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समाजशास्त्र - वेशभूषा संहिता, पश्चिमी संस्कृति, अनपढ़, अभिजात सिद्धान्त, अल्पसंख्यक, अस्पृश्यता ..




                                               

वेशभूषा संहिता

मनुष्य की भौतिक उपस्थिति के पहलू के रूप में वेशभूषा संहिता वस्त्र धारण करने का लिखित नियम है. मानव की भौतिक उपस्थिति के अन्य पहलुओं की तरह वस्त्रों का सामाजिक महत्व है। वेशभूषा संहिता में निहित नियम या संकेत होते हैं जो व्यक्ति के कपड़ों और उन्हें पहनने के तरीके से दिए जा रहे संदेश को इंगित करते हैं। यह संदेश व्यक्ति के लिंग, आय, व्यवसाय और सामाजिक वर्ग, राजनैतिक और जातीय संबद्धता, आराम के प्रति उसके रवैये और दृष्टिकोण, फ़ैशन, परंपराओं, लिंग अभिव्यक्ति, वैवाहिक स्थिति, यौन उपलब्धता और यौन अभिविन्यास इत्यादि को संप्रेषित कर सकता है। कपड़े निजी या सांस्कृतिक पहचान का बयान या दावा, सामाजिक सम ...

                                               

पश्चिमी संस्कृति

पश्चिमी संस्कृति, यूरोपीय मूल की संस्कृतियों को सन्दर्भित करती है। यूनानियों के साथ शुरू होने वाली पश्चिमी संस्कृति का विस्ताऔर सुदृढ़ीकरण रोमनों द्वारा हुआ, पंद्रहवी सदी के पुनर्जागरण एवं सुधार के माध्यम से इसका सुधाऔर इसका आधुनिकीकरण हुआ और सोलहवीं सदी से लेकर बीसवीं सदी तक जीवन और शिक्षा के यूरोपीय तरीकों का प्रसार करने वाले उत्तरोत्तर यूरोपीय साम्राज्यों द्वारा इसका वैश्वीकरण हुआ। दर्शन, मध्ययुगीन मतवाद एवं रहस्यवाद, ईसाई एवं धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद की एक जटिल श्रृंखला के साथ यूरोपीय संस्कृति का विकास हुआ। ज्ञानोदय, प्रकृतिवाद, स्वच्छंदतावाद रोमेन्टिसिज्म, विज्ञान, लोकतंत्और समाजवाद के ...

                                               

अनपढ़

अधिक विकल्पों के लिए यहां जांय - अनपढ़ पढ़ने में अक्षम व्यक्तियों को अनपढ़ कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ निरक्षर से भिन्न होता है हंलांकि व्यावहारिक तौपर वे समान होते हैं। निरक्षर वो है जो लिखने पढ़ने में किसी में भी अक्षम हो यानि अक्षरों से अनभिज्ञ हो। पर अनपढ़ वो है जो पढ़ ना सके।

                                               

अभिजात सिद्धान्त

‘शक्ति’ एवं ‘सत्ता’ की अवधारणा समाजशास्त्र, राजनीतिक समाजशास्त्और राजनीति शास्त्र की मूल अवधारणा है। मानव के सार्वजनिक और राजनीतिक व्यवहार को समझने में इस अवधारणा का अतुलनीय महत्व है। यद्यपि इन दोनों का प्रयोग पर्यायवाची की तरह किया जाता है पर राजनीतिक समाजशास्त्र में इनका विशिष्ट अर्थ है। प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में शक्ति केवल कुछ लोगों अथवा अल्पसंख्यक समूह में ही केन्द्रित होती है। यह किस प्रकार होता है? राजनीतिक समाजशास्त्र में इन प्रश्न का उत्तर ढूँढने के प्रयासों के परिणाम-स्वरूप ही अभिजन सम्बन्धी सिद्धान्तों का विकास हुआ है। अभिजात सिद्धान्त इस तथ्य पर आधारित हैं कि प्रत्येक समाज ...

                                               

अल्पसंख्यक

अल्पसंख्यक संस्कृत के दो शब्दों अल्प यानि थोडा एवं संख्या इस सामासिक शब्द का अर्थ होता है दूसरे समूहो की तुलना में कम संख्या में होना। भाषाई अल्पसंख्यक धार्मिक अल्पसंख्यक और अल्पसंख्यक को मराठी में "अल्पसंख्याक" बोलते है।

                                               

अस्पृश्यता

अस्पृश्यता का शाब्दिक अर्थ है - न छूना । इसे सामान्य भाषा में छूआ-छूत की समस्या भी कहते हैं। अस्पृश्यता का अर्थ है किसी वय्क्ति या समूह के सभी लोगों के शरीर को सीधे छूने से बचना या रोकना। ये मान्यता है कि अस्पृश्य या अछूत लोगों से छूने, यहाँ तक कि उनकी परछाई भी पड़ने से उच्च जाति के लोग अशुद्ध हो जाते है और अपनी शुद्धता वापस पाने के लिये उन्हें पवित्र गंगा-जल में स्नान करना पड़ता है। भारत में अस्पृश्यता की प्रथा को अनुच्छेद १७ के अंतर्गत एक दंडनीय अपराध घोषित कर किया गया है। अनुच्छेद १७ निम्नलिखित है- अस्पृश्यता का अन्त किया जाता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध किया जाता है। अस्पृश ...