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अटकल

अटकल या ऊहा ऐसे कथन को कहते हैं जो बहुविध जांचने पर सत्य या वास्तविक लगता हो किन्तु जिसकी सत्यता पूर्ण रूप से सिद्ध न की जा सकी हो। कार्ल पॉपर ने इस शब्द का वैज्ञानिक दर्शनशास्त्र में सर्वप्रथम प्रयोग करना आरम्भ किया। अटकल, परिकल्पना से इन अर्थ म ...

                                               

अवयव और अवयवी

अवयव का अर्थ है अंग और अवयवी का अर्थ है अंगी। बौद्धों और नैयायिकों में इस विषय को लेकर गहरा मतभेद चलता है। बौद्धों के मत में द्रव्य अपने उत्पादक परमाणुओं का समूह मात्र है अर्थात्‌ वह अवयवों का पुंज है। न्यायमत में अवयवों से उत्पन्न होनेवाला अवयवी ...

                                               

मानदण्डक

मानदण्डक के अर्थ का सम्बन्ध किसी आदर्श मानक या मॉडल से हैं, या उस पर आधारित हैं, जो कोई चीज़ करने का सामान्य या उचित तरीका माना जाता हो। मानदण्डक का विभिन्न अकादमिक अनुशासनों, जैसे दर्शन, सामाजिक विज्ञान, और विधि, में विशिष्ट अर्थ होता हैं।

                                               

द्विविधा

द्विविधा तर्कशास्त्र में ऐसी दुविधा को कहते हैं जिसमें दो सम्भावित विकल्प हों, जिनमें से सरल रूप से कोई भी श्रेष्ठतर न हो। यानि ऐसी स्थिति जिसमें व्यक्ति असमंजस में पड़ जाये कि दोनो चारों या उत्तरों में से किसे चुना जाये। साधारण बोलचाल में द्विवि ...

                                               

बंदी की दुविधा

बंदी की दुविधा खेल सिद्धांत में एक प्रकार की परिस्थिति का एक प्रसिद्ध उदाहरण है जो यह दर्शाता है कि लोग एक-दूसरे पर भरोसा न करने के कारण कभी-कभी आपस में तब भी सहयोग नहीं कर पाते जब सहयोग करने से दोनों का ही स्पष्ट लाभ हो रहा हो और असहयोग से दोनों ...

                                               

मुर्ग़ी का खेल

मुर्ग़ी का खेल, जिसे बाज़-बटेर खेल या बर्फ़ के टीले का खेल भी कहा जाता है, खेल सिद्धांत में दो प्रतिद्वंदियों के बीच होने वाला एक प्रकार का संघर्ष है। इसमें दोनों के बीच में एक ऐसी प्रतियोगिता शुरू हो जाती है जिसमें दोनों में से कोई भी पीछे नहीं ...

                                               

आम युग

आम युग या वर्तमान युग विश्व भर में व्यापक रूप से प्रयुक्त किएँ जाने वाले एक कालदर्शक युग का एक नाम हैं। सीई से पहले के युग को सीई पूर्व या बीसीई कहते हैं। आम युग अंकन प्रणाली डायनीसियन युग प्रणाली के विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जा सकती हैं, जो ...

                                               

छद्म धर्मनिरपेक्षता

छद्म धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्मनिरपेक्ष होने का स्वांग करते हुए व्यवहार में मजहब-सापेक्ष निर्णय, नीतियाँ और कार्य करना है। इस शब्द का उपयोग वे समूह करते हैं जो दूसरों द्वारा मजहब के आधापर दोहरी नीति अपनाने विरोध करते हैं। यह इसका सर्वप्रथम दर्ज ...

                                               

पंथनिरपेक्ष राज्य

पंथनिरपेक्ष राज्य से आशय यह है कि राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हैं और धर्म, पंथ एवं उपासना रीति के आधापर राज्य किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगा। राष्ट्रीय स्वतंत्रा संग्राम के दौरान ही भारत मे सांप्रदायिक कटुता का विस्तार हो चुका था। ...

                                               

प्रवेशद्वार: नारीवाद

नारीवाद में अनेक आन्दोलन, सिद्धांत और दर्शन सम्मिलित हैं, जिनका सन्दर्भ लैंगिक असमानता, नस्ल असमानता और मानवीय अधिकार जैसे मुद्दों से हैं, जो महिलाओं के उत्पीडन को ख़त्म करने की वकालत करते हैं, और जो महिलाओं के अधिकार एवं हित हेतु मुहीम चलाते हैं।

                                               

आमूल नारीवाद

आमूल नारीवाद नारीवाद के भीतर का एक दृष्टिकोण है, जो समाज की आमूल पुनर्व्यवस्था का आह्वान देता है, जिस में सारे सामाजिक और आर्थिक प्रसंगों में पुरुष वर्चस्व मिट जाएँ।

                                               

उदारवादी नारीवाद

उदारवादी नारीवाद एक व्यक्तिवादी किस्म का नारीवाद हैं, जिसमे औरतें समझती है की वह अपनी सोच और करतब से समानता पा सकती हैं। उदारवादी नारीवादियों का मानना हैं की सामाजिक संस्थाओं में औरतों की आवाज़ और उनकी पहचान का सही मायने में प्रतिनिधित्व नहीं हो ...

                                               

कन्या शिशु हत्या

कन्या शिशु हत्या की घटना के रूप में कई संस्कृतियों के रूप में पुरानी है और संभावना के इतिहास में लिंग चयनात्मक होने वाली मौतों के लाखों लोगों के लिए किया था। कन्या शिशु बच्चे पुरुष बच्चों के लिए वरीयता के कारण लड़कियों की जानबूझकर हत्या कम महिलाओ ...

                                               

किरआर्ची

नरीवादी विमर्श मे किरआर्ची का अभिप्राय ऐसी सामाजिक व्यवस्था या परस्पर अन्तर्समबन्धित सामाजिक प्रणालियों के समुह से है जो वर्चस्व, उत्पीड़न, और समर्पण पर आधारित है। यह शब्द Elisabeth Schüssler Fiorenza द्वारा १९९२ मे गढ़ा गया था, जिसका उद्देश्य् व ...

                                               

नारीवाद

नारीवाद, राजनैतिक आन्दोलनों, विचारधाराओं और सामाजिक आंदोलनों की एक श्रेणी है, जो राजनीतिक, आर्थिक, व्यक्तिगत और सामाजिक लैंगिक समानता को परिभाषित करने, स्थापित करने और प्राप्त करने के एक लक्ष्य को साझा करते हैं। इसमें महिलाओं के लिए पुरुषों के सम ...

                                               

पुस्सी रायट

पुस्सी रायट एक रूसी नारीवादी पंक रॉक प्रदर्शन बैंड समूह हैं। इसमें लगभग ग्यारह महिलाएँ हैं। समूह अगस्त २०११ को मॉस्को में स्थापित हुई। अदालत द्वारा उन्हें दो साल की जेल सज़ा सुनागई थी क्योंकि बैंड की कुछ सदस्यों ने इसा मसीह गिरजेघर में व्लादिमीर ...

                                               

भूमाता ब्रिगेड

भूमाता ब्रिगेड एक संगठन है जो महिलाओं के साथ अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता है। ये संगठन औरंगाबाद के शिंगणापुर स्थित शनि मंदिर में महिलाओं द्वारा पूजा करने पर रोक का विरोध करने के लिए सुर्ख़ियों में आया था।

                                               

महिला जननांग कर्तन

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा परिभाषित महिला जननांग कर्तन की परिभाषा निम्न प्रकार है: "वो सभी प्रक्रियाएँ जिनमें महिला जननांग के बाहरी भाग को आंशिक अथवा पूर्ण रूप से हटा दिया जाता है अथवा किसी गैर चिकित्सकीय कारण से महिला यौन अंगों को होने वाली क् ...

                                               

मानव अधिकारों के लिए महिलाएं

मानव अधिकारों के लिए महिलाएं एक ऐसा संगठन जो नेपाल में अकेली महिलाओं के राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक अधिकारों को सुरक्षित करने का काम करता। इसकी स्थापना लिली थापा ने की थी। यह 100.000 से अधिक एकल महिलाओं के सदस्यों के साथ 73 जिलों में ...

                                               

मार्कसवादी नारीवाद

समाजवादी नारीवाद या मार्क्सवादी नारीवाद औद्योगिक रजिस्ट्रारवाद के उलट और उत्पादन के साधनों के साथ श्रम के संबंध के संदर्भ में नारी की सामाजिक स्थिति में बदलाव को देखता है। उनके अनुसार, क्रांति ही एकमात्र समाधान है। हालांकि, समय बीतने के साथ, समाज ...

                                               

मीटू आन्दोलन

मीटू आंदोलन, कई स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय विकल्पों के साथ, यौन उत्पीड़न और यौन हमले के खिलाफ एक आंदोलन है। #MeToo अक्टूबर 2017 में यौन उत्पीड़न और उत्पीड़न, विशेष रूप से कार्यस्थल में व्यापक प्रसार का प्रदर्शन करने के प्रयास में सोशल मीडिया पर इस् ...

                                               

लैंगिक भूमिकाएँ

लैंगिक भूमिकाए समाज मे स्वीकार वह व्यवहार है जो पुरुष और स्त्री के लिंग पर आधारित होते है | यह भूमिकाए नारित्व और मर्दानगी की धारनयो को विरोधी स्थापित करते है, परंतु कई अपवाद भी मौजूद है | विभिन्न संस्कृतीयो मे अलग-अगाल भूमिकाए हो सकती है | कुछ ल ...

                                               

स्त्री द्वेष

स्त्री द्वेष महिलाओं या लड़कियों के प्रति नफरत या नापसंद है। स्त्री जाति से द्वेष यौन भेदभाव, महिलाओं की बदनामी, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और महिलाओं के यौन वस्तुनिष्ठ सहित कई मायनों में प्रकट हो सकता हैं।

                                               

हर-स्टोरी

हर-स्टोरी एक कहानी है जो नारीवाद के दृष्टिकोण से लिखी गई है और जिसमें महिलाओं के चरित्पर बल दिया गया है या फिर विवरण औरतों के दृष्टिकोण से किया गया है। यह एक नवीन रूप से प्रयुक्त शब्द है और इतिहासकारी की यह एक नारीवादी समीक्षा है। इस धारण के अनुस ...

                                               

इब्न सीना

अबू अली सीना फारस के विद्वान, दार्शनिक एवं चिकित्सक थे। उन्होने विविध विषयों पर लगभग ४५० पुस्तकें लिखी जिसमें से २४० अब भी प्राप्य हैं। इसमें से १५ पुस्तकें चिकित्सा विज्ञान से संबंधित हैं। उनकी विश्वविख्यात किताब का नाम क़ानून है। यह किताब मध्यप ...

                                               

इश्वरवादी अस्तित्ववाद

सोरेन किर्केगार्द, गैब्रियल मार्शल आदि द्वारा प्रवर्तित अस्तित्ववाद की इश्वरवादी धारा के केन्द्र में ईश्वर है। इनके अनुसार संसार में निरर्थक जीवन को सार्थक व सारपूर्ण बनाने के लिये निष्ठा तथा ईश्वर में आस्था अनिवार्य है।

                                               

ईश्वरवादी अस्तित्ववाद

सोरेन किर्केगार्द, गैब्रियल मार्शल आदि द्वारा प्रवर्तित अस्तित्ववाद की ईश्वरवादी धारा के केन्द्र में ईश्वर है। इनके अनुसार संसार में निरर्थक जीवन को सार्थक व सारपूर्ण बनाने के लिये निष्ठा तथा ईश्वर में आस्था अनिवार्य है।

                                               

एंपेडोक्लीज़

एंपेडोक्लीज़ का सोचना था कि विश्व में सब कुछ छः तत्वों से बना है। इन में से चार है निष्क्रिय ः पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि। यह चारों तत्व हमेशा से हैं और हमेशा तक ही रहेंगे। न तो इनका उत्पादन होता है न ध्वंस। दूसरे दो समान्य ढंग के तत्व तो नहीं है पर ...

                                               

परमनिरपेक्ष

पाश्चात्य दर्शन में सर्वस्वतंत्र, सर्वस्वाधीन, सर्वोपरि, तथ्यात्मक, स्वयंभू, आत्मनिर्भर, आत्मपूर्ण और वैयक्तिक विचार एवं खोज पर न निर्भर एकमात्र परमनिरपेक्ष सत्य अथवा, मूल्य अर्थात् अर्थ की धारणा प्रचलित रही है। परमनिरपेक्ष को प्राय: समस्त वास्तव ...

                                               

पाइथागोरस

【 अनिक 】सामोस के पाईथोगोरस," या साधारण रूप से Ὁ Πυθαγόρας ; उनका जन्म 580 और 572 ई॰पू॰ के बीच हुआ और मृत्यु 500 और 490 ई॰पू॰ के बीच हुई), या फ़ीसाग़ोरस, एक अयोनिओयन ग्रीक गणितज्ञ और दार्शनिक थे और पाईथोगोरियनवाद नामक धार्मिक आन्दोलन के संस्थापक ...

                                               

प्लेटो

प्लेटो, या अफ़्लातून, यूनान का प्रसिद्ध दार्शनिक था। वह सुकरात का शिष्य तथा अरस्तू का गुरू था। इन तीन दार्शनिकों की त्रयी ने ही पश्चिमी संस्कृति का दार्शनिक आधार तैयार किया। यूरोप में ध्वनियों के वर्गीकरण का श्रेय प्लेटो को ही है।

                                               

विश्लेषी दर्शन

पाश्चात्य दर्शन के सन्दर्भ में, विश्लेषी दर्शन, दर्शन की उस नवीन शैली को कहते हैं जो २०वीं शताब्दी के आरम्भ में प्रबल हुई। इसके कई अर्थ हो सकते हैं जिनमें से प्रमुख अर्थ ये हैं_ १ तर्कों की स्पष्टता एवं परिशुद्धता पर बल, विश्लेषी दर्शन की प्रमुख ...

                                               

सुकरात

सुकरात मौलिक शिक्षा और आचार द्वारा उदाहरण देना ही पसंद था। साधारण शिक्षा तथा मानव सदाचापर वह जोर देता था और उन्हीं की तरह पुरानी रूढ़ियों पर प्रहार करता था। वह कहता था, "सच्चा ज्ञान संभव है बशर्ते उसके लिए ठीक तौपर प्रयत्न किया जाए; जो बातें हमार ...

                                               

अद्वय

अद्वय का अर्थ है - द्वित्व भाव से रहित । महायान बौद्ध दर्शन में भाव और अभाव की दृष्टि से परे ज्ञान को अद्वय कहते हैं। इसमें अभेद का स्थान नहीं होता। इसके विपरीत अद्वैत भेदरहित सत्ता का बोध कराता है। अद्वैत में ज्ञान सत्ता की प्रधानता होती है और अ ...

                                               

अनुशय

बौद्ध परिभाषा के अनुसार संसार का मूल अनुशय है। ये छह अनुशय हैं- 1 रागतृष्णा, 2 प्रतिघद्वेष, 3 मान, 4 अविद्या विद्या का विरोधी तत्व, 5 दृष्टिविशेष प्रकार की मान्यता या दर्शन, जैसे सत्कादृष्टि मिथ्यादृष्टि आदि और 6 विचिकित्सासंशय ये ही अनुशय संयोजन ...

                                               

अपोहवाद

बौद्ध दर्शन में सामान्य का खंडन करके नामजात्याद्यसंयुत अर्थ को ही शब्दार्थ माना गया है। न्यायमीमांसा दर्शनों में कहा गया है कि भाषा सामान्य या जाती के बिना नहीं रह सकती। प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग शब्द हो तो भाषा का व्यवहार नष्ट हो जाएगा। अनेकता ...

                                               

अभिधम्म साहित्य

बुद्ध के निर्वाण के बाद उनके शिष्यों ने उनके उपदिष्ट धर्म और विनय का संग्रह कर लिया। अट्टकथा की एक परम्परा से पता चलता है कि धर्म से दीघनिकाय आदि चार निकायग्रन्थ समझे जाते थे; और धम्मपद सुत्तनिपात आदि छोटे-छोटे ग्रंथों का एक अलग संग्रह बना दिया ग ...

                                               

अर्थक्रिया

अर्थक्रिया वह क्रिया है जिसके द्वारा किसी प्रयोजन की सिद्धि हो। माधवाचार्य ने सर्वदर्शनसंग्रह में बौद्धदर्शन के प्रसंग में अर्थक्रिया के सिद्धांत का विस्तृत विवेचन किया है। बौद्धों का मान्य सिद्धांत है - अर्थक्रियाकारित्वं सत्तवम्‌ अर्थात्‌ वही प ...

                                               

असंग

बौद्ध आचार्य असंग, योगाचार परंपरा के आदिप्रवर्तक माने जाते हैं। महायान सूत्रालंकार जैसा प्रौढ़ ग्रंथ लिखकर इन्होंने महायान संप्रदाय की नींव डाली और यह पुराने हीनयान संप्रदाय से किस प्रकार उच्च कोटि का है, इसपर जोर दिया। इनका जन्म गांधार प्रदेश के ...

                                               

आर्य आष्टांगिक मार्ग

अष्टांग मार्ग महात्मा बुद्ध की प्रमुख शिक्षाओं में से एक है जो दुखों से मुक्ति पाने एवं आत्म-ज्ञान के साधन के रूप में बताया गया है। अष्टांग मार्ग के सभी मार्ग, सम्यक शब्द से आरम्भ होते हैं । बौद्ध प्रतीकों में प्रायः अष्टांग मार्गों को धर्मचक्र क ...

                                               

आलंबन

बौद्ध दर्शन के अनुसार आलंबन छह होते हैं - रूप, शब्द, गंध, रस, स्पर्श और धर्म। इन छह के ही आधापर हमारे चित्त की सारी प्रवृत्तियां उठती हैं और उन्हीं के सहारे चित्त चैत्तसिक संभव होते हैं। ये आलंबन चक्षु आदि इंद्रियों से गृहीत होते हैं। प्राणी के म ...

                                               

उपाय

बौद्ध धर्म यह मानता है कि बुद्ध ने संसार के अनेकानेक मनुष्यों को अपने-अपने उपाय-कौशल्य के आधापर उनके स्वभाव तथा समझ के अनुसार बुद्धत्व प्राप्ति का उपदेश दिया है।

                                               

क्षणिकवाद

बौद्ध दर्शन में सब से महत्वपूर्ण दर्शन क्षणिकवाद का है। इसके अनुसार, इस ब्रह्मांड में सब कुछ क्षणिक और नश्वर है। कुछ भी स्थायी नहीं। सब कुछ परिवर्तनशील है। यह शरीऔर ब्रह्मांड उसी तरह है जैसे कि घोड़े, पहिए और पालकी के संगठित रूप को रथ कहते हैं और ...

                                               

चंद्रकीर्ति

चंद्रकीर्ति - बौद्ध माध्यमिक सिद्धांत के व्याख्याता एक अचार्य। तिब्बती इतिहासलेखक तारानाथ के कथनानुसार चंद्रकीर्ति का जन्म दक्षिण भारत के किसी समंत नामक स्थान में हुआ था। लड़कपन से ही ये बड़े प्रतिभाशाली थे। बौद्ध धर्म में दीक्षित होकर इन्होंने त ...

                                               

धर्मधातु

महायान बौद्ध सम्प्रदाय में धर्मधातु का अर्थ सत्य का राज्य है। महायान दर्शन में इसके समानार्थक अन्य शब्द भी हैं जैसे- तथाता, शून्यता, प्रतीत्यसमुत्पाद आदि।

                                               

नैरात्म्यवाद

कर्मवाद तथा पुनर्जन्म में विश्वास करते हुए भी बुद्ध आत्मा की सत्ता और अमरता में विश्वास नहीं करते थे। उनके अनुसार मनुष्य के शरीर में ऐसा कोई तत्त्व नहीं है जो शरीर के नष्ट हो जाने के बाद भी अक्षुण्ण बना रहे। बुद्ध के इसी मत को नैरात्म्यवाद कहा गय ...

                                               

पंचशील (बौद्ध आचार)

पंचशील बौद्ध धर्म की मूल आचार संहिता है जिसको थेरवाद बौद्ध उपासक एवं उपासिकाओं के लिये पालन करना आवश्यक माना गया है। भगवान बुद्ध द्वारा अपने अनुयायिओं को दिया गया है यह पंचशील। हिन्दी में इसका भाव निम्नवत है- 1. हिंसा न करना, 2. चोरी न करना, 3. व ...

                                               

पारमिता

बौद्ध धर्म में परिपूर्णता या कुछ गुणों का चरमोन्नयन की स्थिति को पारमिता या पारमी कहा गया है। बौद्ध धर्म में इन गुणों का विकास पवित्रता की प्राप्ति, कर्म को पवित्र करने आदि के लिए की जाती है ताकि साधक अनावरुद्ध जीवन जीते हुए भी ज्ञान की प्राप्ति ...

                                               

बाह्य प्रत्यक्षवाद

बाह्य प्रत्यक्षवाद ज्ञानमीमांसा का एक सिद्धान्त है जिसके अनुसार बाह्य वस्तु का ज्ञान अनुमान से नहीं वरन् प्रत्यक्ष प्राप्त होता है। प्रत्यक्ष ज्ञान संभव माने बिना अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यदि बाह्य वस्तु का प्रत्यक्ष कभी न हुआ हों, तो मानसिक प् ...

                                               

बाह्यानुमेयवाद

बाह्यानुमेयवाद ज्ञानमीमांसा का एक सिद्धांत है। इसके अनुसार संसार का, बाह्य वस्तुओं का, ज्ञान वस्तुजनित मानसिक आकारों के अनुमान द्वारा प्राप्त होता है। हमें न तो बाह्य वस्तु का प्रत्यक्ष ज्ञान होता है और न भ्रमवश अपनी मानसिक अवस्था ही बाह्य वस्तु ...