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विदेशी मुद्रा बाज़ार - मुद्रा . विदेशी मुद्रा बाजार, विश्व की मुद्राओं के क्रय-विक्रय का बाजार है जो विकेन्द्रित, चौबीसों घंटे चलने वाला, काउन्टर पर किया जान ..




                                               

बाजार (अर्थशास्त्र)

बाजार तंत्रों, संस्थानों, प्रक्रियाओं, सामाजिक संबंधों और बुनियादी ढांचे की कई किस्मों में से एक है जिसके तहत विभिन्न पक्ष विनिमय में संलग्न होते हैं।

                                               

शंघाई स्टॉक एक्सचेंज

शंघाई स्टॉक एक्सचेंज या एसएसई चीन के शंघाई शहर में स्थित एक शेयर बाजार है। यह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना में स्वतंत्र रूप से संचालित होने वाले दो स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है, दूसरा शेन्जेन स्टॉक एक्सचेंज है। नवंबर 2018 तक $ 4.0 ट्रिलियन पर बाजार पूंजीकरण के आधापर शंघाई स्टॉक एक्सचेंज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार है। हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज के विपरीत, शंघाई स्टॉक एक्सचेंज अभी भी पूरी तरह से विदेशी निवेशकों के लिए खुला नहीं है और अक्सर केंद्र सरकार के फैसलों से प्रभावित होता है, जैसे कि- चीनी मुख्य भूमि के अधिकारियों द्वारा पूंजी खाता नियंत्रण को लागू करने से।

विदेशी मुद्रा बाज़ार
                                     

विदेशी मुद्रा बाज़ार

विदेशी मुद्रा बाजार, विश्व की मुद्राओं के क्रय-विक्रय का बाजार है जो विकेन्द्रित, चौबीसों घंटे चलने वाला, काउन्टर पर किया जाने वाले कारोबार है। अन्य वित्तीय बाजारों की अपेक्षा यह बहुत नया है और पिछली शताब्दी में सत्तर के दशक में आरम्भ हुआ। फिर भी सम्पूर्ण कारोबार की दृष्टि से यह सबसे बड़ा बाजार है। विदेशी मुद्राओं में प्रतिदिन लगभग ४ ट्रिलियन अमेरिकी डालर के तुल्य कामकाज होता है। अन्य बाजारों की तुलना में यह सबसे अधिक स्थायित्व वाला बाजार है।

                                     

1. विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार का इतिहास

1970 से पहले तक विदेशी मुद्रा विनिमय दरें स्थायी रूप से तय रहा करती थीं। 70 के दशक से ही लगातार परिवर्तन होने वाली चल FLOATING विनिमय दरों का प्रचलन शुरू हुआ।

                                     

2. अचल Fixed विदेशी मुद्रा दरें

अचल विदेशी मुद्रा दरों का चलन,विश्व युद्ध के पहले Pre World war समय में जारी आर्थिक भेदभाव के मुद्दों की वजह से हुआ, जहां कुछ देशों के पास दूसरे देशों की तुलना में अधिक व्यापारिक अधिकार होते थे। स्वतंत्र व्यापार को बढ़ावा देने के लिये, अलग - अलग मुद्राओं के बीच स्वतंत्र परिवर्तन का होना ज़रूरी समझा गया और इसीलिए अचल विदेशी मुद्रा दर प्रणाली अस्तित्व में आई। इससे संदर्भित नियम, 44 सहयोगी राष्ट्रों के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में जुलाई 1944 के पहले तीन हफ्तों के दौरान तय किगए थे। इस सम्मेलन का आयोजन, ब्रैटनवुड्स न्यू हैम्पशायर में किया गया था और इसलिए इस प्रणाली या नियमों को ब्रैटनवुड्स प्रणाली कहा जाता है।

                                     

3. चल FLOATING विदेशी मुद्रा दरें

चल विदेशी मुद्रा दर प्रणाली में किसी भी देश की मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन, विदेशी मुद्रा बाजार में जारी व्यापार, मांग व पूर्ति Demand & Supply या अन्य संदर्भित कारणों की वजह से होने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से होता रहता है।