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घुड़सवारी - खेल. घुड़सवारी एक प्रकार की कला है, जिसमें व्यक्ति घोड़े पर बैठ कर सवारी करता है। इसमें उसे दिशा निर्देश देना और बिना गिरे उसकी सवारी करना ही इसम ..




                                               

ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में घुड़सवारी

1900 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में घुड़सवारी ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की शुरुआत की, पेरिस, फ्रांस में। यह 1912 तक गायब हो गया था, लेकिन बाद में हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में दिखाई दिया। वर्तमान ओलंपिक घुड़सवारी विषयों में ड्रेसेज, इवेंटिंग और जंपिंग है। प्रत्येक अनुशासन में, व्यक्तिगत और टीम दोनों पदक से सम्मानित किया जाता है। महिलाओं और पुरुष समान शर्तों पर एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। घुड़सवारी विषयों और आधुनिक पेंटाथलॉन के घुड़सवार घटक भी एकमात्र ओलंपिक घटनाएं हैं जिनमें पशुओं को शामिल किया गया है। घोड़े को राइडर के रूप में ज्यादा एथलीट माना जाता है। घुड़सवार खेल के लिए अंतर्राष्ट्रीय शासी निक ...

                                               

बरेली का इतिहास

बरेली भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक नगर है। यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग २४ के बीचों-बीच स्थित है। यह उत्तर प्रदेश में आठवां सबसे बड़ा महानगर और भारत का ५०वां सबसे बड़ा शहर है।

                                               

कुणाल मून

कुणाल चंद्रमा एक भारतीय समकालीन कलाकार हैं जो अपनी कला से भारतीय शास्त्रीय नृत्य प्रदर्शन करने के लिए जाना जाता है, की वजह से उनके अद्वितीय शैली का मुख्य विषय पर धुंधला रंग का उपयोग करने के लिए है.

                                               

टायर रीसाइक्लिंग व्यापार

टायर रीसाइक्लिंग व्यापार का पूरा विवरण बता सकते हैं, क्या यह है कि यह कैसे शुरू करने के लिए कैसे पूंजी लग जाएगा, आदि? टायर रिसाइक्लिंग व्यवसाय - आप वाहनों के टायर यह संग्रह व्यापार शुरू कर सकते हैं है. काऔर ट्रक के टायर रबर, स्टील, सिंथेटिक और प्राकृतिक फाइबर से मिलकर बने होते हैं और यह सभी पदार्थ का पुनर्नवीनीकरण किया जा कर सकते हैं. पर्यावरण के लाभ के लिए इसके अलावा, टायर पुनर्चक्रण किया जा करने के लिए एक लाभदायक व्यवसाय है. उपयोग किगए लाखों के टायर हर रोज कबाड़ में तब्दील कर रहे हैं कि टायर रीसाइक्लिंग की आपूर्ति के एक निरंतर स्रोत का गठन कर रहे हैं| रीसाइक्लिंग टायर के तीन बाजारों में ...

                                               

दुलावत वंश

सूरजवंश रघुकूल तिलक अवधनाथ रघुबीर ताहि कुंवर लव खाँप मे अव्वल राण हम्मीर लाखों हम्मीर रो पोतरो ता कुँवर दुल्हा राणी लखमादे जनिया सहउदर चूण्डा संवत् चैदह गुनचालीस नृप लाखा रजवाड साख फटी सिसोदिया दुलावत मेवाड़ अयोध्या के सूर्यवंशी राजा जो रघुकुल के तिलक भगवान राम है उनके पुत्र लव के वंश में राणा हम्मीर बहुत अव्वल हुए तथा राणा लाखाजी उन्हीं राणा हम्मीर के पौत्र है तथा राणा लाखा के पुत्र कुँवर दुल्हा जी हुए जिन्हें रानी लखमादे ने जन्म प्रदान किया। उनके सहउदरसगे भ्राता चूण्डा जी है। विक्रम सवंत् 1439 में राणा लाखा के राज्य के समय सिसोदया वंश में दुलावत शाखा फटी। मेवाड़ के महाराणा लाखा 1382-1421 ...

                                               

किन्नर साम्राज्य

महाभारत-काल में किन्नर साम्राज्य किन्नर नामक जनजाति के क्षेत्र को संदर्भित करता है, जो विदेशी जनजातियों में से एक थे। वे हिमालय पर्वत के निवासी थे। गंगा के मैदान के लोग उन्हें आश्चर्य से देखते थे और उन्हें अलौकिक शक्तियों का स्वामी मानते थे। किन्नरों को रहस्यमय तरीके से घोड़ों के साथ जोड़ा जाता था। पुराणों में उनका उल्लेख घोड़े की गर्दन वाले प्राणियों के रूप में है। महाकाव्य महाभारत में किन्नरों का उल्लेख घोड़े के सिर वाले प्राणियों के रूप में न होकर अर्ध-मानव और अर्ध-अश्व रूप में है ग्रीक पौराणिक कथाओं के जीव सेंटौर के समान। महाभारत और पुराणों में किन्नरों का निवास स्थान हिमालय के उत्तर म ...

                                               

नाथाजी और यामाजी

नाथाजी पटेल और यामाजी पटले भारत मे ब्रिटिश राज के दौरान चन्दप गांव जिसे चांडप भी बोला/लिखा जाता है के कोली पटेल थे। यह गांव उनके अधीन था। नाथाजी और यामाजी ने १८५७ के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन मे अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे। नाथाजी और यामाजी हर वर्ष बड़ौदा रियासत को हर वर्ष कुछ कर अदा करते थे यानीकी चन्दप जागीर के रुप में बड़ौदा रियासत के अधीन थी।

                                               

जीवाभाई ठाकोर

जीवाभाई ठाकोर गुजरात में महीसागर जिले के लुणावाडा मे खानपुर के कोली ठाकोर थे। जिसने १८५७ की क्रांती के समय अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे एवं महीसागर क्षेत्र में वो ही पहले स्वतंत्रता सेनानी जागीरदार थे। 1857 की क्रांती के दौरान ब्रिटिश सरकार को ख़बर मिली के खानपुर के कोली तालुकदार जीवाभाई ठाकोर विद्रोह की योजना बना रहे हैं जिसके चलते ब्रिटिश सरकार ने लुणावाडा मे ब्रिटिश सेना तैनात कर दी लेकिन दिसंबर 1857 को ठाकोर के नेतृत्व में कोलीयों ने विद्रोह कर दिया और ब्रिटिश कैम्पों पर हमला कर दिया और पहाड़ी एवं नदी के पास चले गए। जिसके पश्चात ब्रिटिश सरकार ने कैप्टन बक्ले को कोली विद्रोह को दबा ...

                                               

राजा मांडलिक

राजा मांडलिक इडर के शासक थे। राजा मांडलिक ने मेवाड़ अथवा गुहिल वंश के संस्थापक राजा गुहादित्य को अपने संरक्षण में रखा। जब शिलादित्य के वल्लभी पर मलेच्छो ने हमला कर दिया तब शिलादित्य वीरगति को प्राप्त हुए एवं उनकी रानी ने एक गुफा के भीतर गोहिल को जन्म दिया। कमलावती नामक ब्राह्मणी ने उस बालक को राजा मांडलिक भील को सौंप दिया। गुहादित्य, राजा मांडलिक के राजमहल में रहता और भील बालकों के साथ घुड़सवारी करता इस तरह गोहिल राजा मांडलिक के संरक्षण में पला बढ़ा। कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार गुहादित्य ने भील शासक राजा मांडलिक की हत्या कर दी और 566 ईसा पूर्व के दौरान गुहिल वंश की नींव रखी।

घुड़सवारी
                                     

घुड़सवारी

घुड़सवारी एक प्रकार की कला है, जिसमें व्यक्ति घोड़े पर बैठ कर सवारी करता है। इसमें उसे दिशा निर्देश देना और बिना गिरे उसकी सवारी करना ही इसमें एक कला का रूप लेता है। पहले जब गाड़ी आदि वाहन नहीं होते थे। तब मनुष्य इसी पर बैठ कर दूर दूर तक सवारी करता था। यह तेजी से भागता है, इस कारण किसी व्यक्ति को किसी स्थान पर जल्दी पहुँचना होता था तो वह इसी की सवारी करता था।

                                     

1. घोड़ा गाड़ी

जब मनुष्य चक्कों आदि का विकास करने में सक्षम हो गया, तब वह घोड़ों, बैलों आदि को गाड़ी से जोड़कर अपना एक गाड़ी बना दिया करता था। इसे घोड़ा गाड़ी कहते हैं।