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संस्कृति - अंजन, अजा एकादशी, अनंत चतुर्दशी, अन्त: पुर, अष्टधातु, अष्टमंगल, मानव शव का प्रशमन ..



                                               

अंजन

अंजन नेत्रों की रोगों से रक्षा अथवा उन्हें सुंदर श्यामल करने के लिए चूर्ण द्रव्य, नारियों के सोलह सिंगारों में से एक। प्रोषितपतिका विरहणियों के लिए इसका उपयोग वर्जित है। मेघदूत में कालिदास ने विरहिणी यक्षी और अन्य प्रोषितपतिकाओं को अंजन से शून्य नेत्रवाली कहा है। अंजन को शलाका या सलाई से लगाते हैं। इसका उपयोग आज भी प्राचीन काल की ही भाँति भारत की नारियों में प्रचलित है। पंजाब, पाकिस्तान के कबीलाई इलाकों, अफ़गानिस्तान तथा बिलोचिस्तान में मर्द भी अंजन का प्रयोग करते हैं। प्राचीन वेदिका स्तंभों पर बनी नारी मूर्तियाँ अनेक बार शलाका से नेत्र में अंजन लगाते हुए उभारी गई हैं।

                                               

अजा एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। भाद्रपद कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम अजा है। यह सब प्रकार के समस्त पापों का नाश करने वाली है। जो मनुष्य इस दिन भगवान ऋषिकेश की पूजा करना चाहिए।

                                               

अनंत चतुर्दशी

एक दिन कौण्डिन्य मुनि की दृष्टि अपनी पत्नी के बाएं हाथ में बंधे अनन्तसूत्रपर पडी, जिसे देखकर वह भ्रमित हो गए और उन्होंने पूछा-क्या तुमने मुझे वश में करने के लिए यह सूत्र बांधा है? शीला ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया-जी नहीं, यह अनंत भगवान का पवित्र सूत्र है। परंतु ऐश्वर्य के मद में अंधे हो चुके कौण्डिन्यने अपनी पत्नी की सही बात को भी गलत समझा और अनन्तसूत्रको जादू-मंतर वाला वशीकरण करने का डोरा समझकर तोड दिया तथा उसे आग में डालकर जला दिया। इस जघन्य कर्म का परिणाम भी शीघ्र ही सामने आ गया। उनकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई। दीन-हीन स्थिति में जीवन-यापन करने में विवश हो जाने पर कौण्डिन्यऋषि ने अपने अप ...

                                               

अन्त: पुर

प्राचीन काल में हिंदू राजाओं का रनिवास अंतःपुर कहलाता था। यही मुगलों के जमाने में जनानखाना या हरम कहलाया। अंतःपुर के अन्य नाम भी थे जो साधारणतः उसके पर्याय की तरह प्रयुक्त होते थे, यथा- शुद्धांत और अवरोध। शुद्धांत शब्द से प्रकट है कि राजप्रासाद के उस भाग को, जिसमें नारियाँ रहती थीं, बड़ा पवित्र माना जाता था। दांपत्य वातावरण को आचरण की दृष्टि से नितांत शुद्ध रखने की परंपरा ने ही निःसंदेह अंतःपुर को यह विशिष्ट संज्ञा दी थी। उसके शुद्धांत नाम को सार्थक करने के लिए महल के उस भाग को बाहरी लोगों के प्रवेश से मुक्त रखते थे। उस भाग के अवरुद्ध होने के कारण अंतःपुर का यह तीसरा नाम अवरोध पड़ा था। अवर ...

                                               

अष्टधातु

अष्टधातु, एक मिश्रातु है जो हिन्दू और जैन प्रतिमाओं के निर्माण में प्रयुक्त होती है। जिन आठ धातुओं से मिलकर यह बनती है, वे ये हैं- सोना, चाँदी, तांबा, सीसा, जस्ता, टिन, लोहा, तथा पारा की गणना की जाती है। एक प्राचीन ग्रन्थ में इनका निर्देश इस प्रकार किया गया है: स्वर्ण रूप्यं ताम्रं च रंग यशदमेव च। शीसं लौहं रसश्चेति धातवोऽष्टौ प्रकीर्तिता:। सुश्रुतसंहिता में केवल प्रथम सात धातुओं का ही निर्देश देखकर आपातत: प्रतीत होता है कि सुश्रुत पारा पारद, रस को धातु मानने के पक्ष में नहीं हैं, पर यह कल्पना ठीक नहीं। उन्होंने अन्यत्र रस को भी धातु माना है ततो रस इति प्रोक्त: स च धातुरपि स्मृत:। अष्टधातु ...

                                               

अष्टमंगल

अष्टमांगालिक चिह्नों के समुदाय को अष्टमंगल कहा गया है। आठ प्रकार के मंगल द्रव्य और शुभकारक वस्तुओं को अष्टमंगल के रूप में जाना जाता है। सांची के स्तूप के तोरणास्तंभ पर उत्कीर्ण शिल्प में मांगलिक चिहों से बनी हुई दो मालाएँ अंकित हैं। एक में 11 चिह्न हैं - सूर्य, चक्र, पद्यसर, अंकुश, वैजयंती, कमल, दर्पण, परशु, श्रीवत्स, मीनमिथुन और श्रीवृक्ष। दूसरी माला में कमल, अंकुश, कल्पवृक्ष, दर्पण, श्रीवत्स, वैजयंती, मीनयुगल, परशु पुष्पदाम, तालवृक्ष तथा श्रीवृक्ष हैं। इनसे ज्ञात होता है कि लोक में अनेक प्रकार के मांगालिक चिह्नों की मान्यता थी। विक्रम संवत् के आरंभ के लगभग मथुरा की जैन कला में अष्टमांगलि ...

                                               

मानव शव का प्रशमन

मौत के बाद की विभिन्न संस्कृतियों में मानव शरीर के विभिन्न प्रकार से शमन करने के लिए पैटर्न है. उचित प्रकाऔर उचित समय पर शरीर के शमन से गैर-AVCHD पैदा करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं तक पहुँचने । अन्य प्राणियों की तरह मानव शरीर भी monoprint क्षय होने लगता है और इससे दुर्गंध आने लगती है.

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निरंजन का अर्थ.

आत्मदृष्टि का दिव्य अंजन in Hindi Speaking Tree. तेरा एहसास मेरे हर साँस के साथ है। तुम्हारी बातें हैं, तुम्हारी झलकियाँ है। तुम्हारी यादें हैं, तुम्हारी सिसकियाँ है। तुम हो तो मैं हूँ, पर! हम कहीं नहीं हैं। AnJan ​अंजन Kajal काज़ल. teraa ehsaas mere hr saans ke saath hai. अंजना का अर्थ. Anjan Meaning In Hindi अंजन का मतलब Wrytin. अंजन in Assamese অসমীয়া अंजन in Bengali বাংলা अंजन in Bodo बड़ो अंजन in Dogri डोगरी अंजन in English अंजन in Gujarati ગુજરાતી अंजन in Hindi हिन्दी अंजन in Konkani कोंकणी अंजन in Kannada ಕನ್ನಡ अंजन in Kashmiri कॉशुर अंजन in Maithili মৈথিলী अंजन in Malayalam മലയാളം अंजन in.


अजा एकादशी कब है.

How To Do Aja Ekadashi Vrat Puja अजा एकादशी व्रत पर ऐसे. हिंदू मान्यताओं के मुताबिक अजा एकादशी के दौरान जो व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके पाप कट जाते हैं. एकादशी अगस्त 2019. अजा एकादशी पर जानिए कैसे करें पूजा Navodaya Times. Aja Ekadashi 2019: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। इस बार यह एकादशी 26 अगस्त यानि सोमवार को है। हिंदू परंपरा के अनुसार, इस एकादशी व्रत में भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है और उनकी. एकादशी व्रत लिस्ट. अजा एकादशी के व्रत से सभी पाप होते हैं Prabhasakshi. अजा एकादशी या कामिका एकादशी का व्रत भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है। इस एकादशी के दिन किया जाने वाला व्रत समस्त पापों और कष्टों को न.


अनंत चतुर्दशी कब है.

अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें श्री विष्णु के Patrika. भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह 12 सितंबर को है। शास्त्रों में इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु के अनंत स्वरुप की पूजा का विधान है। अनंत चतुर्दशी की पूजा में. अनंत चतुर्दशी 2019. 2002 की अनंत चतुर्दशी की तारीख क्या थी? Vokal. भगवान विष्णु के पूजन और व्रत का दिन है अनंत चतुर्दशी। हिन्दू धर्म की मान्यता है कि इस दिन से शुभ काम शुरू किए जा सकते हैं​। खास बात यह है कि इस दिन कोई शुभ मुहुर्त नहीं देखा जाता यानि यह पूरा दिन ही शुभ होता है और किसी भी समय कोई भी शुभ. अनंत चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं. अनंत चतुर्दशी पर सर्राफा बाजार बंद. PunjabKesari, अनंत चतुर्दशी, रामलीला, रावण, Ravan, Ravana, Anant Chaturdashi, अब ये तो हुई वो जानकारी जिससे लगभग सभी लोग अवगत हैं। मगर क्या इसका कुछ इतिहास रामायण के एक प्रमुख पात्रों से जुड़ा हुआ है। जी हां, कुछ मान्यताओं के अनुसार. अनंत चतुर्दशी 2020. अनंत चतुर्दशी पीपुल्स समाचार. मंगलवार, 1 सितंबर 2020.

शशांक खंड 2 भाग 8 राखाल बंदोपाध्याय रामचन्द्र.

अन्त: पुर पैंट बहुत सारे शेयर के लिए विशेष छूट खोजने के लिए अभी डाउनलोड करें! एप पाओ 1.78 डॉलर WK126 2018 वसंत Sweatpants महिलाओं आकस्मिक अन्त: पुर पैंट ढीला पतलून के लिए महिलाओं धारीदार पक्ष पसीना पैंट. न्यूनतम ऑर्डर मात्रा: 100 Pieces. हरेकृष्ण मंदिर Harekrishna Mandir. 29802: ब्रिगुमा होरराज के प्रमोद उद्यान में अन्त:पुर के बाहर ही रखी गयी और उसकी सेवा में ५०० दासियाँ नियुक्त कर दी गयीं. 29803: उस नजर बाग के भीतर एक निराला प्रमोद गृह था. इसे चीन नरेश के कुशल कारीगरों ने अपनी सर्वोच्च शिल्प प्रतिभा लगाकर.


अष्टधातु रिंग प्राइस.

श्रीराम जानकी मंदिर से दो करोड़ रुपये की. कफेन में 100 वर्ष पुराने राम जानकी मंदिर से सोमवार रात चो ​रों ने अष्टधातु की राम, जानकी व लक्ष्मण की मूर्ति चु रा ली। पुजारी सत्यनारायण झा ने बताया कि संध्या आरती के बाद मंदिर के मुख्य द्वापर दो लगा कर वे घर चले गए। मंगलवार की सुबह वहां. अष्टधातु बनाने की विधि. बलियाः मंदिर से 15 करोड़ रुपये कीमत की अष्टधातु. पुरानी टोंक थाने से करीब सौ मीटर दूर माणक चौक स्थित श्री 1008 श्री नेमीनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सोनीयान से शुक्रवार रात को अष्टधातु की 21 प्राचीन मूर्तियां चोरी चली गईं। शनिवार सुबह जैन समाज के श्रद्धालु़ओं को मंदिर में. अष्टधातु की कीमत. ले पंगा अपने हक़ के लिए ले पंगा ताज़ा ख़बरे हिंदी. बेहड़ा गांव में स्थित प्राचीन रामजानकी मंदिर में स्थापित अष्टधातु की राम लक्षण, सीता की मूर्तियां बुधवार की रात चोरी हो र्गइं। सुबह मंदिर पहुंचे पुजारी को चोरी होने की जानकारी हुई। इस मामले में थाने पर तहरीर दी गई है।.


अष्ट मंगल फोटो.

अष्टमंगल विडियो लिंक अष्टमंगल - Devlok Jinalaya. इस लेख में सन्दर्भ या स्रोत नहीं दिया गया है। कृपया विश्वसनीय सन्दर्भ या स्रोत जोड़कर इस लेख में सुधार करें। स्रोतहीन सामग्री ज्ञानकोश के उपयुक्त नहीं है। इसे हटाया जा सकता है। सितंबर 2014. अष्टमंगल ताल. युवा कलाकारों के संगीत नृत्य उत्सव सोपान का. श्वेताम्बर जैनी स्वास्तिक को अष्ट मंगल का मुख्य प्रतीक मानते हैं। हड़प्पा सभ्यता में स्वास्तिक, सिंधु घाटी की खुदाई के दौरान स्वास्तिक प्रतीक चिन्ह मिला। ऐसा माना जाता है हड़प्पा सभ्यता के लोग भी सूर्य पूजा को महत्व. अष्टमंगल के नाम. अष्ट प्रतिहार्य और अष्टमंगल Acharya Shri Gyan Sagar Ji. अ अष्टमंगल ताल में कुल ताली होती है । ब पंचमसवारी ताल में ​ - - मात्रा पर खाली होती है । स अभिनय दर्पण के रचयिता - - हैं । द सम के पहले सम दिखाना - - - ग्रह है । इ अभिनय दर्पण के अनुसार संयुक्त हस्त के कुल - - प्रकार हैं । फ शिखर हस्त - - - प्रकार की.

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