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आइसीडी-१० अध्याय ब

Scrub typhus A75.3 Typhus fever due to Rickettsia tsutsugamushi A75.0 Epidemic louse-borne typhus fever due to Rickettsia prowazekii A75. Typhus fever A75.1 Recrudescent typhus Brills disease A75.2 Typhus fever due to Rickettsia typhi A75.9 Typhu ...

                                               

आयुर्विज्ञान

आयुर्विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसका संबंध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु बढ़ाने से है।आयुर्विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है, जिसका संबंध मानव शरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त ...

                                               

ईमेडिसिन

इ मेडीसीन चिकित्साशास्त्र से सम्बन्धित एक ऑनलाइल वेबसाइट है। इसकी स्थापना 1996 में स्काँट और रिचर्ड ल्वली नामक दो अमरिकी चिकित्सों ने किया था। 2006 में इसको वाब एस डी को बेंच दिया गया।

                                               

उत्सर्जन तन्त्र

उत्सर्जन तन्त्र अथवा मलोत्सर्ग प्रणाली एक जैविक प्रणाली है जो जीवों के भीतर से अतिरिक्त, अनावश्यक या खतरनाक पदार्थों को हटाती है, ताकि जीव के भीतर होमीयोस्टेसिस को बनाए रखने में मदद मिल सके और शरीर के नुकसान को रोका जा सके। दूसरे शब्दों में जीवो ...

                                               

चिकित्सा

संकीर्ण अर्थ में, रोगों से आक्रांत होने पर रोगों से मुक्त होने के लिये जो उपचार किया जाता है वह चिकित्सा कहलाता है। पर व्यापक अर्थ में वे सभी उपचार चिकित्सा के अंतर्गत आ जाते हैं जिनसे स्वास्थ्य की रक्षा और रोगों का निवारण होता है।

                                               

चिकित्सा विषय शीर्षक

मेडिकल सब्जेक्ट हेडिंग्स एक विशाल शब्दकोश है। इसमें जीव विज्ञान से सम्बन्धित लेखों, पुस्तकों को सूचीबद्ध किया गया है। इसकी रचना विश्व के सबसे बड़े पुस्तकालय युनाइटेड स्टेट्स नेस्नल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने किया है। इसका मुद्रण 2007 में बन्द कर दिय ...

                                               

चिकित्सीकरण

चिकित्सकीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ जीवन के अचिकित्सीय आयामों को मेडिकल की शब्दावली के अंतर्गत देखा जाता है। एक विस्तृत परिघटना के साथ इसे मेडीकलाइज किया जाता है, जिसमें सामान्य जीवन की घटनाएं जीवन, मृत्यु, जैविकीय प्रक्रियाएं वृद्धावस्था, परित ...

                                               

मेडलाइन प्लस

मेडलाइन प्लस एक वेबसाइट है जहाँ स्वास्थ्य सम्बन्धी सूचनाएँ मिलती हैं। यह चिकित्साशास्त्र से सम्बन्धित विश्व के सबसे बड़े पुस्तकालय यूनाइटेड स्टेट्स नेस्नल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन से स्वास्थ्य सम्बन्धित सूचनाएँ उपलब्ध कराता है।

                                               

रोग

रोग अर्थात अस्वस्थ होना। यह चिकित्साविज्ञान का मूलभूत संकल्पना है। प्रायः शरीर के पूर्णरूपेण कार्य करने में में किसी प्रकार की कमी होना रोग कहलाता है। जिस व्यक्ति को रोग होता है उसे रोगी कहते हैं। हिन्दी में रोग को बीमारी, रुग्णdbcbcvxgfghchgbnvg ...

                                               

अनुवंशिक अभियांत्रिकी

जनुकीय अभियांत्रिकी या अनुवांशिक अभियांत्रिकी किसी जीव के संजीन में हस्तक्षेप कर के उसे परिवर्तित करने की तकनीकों व प्रणालियों - तथा उनमें विकास व अध्ययन की चेष्टा - का सामूहिक नाम है। मानव प्राचीन काल से ही पौधों व जीवों की प्रजनन क्रियाओं में ह ...

                                               

प्रतिजैविक प्रतिरोध

प्रतिजैविक प्रतिरोध एक प्रकार का दवा प्रतिरोध है, जहाँ एक सूक्ष्मजीव प्रतिरोध जोखिम जीवित करने के लिए सक्षम है। जीन को एक जीवाणु के बिच में फैशन द्वारा या विकार क्षैतिज कर संक्रमित में हस्तांतरित किया जा सकता है। इस प्रकार प्राकृतिक चयन के माध्यम ...

                                               

पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर

पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय राजस्थान विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है। इसकी स्थापना १९६५ में हुई ही। भारत के सभी पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालयों मे बीकानेर के महाविद्यालय की अधोसंरचना, शैक्षणिक स्तर व प्रयोगशालाओं में उपलब्ध शो ...

                                               

भारतीय पशु चिकित्‍सा परिषद

भारतीय पशु चिकित्‍सा परिषद एक भारत का एक निगमित निकाय है जिसकी स्‍थापना भारतीय पशु चिकित्‍सा परिषद अधिनियम, 1984 के अंतर्गत की गई है। यह पाठ्यक्रम बनाकर पूरे भारत में गतिविधि के एक-समान मानक बनाए रखने के लिए पशु चिकित्‍सा संस्‍थानों को लाइसेंस दे ...

                                               

ऊष्मायन अवधि

ऊष्मायन अवधि किसी रोगजनक जीव, रसायन या विकिरण से सम्पर्क होने और इस सम्पर्क के कारणवश रोग के प्रथम लक्षण व चिन्ह स्पष्ट होने के बीच की अवधि होती है। संक्रमण की स्थिति में इस अवधि में रोगजनक जीव अपनी संख्या बढ़ाकर उस स्तर तक पहुँचता है कि रोगी के ...

                                               

महामारी

जब किसी रोग का प्रकोप कुछ समय पहले की अपेक्षा बहुत अधिक होता तो उसे महामारी या जानपदिक रोग कहते हैं। महामारी किसी एक स्थान पर सीमित होती है। किन्तु यदि यह दूसरे देशों और दूसरे महाद्वीपों में भी पसर जाए तो उसे सार्वदेशिक रोग pandemic कहते हैं।

                                               

विश्वमारी

उन संक्रामक महामारियों को विश्वमारी कहते हैं जो एक बहुत बड़े भूभाग में फैल चुकी हो। यदि कोई रोग एक विस्तृत क्षेत्र में फैल हुआ हो किन्तु उससे प्रभावित लोगों की संख्या में वृद्धि न हो र्ही हो हो, तो उसे विश्वमारी नहीं कहा जाता। इसके अलावा, फ्लू वि ...

                                               

रोगों की सूची

रोगों की इस सूची में रोगों के मुख्य वर्ग शामिल हैं। आनुवांशिक रोगों की सूची भग एवं योनि रोगों की सूची list of vulvovaginal disorders संक्रामक रोगों की सूची त्वचा रोगों की सूची नेत्र रोगों की सूची मानसिक रोग कैंसर रोगों की सूची मूड विकारों की सूची ...

                                               

अचलताकारक कशेरूकाशोथ

अचलताकारक कशेरूकाशोथ, जिसे पहले बेक्ट्रू के रोग, बेक्ट्रू रोगसमूह, और एक प्रकार के कशेरूकासंधिशोथ, मारी-स्ट्रम्पेल रोग के नाम से जाना जाता था, एक दीर्घकालिक संधिशोथ और स्वक्षम रोग है। यह रोग मुख्यतया मेरू-दण्ड या रीढ़ के जोड़ों और श्रोणि में त्रि ...

                                               

एचआइवी

ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस एक लेंटिवायरस है, जो अक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम का कारण बनता है, जो कि मनुष्यों में एक अवस्था है, जिसमें प्रतिरक्षा तंत्र विफल होने लगता है और इसके परिणामस्वरूप ऐसे अवसरवादी संक्रमण हो जाते हैं, जिनसे मृत् ...

                                               

अंजनहारी

अंजनहारी या बिलनी या गुहेरी रोग आंखों की ऊपरी या निचली परत पर दाने के रूप में हल्के लाल रंग में उभरता है। वैसे तो यह कोई रोग नहीं है किन्तु इस रोग के होने पर रोगी को बहुत परेशानी होती है। बिलनी रोग संक्रमण के कारण फैलता है। इसमें संक्रमित होने वा ...

                                               

अंडाशय में गांठ

अंडाशय में गांठ, महिलाओं में, अंडाशय के भीतर एक द्रव भरे हुए थैले होते हैं। अक्सर वे कोई लक्षण नहीं पैदा करते हैं। कभी-कभी वे सूजन, निचले पेट दर्द, या पीठ के निचले हिस्से में दर्द पैदा कर सकते हैं। अधिकांश गांठ हानिरहित हैं। अधिकांश डिम्बग्रंथि क ...

                                               

अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण

रोग और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकी वर्गीकरण ने 10 वा संसोधन प्रस्तुत किया जिसमें रोगो के लक्षण, सिकायत, सामाजिक परिस्थितियों तथा बाह्य कारकों को कोडींग किया। यह श्रेणी विभाजन विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुरूप किया या गया। ...

                                               

अग्न्याशय के रोग

अन्य अंगों की भाँति अग्न्याशय में भी दो प्रकार के रोग होते हैं। एक बीजाणुओं के प्रवेश या संक्रमण से उत्पन्न होने वाले और दूसरे स्वयं ग्रंथि में बाह्य कारणों के बिना ही उत्पन्न होने वाले। प्रथम प्रकार के रोगों में कई प्रकार की अग्न्याशयार्तियाँ हो ...

                                               

अतिताप

साँचा:Infobox symptom अतिताप, तापमान नियंत्रण की विफलता के कारण शरीर का बढ़ा हुआ तापमान होता है। अतिताप तब होता है जब शरीर ताप को अपव्यय करने की अपनी क्षमता से अधिक ताप का उत्पादन करता है या अवशोषित करता है। जब शरीर की गर्मी काफी अधिक हो जाती है, ...

                                               

अतिवृद्धि

अतिवृद्धि का मतलब अपने घटक कोशिकाओं के बढ़ने के कारण एक अंग या ऊतक के आयतन में वृद्धि हो जाती है। यह अतिवर्धन से अलग है, इस में कोशिकाओं लगभग एक ही आकार रहते हैं लेकिन संख्या में वृद्धि हो जाती है। अतिवृद्धि और हाइपरप्लासिया दो अलग प्रक्रिया है, ...

                                               

अधोमधुरक्तता

रक्त में जब ग्लूकोज़ का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, तो उस अवस्था को अधोमधुरक्तता कहते हैं। यह चिकित्साशास्त्र का शब्द है। भोजन करने के 8 घंटे पश्चात या खाली पेट में रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर 80 मिली ग्राम प्रति डेसी लिटर रहता है। साधारणतः जब य ...

                                               

अनिद्रा

अनिद्रा या उन्निद्र रोग में रोगी को पर्याप्त और अटूट नींद नहीं आती, जिससे रोगी को आवश्यकतानुसार विश्राम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बहुधा थोड़ी सी अनिद्रा से रोगी के मन में चिंता उत्पन्न हो जाती है, जिससे रोग और भी बढ़ जात ...

                                               

अन्धता

अंधता या अंधापन, देख न सकने की दशा का नाम है। जो बालक अपनी पुस्तक के अक्षर नहीं देख सकता, वह इस दशा से ग्रस्त कहा जा सकता है। दृष्टिहीनता भी इसी का नाम है। प्रकाश का अनुभव कर सकने की अशक्यता से लेकर ऐसे कार्य करने तक की अशक्यता जो देखे बिना नहीं ...

                                               

अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस

अफ्रीकी ट्रिपेनोसोमयासिस अथवा स्लीपिंग सिकनेस मनुष्यों तथा अन्य पशुओं में होने वाली एक परजीवीजन्य बीमारी है। यह परजीवियों की एक प्रजाति ट्रिपैनोसोमा ब्रुसे के कारण होता है। मनुष्यों को संक्रमित कर सकने वाले परजीवी दो प्रकार के होते हैं, ट्रिपैनोस ...

                                               

अल्पबुद्धिता

अल्पबुद्धिता की अल्पबुद्धिता संबंधी कानून ने यह परिभाषा दी है - अल्पबुद्धिता मस्तिष्क का वह अवरुद्ध अथव अपूर्ण विकास है जो 18 वर्ष की आयु के पूर्व पाया जाए, चाहे वह जन्मजात कारणों से उत्पन्न हो चाहे रोग अथावा आघात चोट से। परंतु वास्तविकता यह है क ...

                                               

आनुवंशिक रोग

आनुवंशिकी और रोग में बहुधा कोई न कोई संबंध रहता है। अनेक रोग दूषित वातावरण तथा परिस्थतियों से उत्पन्न होते हैं, किन्तु अनेक रोग ऐसे भी होते हैं जिनका कारण माता-पिता से जन्मना प्राप्त कोई दोष होता है। ए रोग आनुवंशिक रोग कहलाते हैं। कुछ ऐसे रोग भी ...

                                               

आनुवंशिक रोगों की सूची

यहाँ पर आनुवंशिक रोगों की सूची दी गयी है। इसके साथ ही उस रोग से सम्बन्धित उत्परिवर्तन तथा सम्बन्धित गुणसूत्र का नाम भी दिया गया है, यदि वे ज्ञात हैं। वर्णान्धता क्लाइन टर्नर सिंड्रोम प्रोजेरिया मंगोलिज्म हीमोफीलिया पटाऊ सिन्ड्रोम ओर कही रोगो हे ज ...

                                               

आमवातीय संधिशोथ

आमवातीय संधिशोथ या आमवातीय संध्यार्ति के आरंभिक अवस्था में जोड़ों में जलन होती है। आरंभिक अवस्था में यह काफी कम होती है। यह जलन एक समय में एक से अधिक संधियों में होती है। शुरुआत में छोटे-मोटे जोड़ जैसे- उंगलियों के जोड़ों में दर्द आरंभ होकर यह कल ...

                                               

आर्थेल्जिया

आर्थ्राल्जिया का शाब्दिक अर्थ है जोड़ों का दर्द। यह चोट, संक्रमण, बीमारियों या चिकित्सा उपचार के कारण होने वाली असहनीय प्रतिक्रिया का लक्षण है। MESH के अनुसार, शब्द "आर्थ्राल्जिया" का उपयोग केवल तब किया जाना चाहिए जब स्थिति चिड़चिड़ाहट हो, और शब् ...

                                               

इनफ़्लुएंज़ा

इनफ्लुएंजा एक विशेष समूह के वायरस के कारण मानव समुदाय में होनेवाला एक संक्रामक रोग है। इसमें ज्वर और अति दुर्बलता विशेष लक्षण हैं। फुफ्फुसों के उपद्रव की इसमें बहुत संभावना रहती है। यह रोग प्राय: महामारी के रूप में फैलता है। बीच-बीच में जहाँ-तहाँ ...

                                               

उच्च रक्तचाप

हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप, जिसे कभी कभी धमनी उच्च रक्तचाप भी कहते हैं, एक पुरानी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाये रखने के लिये दिल को सामान्य से ...

                                               

उपदंश

उपदंश एक प्रकार का गुह्य रोग है जो मुख्यतः लैंगिक संपर्क के द्वारा फैलता है। इसका कारक रोगाणु एक जीवाणु, ट्रीपोनीमा पैलिडम है। इसके लक्षण अनेक हैं एंव बिना सही परीक्षा के इसका सही पता करना कठिन है। इसे सीरोलोजिकल परीक्षण द्वारा चिन्हित किया जाता ...

                                               

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग

उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में होने वाले संक्रमणों के उस समूह को उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग कहते हैं अफ्रीका और एशिया के विकासशील क्षेत्रों के कम आयवर्ग की आबादी में विशेषरूप से पाया जाता है। इनको उपेक्षित इसलिये कहा जाता है क्योंकि इनका इलाज या तो ब ...

                                               

ऊर्ध्वहनु वायुविवर

मैक्सिलरी साइनस या ऊर्ध्वहनु वायुविवर मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई गुहा होती हैं जो हमारे सिर को हल्कापन व सांस वाली हवा का नमी युक्त करते हैं। जब कभी साइनस का संक्रमण हो जाता है तो ये सिरदर्द का भी कारण बनते हैं। परंतु सारे सिरदर्द का कार ...

                                               

एंथ्राक्स

एन्थ्राक्स एक खतरनाक एवं जानलेवा रोग है। यह मानव एवं पशु दोंनो को संक्रमित करता है। इसका कारण बेसिलस ऐन्थ्रैक्स नामक जीवाणु है। इस रोग के खिलाफ कार्य करने वाला वैक्सीन हैं एवं प्रतिजैविक भी उपलब्ध हैं। बींसवा सदी को आने तक इस रोग ने एशिया, यूरोप ...

                                               

एसिडिटी (रोग)

एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आमाशय के भित्ति में उपस्थित जठर ग्रंथियों के द्वारा जठराम्ल का स्राव किया जाता है पाचन के लिए आवश्यक है।

                                               

ऐल्ब्युमिनमेह

ऐल्ब्युमिनमेह एक रोग है, जिसके होने पर मूत्र में असामान्य मात्रा में ऐलब्युमिन पाया जाता है। यह एक प्रकार का प्रोटीनमेह है। सामान्य अवस्था में सभी के मूत्र में ऐल्बुमिन पाया जाता है किन्तु वृक्क के रोग होने पर मूत्र में ऐल्बुमिन की मात्रा बहुत बढ ...

                                               

ऑंकोसर्कॉय्सिस

आंकोसर्कायसिस जिसे रिवर ब्लाइंडनेस और रॉब्लेस व्याधि, के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार के परजीवी कृमि परजीवी कृमि आंकोसेरा वाल्वलस के संक्रमण से होने वाली बीमारी है. लक्षणों में गंभीर खुजली, त्वचा के नीचे बम्प्स तथा अंधापन शामिल हैं. ट्रैकोमा ...

                                               

कंठमाला

कंठमाला लसीका ग्रंथियों का एक चिरकारी रोग है। इसमें गले की ग्रंथियाँ बढ़ जाती हैं और उनकी माला सी बन जाती है इसलिए उसे कंठमाला कहते हैं। आयुर्वेद में इसका वर्णन गंडमाला तथा अपची दो नाम से उपलब्ध है, जिन्हें कंठमाला के दो भेद या दो अवस्थाएँ भी कह ...

                                               

कर्णकवकता

कणकवकता या कर्णमक्षिकता यह बाह्यकर्ण का एक छूत का रोग है जो प्राय: श्रवणछिद्पर होता है। ऐसा माना जाता है कि ये रोग बाह्य जीवाणुनाशक औषधियों के प्रयोग का कुपरिणाम होता है। ये जीवाणुनाशक औषधियाँ फ़ंगस जीवाणुओं हेतु एक पीढ़ीवर्धक पोषक का कार्य करती ...

                                               

कर्णनासाकंठ विज्ञान

कर्णनासाकंठ विज्ञान कान, नाक और गले से सम्बन्धित चिकित्साविज्ञान की एक शाखा है। यह शल्यचिकित्सा की एक विशिष्टता है। इस विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों को कर्णनासाकंठ विज्ञानी कहते हैं। जिन लोगों को कान, नाक, गला, खोपड़ी के आधारभाग तथा सिऔर गले के कैन् ...

                                               

कान बजना

बाहर कोई ध्वनि न हो तब भी कान में कुछ सुनाई पड़ना कान बजना या कर्णक्ष्वेण कहलाता है। टिनिटस शरीर के बाहर से नहीं, बल्कि सिर में अनुभूत/सुनाई देने वाले शोर को वर्णित करने के लिए प्रयुक्त चिकित्सा शब्द है। वे अक्सर बजने वाली या सिसकारी भरने वाली ध् ...

                                               

कालमेह ज्वर

मलेरिया मच्छरों के नियन्त्रण में हवाई जहाज ठोकरें कालमेह ज्वर Black water fever अथवा मलेरियल हीमोग्लोबिन्युरिया malarial hemoglobinuria घातक तृतीयक मलेरिया के कई आक्रमण के उपरांत उपद्रव के रूप में होता है। इसमें मूत्र का रंग काला या गहरा लाल हो ज ...

                                               

कुपोषण

शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। अत: कुपोषण की जानकारियाँ होना अत्यन्त जरूरी ...

                                               

कुपोषणजन्य रोग

कुपोषणजन्य रोग वे रोग हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शरीर में आवश्यक पोषक पदार्थों की कमी के कारण उत्पन्न होते हैं। बेरीबेरी रोग इसका एक उदाहरण है। ये रोग प्राय: अधिक समय तक कुपोषण के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं। पोषक पदार्थों की कमी के बजाय ...