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वैश्विक स्वास्थ्य - स्वास्थ्यविज्ञान. वैश्विक स्वास्थ्य वैश्विक संदर्भ में लोगों का स्वास्थ्य से संबंधित मामला है और यह किसी व्यक्ति के राष्ट्र की चिंताओं और ..




वैश्विक स्वास्थ्य
                                     

वैश्विक स्वास्थ्य

वैश्विक स्वास्थ्य वैश्विक संदर्भ में लोगों का स्वास्थ्य से संबंधित मामला है और यह किसी व्यक्ति के राष्ट्र की चिंताओं और दृष्टिकोण से परे मामला है। स्वास्थ्य समस्याएं, जो राष्ट्रीय सीमाओं को पाकर जाती हैं या जिनका वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव पड़ता है, पर हमेशा जोर दिया जाता है। इसे कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है, यह अध्ययन, शोध और अभ्यास का वह क्षेत्र है जिसमें दुनिया के लोगों के स्वास्थ्य सुधाऔर स्वास्थ्य में समानता प्राप्त करने को प्राथमिकता दी जाती है. इस प्रकार, विश्व स्तर पर स्वास्थ्य का संबंध दुनिया भर में स्वास्थ्य सुधार, असमानता में कमी और ऐसे वैश्विक खतरों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना है जो राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं मानता है। इन मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सिद्धांतों को लागू किया जाना वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य कहलाता है।

स्वास्थ्य के लिए प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी वैश्विक स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ WHO) है। वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों पर प्रभाव डालनेवाली अन्य महत्वपूर्ण एजेंसियों में यूनिसेफ UNICEF, विश्व खाद्य कार्यक्रम डब्लूएफपी WHP) और विश्व बैंक भी शामिल हैं। वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एक बड़ी पहल संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दि घोषणा है, जो विश्व स्तर पर सहस्राब्दि विकास लक्ष्य का समर्थन करता है।

                                     

1. इतिहास‍

वैश्विक स्वास्थ्य संगठन का गठन करने के लिए 1948 में विभिन्न राष्ट्रों के सदस्य नव गठित संयुक्त राष्ट्र की बैठक में इकट्ठा हुए. 1947 में मिस्र में एक हैजा महामारी ने 20.000 लोगों की जान ले ली और जिसने 1948 में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मदद के लिए प्रोत्साहित किया।

अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य समुदाय की तब से लेकर अब तक की एक सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने चेचक का उन्मूलन कर दिया. संक्रमण का स्वाभाविक रूप से सामने आनेवाला अंतिम मामला 1977 में दर्ज किया गया। लेकिन एक अजीब तरीके से, चेचक की अति आत्मविश्वासी सफलता और प्रभावशीलता के बाद भी मलेरिया और अन्य बीमारियों के उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किया गया है। वास्तव में, अब वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के भीतर इस बात को लेकर बहस होने लगी है कि अपेक्षाकृत कम खर्चीले और शायद कहीं अधिक प्रभावी प्राथमिक स्वास्थ्य और नियंत्रण प्रोग्राम के बदले अधिक महंगे उन्मूलन अभियान को छोड़ दिया जाना चाहिए.

                                     

2. अनुशासनात्मक दृष्टिकोण

जनसांख्यिकी, अर्थशास्त्र, महामारी विज्ञान, राजनीतिक अर्थव्यवस्था और समाजशास्त्र समेत समाज विज्ञान के विषयों और चिकित्सा के साथ वैश्विक स्वास्थ्य एक अनुसंधान का क्षेत्र है। विभिन्न अनुशासनात्मक दृष्टिकोणों से, अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों में यह स्वास्थ्य के वितरण और निर्धारकों पर केंद्रित है।

एक महामारी विज्ञान के दृष्टिकोण से यह एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य समस्याओं को दर्शाता है। चिकित्सा के परिप्रेक्ष्य में यह प्रमुख रोगों की पैथोलॉजी का वर्णन करता है और इन रोगों के रोकथाम, निदान और उपचार को बढ़ावा देता है।

आर्थिक परिप्रेक्ष्य में, व्यक्तिगत और जनता दोनों के स्वास्थ्य के लिए लागत-प्रभावशीलता और लागत-लाभ आवंटन दृष्टिकोण पर यह जोर देता है। सरकारों और गैर सरकारी संगठनों जैसे समग्र विश्लेषण के परिप्रेक्ष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में यह विश्लेषण पर केंद्रित रहता है। लागत-प्रभावशीलता विश्लेषण इस बात की तुलना करता है कि आर्थिक दृष्टिकोण से लागत और स्वास्थ्य प्रभाव के उपाय को प्राप्त करने के लिए, स्वास्थ्य निवेश सार्थक है या नहीं. स्वतंत्र उपायों और परस्पर अनन्य उपायों के बीच भेद करना जरूरी है। स्वतंत्र उपायों के लिए, औसत लागत-प्रभावशीलता अनुपात पर्याप्त होता है। हालांकि, जब परस्पर अनन्य उपायों की तुलना की जाती हैं, तब वृद्धिशील लागत-प्रभावशीलता अनुपात का उपयोग आवश्यक हो जाता है। बादवाली तुलना यह सुझाव देती है कि उपलब्ध संसाधनों से अधिक से अधिक स्वास्थ्य देखभाल प्रभाव को कैसे प्राप्त किया जाता है।

इस दृष्टिकोण से व्यक्तिगत स्वास्थ्य विश्लेषण की स्वास्थ्य की मांग और आपूर्ति पर केंद्रित होता है। स्वास्थ्य देखभाल की चाह सामान्य स्वास्थ्य की चाह से निकल कर आती है। उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्य देखभाल की मांग "स्वास्थ्य पूंजी" के एक बड़े भंडार को हासिल करने के साधन के रूप में की जाती है। स्वास्थ्य के मामले में इष्टतम स्तर का निवेश वहीं होता है, जहां स्वास्थ्य पूंजी की सीमांत लागत से निकल कर आए इसके नतीजे सीमांत लाभ के बराबर होता है एमसी=एमबी. समय के गुजरने के साथ, कुछ हद तक स्वास्थ्य की अवमूल्यन दर δ हो जाती है। अर्थव्यवस्था में सामान्य ब्याज दर आर से चिह्नित की जाती है। स्वास्थ्य की आपूर्ति प्रदाता प्रोत्साहन, बाज़ार निर्माण, बाज़ार संगठन और इन मुद्दों से संबंधित असंतुलित सूचना, स्वास्थ्य प्रावधान के मामले में गैर सरकारी और सरकारी संगठनों की भूमिका पर केंद्रित होती है।

इसके अलावा, नैतिक दृष्टिकोण वितरणात्मक विचारों पर जोर देता है। बचाव का नियम, जो ए.आर. जोसेन 1986 द्वारा आविष्कृत है, विस्तार संबंधी मुद्दों पर विचार करने का तरीका है। यह नियम स्पष्ट रूप से निर्देश देता है कि जहां कहीं भी संभव हो जीवन को बचाना अपना कर्तव्य महसूस करना है. निष्पक्ष न्याय पर जॉन रॉवेल्स के विचारों का वितरण एक संविदात्मक दृष्टिकोण है। स्वास्थ्य निष्पक्षता के मुख्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए अमर्त्य सेन ने इस दृष्टिकोण को लागू किया था। जैव-नैतिक अनुसंधान भी न्याय के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों की जांच मोटे तौपर तीन समूह क्षेत्रों में करता है: 1 स्वास्थ्य के मामले में अन्यायपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय असमानताओं कहां बरती जा रही है?; 2 अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य असमानताएं से कहां से आती हैं?; 3 अगर हम उन सबसे नहीं मिल पाते हैं तो हम कैसे स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को कैसे पूरा कर सकेंगे?

वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक राजनीतिक दृष्टिकोण राजनीतिक अर्थव्यवस्था लागू करने पर जोर देता है। राजनीतिक अर्थव्यवस्था शब्द की उत्पत्ति उत्पादन के अध्ययन, खरीद और बिक्री से हुई है और इसका संबंध कानून, चुंगी और सरकार से है। नैतिक दर्शन की व्यु‍त्पत्ति उदा. के लिए ग्लासगो विश्वविद्यालय में नैतिक दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर एडम स्मिथ थे, स्वास्थ्य की राजनीतिक अर्थव्यवस्था का अध्ययन है, जिसमें यह देखा जाता है कि राज्यों की अर्थव्यवस्था पर - राजनीति, इसलिए राजनीतिक अर्थव्यवस्था - का कुल जनसंख्या के स्वास्थ्य परिणामों पर कैसा प्रभाव पड़ता है।

                                     

3. पैमाना

वैश्विक स्वास्थ्य का विश्लेषण इस बात पर निर्भर करता है कि स्वास्थ्य की जिम्मेवारी को कैसे मापा जाए. डेली DALY, क्वैली QALY और मृत्यु दर जैसे कई उपाय मौजूद हैं। पैमाने का चयन विवादास्पद हो सकता है, जिसमें व्यावहारिक और नैतिक विचार भी शामिल हैं।

                                     

3.1. पैमाना जीवन प्रत्याशा

एक निर्दिष्ट आबादी की औसत जीवन प्रत्याशा जीवित रहने की औसत अवधि का एक सांख्यिकीय माप है। ज्यादातर समय इसका उल्लेख एक दी गई मानव आबादी के लिए मृत्यु से पहले संभावित उम्र के लिए किया जाता है। जीवन के संभावित शेष समय को भी जीवन प्रत्याशा कहा जा सकता है और इसकी गणना किसी भी समूह के लिये किसी भी उम्र से की जा सकती है।

                                     

3.2. पैमाना विकलांगता द्वारा समायोजित जीवन वर्ष डेली

विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष डेली स्वास्थ्य का एक सारांश है, जो आबादी की सेहत में बीमारी के प्रभाव, अपंगता और मृत्यु दर को भी जोड़ता है। डेली विकलांगता के साथ जीने और समय से पहले मृत्यु दर के कारण दोनों को जोड़ कर मापा जाता है। स्वस्थ जीवन बीत जाने को एक डेली के रूप में माना जा सकता है और बीमारी के बोझ को स्वास्थ्य की वर्तमान स्थिति और एक आदर्श स्थिति के बीच के अंतर से मापा जाता है, जिसमें हर कोई बढ़ती उम्र में भी बीमारी और अपंगता से आजाद जीवन जीता है। उदाहरण के लिए, लोगों में किसी बीमारी के कारण समय से पहले मृत्यु वाईएलएल YLL) से होनेवाली जीवन हानि और किसी घटना विशेष के कारण विकलांगता से जीवन हानि वाईएलडी YLD) के लिए सेहत की स्थिति डेली है। एक डेली परिपूर्ण स्वास्थ्य के एक साथ के नुकसान का प्रतिनिधित्व करता है।

                                     

3.3. पैमाना गुणवत्ता समायोजित जीवन वर्ष क्वाली

गुणवत्ता समायोजित जीवन वर्ष या संक्षेप में क्वाली बीमारी बोझ को मापने का एक जरिया है, जिसमें जीवन जीने की गुणवत्ता और मात्रा दोनों शामिल हैं, जो कि चिकित्सा सलाह के लाभ की मात्रा को निर्धारित करने जैसा है। क्वाली मॉडल में उपयोगिता स्वतंत्र, जोखिम तटस्थता और निरंतर आनुपातिक दुविधात्मक व्यवहार की आवश्यकता है। संभावित गुणवत्ता के साथ जीवन को जीने की उम्मीद क्वाली के लिए एक संख्या में जीवन की गुणवत्ता के साथ उम्मीद की उम्मीद अस्तित्व गठबंधन करने का प्रयास: अगर स्वस्थ जीवन प्रत्याशा के एक अतिरिक्त वर्ष एक वर्ष के एक मूल्य के लायक है, तो कम स्वस्थ जीवन प्रत्याशा एक साल एक वर्ष से भी कम की होती है। क्वाली गणना मूल्य के माप पर आधारित हैं जिसमें किसी व्यक्ति के जीवित रहने के संभावित वर्षों का अनुमान लगाया जाता है। कई तरीकों से इसे मापा जा सकता है: तकनीकी द्वारा सर्वेक्षण या विश्लेषण के साथ जिसमें स्वास्थ्य की वैकल्पिक स्थिति की प्राथमिकता के बारे में अनुकरण का दांव लगाया जाता है, जो कि वै‍कल्पिक स्वास्थ्य की स्थिति की सम्मति का अनुमान लगाता है; या किसी उपकरण के जरिए जो कि किसी लेन-देन पर आधारित होता है या संभावित जीवन काल जो कि उच्च गुणवत्ता वाले जीवन जीने के कम समय के लिए चिकित्सा सुझाव हो सकता है। उपयोगितावादी विश्लेषण के लिए क्वालीज उपयोगी होते हैं, लेकिन निष्पक्षता के दृष्टिकोण को इसमें शामिल नहीं किया जाता है।



                                     

3.4. पैमाना शिशु और बाल मृत्यु

जीवन प्रत्याशा और डेली/क्वाली औसत रोग बोझ का अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, जनसंख्या के सबसे गरीब वर्गों में शिशु मृत्यु दर और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर अधिक महत्वपूर्ण ढंग से स्वास्थ्य मामलों का प्रतिनिधित्व करता हैं। इसलिए, सेहत से संबंधित निष्पक्षता पर जब ध्यान दिया जाता है तो शास्त्रीय उपायों में बदलाव विशेष रूप से उपयोगी होते हैं। ये उपाय बच्चों के अधिकार के मामलों में भी बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। 2001 में लगभग 56 लाख लोगों की मृत्यु हुई. इनमें से 10.6 मिलियन पांच साल के कम उम्र के बच्चे थे और इनमें से 99% बच्चे कम आय या मध्य स्तरीआय वाले देशों में रहते थे। इसका अर्थ यह हुआ कि हर दिन मोटे तौपर 30.000 बच्चे मर रहे है।

                                     

3.5. पैमाना रुग्णता

रुग्णता उपाय में विस्तार दर, व्यापकता और संचयी घटना शामिल हैं। विस्तादर एक निर्दिष्ट समयावधि के भीतर किसी नई स्थिति के विकसित होने का खतरा है। हालांकि किसी अवधि के दौरान कभी-कभी नए मामलों की संख्या शिथिल के रूप में इसे ढीले-ढाले ढंग से व्यक्त किया गया है, इसे एक अनुपात या विभाजक के साथ एक दर के रूप में करने कहीं बेहतर होगा.

                                     

4.1. स्वास्थ्य स्थितियां शल्य रोग का कष्ट

जब कम आय वाले देशों में एचआईवी HIV से बहुत लोगों की जान चली जाती है, शल्य स्थिति जिसमें सड़क दुर्घटना से होनेवाला मानसिक आघात या अन्य जख्म, असाध्यता, कोमल ऊतक संक्रमण, जन्मजात विसंगतियां और बच्चे के जन्म की जटिलताएं शामिल हैं, जो बीमारी के बोझ में विश्ष्टि रूप से अपना योगदान करती हैं।

                                     

4.2. स्वास्थ्य स्थितियां पोषण और सूक्ष्म पोषक की कमी

दुनिया में दो अरब से अधिक दो लोग सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के खतरे के साथ जी रहे हैं। विकासशील देशों में पांच वर्ष के कम आयुवाले 53% बच्चों की मौत का कारण कुपोषण जनित संक्रामक बीमारी है। आवृत्ति में वृद्धि, तीव्रता और बचपन में लंबे समय तक बीमार रहने जिसमें खसरा निमोनिया और दस्त शामिल हैं से कुपोषण प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बौद्धिक क्षमता, वृद्धि, विकास और वयस्क उत्पादकता को बाधित करती है।

हालांकि, संक्रमण भी एक महत्वपूर्ण कारण है और कुपोषण में उसका योगदान होता है। उदाहरण के लिए, गैस्ट्रो-इंटेस्टिनल संक्रमण का कारण दस्त होता है और एचआईवी, तपेदिक, आंत्र परजीवी तथा दीर्घकालिक संक्रमण और रक्ताल्पता में वृद्धि क्षय कर देता है।

पांच वर्ष से कम उम्र के पचास लाख बच्चे विटामिन ए की कमी से प्रभावित हैं। ऐसी कमी रतौंधी का कारण होती है। गंभीर कमी ज़ेरोफ्थेल्मिया और कॉर्निया में घाव से संबंध रखती है, यह एक ऐसी स्थिति है, जिससे पूरी तरह अंधत्व हो सकता है। विटामिन ए प्रतिरक्षा प्रणाली और उपकला सतहों को बनाए रखने के काम से भी यह जुड़ा हुआ है। इस कारण से, विटामिन ए की कमी संक्रमण और बीमारी की अतिसंवेदनशीलता में इजाफा करती है। दरअसल, उन क्षेत्रों में जहां विटामिन ए की कमी उल्लेखनीय है वहां विटामिन ए का अनुपूरण बच्चों की मृत्यु दर को 23% कम करती है।

दुनिया की लगभग एक-तिहाई महिलाएं और बच्चे लौह तत्व की कमी से प्रभावित हैं। लौह तत्व की कमी से रक्ताल्पता के साथ अन्य पोषक तत्वों की कमी और संक्रमण होता है और यह दुनिया भर में प्रसव मृत्यु, जन्म के पूर्व मृत्यु और मानसिक मंदता का भी कारण होता है। रक्ताल्पता वाले बच्चों को लौह तत्व अनुपूरक के साथ सूक्ष्म पोषक दिए जाने पर स्वास्थ्य और हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार होता है। बच्चों में, लौह तत्व की कमी से सीखने की क्षमता तथा भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास प्रभावित होता है।

आयोडीन की कमी प्रतिकार योग्य मानसिक मंदता का प्रमुख कारण है। प्रति वर्ष पांच करोड़ से भी ज्यादा शिशुओं का जन्म आयोडीन की कमी के खतरे के साथ होता है। इस विशेष उपाय के तहत गर्भवती महिलाएं, जिनमें आयोडीन की कमी है, को भी आबादी लक्ष्य में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि आयोडीन कमीवाली गर्भवती महिलाओं में गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है और उनमें शिशु के विकास की क्षमता में भी कम हो जाती है। व्यापक स्तर पर नमक के आयोडनीकरण का वैश्विक प्रयाइस समस्या को खत्म करने में मदद कर रहा हैं।

लेजरीनी और फिशर व अन्य के अनुसार, जस्ते की कमी दस्त, न्यूमोनिया और मलेरिया में मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। माना जाता है कि दुनिया के लगभग 30% बच्चों की मृत्यु जस्ते की कमी से होती है। अनुपूरक दस्त की बारंबारता की अवधि को कम करता है।

सूक्ष्म पोषक अनुपूरण कुपोषण को रोकने के उपाय में शामिल हैं, साथ में बुनियादी खाद्य पदार्थों के दृढ़ीकरण, आहार विविधीकरण, स्वच्छता आदि जैसे उपाय संक्रमण के विस्तार को कम करते हैं और स्तनपान को बढ़ावा देते हैं। आहार विविधीकरण का लक्ष्य नियमित भोजन में महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक में वृद्धि करना है। यह काम शिक्षा और एक विविध आहार के संवर्धन तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूऔर स्थानीय रूप से निर्मित खाद्य के उपयोग में सुधार के द्वारा के द्वारा किया जाता है।



                                     

4.3. स्वास्थ्य स्थितियां पुरानी बीमारी

पुरानी गैर-संक्रामक बीमारी का सापेक्ष महत्व बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, टाइप 2 मधुमेह की दर, जो मोटापे से जुड़ा हुआ है, परंपरागत रूप से भूख स्तर के लिए जाने जाने वाले देशों में यह बढ़ रहा है। कम आय वाले देशों में, मधुमेह वाले व्यक्तियों की संख्या 84 मिलियन से बढ़ कर 2030 तक 228 मिलियन हो जाने की संभावना है। मोटापा निवारणीय है, लेकिन यह बहुत सारी दीर्घकालिक बीमारियों, जैसे हृदय की बीमारी, मधुमेह, स्ट्रोक, कैंसर और सांस की बीमारियों के साथ जुड़ा हुआ है। डेली के मापक से पता चला है कि विश्व की लगभग 16 फीसदी बीमारियों के लिए मोटापा जिम्मेवार है।

                                     

5. स्वास्थ्य उपाय

स्तनपान के लिए प्रोत्साहित किया जाना, जस्ता अनुपूरण, विटामिन ए का संवर्धन और अनुपूरण, नमक का आयोडनीकरण, हाथ धोने और स्वच्छता के अन्य उपाय, टीकाकरण, गंभीर तीव्र कुपोषण का इलाज आदि बच्चों के स्वास्थ्य और उनके जीवित रहने के लिए उपायों में शामिल हैं। मलेरिया महामारी वाले क्षेत्रों में कीटनाशक वाले मच्छरदानी और कुछ-कुछ अंतराल के बाद औषधीय उपचार मृत्यु दर को कम करता है।. अध्ययन के आधापर विश्व स्वास्थ्य परिषद ने 32 उपचाऔर बचाव के उपायों की एक सूची दी है, जिससे संभवत: प्रति वर्ष एक मिलियन लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है।

                                     

6. आगे पढ़ें

  • स्कोलनिक आर 2008 आवश्यक जन स्वास्थ्य: ग्लोबल स्वास्थ्य के अनिवार्य. जोन्स और बार्टलेट.
  • जेकबसेन केएच 2008 वैश्विक स्वास्थ्य का परिचय. जोन्स और बार्टलेट
  • लेविन आर एड 2007 आवश्यक लोक स्वास्थ्य: वैश्विक स्वास्थ्य में प्रकरण अध्ययन. जोन्स और बार्टलेट.
  • लौन्चिंग ग्लिबल हेल्थ स्टीवन पामर. एन आर्बर, मिशिगन विश्वविद्यालय प्रेस, 2010.
  • हल विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य व सामाजिक देखभाल संकाय द्वारा इन पुस्तकों को अपनाया गया है। बीएससी वैश्विक स्वास्थ्य और रोग अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विकास और मानवीय राहत के लिए और वैश्विक स्वास्थ्य प्रथम मॉड्यूल और वैश्विक स्वास्थ्य द्वितीय मॉड्यूल के नवीनतम अंकों को पढ़ना आवश्यक है।