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मुद्रा बोर्ड - मुद्रा . करेन्सी बोर्ड एक मौद्रिक प्राधिकरण है, जो कि एक देश की मुद्रा की विदेशी मुद्रा के साथ स्थिर विनिमय दर बनाये रखने के लिए आवश्यक होता ह ..




                                     

मुद्रा बोर्ड

करेन्सी बोर्ड एक मौद्रिक प्राधिकरण है, जो कि एक देश की मुद्रा की विदेशी मुद्रा के साथ स्थिर विनिमय दर बनाये रखने के लिए आवश्यक होता है। इस नीति के अन्तर्गत केन्द्रीय बैंक के जो अन्यथा परंपरागत लक्ष्य होते हैं, उन्हें विनिमय दर स्थिर रखने के लक्ष्य के आगे गौण कर दिया जाता है।

                                     

1. एक "कट्टर" करेन्सी बोर्ड के लक्षण

एक "कट्टर" करेन्सी बोर्ड के मुख्य गुण हैं-

  • करेन्सी बोर्ड ब्याज दरों को साधने का प्रयास नहीं करता, जैसा कि केंद्रीय बैंक डिस्काउंट रेट देकर करते हैं। दरअसल विदेशी मुद्रा के साथ खूँटीबद्ध कर देने से ब्याज दर तथा मुद्रा स्फीति उस देश के साथ कदमताल करने लगती है जिसकी मुद्रा से वह बँधा है।
  • एक करेन्सी बोर्ड अपने देश की मुद्रा तथा उस मुद्रा जिसके सापेक्ष वह खूँटीबद्ध किया गया है, के बीच एक स्थिर विनिमय दर पर निरपेक्ष, असीमित परिवर्तनीयता की सुविधा देता है।
  • करेन्सी बोर्ड के विदेशी मुद्रा भंडार इतने पर्याप्त होने चाहिए कि उसके सारे नोट व सिक्का धारक उसे उस भंडारित मुद्रा में बदलवा सकें।
  • करेन्सी बोर्ड वाणिज्यिक बैंकों के लिए अन्तिम-आश्रयात्मक उधारदाता का कार्य नहीं करता, तथा भंडार आवश्यकताओं को विनियमित भी नहीं करता।
  • करेन्सी बोर्ड केवल विदेशी मुद्रा के भंडापर मिलने वाले ब्याज से कमा पाता है जिसमें से नोट छापने का व्यय भी घटाना होगा, तथा अग्रगामी-विनिमय फॉरवार्ड एक्सचेंज लेनदेनों में नहीं उलझता। ये विदेशी भंडार अस्तित्व में होते हैं, क्योंकि 1 उनके बदले में स्थानीय नोट जारी किये गये होते हैं, या 2 वाणिज्यिक बैंक, विनियमों के अधीन, करेन्सी बोर्ड में एक न्यूनतम रिजर्व जमा करके अवश्य रखते हैं।
  • करेन्सी बोर्ड के पास मौद्रिक नीति को प्रभावित करने की विवेकाधीन शक्तियाँ नहीं होतीं, तथा यह सरकार को उधार भी नहीं देता। सरकारें, इस व्यवस्था में मुद्रा नहीं छाप सकतीं तथा केवल कर द्वारा या उधार लेकर अपनी व्यय देनदारियों को पूरा करती हैं।
                                     

2. लाभ व हानियाँ

इसका लाभ तो यह है कि मुद्रा की स्थिरता का प्रश्न सुलझ जाता है। तथा हानियाँ हैं, कि देश अपनी घरेलू हालातों के अनुसार मौद्रिक नीति नहीं लागू कर पाता, तथा स्थिर विनिमय दर से देश के व्यापार की शर्तें भी स्थिर हो जाती हैं, जो कि व्यापारकर्ता देशों के आपसी आर्थिक अन्तरों पर निर्भर नहीं करतीं। प्रायः करेन्सी बोर्ड, छोटी तथा खुली अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभप्रद होते हैं, जहाँ स्वतंत्र मौद्रिक नीति चल नहीं सकती। तथा इससे मुद्रा स्फीति को कम रखने का आश्वासन भी मिलता है।

                                     

3. और पढ़ें

  • Tiwari, Rajnish 2003: Post-Crisis Exchange Rate Regimes in Southeast Asia, Seminar Paper, University of Hamburg. PDF

For a precise definition of what constitutes a currency board, including past examples, see:

  • Hanke, Steve H. 2002: On Dollarization and Currency Boards: Error and Deception, Journal of Policy Reform Vol. 5 no. 4, pp203-222. PDF