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श्वसन तंत्र के रोग

श्वसन तंत्र के रोगों में फेफड़ों के रोग, श्वासनली के रोग सहित इस तंत्र के अन्य रोग शामिल हैं। श्वसन तंत्र के रोगों में स्वयंसीमित सर्दी-जुकाम से लेकर जीवाणुजन्य न्यूमोनिया जैसे घातक रोग हैं। गीली खांसी ऐसी खांसी है जिसके होने से बलगम निकलता है जो ...

                                               

श्वसनीशोथ

फेफड़ों के अंदर स्थित श्वसनी के श्लेष्मकला के प्रदाह को श्वसनीशोथ या ब्रोंकाइटिस कहते है। श्वासनली से फेफड़ों में वायु ले जाने वाली नलियों को श्वसनी कहते हैं। इसमें श्वसनी की दीवारें इन्फेक्शन व सूजन की वजह से अनावश्यक रूप से कमजोर हो जाती हैं जि ...

                                               

श्वासावरोध

श्वासावरोध अथवा दम घुटना शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी है, जो कि असामान्य तरीके से सांस लेने के कारण होता है। श्वासावरोध सामान्यीकृत हाइपोक्सिया, का कारण बनता है, जो मुख्य रूप से ऊतकों और अंगों को प्रभावित करता है। कई परिस्थितियाँ श्वासावरोध ...

                                               

श्वेत प्रदर

श्वेत प्रदर या सफेद पानी का योनी मार्ग से निकलना Leukorrhea कहलाता है। यह हमेशा रोग का लक्षण नहीं होता। अधिकतर महिलाएं इस गलत फैमी में होती है कि सफेद पानी के जाने से शरिर में कमजोरी आती है, चक्कर आता है, बदन में दर्द होता है। शरिर से तेजस्विता च ...

                                               

संक्रमण

रोगों में कुछ रोग तो ऐसे हैं जो पीड़ित व्यक्तियों के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संपर्क, या उनके रोगोत्पादक, विशिष्ट तत्वों से दूषित पदार्थों के सेवन एवं निकट संपर्क, से एक से दूसरे व्यक्तियों पर संक्रमित हो जाते हैं। इसी प्रक्रिया को संक्रमण कहते ...

                                               

संक्रामक रोग

संक्रामक रोग, रोग जो किसी ना किसी रोगजनित कारको जैसे प्रोटोज़ोआ, कवक, जीवाणु, वाइरस इत्यादि के कारण होते है। संक्रामक रोगों में एक शरीर से अन्य शरीर में फैलने की क्षमता होती है। मलेरिया, टायफायड, चेचक, इन्फ्लुएन्जा इत्यादि संक्रामक रोगों के उदाहर ...

                                               

सर्वांगशोथ

सर्वांगशोथ, या देहशोथ शरीर की एक विशिष्ट सर्वांगीय शोथयुक्त अवस्था है, जिसके अंतर्गत संपूर्ण अधस्त्वचीय ऊतक में शोथ के कारण तरल पदार्थ का संचय हो जाता है। इसके कारण शरीर का आकार बहुत बड़ा हो जाता है तथा उसकी एक विशेष प्रकार की आकृति हो जाती है।

                                               

सायटिका

कमर से संबंधित नसों में से अगर किसी एक में भी सूजन आ जाए तो पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है, जिसे गृध्रसी या सायटिका कहा जाता है। यह तंत्रिकाशूल का एक प्रकार है, जो बड़ी गृघ्रसी तंत्रिका में सर्दी लगने से या अधिक चलने से अथवा मलावरोध और गर् ...

                                               

सिरदर्द

सिरदर्द या शिरपीड़ा सिर, गर्दन या कभी-कभी पीठ के उपरी भाग के दर्द की अवस्था है। यह सबसे अधिक होने वाली तकलीफ है, जो कुछ व्यक्तियों में बार बार होता है। सिरदर्द की आमतौपर कोई गंभीर वजह नहीं होती, इसलिए लाइफस्टाइल में बदलाव और रिलैक्सेशन के तरीके स ...

                                               

सिलिकामयता

सिलिकामयता फेफड़ों से सम्बन्धित बिमारी है जो सिलिका भरे वातावरण में सांस लेने से क्रिस्तलीय सिलिका के फेफड़ों में एकत्र होने के कारण होती है।

                                               

सुजाक

सुजाएक संक्रामक यौन रोग) है। सुजाक नीसेरिया गानोरिआ नामक जीवाणु से होता है जो महिला तथा पुरुषों में प्रजनन मार्ग के गर्म तथा गीले क्षेत्र में आसानी और बड़ी तेजी से बढ़ती है। इसके जीवाणु मुंह, गला, आंख तथा गुदा में भी बढ़ते हैं। उपदंश की तरह यह भी ...

                                               

सोरियासिस संधिशोथ

सोरियासिस संधिशोथ एक दीर्घकालिक गठिया है जो छाल रोग नामक स्वप्रतिरक्षित रोग से प्रभावित लोगों में होता है। सोरियाटिक गठिया का चिरपरिचित लक्षण पैर की सभी अंगुलियों तथा अंगूठे की सूजन होना है। यह अक्सर नाखूनों में परिवर्तन के साथ होता है जैसे कि ना ...

                                               

स्तन की सूजन

स्तन की सूजन स्तन या उदर की सूजन है, आमतौपर स्तनपान से जुड़ा होता है। लक्षणों में आम तौपर स्थानीय दर्द और लाली शामिल है। अक्सर बुखाऔर सामान्य दर्द भी होता है। शुरुआत आम तौपर काफी तेज़ होती है और आमतौपर प्रसूति के पहले कुछ महीनों में होती है। और फ ...

                                               

स्तन रोग

ज्यादातर महिलाओं को कुछ समय में स्तन परिवर्तन का अनुभव होता है। स्तन रोगों को या तो प्रजनन प्रणाली के विकार, या प्रजनन के विकारों के साथ वर्गीकृत किया जा सकता है। स्तन रोग अधिकांश कैंसरमुक्त रोग होते हैं। स्तन रोगों के कई प्रकार हैं। वह कारण है स ...

                                               

हर्निया

मानव शरीर के कुछ अंग शरीर के अंदर खोखले स्थानों में स्थित है। इन खोखले स्थानों को "देहगुहा" कहते हैं। देहगुहा चमड़े की झिल्ली से ढकी रहती है। इन गुहाओं की झिल्लियाँ कभी-कभी फट जाती हैं और अंग का कुछ भाग बाहर निकल आता है। ऐसी विकृति को हर्निया कहत ...

                                               

हाईपोथर्मिया

अल्पताप शरीर की वह स्थिति होती है जिसमें तापमान, सामान्य से कम हो जाता है। इसमें शरीर का तापमान ३५° सेल्सियस से कम हो जाता है। शरीर के सुचारू रूप से चलने हेतु कई रासायनिक क्रियाओं की आवश्यकता होती है। आवश्यक तापमान बनाए रखने के लिए मानव मस्तिष्क ...

                                               

हायपर ग्लाईसीमिया

मधुमेह होने पर शरीर को भोजन से ऊर्जा प्राप्त करने में कठिनाई होती है। पेट फिर भी भोजन को ग्लूकोज में बदलता रहता है। ग्लूकोज रक्त धारा में जाता है। किन्तु अधिकांश ग्लूकोज कोशिकाओं में नही जा पाते जिसके कारण इस प्रकार हैं: इंसुलिन की मात्रा अपर्याप ...

                                               

हिचकी

हमें अधिक मिर्च मसालेदार व्यंजन खाने के बाद अथवा हडबडी मे खाना खाने के बाद अचानक ही हिचकी आने लगती है. सामान्य रूप से यह जाना जाता है कि हिचकी आने के पीछे के मूल वजह खुराक के कणो का श्वसन नलिका मे फँस जाना होता है. परंतु हिचकी आने के पीछे की मूल ...

                                               

हीमोफीलिया

पैतृक रक्तस्राव या हीमोफिलिया एक आनुवांशिक बीमारी है जो आमतौपर पुरुषों को होती है और औरतों द्वारा फैलती होती है। हीमोफीलिया आनुवंशिक रोग है जिसमें शरीर के बाहर बहता हुआ रक्त जमता नहीं है। इसके कारण चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा साबित होती है क्य ...

                                               

हृदय की विफलता

"हृदय की विफलता" का सीधा सा अर्थ है आपका हृदय जितना आवश्यक है, उतने अच्छे तरीके से रक्त की पम्पिंग नहीं कर रहा है। हृदय की विफलता का अर्थ यह नहीं है की आपके हृदय ने कार्य करना बंद कर दिया है या आपको हृदयाघात हो रहा है । हृदय की विफलता को कन्जेस्ट ...

                                               

हृदय विफलन

हृदयाघात आज मनुष्य-जाति के सर्वाधिक प्राणलेवा रोगों में से प्रमुख है जो मानसिक तनाव एवं अवसाद से जुड़ा हुआ है। दोषपूर्ण भोजन-विधि, मद्यपान, धूम्रपान, मादक पदार्थों का सेवन तथा विश्रामरहित परिश्रम इत्यादि हृदय-रोग के प्रमुख कारण हैं। इसके निदान के ...

                                               

हैजा

विसूचिका या आम बोलचाल मे हैजा, जिसे एशियाई महामारी के रूप में भी जाना जाता है, एक संक्रामक आंत्रशोथ है जो वाइब्रियो कॉलेरी नामक जीवाणु के एंटेरोटॉक्सिन उतपन्न करने वाले उपभेदों के कारण होता है। मनुष्यों मे इसका संचरण इस जीवाणु द्वारा दूषित भोजन य ...

                                               

श्रवण तंत्र

श्रवण तंत्र जीवों के शरीर की वह प्रणाली होती है जिनके प्रयोग से उसे सुनाई देता है। इसमें कान की ज्ञानेन्द्रिय और संवेदक तंत्रिका तंत्र के श्रवण-सम्बन्धी भाग शामिल होते हैं।

                                               

श्रवणविज्ञान

श्रवणविज्ञान विज्ञान की वह शाखा है जिसमें श्रव्यता तथा कानों के प्रयोग से शारीरिक संतुलन और इन से सम्बन्धित रोगों व विकारों का अध्ययन करा जाता है। श्रवणवैज्ञानिकों का एक मुख्य कार्य सुनने की शक्ति कम होने या खो जाने वाले लोगों की सहायता करना व श् ...

                                               

श्रव्यता

श्रव्यता ध्वनि का बोध होने की क्षमता को कहते हैं। यह वायु, जल या अन्य किसी माध्यम में ध्वनि की कम्पन को कान जैसे अंगों द्वारा भाँप लेने से सम्भव होता है। श्रव्यता के अध्ययन को श्रवणविज्ञान कहते हैं।

                                               

चिकित्सा समाज-कार्य

चिकित्सा समाज-कार्य समाज कार्य का एक उपविषय है। इसे चिकित्सालय समाज-कार्य भी कहते हैं। चिकित्सा समाजकार्यकर्ता प्रायः किसी अस्पताल या नर्सिंग सुविधा में कार्य करते हैं, वे चिकित्सा समाज-कार्य में स्नातक होते हैं, तथा उन रोगियों और उनके परिवार के ...

                                               

परामर्श

किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्याओं एवं कठिनाइयों को दूर करने के लिये दी जाने वाली सहायता, सलाह और मार्गदर्शन, परामर्श कहलाता है। परामर्श देने वाले व्यक्ति को परामर्शदाता कहते हैं। निर्देशन के अन्तर्गत परामर्श एक आयोजित विशिष्ट सेवा है। यह एक सहया ...

                                               

नशीली दवा का सेवन

मादक द्रव्य का सेवन, जिसे नशीली दवा के सेवन के रूप में भी जाना जाता है, उस पदार्थ के उपयोग के एक दोषपूर्ण अनुकूलनीय पद्धति को सूचित करता है जिसे निर्भर नहीं माना जाता है। "नशीली दवा का सेवन" शब्द, निर्भरता को अलग नहीं करता है, लेकिन अन्यथा गैर-चि ...

                                               

नैदानिक निगरानी

नैदानिक निगरानी विश्लेषण का संदर्भ देता है और व्याख्या शिक्षा स्वास्थ्य नीति और स्वास्थ्य के बारे में निर्णय करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। ये अभी की निगरानी से अलग है, जो सभी के लिए लागू होता है।

                                               

रेडियोजैविकी

रेडियोजैविकी आयुर्विज्ञान की एक शाखा है जिसमें जीवों के ऊपर आयनकारी विकिरण के प्रभाव का अध्ययन करा जाता है। आयनकारी विकिरण जीवों की कोशिकाओं और ऊतकों पर बहुत हानिकारक या जानलेवा प्रभाव रखती हैं लेकिन कुछ सन्दर्भों में उनकी सीमित मात्रा से चिकित्स ...

                                               

अनुरूप एलेक्ट्रॉनिकी

अनुरूप एलेक्ट्रॉनिकी के अन्तर्गत वे एलेक्ट्रानिक प्रणालियाँ आतिं हैं जिनमें पाये जाने वाले संकेत क्रमश: या सतत बदलते हैं । इसके विपरीत आंकिक एलेक्ट्रॉनिकी में पाये जाने वाले संकेत केवल द्विस्तरीय होते हैं - शून्य या एक। एलेक्ट्रानिकी के आरम्भिक द ...

                                               

अर्धचालक डायोड

डायोड एक P टाइप सेमीकंडक्टर और N टाइप सेमीकंडक्टर का जंक्शन होता है इसलिए डायोड को हम P-N जंक्शन डायोड भी कहते हैं। जैसा की हम जानते हैं कि P टाइप सेमीकंडक्टर में होल कि अधिकता रहती है और N टाइप सेमीकंडक्टर में एलेक्ट्रोंस की। हमें ये भी पता है क ...

                                               

अर्धचालक युक्ति

अर्धचालक युक्तियाँ उन एलेक्ट्रानिक अवयवों को कहते हैं जो अर्धचालक पदार्थों के गुण-धर्मों का उपयोग करके बनाये जाते हैं। सिलिकॉन, जर्मेनियम और गैलिअम आर्सेनाइड मुख्य अर्धचालक पदार्थ हैं। अधिकांश अनुप्रयोगों में अब उन सभी स्थानों पर अर्धचालक युक्तिय ...

                                               

अवक्षय क्षेत्र

डायोड एक P टाइप सेमीकंडक्टर और N टाइप सेमीकंडक्टर का जंक्शन होता है इसलिए डायोड को हम P-N जंक्शन डायोड भी कहते हैं। जैसा की हम जानते हैं कि P टाइप सेमीकंडक्टर में होल कि अधिकता रहती है और N टाइप सेमीकंडक्टर में एलेक्ट्रोंस की. हमें ये भी पता है क ...

                                               

इलेक्ट्रॉनिक इंजिनीयरी का इतिहास

इलेक्ट्रॉनिकी का आधुनिक रूप रेडियो एवं दूरदर्शन के विकास के रूप में सामने आया। साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध में प्रयुक्त रक्षा उपकरणों एवं रक्षा-तन्त्रों से भी इसका महत्व उभरकर सामने आया। किन्तु इलेक्ट्रॉनिकी की नीव बहुत पहले ही रखी जा चुकी थी। इले ...

                                               

इलेक्ट्रॉनिक फिल्टर

एलेक्ट्रॉनिक निस्यन्दक या इलेक्ट्रॉनिक फिल्टर ऐसे परिपथों को कहते हैं जो, संकेत प्रसंस्करण का काम करते हैं। ये विद्युत संकेतकों में से अवांछित आवृत्ति वाले अवयवों को कम करते हैं; वांछित आवृत्ति वाले अवयवों को बढ़ाते हैं; या ये दोनो ही कार्य करते ...

                                               

अंकीय इलेक्ट्रॉनिकी

अंकीय इलेक्ट्रॉनिकी या डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स इलेक्ट्रॉनिक्स की एक शाखा है जिसमें विद्युत संकेत अंकीय होते हैं। अंकीय संकेत बहुत तरह के हो सकते हैं किन्तु बाइनरी डिजिटल संकेत सबसे अधिक उपयोग में आते हैं। शून्य/एक, ऑन/ऑफ, हाँ/नहीं, लो/हाई आदि बाइनर ...

                                               

इलैक्ट्रॉनिक्स

विज्ञान के अन्तर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स या इलेक्ट्रॉनिकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी का वह क्षेत्र है जो विभिन्न प्रकार के माध्यमों से होकर आवेश के प्रवाह एवं उन पर आधारित युक्तिओं का अध्ययन करता है। प्रौद्योगिकी के रूप में इलेक्ट्रॉनिकी वह क्षेत्र है जो ...

                                               

उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स

उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स या गृह इलेक्ट्रॉनिक्स दैनिक प्रयोग में आने वाली इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ होती हैं जो विशेष रूप से निजी घरों में इस्तेमाल होती हैं। इनमें टेलिविज़न जैसी मनोरंजन के लिए, दूरभाष जैसी संचार के लिए और संगणक जैसी कार्यों के लिए प्रय ...

                                               

एकीकृत परिपथ

एलेक्ट्रॉनिकी में एकीकृत परिपथ या एकीपरि) को सूक्ष्मपरिपथ, सूक्ष्मचिप, सिलिकॉन चिप, या केवल चिप के नाम से भी जाना जाता है। यह एक अर्धचालक पदार्थ के अन्दर बना हुआ एलेक्ट्रॉनिक परिपथ ही होता है जिसमें प्रतिरोध, संधारित्र आदि पैसिव कम्पोनेन्ट के अला ...

                                               

एन-प्रकार अर्धचालक

जब हम प्योर सेमीकंडक्टर में पेंटावलेंट इम्पुरिटी मिलते है तो सेमीकंडक्टर के बाहरी ऑर्बिट के चार एलेक्ट्रोंस इम्पुरिटी के चार एलेक्ट्रोंस के साथ बोंड बना लेता है। इसके बाहरी ऑर्बिट में आठ एलेक्ट्रोंस पुरे होने के बाद भी इसके पास एक एलेक्ट्रोन बच ज ...

                                               

ऐविओनिकी

ऐविओनिकी शब्द का अर्थ है उड़ान में प्रयुक्त होने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स| इसमें मुख्यतः संचार, नेविगेशन, नियंत्रण और डिजिटल प्रदर्शन से सम्बंधित हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर का निर्माण और संचालन सम्मिलित होता है|

                                               

ओममापी

ओममापी एक वैद्युत उपकरण जो प्रतिरोध मापने के काम आता है। वे ओममापी जो अत्यन्त कम प्रतिरोध को मापने के हिसाब से डिजाइन किये गये होते हैं उन्हें माइक्रोओममापी कहते हैं। इसी प्रकार बहुत अधिक प्रतिरोध के मापन के लिये मेगोममापी का उपयोग किया जाता है ज ...

                                               

ट्रांजिस्टर

ट्रान्जिस्टर एक अर्धचालक युक्ति है जिसे मुख्यतः प्रवर्धक तथा इलेक्त्रॉनिक स्विच के रूप में प्रयोग किया जाता है। कुछ लोग इसे बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण खोज मानते हैं। ट्रान्जिस्टर का उपयोग अनेक प्रकार से होता है। इसे प्रवर्धक, स्विच, वोल्टे ...

                                               

डोपिगं

जैसा की हम जानते हैं कि सेमीकंडक्टर को हम चालक या अर्धचालक किसी भी रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन शुद्ध रूप में एक सेमीकंडक्टर एक कुचालक के तरह काम करता है। शुद्ध रूप का मतलब है कि उसके बाहरी ऑर्बिट में पुरे चार एलेक्ट्रोंस रहते है जैसा कि आप ...

                                               

पी एन जंक्शन

डायोड एक P टाइप सेमीकंडक्टर और N टाइप सेमीकंडक्टर का जंक्शन होता है इसलिए डायोड को हम P-N जंक्शन डायोड भी कहते हैं। जैसा की हम जानते हैं कि P टाइप सेमीकंडक्टर में होल कि अधिकता रहती है और N टाइप सेमीकंडक्टर में एलेक्ट्रोंस की। हमें ये भी पता है क ...

                                               

पी-प्रकार अर्धचालक

जब हम प्योर सेमीकंडक्टर में ट्राईवलेंट इम्पुरिटी मिलते है तो सेमीकंडक्टर के बाहरी ऑर्बिट के चार एलेक्ट्रोंस इम्पुरिटी के तीन इलेक्ट्रोंस के साथ बोंड बना लेता है। जैसा कि हम जानते हैं कि कोई भी परमाणु अपने बहरी ऑर्बिट में आठ एलेक्ट्रोन पूरा करना च ...

                                               

प्रिन्टेड सर्किट बोर्ड

एलेक्ट्रॉनिकी के सन्दर्भ में मुद्रित परिपथ बोर्ड या प्रिन्टेड सर्किट बोर्ड या पीसीबी एक विद्युत अवयव है जो एलेक्ट्रानिक अवयवों को आधार/आश्रय प्रदान करने के लिये तथा इन्हें आपस में सुचालक मार्गों के माध्यम से जोड़ने के लिये उपयोग में लाया जाता है। ...

                                               

फ्लिप-फ्लॉप

एलेक्ट्रॉनिकी में द्विमानित्र एक अंकीय परिपथ है जिसका निर्गम दो स्थाई अवस्थाओं में से किसी एक में बना रहता है में कुछ न किया जाय)। इसे लैच भी कहते हैं। इस परिपथ में एक या एक से अधिक निवेश होते हैं जिन पर संकेत का उचित परिवर्तन करके निर्गम के अवस् ...

                                               

माइक्रोकंट्रोलर

माइक्रोकन्ट्रोलर एक आइ॰ सी॰ है जिसमें पूरा कम्प्यूटर समाहित होता है; अर्थात् एक ही आई॰ सी॰ के अन्दर कम्प्यूटर के चारों भाग निर्मित होते हैं। वस्तुतः यह भी एक प्रकार का माइक्रोप्रोसेसर ही है किन्तु इसकी डिजाइन में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है ...