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जैवप्रौद्योगिकी - तकनीकी और अभियान्त्रिकी. जैवप्रौद्योगिकी या जैवतकनीकी तकनीकी का वो विषय है जो अभियान्त्रिकी और तकनीकी के डाटा और तरीकों को जीवों और जीवन तन ..




जैवप्रौद्योगिकी
                                     

जैवप्रौद्योगिकी

जैवप्रौद्योगिकी या जैवतकनीकी तकनीकी का वो विषय है जो अभियान्त्रिकी और तकनीकी के डाटा और तरीकों को जीवों और जीवन तन्त्रों से सम्बन्धित अध्ययन और समस्या के समाधान के लिये उपयोग करता है। इसे रासायनिक अभियान्त्रिकी, रसायन शास्त्र या जीव विज्ञान में संबंधित माना जाता है। जैव प्रौद्योगिकी लागू जीव विज्ञान के एक क्षेत्र है कि अभियान्त्रिकी, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और अन्य जैव-उत्पाद आवश्यकता क्षेत्रों में रहने वाले जीवों और बायोप्रोसेस का इस्तेमाल शामिल है।

                                     

1.1. तकनीकी डीएनए

विभिन्न जीवों से डीएनए निकालना, डीएनए प्रतिकृति एवं डीएनए संपादन करने की कुशलता पर ही जैवप्रद्यौगिकी की सफलता टिकी हुई है।

डीएनए निकालने के रेस्ट्रिक्शन एंज़ाइम खास तौपर रेस्ट्रिक्शन इंडोन्यूकलिएस वो एंज़ाइम जो डीएनए को बीच में से काटने की कुशलता रखते हो। का खासा महत्व है। बिना किसी प्रवाभी रेस्ट्रिक्शन एंजाइम के डीएनए को मनपंसद जगह से काटना मुश्किल होगा।

बहुलतया प्रयोग होने वाला एक क्लोनिंग वेक्टर pBR322 जिसे कि सन् 1974 में बोलिवर एवं रोड्रिग्स ने खोज़ा था। पहली बार व्यापक रूप से इस्तेमाल कोलाई क्लोनिंग वैक्टर में से एक था।|पाठ=|बाएँ|फ्रेम
                                     

1.2. तकनीकी वेक्टर

  • वेक्टर का आकार ना ज्यादा छोटा या बड़ा हो।
  • उसमें ऐसा डीएनए जरूर होना चाहिए जिसकी ज़गह पर मनपंसद डीएनए लगाया जा सके और ऐसे डीएनए को हटाए जाने पर वेक्टर की कार्यशैली पर कोई असर ना पड़े।
  • वह अकेंद्रिक प्रोकार्योटिक एवं सुकेन्द्रिक यूकैरियोटिक कोशिका में सफलतापूर्वक कार्य कर सके।
  • बेक्टीरिया एवं कवक
  • उसमें एक या एक से अधिक ऐसे डीएनए के क्रम हो जो आसानी से डीएनए के काटने एवं चिपकाने के काम आ सके।
  • किसी भी आदर्श क्लोनिंग वेक्टर को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी चाहिए।
  • उसकी कॉपी संख्या अधिक हो।
                                     

2.1. संबंधित शाखा स्वास्थ्य

जैवप्रोद्योगिकी के प्रयोग से स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। कैंसर, अनुवांशिक रोग एवं लाईलाज रोगो का ईलाज़ संभव हो पाया है। जीन चिकित्सा जीन थेरेपी की मदद से आज खराब़ हो चुके डीएनए को सही डीएनए से बदल दिया जाता है।

                                     

2.2. संबंधित शाखा कृषि

कीटनाशकों, खरपतनाशक और फफूँदनाशकों के साथ-साथ रसायन उर्वरको का कृषि में अंधाधुंध प्रयोगो सें आज जमीन की उपजाऊ ताकत न बराबर हो गई है वही रसायनों के हानिकारक प्रभाव भी साफ देखे जा सकते है। फसलों में कीटनाशक जीन डालने से न केवल कीटनाशकों के प्रयोगों से बचा जा सकता है बल्कि इनके हानिकारक प्रभाव से प्रकृति को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।

                                     

2.3. संबंधित शाखा जैवसूचनाप्रौद्योगिकी

जैवसूचनाप्रौद्योगिकी और जैवप्रौद्योगिकी एक दूसरे पर पूर्णतया निर्भर है। कंप्यूटर और सूचना तकनीकी के उपयोग से आज़ विश्व के कई देशों ने जैव डाटाबेस तैयार किए है जिनमें से सबसे प्रमुख

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन एनसीबीआई National Center for Biotechnology Information जोकि एक संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा तैयार डेटाबेस है। इसी तरह यूरपीय देशों द्वारा तैयार किया गया यूरोपीय आणविक जीवविज्ञान प्रयोगशाला European Molecular Biology Laboratory डेटाबेस है।

इसी तर्ज पर स्विस परोट Swiss-Prot एक प्रोटीन आधारित डेटाबेस है।

                                     

3. चर्चित उत्पाद

बीटी फसले

डॉली भेङ डॉली भेङ 5 जुलाई 1996 – 14 फरवरी 2003 पहली स्तनपायी जीव थी जोकि क्लॉनिंग तकनीक से विकसित की गई थी। इसका पूरी जीवन रॉस्लिन संस्थान, स्कॉटलैंड मे बीता। इसे कीथ कैंपबेल, इयान विल्मुट और एडिनबर्ग के पास जैव प्रौद्योगिकी कंपनी PPL थेराप्यूटिक्स के सहयोगियों द्वारा क्लोन किया गया था |पाठ=|अंगूठाकार|220x220पिक्सेल