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शिकारा - मछली. शिकारा एक प्रकार की लकड़ी की नाव है जो डल झील और जम्मू और कश्मीर, भारत के श्रीनगर के अन्य झीलों में पाई जाती है। शिकारे विभिन्न आकारों के होते ..




शिकारा
                                     

शिकारा

शिकारा एक प्रकार की लकड़ी की नाव है जो डल झील और जम्मू और कश्मीर, भारत के श्रीनगर के अन्य झीलों में पाई जाती है। शिकारे विभिन्न आकारों के होते हैं और लोगों के परिवहन सहित कई उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। एक सामान्य शिकारा आधा दर्जन लोगों को बैठाता है, जिसमें चालक पीछे की तरफसे ये शिकारा चलाता है। वेनिस के गोंडोला नाव की तरह, ये शिकारे जम्मू और कश्मीर के एक सांस्कृतिक प्रतीक माने जाते हैं। कुछ शिकारों का उपयोग अभी भी मछली पकड़ने, जलीय वनस्पति, और परिवहन के लिए किया जाता है, जबकि अधिकांश तिरपाल से ढके होते हैं और पर्यटकों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। कुछ का उपयोग गरीब लोगों द्वारा अस्थायी घरों के रूप में किया जाता है। केरल में भी शिकारा नाव उपलब्ध है। अल्लेप्पी में शिकारा आकार में छोटे होते हैं और ४ से २० लोगोंके बैठने की क्षमता रखता है। गर्मियों के मौसम के दौरान, डल झील में शिकारा महोत्सव भी आयोजित किया जाता है।

                                     

1. निर्माण

शिकारे का शिल्प देवदार की लकड़ी, जो पानी में विघटित नहीं होता है, पर निर्भर करता है, जिसकी लंबाई २५ से ४१ फीट तक होती है। नुकीले अगले छोर के बाद एक केंद्रीय खंड होत है जो लकड़ी के ८ तख्तों से बनता है और यह नाव आम तोपर अंत में एक सपाट खंड में समाप्त होती है। लकड़ी की दो पट्टियाँ दोनो तरफ से १.५ फीट की ऊँचाई देती हैं। यह एक विशिष्ट कुदाल आकार का आधार है।

जुड़ने के लिए उपयोग किए जाने वाले किल और लोहे के क्लैंप लकड़ी में तिरछे लगाए जाते होते हैं जब वे गरम होते हैं। इससे मजबूत जोड सुनिश्चित होता हैं। नाव का सौंदर्य जताए रखने के लिए उन्हें छिपाए रखने के लिए देखभाल की जाती है। पोपलर के बीज की पेस्ट के उपयोग से छेद सील कर दिए जाते हैं। यह नाव १० से १२ दिनों में बनाई जाती है।

बैठने की व्यवस्था नाव के मध्य खंड में स्थित तकिये, गद्दे, बिस्तर द्वारा निर्मित की जाती है जिसके निचे सामान रखने की भी व्यवस्था होती है। एक शामियाना चार खंभों पर समर्थित होता है। केंद्और छोर लोहे के लंगर और लकड़ी के खूंटे से सुसज्जित होते हैं, जो झील के किनारे शिकारे को बांधने के लिए उपयोग किया जाता है। शिकारों को अंततः चमकदार रंगों से चित्रित किया जाता है और पॉलिश और अन्य से अलंकृत किया जाता है।