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एशिया में धर्म

एशिया विभिन्न प्रकार के धर्मों के साथ सबसे बड़ा और सबसे अधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप है, और हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, कन्फ्यूशियनिज्म, इस्लाम, जैन धर्म, ईसाई धर्म, यहूदी धर्म, शिनटोइज्म, सिख धर्म, ताओवाद और पारिस्थितिकतावाद जैसे कई धर्मों का जन्मस्थ ...

                                               

विश्व में सिख धर्म

सिख धर्म ; के अनुयायी मुख्य रूप से भारत के पंजाब क्षेत्र में पाए जाते हैं।.लेकिन सिख समुदाय हर बसे हुए महाद्वीप में मौजूद हैं, साथ ही विदेशी स्तर पर कनाडा में सबसे बड़ी जनसंख्या है। दुनिया में करीब 25-27 लाख सिख हैं।

                                               

विश्व में हिन्दू धर्म

जनसंख्या के आधापर भारत पहले स्थान पर है और उसके बाद प्रतिशत में नेपाल और मॉरिशस का स्थान आता है।विश्व की कुल आबादी में लगभग 15-16% हिन्दू धर्म के अनुयायी लोग हैं।

                                               

तोरो

तोरो जापान में प्रयोग होने वाली एक पारम्परिक लालटेन है जो पत्थर, लकड़ी या धातु की बनी होती है। इसका प्रयोग बौद्ध मंदिरों में हुआ करता था जहाँ इन्हें महात्मा बुद्ध के लिए श्रद्धांजलि मन जाता था। हेइआन काल के बाद इन्हें शिन्तो धर्म के मंदिरों और नि ...

                                               

नज़र

नज़र या दृष्टिदोष उस दृष्टि या देखने के लहजे को कहा जाता है जिस से देखे जाने वाले को हानि यो या दुर्भाग्य का सामना करना पड़े। बहुत सी संस्कृतियों में यह मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई अन्य व्यक्ति ईर्ष्या या नफ़रत की दृष्टि से देखे तो पहले ...

                                               

संत मत

लगभग 13 वीं सदी के बाद से भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में" संत मत” एक ढीले ढंग से जुड़ा गुरुओं का एक सहयोगी समूह था जिसे बहुत प्रसिद्धि मिली। धर्म ब्रह्म विज्ञान के तौपर उनकी शिक्षाओं की विशेषता यह है कि वे अंतर्मुखी और प्रेम भक्ति के एक दैवी ...

                                               

कबीर पंथ

कबीर पंथ या सतगुरु कबीर पंथ भारत के भक्तिकालीन कवि कबीर की शिक्षाओं पर आधारित एक पंथ है, जिसका स्थापना खुद सदगुरु कबीर ने अपने परम शिष्य धर्मदास के द्वारा किये थे। यह पंथ दार्शनिक और नैतिक शिक्षा पर आधारित है। कबीर पंथ के अनुयायियों में हिंदू, मु ...

                                               

डेरा सच्चा सौदा

डेरा सच्चा सौदा आश्रमों की एक श्रृंखला है। संमत का अनुसरण करने वाले इस आश्रम का मुख्यालय हरियाणा के सिरसा में बेगू मार्ग पर स्थित है। इसकी स्थापना सन् १९४८ में एक संत शाह मस्ताना जी ने की थी। वर्तमान में इसके प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह हैं। ...

                                               

दर्शन सिंह

सन्त दर्शन सिंह भारत के आधुनिक काल के आध्यात्मिक गुरुओं में थे। दिल्ली स्थित सावन कृपाल रुहानी मिशन से संचालित सन्मत विचारधारा के प्रणेता रहे। उर्दू व फारसी में वे सिद्धहस्त थे तथा सूफ़ी रहस्यात्मक शायरी में कई अत्यंत गहरी रचनाएँ उन्होंने मानवजात ...

                                               

बाबा फकीर चंद

बाबा फकीर चंद सुरत शब्द योग अर्थात मृत्यु अनुभव के सचेत और नियंत्रित अनुभव के साधक और भारतीय गुरु थे। वे संतमत के पहले गुरु थे जिन्होंने व्यक्ति में प्रकट होने वाले अलौकिक रूपों और उनकी निश्चितता के छा जाने वाले उस अनुभव के बारे में बात की जिसमें ...

                                               

भीखा साहब

भीखा साहब बावरी पंथ की भुरकुड़ा, गाजीपुर शाखा के संत गुलाल साहब के शिष्य थे। इनका जन्म आजमगढ़ जिले के खानपुर बोहना गाँव में हुआ था। सन् 1760 में गुलाल साहब की मृत्यु के बाद भीखा भुरकुड़ा गद्दी के महंत हुए। इनके दो प्रमुख शिष्य हुए - गोबिन्द साहब ...

                                               

शिव ब्रत लाल

शिव ब्रत लाल वर्मन का जन्म सन् 1860 ईस्वी में भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िला में हआ था। वे दाता दयाल और महर्षि जी के नाम से भी प्रसिद्ध हुए. वे स्नातकोत्तर तक पढ़े थे और लेखक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में ख्याति पाई. ऐसा माना जाता है क ...

                                               

संत तुकाराम

cast= संत तुकाराम १६०८-१६५०, जिन्हें तुकाराम के नाम से भी जाना जाता है सत्रहवीं शताब्दी एक महान संत कवि थे जो भारत में लंबे समय तक चले भक्ति आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ थे।

                                               

सत्गुरु

सत्गुरु या सद्गुरु का अर्थ है सच्चा गुरु. यह शब्द गुरु के अन्य रूपों जैसे संगीत विद्या के गुरु, पढा़ने वाले गुरु, माता-पिता रूपी गुरु आदि से अलग माना जाता है। सत्गुरु नाम केवल ऐसे ज्ञानप्राप्त ऋषि/ संत को दिया जाता है जिसके जीवन का उद्देश्य आध्या ...

                                               

गंभीरनाथ

गंभीरनाथ, नाथ पंथ के एक प्रख्यात योगी थे जिनका जन्म कश्मीर के एक धनी परिवार में हुआ था। किंतु युवावस्था में ही उन्हें वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने गोरखपुर में गोपालनाथ से दीक्षा प्राप्त की। कहा जाता है कि उन्होंने तीनों योगों की सिद्धि प्राप्त ...

                                               

गाडगे बाबा

महान समाज सुधारक संत गाडगे बाबा का जन्म दिवस बीसवीं सदी के समाज-सुधार आन्दोलन में जिन महापुरूषों का योगदान रहा है, उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण नाम बाबा गाडगे का है। बुद्धिजीवियों का ध्यान बाबा गाडगे के तरफ न जाने से उनका नाम ज्यादा प्रकाश में नही ...

                                               

चोखामेला

चोखामेला महाराष्ट्र के एक नामी संत थे। संत चोखामेला ने कई अभंग लिखे हैं, जिसके कारण उन्हें भारत का पहला दलित-कवि कहा गया है। सामाजिक-परिवर्तन के आन्दोलन में चोखामेला पहले संत थे, जिन्होंने भक्ति-काल के दौर में सामाजिक-गैर बराबरी को लोगों के सामने ...

                                               

ज्ञानेश्वर

संत ज्ञानेश्वर महाराष्ट्र तेरहवीं सदी के एक महान सन्त थे| इन्होंने ज्ञानेश्वरी की रचना की। संत ज्ञानेश्वर की गणना भारत के महान संतों एवं मराठी कवियों में होती है। ये संत नामदेव के समकालीन थे और उनके साथ इन्होंने पूरे महाराष्ट्र का भ्रमण कर लोगों ...

                                               

नामदेव

नामदेव भारत के प्रसिद्ध संत थे। इनके समय में नाथ और महानुभाव पंथों का महाराष्ट्र में प्रचार था। नामदेव का जन्म सन १२७० शके ११९२ में महाराष्ट्र के सतारा जिले में कृष्णा नदी के किनारे बसे नरसीबामणी नामक गाँव में एक शिंपी जिसे छीपा भी कहते है के परि ...

                                               

नारायण गुरु

नारायण गुरु भारत के महान संत एवं समाजसुधारक थे। कन्याकुमारी जिले में मारुतवन पहाड़ों की एक गुफा में उन्होंने तपस्या की थी। गौतम बुद्ध को गया में पीपल के पेड़ के नीचे बोधि की प्राप्ति हुई थी। नारायण गुरु को उस परम की प्राप्ति गुफा में हुई।

                                               

पुंडलिक

पुंडलिक या पुंडरीक हिंदू भगवान विट्ठल के उपाख्यानों में एक केंद्रीय पात्र है। विट्ठल वैष्णव देवता है जिन्हे आमतौपर विष्णु और कृष्ण का रूप माना जाता है। पुंडलिक को विठ्ठल को पंढरपुर लाने का श्रेय दिया जाता है, जहां विठ्ठल का प्रमुख मन्दिर है। पुंड ...

                                               

लिखमीदास

सन्त लिखमीदास, राजस्थान के प्रसिद्ध सन्त थे। माली समाज में उनकी बड़ी प्रतिष्ठा है। वे विवाहित थे तथा उनके दो पुत्और एक पुत्री थी। वे नागौर के निवासी थे। उनके गुरु श्री श्री 1008 श्री खीवण जी मेगवाल थे उन्होने अनेकों भजन और दोहों की रचना की है जो ...

                                               

वेदान्त देशिक

वेदान्त देशिक वैष्णव गुरू, कवि, भक्त, दार्शनिक एवं आचार्य थे। उनकी पादुका सहस्रम नामक रचना चित्रकाव्य की अनुपम् भेंट है। इनका दूसरा नाम वेंकटनाथ था। तेरहवीं शताब्दी में इनकी स्थिति मानी जाती है।

                                               

सन्त एकनाथ

एकनाथ प्रसिद्ध मराठी सन्त जिनका जन्म पैठण में संत भानुदास के कुल में हुआ था। इन्होंने संत ज्ञानेश्वर द्वारा प्रवृत्त साहित्यिक तथा धार्मिक कार्य का सब प्रकार से उत्कर्ष किया। ये संत भानुदास के पौत्र थे। गोस्वामी तुलसीदास के समान मूल नक्षत्र में ज ...

                                               

सन्त कंवर राम

संत कंवर रामजी का जन्म 13 अप्रैल सन् 1885 ईस्वी को बैसाखी के दिन सिंध प्रांत में सक्खर जिले के मीरपुर माथेलो तहसील के जरवार ग्राम में हुआ था। उनके पिता ताराचंद और माता तीर्थ बाई दोनों ही प्रभु भक्ति एवं हरि कीर्तन करके संतोष और सादगी से अपना जीवन ...

                                               

स्वामी रामसुखदास

स्वामी राम सुखदास भारतवर्ष के अत्यन्त उच्च कोटि के विरले वीतरागी संन्यासी थे। वे गीताप्रेस के तीन कर्णाधारों में से एक थे। अन्य दो हैं- श्री जयदयाल गोयन्दका तथा श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार।

                                               

इस्लाम से हिंदू धर्म के धर्मान्तरण की सूची

इस्लाम से हिंदू धर्म के धर्मान्तरण की सूची उन व्यक्तियों को सूचीबद्ध किया गया हैं, जिन्होंने किसी कारण अपना हिन्दू धर्म त्याग कर इस्लाम धर्म अंगीकार किया और किसी कारण पुनः हिन्दूधर्म को स्वीकारा। इस सूची में उन लोगो को भी सम्मिलित किया गया है, जि ...

                                               

आनन्द मार्ग

आनन्द मार्ग एक सामाजिक एवं आध्यात्मिक पन्थ है। इसका आरम्भ सन् १९५५ में बिहार के जमालपुर में श्री प्रभात रंजन सरकार द्वारा की गयी थी या यह आधिकारिक तौपर आनन्द मार्ग प्रचारक संघ एक है 1955 में प्रभात रंजन सरकार द्वारा भारत के जमालपुर, बिहार, भारत म ...

                                               

आज्ञा चक्र

हिन्दू परम्परा के अनुसार आज्ञा चक्र छठा मूल चक्र है। ध्यान करने से आज्ञा चक्र होने का अभास होता है आग्या का अर्थ है आदेश। आज्ञाचक्र भौंहों के बीच माथे के केंद्र में स्थित होता है। यह भौतिक शरीर का हिस्सा नहीं है लेकिन इसे प्राणिक प्रणाली का हिस्स ...

                                               

त्राटक

त्राटक का सामान्य अर्थ है किसी विशेष दृष्य को टकटकी लगाकर देखना। मन की चंचलता को शान्त करने के लिये साधक इसे करता है। यह ध्यान की एक विधि है जिसमें किसी वाह्य वस्तु को टकटकी लगाकर देखा जाता है। विधि - त्राटक के लिये किसी भगवान, देवी, देवता, महापु ...

                                               

अमृत

अमृत का शाब्दिक अर्थ अमरता है। भारतीय ग्रंथों में यह अमरत्व प्रदान करने वाले रसायन के अर्थ में प्रयुक्त होता है। यह शब्द सबसे पहले ऋग्वेद में आया है जहाँ यह सोम के विभिन्न पर्यायों में से एक है। व्युत्पत्ति की दृष्टि से यह यूनानी भाषा के अंब्रोसि ...

                                               

अरदास

अरदास का सामान्य अर्थ परमशक्ति के आगे विनती करने से है। सिख धर्म की प्रथाओं रहत मर्यादा में अरदास का एक मानक रूप है, जो कि गुरुद्वारों में प्रतिदिन की जाती है।यह किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को आरंभ करने से पहले या करने के बाद की जाती है; सुबह और शाम ...

                                               

आदि ग्रन्थ

आदि ग्रन्थ या आद ग्रन्थ सिख धर्म से सम्बंधित धार्मिक लिखाईयों का एक संकलन है जिसे पाँचवे सिख गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने सन् १६०४ में पूरा करा। दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी ने इसमें १७०४ से १७०६ काल में और शबद जोड़े और इसे अपने बाद ...

                                               

आदि शक्ति (सिख धर्म)

सिख धर्म, या सिखी एकेश्वरवादी धर्म है और निराकार का पुजारी है। सिख धर्म में चंडी के अर्थ हैं: विवेक बुद्धी: ऐसी बुद्धि जो अदवैत है, हर वासना से दूऔर अपने मूल में समाई रहती है। यह वो सुरत है जो अनहद नाद, शब्द में समाई रहती है। नानक, कबीर, नारद इति ...

                                               

ईरान में सिख धर्म

ईरान में सिखों का एक बहुत छोटा समुदाय है। 2011 में कुछ 60 सिख परिवार देश में रह रहे थे। समुदाय के सदस्य आपस में पंजाबी और मुख्य ईरानी समुदाय के साथ फ़ारसी और बलोच भाषाएँ बोलते हैं।

                                               

कूका

कूका एक सिख संप्रदाय है जिसे नामधारी भी कहते हैं। इस सप्रंदाय की स्थापना रामसिंह नामक एक लुहार ने की थी जिसका जन्म 1824 ई. में लुधियाना जिले के भेणी नामक ग्राम में हुआ था। उन दिनों सिख धर्म का जो प्रचलित रूप था वह रामसिंह को मान्य न था। गुरु नानक ...

                                               

खंडा (सिख चिन्ह)

खंडा चिन्ह एक सिख धार्मिक, सांस्कृतिक, एवं ऐतिहासिक चिन्ह है जो कई सिख, धर्म एव वष्वदर्षण, सिद्धांतों को ज़ाहिर रूप से दर्शाता है। यह "देगो-तेगो-फ़तेह" के सिद्धान्त का प्रतीक है एवं इसे चिन्हात्मक रूप में पेश करता है। यह सिखों का फ़ौजी निशान भी ह ...

                                               

ख़ालसा

खालसा सिख धर्म के विधिवत् दीक्षाप्राप्त अनुयायियों सामूहिक रूप है। खालसा पंथ की स्थापना गुरु गोबिन्द सिंह जी ने १६९९ को बैसाखी वाले दिन आनंदपुर साहिब में की। इस दिन उन्होंने सर्वप्रथम पाँच प्यारों को अमृतपान करवा कर खालसा बनाया तथा तत्पश्चात् उन ...

                                               

गुरमत

गुरमत का शाब्दिक अर्थ है गुरु का मत अर्थात्: गुरु के नाम पर संकल्प। यह सिखों द्वारा किसी भी धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे से संबंधित गुरु के नाम पर आयोजित सभा में अपनागई सलाह या संकल्प है। यह सम्मेलन अशांत अठारहवीं शताब्दी में बढ़ा और इसकी ...

                                               

गुरु अंगद देव

अंगद देव या गुरू अंगद देव सिखो के एक गुरू थे। गुरू अंगद देव महाराज जी का सृजनात्मक व्यक्तित्व था। उनमें ऐसी अध्यात्मिक क्रियाशीलता थी जिससे पहले वे एक सच्चे सिख बनें और फिर एक महान गुरु। गुरू अंगद साहिब जी भाई लहना जी का जन्म हरीके नामक गांव में, ...

                                               

गुरु अमर दास

सवायीये महले तीजे के भले अमरदास गुण तेरे, तेरी उपमा तोहि बनि आवै॥ १॥ पृष्ठ १३९६ गुरू अमर दास जी सिख पंथ के एक महान प्रचारक थे। जिन्होंने गुरू नानक जी महाराज के जीवन दर्शन को व उनके द्वारा स्थापित धार्मिक विचाराधारा को आगे बढाया। ÷तृतीय नानक गुरू ...

                                               

गुरु अर्जुन देव

अर्जुन देव या गुरू अर्जुन देव सिखों के ५वे गुरु थे। गुरु अर्जुन देव जी शहीदों के सरताज एवं शान्तिपुंज हैं। आध्यात्मिक जगत में गुरु जी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्हें ब्रह्मज्ञानी भी कहा जाता है। गुरुग्रंथ साहिब में तीस रागों में गुरु जी की व ...

                                               

गुरु पर्व

नानक देव या गुरू नानक देव सिखों के प्रथम गुरू थे। गुरु नानक देवजी का प्रकाश १५ अप्रैल, १४६९ ई. में तलवंडी रायभोय नामक स्थान पर हुआ। सुविधा की दृष्टि से गुरु नानक का प्रकाश उत्सव कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। तलवंडी अब ननकाना साहिब के नाम से ...

                                               

गुरु राम दास

राम दास या गुरू राम दास, सिखों के गुरु थे और उन्हें गुरु की उपाधि 30 अगस्त 1574 को दी गयी थी। उन दिनों जब विदेशी आक्रमणकारी एक शहर के बाद दूसरा शहर तबाह कर रहे थे, तब चौथे नानक गुरू राम दास जी महाराज ने एक पवित्र शहर रामसर, जो कि अब अमृतसर के नाम ...

                                               

गुरु हर किशन

गुरू हर किशन साहिब जी का जन्म सावन वदी १० ८वां सावन बिक्रम सम्वत १७१३ ७ जुलाई १६५६ को कीरतपुर साहिब में हुआ। वे गुरू हर राय साहिब जी एवं माता किशन कौर के दूसरे पुत्र थे। राम राय जी गुरू हरकिशन साहिब जी के बड़े भाई थे। रामराय जी को उनके गुरू घर वि ...

                                               

गुरु हरगोबिन्द

गुरू हरगोबिन्द सिखों के छठें गुरू थे। साहिब की सिक्ख इतिहास में गुरु अर्जुन देव जी के सुपुत्र गुरु हरगोबिन्द साहिब की दल-भंजन योद्धा कहकर प्रशंसा की गई है। गुरु हरगोबिन्द साहिब की शिक्षा दीक्षा महान विद्वान् भाई गुरदास की देख-रेख में हुई। गुरु जी ...

                                               

चण्डी चरित्र

चण्डी चरित्र सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा रचित देवी चण्डिका की एक स्तुति है। गुरु गोबिन्द सिंह एक महान योद्धा एवं kavi थे। यह स्तुति दशम ग्रंथ के "उक्ति बिलास" नामक विभाग का एक हिस्सा है। गुरुबाणी में हिन्दू देवी-देवताओं का अन्य जगह ...

                                               

चालीस मुक्त

गुरू गोविन्द सिंह जी ने मुगलों के विरूद्ध 1705 ई. में आखिरी लड़ाई मुक्तसर में लडी थी। इस लड़ाई के दौरान गुरू जी के चालीस शिष्य शहीद हो गए थे। गुरू जी के इन चालीस शिष्यों को चालीस मुक्तों के नाम से भी जाना जाता है। इन्हीं के नाम पर उस जगह का नाम म ...

                                               

चौबीस अवतार

चौबीस अवतार, दशम ग्रन्थ का एक भाग है जिसमें विष्णु के चौबीस अवतारों का वर्णन है। परम्परा से तथा ऐतिहासिक रूप से यह गुरु गोबिन्द सिंह की रचना मानी जाती है। यह रचना दशम ग्रन्थ का लगभग ३० प्रतिशत है जिसमें ५५७१ श्लोक हैं। इसमें कृष्ण अवतार तथा राम अ ...

                                               

जपजी साहिब

आदि गुरु श्री गुरुग्रंथ साहब की मूलवाणी जपुजी जगतगुरु श्री गुरुनानकदेवजी द्वारा जनकल्याण हेतु उच्चारित की गई अमृतमयी वाणी है। जपुजी एक विशुद्ध एक सूत्रमयी दार्शनिक वाणी है उसमें महत्वपूर्ण दार्शनिक सत्यों को सुंदर अर्थपूर्ण और संक्षिप्त भाषा में ...