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पुराना नियम

ईसाइयों के धर्मग्रन्थ बाइबिल के प्रथम भाग का नाम पुराना नियम है। इसमें ईश्वर द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति, यहूदी राज्य और ईश्वर से उनका सम्बन्ध, आदि का कहानियों द्वारा वर्णन है। यहूदियों के प्रारंभिक इतिहास का अधिकतर पता ओल्ड टेस्टामेंट से ही चलता ह ...

                                               

पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च

ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म के प्रमुख तीन सम्प्रदायों में से एक है। 11वीं सदी तक पश्चिम में लैटिन, और पूरब में ग्रीक केंद्रों में बंटे, ईसाई साम्राज्य के फलस्वरूप 1054 ई. में, पूर्वी बाइजेंटाइन ऑर्थोडॉक्स, पश्चिमी कैथोलिक से अलग हो गए तथा पोप की सत्ता क ...

                                               

पैराडाइज

यूनानी साहित्य में फारसी राजाओं की वाटिका को पैराडाईज कहा जाता था। बाइबिल के प्रारंभ में आदम और हौवा का निवास स्थान एक वाटिका के रूप में चित्रित है और उसे पैराडाज अथवा अदनवाटिका कहा गया है। उसका तात्पर्य है कि वे सुख-शांति से जीवन व्यतीत कर रहे थ ...

                                               

प्रभुप्रकाश

एपिफ़नी अथवा प्रभुप्रकाश नामक ईसाई पर्व परम्परागत रूप से ६ जनवरी को मनाया जाता है। यह लगभग सन्‌ 200 ई. में प्राच्य चर्च में प्रारंभ हुआ। बाद में वह पर्व पाश्चात्य चर्च में भी फैल गया। प्रारंभ में वह ईश्वरीय शक्ति के आविर्भाव तथा ईसा के जन्म के आद ...

                                               

प्राच्य कलीसिया

प्राच्य कलीसिया, ईसाई धर्म में, उन ईसाई कलीसियाओं अथवा सम्प्रदायों को कहा जाता है जो आराधना, धार्मिकता तथा संगठन के विषय में अंतिओक, येरुसलेम, सिकंदरिया और कुस्तुंतुनिया जैसे प्राचीन मसीही केंद्रों की प्रणाली अपनाते हैं उन्हें। इसे अक्सर पूर्वी क ...

                                               

भक्ति (इसाई)

ईसाई विश्वास के अनुसार ईश्वर ने प्रेम से प्रेरित होकर मनुष्य को अपने परमानंद का भागी बनाने के उद्देश्य से उसकी सृष्टि की है। प्रथम मनुष्य ने ईश्वर की इस योजना को ठुकरा दिया और इस प्रकार संसार में पाप का प्रवेश हुआ । मनुष्यों को पाप से छुटकारा दिल ...

                                               

भजनसंहिता

भजन संहिता, एक हिब्रू की बाइबल और ईसाई बाइबल की एक पुस्तक है। इसे प्रायः साल्म कहा जाता है। कुल मिलाकर इसके १५० भजन इजराइल के सम्पूर्ण मजहबी विश्वास को अभिव्यक्त करते हैं।

                                               

मारिया डी लियोन

मारिया डी लियोन एक कैथोलिक नन और रहस्यमय ढँग से पैदा हुई स्पेनिश तेनरीफ़ थी। एक गरीब परिवार में जन्मी मारिया को बचपन से ही रहस्यमय अनुभव प्राप्त हो गया था। 1668 में वह एक नन बन गयी। बाद में किसी सन्त की प्रतिष्ठा के लिए उसकी रहस्यपूर्ण मौत हो गई। ...

                                               

मुक्ति सेना

मुक्तिसेना एक ईसाई संस्था तथा अन्तरराष्ट्रीय धर्मार्थ संस्था है जिसका संगठन अर्ध-सैनिक है। इस संस्था के विश्व भर में १५ लाख से अधिक सदस्य हैं। इसके संस्थापक विलियम बूथ थे। इसके सदस्य बाइबिल, ईसा के ईश्वरत्व आदि मुख्य ईसाई धर्मसिद्धांतों पर विश्वा ...

                                               

मेथोडिज़्म

मेथोडिज्म प्रोटेस्टैण्ट ईसाइयत से सम्बन्धित धार्मिक आन्दोलन है। यह अनेकानेक नामों वाली संस्थाओं के माध्यम से चलाया जा रहा है। इनका दावा है कि इसके लगभग ७ करोड़ अनुयाई हैं। मेथाडिस्ट विश्व भर में फैला हुआ है। ब्रिटेन के अतिरिक्त वह प्रधानतया कनाडा ...

                                               

मौनवाद

मौनवाद, ईसाई धर्म की एक रहस्यवादी प्रवृति, जिसमें आंतरिक शांति को ईश्वर के अनुछाव का माध्यम माना गया था। वस्तुत, यह प्रवृत्ति अपने ढंग की अकेली न थी। ईसाई धर्म के इतिहास से पता चलता है कि वह मानव के आत्मिक विकास का ही उद्देश्य लेकर नहीं, वरन् धार ...

                                               

यहोवा के साक्षी

यहोवा के साक्षी ईसाई धर्म का एक संप्रदाय है जिसकी धार्मिक मान्यताएँ मुख्यधारा ईसाईयत से भिन्न हैं। संस्था के अनुसार विश्व भर में उसके 8.6 मिलियन अनुयायी इंजीलवाद में लगे हुए हैं, सम्मेलन उपस्थिति 12 मिलियन तथा वार्षिक स्मृति उपस्थिति 20.91 मिलियन ...

                                               

यीशु

यीशु या यीशु मसीह इब्रानी: येशुआ ; अन्य नाम: ईसा मसीह, जीसस क्राइस्ट, जिन्हें नासरत का यीशु भी कहा जाता है, ईसाई धर्म के प्रवर्तक हैं। ईसाई लोग उन्हें परमपिता परमेश्वर का पुत्और ईसाई त्रिएक परमेश्वर का तृतीय सदस्य मानते हैं। ईसा की जीवनी और उपदेश ...

                                               

यूरोपीय धर्मसुधार

16वीं शताब्दी के प्रारंभ में समस्त पश्चिमी यूरोप धार्मिक दृष्टि से एक था - सभी ईसाई थे; सभी रोमन काथलिक चर्च के सदस्य थे; उसकी परंपरगत शिक्षा मानते थे और धार्मिक मामलों में उसके अध्यक्ष अर्थात् रोम के पोप का शासन स्वीकार करते थे। यूरोपीय धर्मसुधा ...

                                               

रूसी पारम्परिक ईसाई

रूसी पारम्परिक ईसाई एक ईसाई समुदाय का नाम है। अधिकतर रूसी ईसाई लोग इसी सम्प्रदाय के सदस्य हैं। इसका सर्वोच्च धार्मिक नेता मोस्को का मुख्य पादरी है। यह सम्प्रदाय अन्य पूर्वी पारम्परिक ईसाई सम्प्रदायों को अपना सम्बन्धी मानती है। यह पोप के नेतृत्व व ...

                                               

लूक़ा

लूक़ा) चार इंजीलवादियों में से एक था। लूक़ा ने तीसरी गोस्पल लिखी थी और ऍक्ट्स ओफ़ द अपॉसल्स का एक भाग भी। वे बाइबिल के बहुत महत्वपूर्ण चरित्र हैं।

                                               

वाई एम सी ए

वाई एम सी ए जिनेवा, स्विट्ज़रलैण्ड में स्थित एक विश्वव्यापी संगठन है जो १२५ राष्ट्रोंसे जूडा हुआ है। अंग्रेजी लोकोपकारी जॉर्ज विलियम्स ने इसकी स्थापना ६ जून १८४४ को लंदन में की थी।

                                               

विश्व गिरजाघर परिषद

विश्व गिरजाघर परिषद: का उद्भव वर्ष 1921 में अनेक ईसाई आन्दोलनों के एकजुट होने से हुआ। एकजुट होने वाले ईसाई आन्दोलनों में अंतरराष्ट्रीय मिशनरी परिषद, आस्था एवं व्यवस्था आंदोलन तथा जीवन एवं कार्य आन्दोलन प्रमुख थे। गिरजाघरों की एक परिषद गठित करने क ...

                                               

विश्व में ईसाई धर्म

ईसाई धर्म ; में लगभग 2.4 अरब अनुयायी हैं, जो कि लगभग 7.2 अरब लोगों में से हैं।. दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और विश्व में सबसे बड़ा धर्म है, जिसमें कैथोलिक चर्च, प्रोटेस्टेंटिज़म और पूर्वी रूढ़िवादी चर्च होने वाले ईसाई मे ...

                                               

सन्त निकोलस

संत निकोलस शताब्दियों से मध्य पूर्व तथा समस्त यूरोप में अत्यंत लोकप्रिय संत थे, जो बच्चों, कुमारियों, मल्लाहों तथा बहुत से नगरों के संरक्षक माने जाते हैं। सन्त निकोलस का पर्व ६ दिसम्बर को पड़ता है। जर्मनी, स्विट्जरलैंड, हॉलैंड आदि में उस पर्व में ...

                                               

सीरियाई ईसाई

सीरियाई ईसाई एक पूर्वी ईसाई सम्प्रदाय है जो अपने धार्मिक कार्यों में सीरियाई भाषा का प्रयोग करता है। सीरियाई भाषा, मध्य अरामी भाषा की उपभाषा है।

                                               

सैंट पीटर

सैंट पीटर संत पीटर 64 से 68 के बीच), | term_end = between AD 64 and 68 को साइमन पीटर, शिमोन या साइमन के नाम से भी जाना जाता है इस ध्वनि के बारे में उच्चारण, नए नियम के अनुसार, प्रारंभिक ईसाई महान चर्च के नेताओं, यीशु मसीह के बारह प्रेरितों में से ...

                                               

सोला स्क्रिप्तूरा

सोला स्क्रिप्तूरा ईसाई धर्म के कुछ पंथों की यह मान्यता है कि धर्म में केवल वही मान्य होना चाहिये जो ईसाई धर्मग्रंथ बाइबिल में लिखा गया है और इस से अलग किसी मानव या पुस्तक द्वारा जो भी कहा गया है वह अधिकारिक नहीं माना जा सकता। ईसाई धर्म के विकास म ...

                                               

हर्मैनो पेड्रो

संत हर्मैनो पेड्रो या सेंट जोज़फ़ डी बेटनकोर्ट यी गोंज़ालस के संत पीटर एक स्पेनियाइ मूल के ईसाई धर्मप्रचारक और मिशनरी थे जिनकी कर्मभूमि ग्वाटेमाला थी। वे आर्डर ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ बेथेलेम के संस्थापक थे। तथा वे न सिर्फ कैनरी द्वीपसमूह के पहले मूलनिव ...

                                               

झाकरी

झाकरी भारत के सिक्किम राज्य और दार्जिलिंग ज़िले में स्थानीय ओझाओं को कहा जाता है जो हिन्दू, तिब्बती बौद्ध, मून और बोन प्रथाओं के मिश्रित रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। यह लिम्बू, खाम्बू, सुनवर, शेरपा, कामी, तामांग, गुरुंग और लेपचा समुदायों में पा ...

                                               

काओ दाई धर्म

काओ दाई ; Cao Dai: बीसवीं शताब्दी का एक नए धर्म है. इसकी स्थापना 1926 ईस्वी में वियतनाम में हुई थी। काओ दाई मतलब है "उच्च" या ऊंचाइयों में काओ दाई धर्म के अनुयायी मानते हैं कि उनके धर्म और इसके शिक्षण तथा प्रतीकवाद भगवान द्वारा प्रदर्शित होते हैं ...

                                               

गणेश अथर्वशीर्ष

{{स्रोतहीति अथर्वशीर्ष में रचित एक लघु उपनिषद है। इस उपनिषद में गणेश को परम ब्रह्म बताया गया है। यह अथर्ववेद का भाग है।अथर्वशीर्ष में दस ऋचाएं हैं।

                                               

गणेश-द्वादशनाम

विघ्नविनाशक-गणेश-द्वादशनामस्तोत्रम् सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः।। धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः। द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि।। विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा। संग्रामे संकटे चै ...

                                               

तमिल जैन

तमिल जैन भारत में जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय का हिस्सा है। वे ज्यादातर पहली शताब्दी ई.पू. के बाद से तमिलनाडु राज्य में रहते हैं। इन तमिल जैनियों ने तमिल साहित्य और संस्कृति के लिए बहुत योगदान दिया है। वे मातृभाषा के रूप में तमिल बोलते हैं। उत्तर ...

                                               

अकंपित गौतम

अकंपित गौतम भगवान महावीर के ८ वें गणधर थे। वे गौतम गोत्रिय ब्राह्मण थे। इन्होंने अपने 300 शिष्यों के साथ 48 वर्ष की अवस्था मे भगवान महावीर से दीक्षा ग्रहण की थी, तथा भगवान महावीर के ८ वें शिष्य कहलाये।

                                               

अग्रवाल जैन

साहु शांति प्रसाद जैन, founder of Bharatiya Jnanpith विबुध श्रीधर, author and poet, composer of several texts साहु टोडर, supervisor of royal mint and patron of scholars नट्टल साहु, merchant prince during the rule of Tomar Anangapal and patron of ...

                                               

अचलभ्राता

अचलभ्राता भगवान महावीर के ९ वें गणधर थे। ये भी ब्राह्मण थे तथा उनके ३०० ब्राह्मण शिष्य भी भगवान महावीर के संघ में दीक्षित हो गये थे। ७२ वर्ष कि आयु मे इन्होने निर्वाण प्राप्त किया।

                                               

अणुव्रत

अणुव्रत का अर्थ है लघुव्रत। जैन धर्म के अनुसार श्रावक, अणुव्रतों का पालन करते हैं। महाव्रत साधुओं के लिए बनाए जाते हैं। यही अणुव्रत और महाव्रत में अंतर है, अन्यथा दोनों समान हैं। अणुव्रत इसलिए कहे जाते हैं कि साधुओं के महाव्रतों की अपेक्षा वे लघु ...

                                               

अनुयोग (जैन धर्म)

जैन धर्म में शास्त्रो की कथन पद्धति को अनुयोग कहते हैं। जैनागम चार भागों में विभक्त है, जिन्हें चार अनुयोग कहते हैं - प्रथमानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग और द्रव्यानुयोग। इन चारों में क्रम से कथाएँ व पुराण, कर्म सिद्धान्त व लोक विभाग, जीव का आचार-व ...

                                               

अरिहंत

अर्हत् और अरिहंत पर्यायवाची शब्द हैं। अतिशय पूजा-सत्कार के योग्य होने से इन्हें कहा गया है। मोहरूपी शत्रु का अथवा आठ कर्मों का नाश करने के कारण ये अरिहंत कहे जाते हैं। अर्हत, सिद्ध से एक चरण पूर्व की स्थिति है। जैनों के णमोकार मंत्र में पंचपरमेष् ...

                                               

अवसर्पिणी

अवसर्पिणी, जैन दर्शन के अनुसार सांसारिक समय चक्र का आधा अवरोही भाग है जो वर्तमान में गतिशील है। जैन ग्रंथों के अनुसार इसमें अच्छे गुण या वस्तुओं में कमी आती जाती है। इसके विपरीत उत्सर्पिणी में अच्छी वस्तुओं या गुणों में अधिकता होती जाती है।

                                               

अहिंसा पुरस्कार

अहिंसा पुरस्कार उन व्यक्तियों की पहचान के लिए जैनोलॉजी संस्थान द्वारा दिया गया एक वार्षिक पुरस्कार है जो अहिंसा के सिद्धांतों को सन्निहित करते हैं और बढ़ावा देते हैं। यह 2006 में स्थापित किया गया था और तब से 2 अक्टूबर को, महात्मा गांधी की जयंती क ...

                                               

आगम

भारत के नाना धर्मों में आगम का साम्राज्य है। जैन धर्म में मात्रा में न्यून होने पर भी आगमपूजा का पर्याप्त समावेश है। बौद्ध धर्म का वज्रयान इसी पद्धति का प्रयोजक मार्ग है। वैदिक धर्म में उपास्य देवता की भिन्नता के कारण इसके तीन प्रकार है: वैष्णव आ ...

                                               

आगम (जैन)

आगम शब्द का प्रयोग जैन धर्म के मूल ग्रंथों के लिए किया जाता है। केवल ज्ञान, मनपर्यव ज्ञानी, अवधि ज्ञानी, चतुर्दशपूर्व के धारक तथा दशपूर्व के धारक मुनियों को आगम कहा जाता है। कहीं कहीं नवपूर्व के धारक को भी आगम माना गया है। उपचार से इनके वचनों को ...

                                               

आचार्य पुष्पदंत सागर

आचार्य पुष्पदंत सागर जैन धर्म के एक प्रमुख दिगम्बर संत हैं। उन्होंने क्षुल्लक दीक्षा आचार्य विद्यासागर से ग्रहण की। उनकी दिगम्बर दीक्षा आचार्य विमल सागर के हाथों सम्पन्न हुई। पुष्पगिरी तीर्थ का निर्माण कार्य आचार्य पुष्पदंत सागर की प्रेरणा से हो ...

                                               

आचार्य शय्यंभव

आचार्य शय्यंभव भगवान महावीर के चतुर्थ पट्टधर आचार्य थे।। इनका जन्म राजगृह के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। श्वेताम्बर मान्यताओं के अनुसार इन्होनें दशवईकालिका नामक ग्रन्थ की रचना की थी। ऐसा मुमकिन है कि यह पूरी रचना आचार्य शय्यंभव की ना हों और कुछ भ ...

                                               

आदर्श जादुई वर्ग

कोई n श्रेणी का वर्ग जिसमें शून्य से n ² − १ की संख्याएं होती हैं और दो अन्य अतिरिक्त गुण होते हों, आदर्शतम जादूई वर्ग कहलाता है। दो अतिरिक्त गुणों में: इंटीजर्स के सभी जोड़े n /2 की प्रधान डायगोनल पर जमा करने पर s आये। प्रत्येक २×२ उप-वर्ग का जम ...

                                               

आदिपुराण

आदिपुराण जैनधर्म का एक प्रख्यात पुराण है जो सातवीं शताब्दी में जिनसेन आचार्य द्वारा लिखा गया था। इसका कन्नड भाषा में अनुवाद आदिकवि पम्प ने चम्पू शैली में किया था। इसमें जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के दस जन्मों का वर्णन है।

                                               

आस्रव

जैन दर्शन के अनुसार, आस्रव संसार का एक तत्त्व अथवा एक मूल यथार्थ हैं। यह आत्मा के कर्म करने के पीछे मन और शरीर के प्रभाव को संदर्भित करता हैं। जैन धर्म में, कर्म की प्रक्रिया सात सत्य या मौलिक सिद्धांतों पर आधारित हैं, जो मानव दुर्दशा समझाते हैं। ...

                                               

इंद्रभूति गौतम

दिगम्बर परम्परा के अनुसार जब इंद्र ने इंद्रभूति से एक श्लोक का अर्थ पूछा था: पंचेव अत्थिकाया छज्जीव णिकाया महव्वया पंच। अट्ठयपवयण-मादा सहेउओ बंध-मोक्खो य॥ जब वह नहीं बता पाए तो इंद्र ने उने उत्तर के लिए भगवान महावीर के समावसरण में जाने को कहा। दि ...

                                               

उत्तरपुराण

महापुराण का उत्तरार्ध उत्तरपुराण कहलाता है। यह जिनसेन के पट्टशिष्य गुणभद्राचार्य की प्रौढ़ रचना है। इसमें लगभग 9.500 श्लोक हैं जिनमें 24 में से 23 तीर्थकरों तथा अन्य शलाकापुरुषों के चरित्र काव्यरीति में वर्णित हैं। महापुराण के पूर्वाद्ध, आदिपुराण ...

                                               

उमास्वामी

आचार्य उमास्वामी, कुन्दकुन्द स्वामी के प्रमुख शिष्य थे। वह मुख्य जैन ग्रन्थ, तत्त्वार्थ सूत्र के लेखक है। वह दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों के द्वारा पूजे जाते हैं। वह दूसरी सदी के एक गणितज्ञ थे।

                                               

कर्नाटक में जैन धर्म

कर्नाटक में इनकी आबादी ०.७४ प्रतिशत यानि ४१२६५४ है। गोमतेश्वर में ५७ फट ऊंची प्रतिमा है, जो भारत के सात अजूबों में शामिल है। ये मुख्यतः कन्नड़ बोलते हैं।

                                               

कवलाहार

कवलाहार मुनि के आहार का पर्यायवाची है। आगम में किगए मुनि के आहार के छः भेद बताये गये हैं- नोकर्माहार, कर्माहार, कवलाहार, लेप्याहार, ओजाहाऔर मानसाहार। भगवतीसूत्र, गाथा २११ में मुनि का अधिकतम आहार ३२ और आर्यिका का २८ कवल बताया है। एक कवल का उत्कृष् ...

                                               

काष्ठ संघ

काष्ठा संघ दिगंबर जैन सम्प्रदाय का एक उपसम्प्रदाय था जो उत्तरी एवं पश्चिमी भारत के अनेक भागों में व्याप्त था। काष्ठा संघ मूल संघ की एक शाखा माना जाता है। कहा जाता है कि इस संघ की उत्पत्ति काष्ठा नामक नगर से हुई थी। दिल्ली क्षेत्र के कई ग्रन्थों ए ...