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श्रुतकेवली

श्रुतकेवली, श्रुतज्ञान अर्थात् शास्त्रों के पूर्ण ज्ञाता होते हैं। श्रुतकेवली और केवली, ज्ञान की दृष्टि से दोनों समान हैं, लेकिन श्रुतज्ञान परोक्ष और केवल ज्ञान प्रत्यक्ष होता है। केवलियों को जितना ज्ञान होता है उसके अतनवें भाग का वे प्ररूपण कर स ...

                                               

संवर

संवर जैन दर्शन के अनुसार एक तत्त्व हैं। इसका अर्थ होता है कर्मों के आस्रव को रोकना। जैन सिद्धांत सात तत्त्वों पर आधारित हैं। इनमें से चार तत्त्व- आस्रव, बन्ध, संवर, निर्जरा कर्म सिद्धांत के स्तम्भ हैं।

                                               

सप्तभंगी नय

स्यादवाद या अनेकान्तवाद या सप्तभङ्गी का सिद्धान्त जैन धर्म में मान्य सिद्धान्तों में से एक है। स्यादवाद का अर्थ सापेक्षतावाद होता है। यह जैन दर्शन के अंतर्गत किसी वस्तु के गुण को समझने, समझाने और अभिव्यक्त करने का सापेक्षिक सिद्धांत है। सापेक्षता ...

                                               

समयसार

समयसार, आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इसके दस अध्यायों में जीव की प्रकृति, कर्म बन्धन, तथा मोक्ष की चर्चा की गयी है। यह ग्रंथ दो-दो पंक्‍तियों से बनी ४१५ गाथाओं का संग्रह है। ये गाथाएँ प्राकृत भाषा में लिखी गई है। इस समयसार के ...

                                               

स्यादवाद

स्यादवाद या अनेकांतवाद या सप्तभंगी का सिद्धान्त जैन धर्म में मान्य सिद्धांतों में से एक है। स्यादवाद का अर्थ सापेक्षतावाद होता है। यह जैन दर्शन के अंतर्गत किसी वस्तु के गुण को समझने, समझाने और अभिव्यक्त करने का सापेक्षिक सिद्धांत है। सापेक्षता अर ...

                                               

अधिसिद्धांत

अधिसिद्धांत ऐसा सिद्धांत होता है जिसका विषय कोई अन्य सिद्धांत हो। स्टीफन हॉकिंग के शब्दों में "हर सिद्धांत सदैव अस्थाई होता है, वह केवल एक परिकल्पना मात्र होती है; उसे पूर्ण रूप से प्रमाणित नहीं करा जा सकता। चाहे कितनी ही बार प्रयोग कर के सिद्धां ...

                                               

तर्क-वितर्क

तर्क-वितर्क चेतना द्वारा चीज़ों को समझने, तथ्यों को स्थापित व प्रमाणित करने, तर्क का प्रयोग करने और व्यवहारों तथा विश्वासों के कारण समझने व उन्हें बदलने की प्रक्रिया को कहते हैं। कई मानवीय कार्य व अध्ययन - जिनमें दर्शनशास्त्र, विज्ञान, भाषा, गणित ...

                                               

समय

समय एक भौतिक राशि है। जब समय बीतता है, तब घटनाएँ घटित होती हैं तथा चलबिंदु स्थानांतरित होते हैं। इसलिए दो लगातार घटनाओं के होने अथवा किसी गतिशील बिंदु के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक जाने के अंतराल को समय कहते हैं। समय नापने के यंत्र को घड़ी अथवा घ ...

                                               

अन्यथासिद्धि

न्याय या तर्क में, किसी अ-यथार्थ या अ-प्रत्यक्ष कारण के आधापर कोई बात सिद्ध करना अन्यथासिद्धि कहलाती है। इसे तर्कदोष माना गया है। उदाहरण के लिए, कहीं कुम्हार, दण्ड या गधे को देखकर यह सिद्ध करना कि वहाँ घट है - यह अन्यथासिद्धि है। न्यायदर्शन में प ...

                                               

कुतर्क

कुतर्एक बुरे या अमान्य तर्क को कहते हैं। कुछ कुतर्क धोखे से यकीन दिलाने के लिए जानबूझकर किए जाते हैं, और कुछ लापरवाही या अज्ञानता के कारण अनजाने में होते हैं। कुतर्क सामान्यतः दो प्रकार के होते हैं: "औपचारिक" और "अनौपचारिक"। औपचारिक कुतर्कों को प ...

                                               

गणितीय तर्कशास्त्र

गणितीय तर्कशास्त्र गणित की शाखा है किसका संगणक विज्ञान एवं दार्शनिक तर्कशास्त्र से निकट का सम्बन्ध है। तर्कशास्त्र का गणितीय अध्ययन तथा गणित के अन्य विधाओं में तर्कशास्त्र के अनुप्रयोग दोनो ही इसके अंतर्गत आते हैं। प्राय: गणितीय तर्कशास्त्र को सम ...

                                               

जुआरी का कुतर्क

जुआरी का कुतर्क या मोंटे कार्लो कुतर्एक गलत धारणा है कि यदि कोई घटना अतीत में सामान्य से अधिक बार हुई है, तो वह घटना भविष्य में कम बार होगी; या यदि कोई घटना अतीत में सामान्य से कम बार हुई है, तो वह घटना भविष्य में अधिक बार होगी । उदाहरण के रूप मे ...

                                               

ज्ञान द्योतन

ज्ञान द्योतन संगणकी की कृत्रिम बुद्धि क्षेत्र की एक शाखा है जिसमें ज्ञान को भिन्न प्रकार से संगणकों में व्यक्त करने का अध्ययन किया जाता है ताकि उसका प्रयोग कठिन कार्यों में किया जा सके। उदाहरण के लिये चिकित्सा-सम्बन्धी जानकारी को संगणकों में व्यक ...

                                               

तन्त्रयुक्ति

तंत्रयुक्ति रचित एक भारतीय ग्रन्थ है जिसमें परिषदों एवं सभाओं में शास्त्रार्थ करने की विधि वर्णित है। वस्तुतः तंत्रयुक्ति हेतुविद्या का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है। इसका उल्लेख चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता, अर्थशास्त्र ग्रन्थ आदि में भी मिलता है। किन्तु इ ...

                                               

तरकशास्त्र (भारतीय दर्शन)

भारतीय दर्शन के सन्दर्भ में तर्कशास्त्र ज्ञान की प्रकृति, स्रोत तथा वैधता का विश्लेषण करने वाला विज्ञान है। तर्कशास्त्र डायलेक्टिक्स, लॉजिक, रीजनिंग और शास्त्रार्थ का विज्ञान है। छः शास्त्र बताये गये हैं जिनमें व्याकरणशास्त्र, मीमांसाशास्त्र, तर् ...

                                               

तर्क

दर्शनशास्त्र में तर्क‍ कथनों की ऐसी शृंखला होती है जिसके द्वरा किसी व्यक्ति या समुदाय को किसी बात के लिये राज़ी किया जाता है या उन्हें किसी व्यक्तव्य को सत्य मानने के लिये कारण दिये जाते हैं। आम तौपर किसी तर्क के बिन्दु साधारण भाषा में प्रस्तुत क ...

                                               

तर्कशास्त्र

तर्कशास्त्र शब्द अंग्रेजी लॉजिक का अनुवाद है। प्राचीन भारतीय दर्शन में इस प्रकार के नामवाला कोई शास्त्र प्रसिद्ध नहीं है। भारतीय दर्शन में तर्कशास्त्र का जन्म स्वतंत्र शास्त्र के रूप में नहीं हुआ। अक्षपाद! गौतम या गौतम का न्यायसूत्र पहला ग्रंथ है ...

                                               

तर्कशास्त्र का इतिहास

अनेकों संस्कृतियों ने तर्क करने की सूक्ष्मतिसूक्ष्म प्रणाली अपनायी तथा मानव के सम्पूर्ण चिन्तन में तर्क उपस्थित रहा है। किन्तु तर्क करने की स्पष्ट और विधिवत प्रणाली मुख्यत: और मूलत: भारत, चीन और यूनान में ही विकसित हुई। इनमें से केवल भारतीय और यू ...

                                               

न्यायवाक्य

न्यायवाक्य या सिल्लोगिज्म एक विशेष प्रकार का तर्क करने का तरीका है जिसमें दो अन्य कथनों के आधापर तीसरा कथन निकाला जाता है। अरस्तू ने सिल्लोजिज्म को इस प्रकार परिभाषित किया है - "वह शास्त्रार्थ discourse जिसमें कुछ चीजें सत्य मान लेने के बाद इनसे ...

                                               

प्रमेय

प्रमेय का शाब्दिक अर्थ है - ऐसा कथन जिसे प्रमाण द्वारा सिद्ध किया जा सके। इसे साध्य भी कहते हैं। गणित में और विशेषकर रेखागणित में बहुत से प्रमेय हैं। प्रमेयों की विशेषता है कि उन्हें स्वयंसिद्धों axioms एवं सामान्य तर्क deductive logic से सिद्ध क ...

                                               

प्रहसन कुतर्क

प्रहसन कुतर्क तर्कशास्त्र में ऐसे मिथ्या तर्क को कहते हैं जिसमें किसी दावे को उपहासजनक तरीक़े से प्रस्तुत करके उसका मज़ाक़ बनाकर या खिल्ली उड़ाकर उसे झुठा ठहराने का ग़लत प्रयास किया जाए। अक्सर इसमें मूल दावे को अवैध अतिशयोक्ति या तथ्यों के साथ बत ...

                                               

प्रासंगिकता

प्रासंगिकता का अर्थ यह है कि कोई सूचना, क्रिया या चीज किसी मामले या मुद्दे से कितना सम्बद्ध है। उदाहरण के लिये मुकद्दमों में बहस के दौरान या साक्ष्य के लिये प्रासंगिकता को बहुत महत्व दिया जाता है और जो चींजे मुद्दे से हटकर या असम्बद्ध लगती हैं उन ...

                                               

बूलीय बीजगणित (तर्कशास्त्र)

बूलीय बीजगणित या बूली का तर्कशास्त्र, तार्किक ऑपरेशन का एक सम्पूर्ण तन्त्र है। इसे सबसे पहले जॉर्ज बूल ने उन्नीसवीं शदी के मध्य में बीजगणितीय तर्क के रूप में प्रस्तुत किया। बहुत दिनो तक इस पर लोगों का ध्यान नहीं गया और इसे महत्व नहीं दिया गया। इस ...

                                               

लोकप्रियता कुतर्क

लोकप्रियता कुतर्क, जिसे कभी-कभी गणतांत्रिक कुतर्क भी कहते हैं, तर्कशास्त्र में ऐसे मिथ्या तर्क को कहते हैं जिसमें किसी दावे को इस आधापर सच ठहराया जाने का प्रयास जो कि उसे बहुत या अधिकतर लोग मानते हैं।

                                               

विकल्प

विकल्प का अर्थ है- शब्द, वचन, कल्पना आदि से प्राप्त अप्रत्यक्ष ज्ञान को कहते हैं। यह ज्ञान अनुभव या प्रयोग पर आधारित नहीं होता। पतञ्जलि के योगसूत्र में विकल्प, ५ प्रकार की वृत्तियों में से एक है। अन्य वृत्तियाँ ये हैं- प्रमाण, विपर्यय, निद्रा, स् ...

                                               

विरोधाभास सूची

यह विषयक वर्गीकृत विरोधाभासों की सूची है। वर्गीकरण लगभग है क्योंकि विरोधाभास एक से अधिक श्रेणियों के लिए योग्य हो सकते हैं। चूँकि शब्द विरोधाभास की परिभाषा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है अतः प्रत्येक के लिए निम्न सूचियाँ विरोधाभास होना आ ...

                                               

व्यक्ति-केन्द्रित कुतर्क

व्यक्ति-केन्द्रित कुतर्क तर्कशास्त्र में ऐसे मिथ्या तर्क को कहते हैं जिसमें किसी दावे की निहित सच्चाई को झुठलाने की कोशिश उस दावेदार के चरित्र, विचारधारा या किसी अन्य गुण की ओर ध्यान बंटाकर की जाए। उदाहरण के लिए यह कहना कि वर्मा साहब ने जो भ्रष्ट ...

                                               

संरचनावादी आलोचना

संरचनावादी आलोचना साहित्य का संरचनावादी भाषा विज्ञान के मूल्यो के आधापर विश्लेषण करने वाली आलोचना है। रोमन जैकोबसन और क्लॉड लेवी स्ट्राउस आदि संरचनावादी आलोचना पद्धति के प्रमुख आलोचकों में शामिल हैं। यह आलोचना विधि एक बड़े आंदोलन का हिस्सा है। इस ...

                                               

अभिगृहीत

तर्कशास्त्र में स्वयंसिद्ध या अभिगृहीत ऐसे कथनों को कहते हैं जिन्हें सिद्ध नहीं किया जाता बल्कि उन्हें अति-स्पष्ट समझा जाता है। स्वयंसिद्धों को सत्यता को बिना शंका के स्वीकाकर लिया जाता है। स्वयंसिद्ध अन्य सत्यों को सिद्ध करने के लिये आधार का काम ...

                                               

स्वयंसिद्धों की सूची

ये समसामयिक गणित एवं सम्मुच्चय सिद्धान्त के लिये मानक स्वयंसिद्ध हैं। Axiom of union Axiom schema of replacement Axiom schema of specification Axiom of regularity Axiom of extensionality Axiom of pairing Axiom of power set Axiom of infinity Axiom ...

                                               

हेत्वाभास

भारतीय न्यायदर्शन में हेत्वाभाउस अवस्था को कहते हैं जिसमें वास्तविक हेतु का अभाव होने पर या किसी अवास्तविक असद् हेतु के वर्तमान रहने पर भी वास्तविक हेतु का आभास मिलता या अस्तित्व दिखाई देता है और उसके फल-स्वरूप भ्रम होता या हो सकता हो। हेत्वाभास ...

                                               

तीर्थंकरों की सूची

नीचे २४ तीर्थंकरों की सूची उनके कालक्रम में दी गयी है। The total length of the lifespans of all 24 Tīrthaṅkaras combined equals 2.603672 sextillion years.

                                               

पद्मप्रभ

पद्मप्रभ जी वर्तमान अवसर्पिणी काल के छठे तीर्थंकर है। कालचक्र के दो भाग है - उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी। एक कालचक्र के दोनों भागों में २४-२४ तीर्थंकरों का जन्म होता है। वर्तमान अवसर्पिणी काल की चौबीसी के ऋषभदेव प्रथम और भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर थे।

                                               

मुनिसुव्रतनाथ

मुनिसुव्रतनाथ या मुनिसुव्रत जैन धर्म के २० वें तीर्थंकर माने गए हैं। उनके पिता का नाम सुमित्और माता का नाम पद्यावती था। ये भगवान राम के समकालीन माने गये हैं।उ नका जन्म राजगृह और निर्वाण संमेदशिखर पर हुआ था। कछुवा उनका चिह्न बताया गया है। उनके समय ...

                                               

सुविधिनाथ

भगवान पुष्पदन्त की टोंक को सुप्रभ कूट भी कहा जाता है। वादियों में बसी भगवान पुष्पदन्त की टोंक भगवान पार्श्वनाथ की टोंक से लगभग 1.8 कि.मि. की दूरी पर स्थित है। यहाँ से भगवान पुष्पदंतनाथ ने एक हजार साधुओं के साथ मोक्ष प्राप्त किया था। भगवान पुष्पदन ...

                                               

गुण नीतिशास्त्र

साँचा:Socrates गुण नीतिशास्त्र एक मानदण्डक नीतिशास्त्रीय सिद्धान्त हैं, जो मन और चरित्र के गुणों पर ज़ोर डालता हैं। गुण नीतिशास्त्रवादी गुणों के प्रकृति और परिभाषा की तथा अन्य सम्बन्धित समस्याओं की चर्चा करते हैं। उदाहरणार्थ, गुण कैसे कैसे सम्प्र ...

                                               

व्यवहारवादी नीतिशास्त्र

व्यवहारवादी नीतिशास्त्र मानदण्डक दार्शनिक नीतिशास्त्र का एक सिद्धान्त हैं। नीतिशास्त्रीय व्यवहारवादी, जैसे कि जॉन डूई मानते हैं कि, कुछ समाज ने उसी तरह नैतिक रूप से प्रगति की हैं, जैसे उन्होंने विज्ञान में प्रगति प्राप्त की हैं।

                                               

अधिदर्शन

अधिदर्शन, जिसे कभी-कभी दर्शन का दर्शन भी कहा जाता है, स्वयं दर्शनशास्त्र को दर्शनशास्त्रीय सिद्धांतों के प्रयोग से समझने की क्रिया को कहते हैं। इसमें दर्शनशास्त्र के ध्येय, उसकी सीमाएँ और उसकी अध्ययन-प्रणालियाँ शामिल हैं। जहाँ दर्शनशास्त्र में अस ...

                                               

अनात्मवाद

दर्शन में दो विचारधाराएँ होती हैं: 1 आत्मवाद, जो आत्मा का अस्तित्व मानती है: 2 अनात्मवाद, जो आत्मा का अस्तित्व नहीं मानती। एक तीसरी विचारधारा नैरात्मवाद की भी है, जो आत्म-अनात्म से परे नैरात्मा को देवता की तरह मानती है। कुछ दर्शनों में आत्मवाद और ...

                                               

मूल्यमीमांसा

मूल्यमीमांसा दर्शन की एक शाखा है। मूल्यमीमांसा अंग्रेजी शब्द "एग्जियोलॉजी" का हिंदी रूपांतर है। "एग्जियोलॉजी" शब्द "एक्सियस" शब्द यूनानी शब्द "एक्सियस" और "लागस" का अर्थ मूल्य या कीमत है तथा "लागस" का अर्थ तर्क, सिद्धांत या मीमांसा है। अत: "एग्जि ...

                                               

राजनीतिक दर्शन

राजनीतिक दर्शन के अन्तर्गत राजनीति, स्वतंत्रता, न्याय, सम्पत्ति, अधिकार, कानून तथा सत्ता द्वारा कानून को लागू करने आदि विषयों से सम्बन्धित प्रश्नों पर चिन्तन किया जाता है: ये क्या हैं, उनकी आवश्यकता क्यों हैं, कौन सी वस्तु सरकार को वैध बनाती है, ...

                                               

हरबर्ट स्पेंसर

अन्य व्यक्तियों के लिये हरबर्ट स्पेंसर देखें। हरबर्ट स्पेंसर 27 अप्रैल 1820-8 दिसम्बर 1903 विक्टोरियाई काल के एक अंग्रेज़ दार्शनिक, जीव-विज्ञानी, समाजशास्री और प्रसिद्ध पारंपरिक उदारवादी राजनैतिक सिद्धांतकार थे। स्पेंसर ने भौतिक विश्व, जैविक सजीव ...

                                               

अक्षर अनन्य

अक्षर अनन्य एक सन्तकवि एवं दार्शनिक थे। ये ज्ञानयोग, विज्ञानयोग, ध्यानयोग, विवेकदीपिका, ब्रह्मज्ञान, अनन्य प्रकाश, राजयोग, सिद्धांतबोध आदि ग्रंथों के ये प्रणेता माने जाते हैं। इनमें अद्वैत वेदांत के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया ...

                                               

अजित केशकंबली

भगवान बुद्ध के समकालीन एवं तरह-तरह के मतों का प्रतिपादन करने वाले जो कई धर्माचार्य मंडलियों के साथ घूमा करते थे उनमें अजित केशकंबली भी एक प्रधान आचार्य थे। इनका नाम था अजित और केश का बना कंबल धारण करने के कारण वह केशकंबली नाम से विख्यात हुए। उनका ...

                                               

अभिनवगुप्त

अभिनवगुप्त दार्शनिक, रहस्यवादी एवं साहित्यशास्त्र के मूर्धन्य आचार्य। कश्मीरी शैव और तन्त्र के पण्डित। वे संगीतज्ञ, कवि, नाटककार, धर्मशास्त्री एवं तर्कशास्त्री भी थे। अभिनवगुप्त का व्यक्तित्व बड़ा ही रहस्यमय है। महाभाष्य के रचयिता पतंजलि को व्याक ...

                                               

अरस्तु

अरस्तु यूनानी दार्शनिक थे। वे प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु थे। उनका जन्म स्टेगेरिया नामक नगर में हुआ था । अरस्तु ने भौतिकी, आध्यात्म, कविता, नाटक, संगीत, तर्कशास्त्र, राजनीति शास्त्र, नीतिशास्त्र, जीव विज्ञान सहित कई विषयों पर रचना की। अरस्तु ...

                                               

अल-राज़ी

मुहम्मद इब्न जकारिया राजी अरबी: أبو بكر محمد بن يحيى بن زكريا الرازي‎ अबू बक्र मोहम्मद बिन याहिया बिन जकारिया अल-राजी ; फारसी: محمد زکریای رازی‎ मोहम्मद-ए-जकारिया-ए-राजी, फारस इरान के प्रसिद्ध हकीम थे संभवत: सन् ८५०-९२३। इनका जन्म तेहरान के पास र ...

                                               

अल्फ्रेड नार्थ ह्वाइटहेड

अल्फेड नार्थ ह्वाइटहेड इंग्लैण्ड के गणितज्ञ एवं दार्शनिक थे। वे प्रक्रिया दर्शन नामक दार्शनिक सम्प्रदाय के प्रमुख दार्शनिक हैं।

                                               

आदि शंकराचार्य

आदि शंकर ये भारत के एक महान दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक थे। उन्होने अद्वैत वेदान्त को ठोस आधार प्रदान किया। उन्होने सनातन धर्म की विविध विचारधाराओं का एकीकरण किया। उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई इनकी टीकाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। इन्होंने भारतवर ...

                                               

आनन्दबोध

आनंदबोध, शांकर वेदांत के प्रसिद्ध लेखक। ये संभवत: 11वीं अथवा 12वीं शती में विद्यमान थे। इन्होंने शांकर वेदांत पर कम से कम तीन ग्रंथ लिख थे- "न्यायदीपावली", "न्यायमकरंद" और "प्रमाणमाला"। इनमें से "न्यायमकरंद" पर चित्सुख और उनके शिष्य सुखप्रकाश ने ...