                               

राजीव गांधी उद्यान

राजीव गांधी उद्यान भारत के राजस्थान राज्य के उदयपुर ज़िले में स्थित एक बड़ा उद्यान है। यह उद्यान फतेहसागर झील के नजदीक स्थित है।

                                               

जल निकासी

किसी क्षेत्र की सतह या उप-सतह के पानी को प्राकृतिक या कृत्रिम ढंग से हटाना जल निकासी कहलाता है। कृषि भूमि के उत्पादन को सुधारने या पानी की आपूर्ति के प्रबंधन के लिए जल निकासी की आवश्यकता पड़ती है। जल निकास की परिभाषा पौधों के जड़ क्षेत्र में वायु ...

                                               

द्राक्षाकृषि

द्राक्षाकृषि अंगूर से सम्बन्धित उद्यान विज्ञान की शाखा है। इसमें अंगूरों की बोआई, पोषण, देख-रेख और फल उत्पादन का अध्ययन करा जाता है। इसमें द्राक्षाक्षेत्र का प्रबन्धन भी शामिल है, जिसमें रोगों व नाशीजीवों का रोकथाम, उर्वरक का प्रयोग, सिंचाई, फलों ...

                                               

द्राक्षाक्षेत्र

द्राक्षाक्षेत्र या अंगूरबाग़ान अंगूर फलने वाली लताओं का बाग़ान होता है। इन अंगूरों का प्रयोग हाला बनाने के लिए होता है, लेकिन कुछ मात्रा में खाने-वाले अंगूर, किशमिश और अंगूर रस का भी उत्पादन होता है। द्राक्षाक्षेत्रों में लताओं और अंगूरों की देखर ...

                                               

वाइटिस

वाइटिस, जिसके सदस्यों को साधारण भाषा में अंगूरबेल कहा जाता है, सपुष्पक द्विबीजपत्री वनस्पतियों के वाइटेसिए कुल के अंतर्गत एक जीववैज्ञानिक वंश है। इस वंश में ७९ जीववैज्ञानिक जातियाँ आती हैं जो अधिकतर पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में उत्पन्न हुई हैं और ...

                                               

अगस्ति

अगस्ति या गाछ मूंगा सेस्बानिया जीववैज्ञानिक वंश का एक छोटा पौधा है। यह एक तेज़ी से उगने वाला वृक्ष है जो ३ से ७ मीटर लम्बा होता है और मुलायम लकड़ी का बना होता है। इसके फल लम्बी व चपटी फलियों जैसे होते हैं और फूल लाल या सफ़ेद रंग के। यह मूल रूप से ...

                                               

अनावृतबीजी

अनावृतबीजी या विवृतबीज ऐसे पौधों और वृक्षों को कहा जाता है जिनके बीज फूलों में पनपने और फलों में बंद होने की बजाए छोटी टहनियों या शंकुओं में खुली अवस्था में होते हैं। यह दशा आवृतबीजी वनस्पतियों से विपरीत होती है जिनपर फूल आते हैं और जिनके बीज अक् ...

                                               

ऐस्टरेसिए

कंपोज़िटी या ऐस्टरेसिए फूलवाले पौधों का एक कुल है। इस कुल को हिंदी में संग्रथित कुल कह सकते हैं। इस कुल में अन्य कुलों की अपेक्षा बहुत अधिक पौधे हैं और ये विश्वव्यापी भी हैं।

                                               

कटुकी

कटुकी एक बड़ी जड़ वाली कन्द है। इसके पत्ते अण्डे की तरह गोल होते हैं। फूल नीले रंग के गुच्छों में होते है। सफेद, मायल और काली होती है। स्वाद में कडुवी होती है। इसे संस्कृत में कट्वी, कटुका या तिक्ता कहते हैं। कुटकी दो प्रकार की होती है- काली और प ...

                                               

कपूर कचरी

कपूरकचरी ज़िंजीबरेसी कुल की एक क्षुप जाति है जिसका वानस्पतिक नाम हेडीचियम स्पाइकेटम है। यह उपोष्णदेशीय हिमालय, नेपाल तथा कुमाऊँ में पाँच सात हजार फुट की ऊँचाई तक स्वत: उत्पन्न होता है। इसके पत्र साधारणत: लगभग एक फुट लंबे, आयताकार अथवा आयताकार-भाल ...

                                               

किबर

किबर मोनिमिएसे परिवार में एक प्रजाति का पौंधा है। इसमें निम्नलिखित प्रजातियाँ सम्मिलित हैं: किबर कोरिआसे Kibara coriacea, ब्ल्युम Blume) टुलास्ने

                                               

खरक

खरक या खर्ग या खिर्क या रोकू एक पतझड़ी वृक्ष है जो २० से २५ मीटर तक उग सकता है। यह रेतीली ज़मीन में और समशीतोष्ण इलाक़ों में तेज़ी से उगता है। इसका निवास क्षेत्र भारत, पाकिस्तान, तुर्की, बाल्कन क्षेत्र, इटली और फ़्रांस है, हालांकि यह दुनिया की अन ...

                                               

गुलबकावली

गुलबकावली हल्दी की जाति का एक पौधा जो प्रायः दलदलों या नम जमीन में होता है। इस पौधे का लंबोतरा फूल कई रंगों का और बहुत सुंगधित होता है। यह आँखों के रोगों में उपकारी माना जाता है। गुलबकावली नाम की एक लोककथा तथा एक फिल्म भी है।

                                               

धतूरा

धतूरा एक पादप है।। यह लगभग १ मीटर तक ऊँचा होता है। यह वृक्ष काला-सफेद दो रंग का होता है। और काले का फूल नीली चित्तियों वाला होता है। हिन्दू लोग धतूरे ले फल, फूल और पत्ते शंकरजी पर चढ़ाते हैं। आचार्य चरक ने इसे कनक और सुश्रुत ने उन्मत्त नाम से संब ...

                                               

बनफूल

अगर आप इसी नाम की १९७१ में बनी हिन्दी फ़िल्म पर जानकारी ढूंढ रहे हैं तो बनफूल 1971 फ़िल्म का लेख देखें बनफूल या वनफूल ऐसे फूल को कहा जाता है जो बिना किसी मानवी देखरेख के स्वयं ही उगकर खिल गया हो। मौसम, बारिश और धरती के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर अ ...

                                               

बनबेर

बनबेर या उन्नाव, बेर की जाति का पौधा है और पश्चिम हिमालय प्रदेश, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत, अफगानिस्तान, बलोचिस्तान, ईरान इत्यादि में पाया जाता है। इसकी झाड़ी काँटेदार, पत्ते बेर के पत्तों से कुछ तथा नुकीले, फल छोटी बेर के बराबर और प ...

                                               

लता

जो वनस्पतियाँ लता कहलातीं हैं जो स्वयं उर्ध्वाधर दिशा में खड़ी नहीं रह सकतीं। इनके तने पतले और कमजोर होते हैं और इतने लम्बे होते हैं कि ये स्वयं खड़ी नहीं होती बल्कि किसी अन्य वृक्ष, दीवार, जमीन आदि पर पसरते हुए वृद्धि करतीं हैं। अंगूर, लौकी, कद् ...

                                               

साधारण राज़क

साधारण राज़क या साधारण हॉप ​कैनाबेसीए जीववैज्ञानिक कुल के राज़क वंश की एक जाति है। इसके मादा और नर पौधे अलग होते हैं और मादा पौधे के शंकुनुमा फूलों का प्रयोग बियर बनाने में किया जाता है, जिसे वह स्वाद और ख़ुशबू प्रदान करते हैं, हालांकि इनसे कुछ क ...

                                               

सिलीन स्टेनोफ़ाइला

सिलीन स्टेनोफ़ाइला पुष्पीय पौधों की एक प्रजाति है, जो कैर्योफ़िलैसिए जीववैज्ञानिक कुल की है। इसे प्रायः नैरो-लीफ़्ड कैम्पियन भी कहा जाता है। यह सिलीन जीववैज्ञानिक वंश में एक प्रजाति है। २०१२ में यह दावा किया गया है कि इसके हिमीकृत नमूनों को, जो ३ ...

                                               

फ़बासी

फ़बासिए, लेग्युमिनोसी या पापील्योनेसी एक महत्त्वपूर्ण पादप कुल है जिसका बहुत अधिक आर्थिक महत्त्व है। इस कुल में लगभग ४०० वंश तथा १२५० जातियाँ मिलती हैं जिनमें से भारत में करीब ९०० जातियाँ पाई जाती हैं। इसके पौधे उष्ण प्रदेशों में मिलते हैं। शीशम, ...

                                               

शाकनाशक

शाकनाशक, शाकनाशी या खरपतवारनाशक या अपतृणनाशी ऐसे रसायन या कीटनाशक होते हैं, जिनका प्रयोग कृषि क्षेत्र में अवांछित खरपतवारों को नष्ट करने के लिये किया जाता है। विशेष शाकनाशक से सिर्फ चुने हुए खरपतवार ही नष्ट होते हैं जबकि शेष फसल को कोई नुकसान नही ...

                                               

नीला थोथा

नीला थोथा या तूतिया या कॉपर सल्फेट अकार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र CuSO 4 है। इसे क्युप्रिक सल्फेट भी कहते हैं। कॉपर सल्फेट कई यौगिकों के रूप में पाया जाता है जिनमें क्रिस्टलन जल की मात्रा अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिये इसका सूखा क्रिस्ट ...

                                               

आपेक्षिक आर्द्रता

किसी निश्चित तापक्रम पर निश्चित आयतन वाली हवा की आर्द्रता-सामर्थ्य तथा उसमें मौजूद आर्द्रता की वास्तविक मात्रा के अनुपात को सापेक्ष आर्द्रता कहतें हैं।

                                               

शीतोष्ण कटिबन्ध

शीतोष्ण कटिबन्ध या समशीतोष्ण कटिबन्ध ऊष्णकटिबन्ध और शीत कटिबन्ध के बीच का क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहाँ गर्मी और सर्दी के मौसम के तापमान में अधिक अन्तर नहीं होता। लेकिन यहाँ के कुछ क्षेत्रों में, जैसे मध्य एशिया और मध्य उ ...

                                               

आर्द्र अर्ध-कटिबन्धीय जलवायु

आर्द्र अर्ध-कटिबन्धीय जलवायु पृथ्वी पर एक जलवायु क्षेत्र होता है, जिसमें उष्ण, आर्द्र ग्रीष्म काल एवं ठंडे शीतकाळ होते हैं। इस प्रकार के जलवायु में मौसम की विस्तृत श्रेणी आती है और शब्द- अर्ध-कटिबंधीय शीतकालीन जलवायु के लिये एक मिथ्या नाम हो सकता ...

                                               

उष्णकटिबन्धीय जलवायु

उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों की जलवायु उष्णकटिबन्धीय जलवायु कहलाती है। यह जलवायु अशुष्क होती है तथा वर्ष के बारहों महीने औसत ताप 18 °C से अधिक रहता है। उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों का ताप पूरे वर्ष लगभग समान बना रहता है।

                                               

कोपेन जलवायु वर्गीकरण

कोपेन जलवायु वर्गीकरण जलवायु आकलन के लिए प्रयोग किया जाने वाला सबसे अधिक प्रयोगनीय मौसम वर्गीकरण है। इसका विकास जर्मन मौसमवेत्ता व्लादिमिर कोपेन ने १९०० में किया था। इसके बाद उन्होंने ही इसमें १९१८ और १९३६ में बहुत से बदलाव किये थे। इस वर्गीकरण क ...

                                               

ट्रिवार्था का जलवायु वर्गीकरण

विश्व की जलवायु का निर्धारण करने वाला सबसे प्रमुख कारक तापमान ही है, किन्तु यही एकमात्र कारक नहीं है। जलवायु के निर्धारण में किसी स्थान की समुद्र तल से ऊँचाई, समुद्र से दूरी, हवा और धाराएँ तथा अन्य भौगोलिक स्थितियों का योगदान होता है । अतः केवल त ...

                                               

भारत के जलवायु प्रदेश

भारत विशाल देश है। अतः इसके भिन्न-भिन्न क्षेत्रों की जलवायु में भी बहुत असमानता है। भारत के विभिन्न क्षेत्र चार प्रकार के जलवायु-समूह की जलवायु का अनुभव करते हैं। इनको पुनः सात जलवायवीय प्रकारों में बाटा जा सकता है।

                                               

भूमध्यरेखीय जलवायु

स्थिति एवं विस्तार- भूमध्य रेखा के उत्तर तथा दक्षिण में 5°अक्षांश से 10° अक्षांश तक विस्तृत जलवायु प्रदेश को विषुवत रेखीय भूमध्य रेखीय जलवायु प्रदेश कहते हैं।इसका विस्तार कभी कभी 15° से 20° अक्षांश तक भी पाया जाता है। वायुदाब पेटी में खिसकाव के क ...

                                               

भूमध्यसागरीय

भूमध्यसागर से सटे हुए अंचल में भूमध्यसागरीय जनवायु पाई जाती है। इस जलवायु की सर्वप्रमुख विशेषता जाड़े में वर्षा है। इस अंचल में फलों की कृषि अधिक होती है।

                                               

भूमध्यसागरीय जलवायु

भूमध्य जलवायु वह जलवायु है जो भूमध्य द्रोणी क्षेत्र में व्यापक है। भूमध्य सागर के अलावा कैलिफ़ोर्निया के तटवर्ती क्षेत्र, पश्चिमी और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के कुछ क्षेत्र, दक्षिणपश्चिमी दक्षिण अफ़्रीका और मध्य चिली में भी इस प्रकार की मौसमी परिस्थित ...

                                               

महाद्वीपीय जलवायु

महाद्वीपीय जलवायु वह जलवायु है जिसमें वर्ष में तापमान में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव होता है। इन क्षेत्रों के आसपास जलराशि के बड़े भण्डारों की कमी के कारण ऐसा होता है। प्रायः शीत ऋतु में तापमान इतना कम होता है कि हर वर्ष कुछ अवधि के लिए बर्फ जम जाती है ...

                                               

पवन

गतिशील वायु को पवन कहते हैं। यह गति पृथ्वी की सतह के लगभग समानांतर रहती है। पृथ्वी से कुछ मीटर ऊपर तक के पवन को सतही पवन और २०० मीटर या अधिक ऊँचाई के पवन को उपरितन पवन कहते हैं। जब किसी स्थान और ऊँचाई के पवन का निर्देश करना हो तब वहाँ के पवन की च ...

                                               

जेट स्ट्रीम

जेट धाराएं पृथ्वी सहित कुछ ग्रहों के वायुमंडल में तेजी से बहने व घूमने वाली हवा धाराएं हैं। पृथ्वी पर, मुख्य जेट धाराएं ट्रोपोपोज की ऊंचाई पर स्थित होती हैं और वे पश्चिम से पूर्व ओर बहती हैं। उनके पथ आम तौपर एक घूमने वाला आकार के होते है। जेट स्ट ...

                                               

तूफ़ान

तूफ़ान या आँधी पृथ्वी या किसी अन्य ग्रह के वायुमंडल में उत्तेजना की स्थिति को कहते हैं जो अक्सर सख़्त मौसम के साथ आती है। इसमें तेज़ हवाएँ, ओले गिरना, भारी बारिश, भारी बर्फ़बारी, बादलों का चमकना और बिजली का चमकना जैसे मौसमी गतिविधियाँ दिखती हैं। ...

                                               

पश्चिमी विक्षोभ

पश्चिमी विक्षोभ या वेस्टर्न डिस्टर्बन्स भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाक़ों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफ़ान को कहते हैं जो वायुमंडल की ऊँची तहों में भूमध्य सागर, अन्ध महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर उसे अचानक वर्षा और ...

                                               

प्रचलित पवन

जो पवन वायुदाब के अक्षांशीय अन्तर के कारण वर्ष भर एक से दूसरे कटिबन्धकी ओर प्रवाहित होता रहता हैं उसे प्रचलित पवन या स्थायी पवन, निश्चित पवन, ग्रहीय पवन या सनातनी पवने भी भी कहा जाता हैं।

                                               

विश्व की स्थानीय पवनें

स्थानीय धरातलीय बनावट, तापमान एवं वायुदाब की विशिष्ट स्थिति के कारण स्भावतः प्रचलित पवनों के विपरीत प्रवाहित होनें वाली पवनें "स्थानीय पवनों" के रूप में जानी जाती हैं। इनका प्रभाव अपेक्षाक्रत छोटे छेत्रों पर पडता हैं। ये क्षोभमण्डल की सबसे नीचे क ...

                                               

हारमैटन

पश्चिमी अफ्रीका में बहने वाली शुष्क एवं धूल-भरी व्यापारिक पवन को हारमैटन कहते हैं। यह पवन नवम्बर के अन्त से मार्च के मध्य तक सहारा से गिनी की खाड़ी की तरफ उतर-पूर्व दिशा से बहती है। इसका तापमान ३ डिग्री सेल्सियस तक होता है। मरुस्थल से होकर बहने क ...

                                               

बादल संघनन नाभिक

बादल संघनन नाभिक या संघनन का नाभिक वो छोटे कण होते हैं जिन पर, बादल की छोटी बूंदें आपस में जुड़कर एक बड़ी बूंद का निर्माण करती हैं। जल को वाष्प से द्रव अवस्था प्राप्त करने के लिए एक गैर-गैस सतह की आवश्यकता होती है और वातावरण में, यह सतह बादल संघन ...

                                               

2015 दक्षिण भारतीय बाढ़

2015 दक्षिण भारत बाढ़ नवंबर-दिसंबर के महीने में उत्तर-पूर्वी मॉनसून के कारण आई थी। इसने तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश और पुदुच्चेरी को प्रभावित किया। इस बाढ़ ने चेन्नई शहर को विशेष रूप से प्रभावित किया। इस बाढ़ के कारण लगभग 300 लोग मारे गए, 18 लाख से अ ...

                                               

अयन (खगोलविज्ञान)

भौतिकी में, किसी घूर्णन करने वाली वस्तु के अक्ष के घूर्णन को पुरस्सरण या अयन कहते हैं। पुरस्सरण दो तरह का होता है- १ बलाघूर्ण-मुक्त पुरस्सरण, तथा २ बलाघूर्ण से उत्पन्न पुरस्सरण या गाइरोस्कोपिक पुरस्सरण प्रायः हम देखते हैं कि घूर्णन करने वाली वस्त ...

                                               

ओसांक

जिस तापमान पर जल-वाष्प संघनित होकर जल रूप में बदल जाती है, उसे ओसांक कहते हैं। ओसांक कई बातों पर निर्भर करता है, दाब, आपेक्षिक आर्द्रता आदि।

                                               

कुहासा

कुहासा वह वायुमंडलीय अवस्था है जिसमे जल की सूक्ष्म बूँदे हवा में तैरते रहते हैं। इनकी दृश्यता सीमा कोहरे की तुलना में अधिक होती है। ये अक्सर वर्षा के बाद दिखाई देती है।

                                               

कोहरा

कोहरा प्रायः ठंडी आर्द्र हवा में बनता है और इसके अस्तित्व में आने की प्रक्रिया बादलों जैसी ही होती है। गर्म हवा की अपेक्षा ठंडी हवा अधिक नमी लेने में सक्षम होती है और वाष्पन के द्वारा यह नमी ग्रहण करती है। ये वह बादल होता है जो भूमि के निकट बनता ...

                                               

घाघ

घाघ कृषि पंडित एवं व्यावहारिक पुरुष थे। उनका नाम भारतवर्ष के, विशेषत: उत्तरी भारत के, कृषकों के जिह्वाग्पर रहता है। चाहे बैल खरीदना हो या खेत जोतना, बीज बोना हो अथवा फसल काटना, घाघ की कहावतें उनका पथ प्रदर्शन करती हैं। ये कहावतें मौखिक रूप में भा ...